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अमेरिका के पहले राष्‍ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन नहीं थे

जब 1776 में अमेरिकी कॉलोनियों को ब्रिटिश साम्राज्‍य से स्‍वतंत्रता मिली, और 1789 में जॉर्ज वाशिंगटन पहले राष्‍ट्रपति अमेरिका चुने गए।  लेकिन इतिहास के पन्‍ने पलटने पर यह पता चला है, वर्जिनिया का पहला राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन नहीं हो सकता।
समस्‍या यह है कि इतिहासकारों ने अमेरिकी इतिहास के कुछ सालों को भूलाकर आगे से इतिहास लिखना शुरू कर दिया था। आजादी की लिखित घोषणा 1776 में हुई, लेकिन अमेरिका का संविधान 1787 में लिखा गया, और वाशिंगटन राष्‍ट्रपति 1789 में नियुक्त हुए। 

उन बीच के वर्षों में अमेरिका को एक सरकार द्वारा चलाया गया। इसका मतलब साफ है कि इस दौरान किसी पहले राष्‍ट्रपति द्वारा अमेरिका का नेतृत्‍व संभाला गया।  जी हां, अमेरिका के पहले राष्‍ट्रपति जॉन हैनसन हैं।

1776 में राष्‍ट्रीय सरकार के समय जॉन हैनसन महाद्वीपीय कांग्रेस, अमेरिकन कॉलोनीज के अध्‍यक्ष थे। जब उन्‍होंने आजादी के घोषणा पत्र पर हस्‍ताक्षर किए, तत्‍काल उनको अमेरिका का राष्‍ट्रपति बनाया गया था। 

दूसरा, पहला राष्‍ट्रपति सैम्‍यूल होंटिंगटन थे, लेकिन उनको नजरअंदाज किया गया, क्‍यूंकि उसने एक परिभाषा पर अपना टाइटल अर्जित किया था। वे 1981 कांटिनेंटल कांग्रेस के अध्‍यक्ष थे, तब आर्टिकल ऑफ कन्‍फेडेरेशन पारित किया गया, और पहला राष्‍ट्रपति आर्टिकल्‍स के तहत चुना गया, और उसने अपना कार्यकाल पूरा किया, वे थे जॉन हैनसन, जो मैरीलैंड से आते थे। 

बहुत सारे इतिहासकार इस बात को सही ठहराते हुए जॉन हैनसन को अमेरिका का पहला राष्‍ट्रपति मानते हैं। रिमेम्‍बरिंग जॉन हैनसन के लेखक पीटर एच माइकल लिखते हैं कि जॉर्ज वाशिंगटन खुद जॉन हैनसन को राष्‍ट्र का पहला राष्‍ट्रपति कहते थे।

'दबंग 2' से हुआ 'कैपरी सिनेमा' का पुन:उदय

-: वाईआरएन सर्विस :-
 
जहां पूरा विश्‍व 21 दिसम्‍बर 2012 को खत्‍म होने वाला था, वहीं राख़ हो चुके कैपरी सिनेमा हाल का दबंग 2 से 21 दिसम्‍बर को फिर उदय हुआ। कराची का सबसे सिंगल स्‍क्रीन लोकप्रिय कैपरी सिनेमा 21 सितम्‍बर को कुछ शरारती तत्‍वों द्वारा जला दिया गया था। इसके अलावा सात अन्‍य सिनेमाओं को भी निशाना बनाया गया था, जिसमें से पांच सिनेमा हाल कराची के थे, जबकि अन्‍य तीन पेशावर के।

सिने प्रेमियों की जरूरत को देखते हुए इस सिनेमा हाल को फिर से पुन:जीवित करने का फैसला किया गया। पहले उम्‍मीद थी कि यह सिनेमा सात दिसम्‍बर को शुरू हो जाएगा, और दर्शक खिलाड़ी 786 देख पाएंगे। मगर ऐसा हो न सका, अंत यह सिनेमा 21 दिसम्‍बर से पहले फिर बनकर तैयार हो गया, और इस की फिर शुरूआत सलमान ख़ान की बहुत चर्चित फिल्‍म दबंग 2 से की गई।

इस फिल्‍म को देखने के लिए दर्शकों की बेहद भीड़ सिनेमा हाल के बाहर देखी गई। पूरी सुरक्षा व्‍यवस्‍था के बीच सिनेमा हाल का पुन:संचालन किया गया है। इस सिनेमा हाल के मालिक ने पाकिस्‍तान समाचार पत्र द डान से बातचीत करते हुए कहा, उनको पूरी उम्‍मीद है कि दबंग 2 सप्‍ताह भर हाऊसफुल बिजनस देगी।

उधर, सिने प्रेमियों में भी खुशी की लहर है कि आख़िर तीन महीनों बाद ही सही, उनका प्रिय सिनेमा कैपरी फिर से शुरू तो हुआ।

कीनिया में खूनी हिंसा, 30 मरे

-: वाईआरएन सर्विस :-

कीनिया के दक्षिण पचिश्‍मी क्षेत्र स्‍थित ताना रीवर जिले में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प के दौरान 30 लोगों के मारे जाने की ख़बर मिली है। यह ख़ूनी हिंसक झड़प पोकोमो एवं उरमा समुदाय के बीच शुक्रवार सुबह उस समय हुई, जब पोकोमो समुदाय के किसानों ने चारवाहों के एक गांव पर हल्‍ला बोल दिया।

रेड क्रॉस के मुताबिक हमलावर अपने साथ भारी मात्रा में असलाह बगैरह लेकर गांव में पहुंचे थे, इस हमले में मरने वालों की संख्‍या 30 बताई जा रही है, जिसमें पांच महिलाएं एवं पांच बच्‍चे भी शामिल हैं।

उधर, रेड क्रास का कहना है कि पोकोमो एवं उरमा सुमदाय की आपसी झड़पों में अगस्‍त एवं सितंबर महीने में करीबन 110 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हिंसा को आगामी होने वाले आम चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। यह क्षेत्र कीनिया की राजधानी नेरोबी से करीबन 300 किलोमीटर दूर है।

आर्मी चीफ साइकिल से पहुंचे ऑफिस

-: वाईआरएन सर्विस :-

पड़ोसी देश नेपाल से ख़बर आ रही है कि वहां के सेना प्रमुख पर्यावरण की समस्‍याओं को लेकर इतना गम्‍भीर हैं, कि वो अपने दफ्तर तक सरकारी वाहन में न आकर अपने साइकिल द्वारा पहुंच रहे हैं।

सूत्रों की माने तो आर्मी चीफ गौरव शमशेर राणा आज शुक्रवार को अपने घर से आर्मी मुख्‍यालय भद्रकाली तक अपने साइकिल पर आए, जबकि आर्मी चीफ हमेशा कड़ी सुरक्षा के बीच आर्मी वाहन में सवार होकर ऑफिस पहुंचते थे।

ऐसा करने वाले अकेले आर्मी चीफ ही नहीं थे, बल्‍कि अन्‍य सीनियर ऑफिसरों ने भी कुछ तरह ऑफिस में आगमन किया, हालांकि कुछ अधिकारियों ने सार्वजनिक वाहनों का सहारा लिया। सूत्रों का कहना है कि हर शुक्रवार सेना अधिकारी कुछ इस तरह ऑफिस पहुंचेंगे।

द हिमालियन टाइम्‍स से बातचीत करते हुए आर्मी प्रवक्‍ता सुरेश शर्मा ने कहा कि आर्मी की ओर से इस मुहिम को पर्यावरण बचाओ अभियान के तहत शुरू किया गया है एवं अगर दूसरी तरफ देखा जाए तो इससे कहीं न कहीं सेहत अच्‍छी रहती है एवं पैसे की बचत होती है। इस दौरान जन संपर्क भी बढ़ता है, रास्‍ते में आते हुए हम को हमारे शुभ चिंतकों से मिलना भी हो जाता है। उम्‍मीद है कि आर्मी द्वारा शुरू की गई इस मुहिम से नेपाल वासी प्रभावित होंगे, और यह मुहिम एक बड़ा रूख ले सकती है।

पाक : फेयर ट्रायल बिल 2012 को मंजूरी

-: वाईआरएन सर्विस :-
 
पाकिस्‍तानी राष्ट्रीय विधानसभा ने गुरूवार को विवादित फेयर ट्रायल बिल 2012 को मंजूरी दे दी है। इस बिल को सदन में कानूनी मंत्री फारूक नायक, ने पीएमएल एन एवं एमक्‍यूएम के द्वारा किए संशोधनों के समावेश के बाद पेश किया।

जहां इस बिल को आतंकवाद के खिलाफ एक सकारात्‍मक कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसको व्‍यक्‍तिगत निजता के ख़तरे से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

यह बिल सुरक्षा एजेंसियों को लोगों के फोन कॉल्‍स और अन्य निजी संचार यंत्रों को टेप करने की अनुमति देता है। इस से सुरक्षा एजेंसियां संदिग्‍ध लोगों के फोन कॉल्‍स एवं अन्‍य संपर्क साधनों पर निगरानी रखकर आतंकवादियों तक पहुंच सकती है, लेकिन वहीं इससे निजता भंग होने का ख़तरा भी है।

इस मौके पर प्रधान मंत्री राजा परवेज अशराफ ने कहा, इस बिल के पास होने से आतंकवादियों को संदेश जाएगा कि पाकिस्‍तान उनके खिलाफ एकजुट हो चुका है। इस बिल के पास होने से आम लोगों को आतंकवाद का शिकार होने से बचाया जा सकता है।

मौत के दूतों ने छीने दो बूंद जिन्‍दगी के

-: वाईआरएन सर्विस :-

पोलियो विरोधी मुहिम को चलाने वाले वर्करों पर हो रहे निरंतर हमलों के बाद डब्‍ल्‍यूएचओ ने पाकिस्‍तान में बंद करने की घोषणा कर दी है। गौरतलब है कि पिछले दो तीन दिनों से निरंतर बंदूकधारी पाकिस्‍तान में अलग अलग स्‍थानों पर पोलियो विरोधी मुहिम चलाने वाले वर्करों को निशाना बना रहे हैं। इन हमलों में अभी तक दर्जन भर से ऊपर लोगों की जानें चल गई।

डब्‍ल्‍यूएचओ ने उस समय इस मुहिम को रोकने का मन बनाया, जब खैबर के तीन अलग अलग स्‍थानों पर हुए हमलों में दो लोगों जान जाने एवं कई के घायल होने की सूचना मिली। इससे पूर्व बंदूकधारियों ने पोलियो मुहिम से जुड़ी पांच महिला वर्करों को उस समय निशाना बनाया था, जब वो अपने कार्य में व्‍यस्‍त थीं।

उधर, तारीखे तालिबान ने इन हमलों की जिम्‍मेदारी लेते हुए इस मुहिम को बंद करवाने की बात कही। पाकिस्‍तान उन देशों में शामिल है, जहां पर पोलियो की बीमारी निरंतर अपने पैर पसार रही है।

'इलेक्‍शन क्‍वीन' बनेगी द.कोरिया की प्रथम महिला राष्‍ट्रपति

-: वाईआरएन सर्विस:- 
दक्षिण कोरिया में राष्‍ट्रपति के चुनाव संपन्‍न होने के बाद मतगणना शुरू हो चुकी है एवं इलेक्शन वॉचडॉग ने कहा कि सत्‍ताधारी पार्टी की उम्‍मीदवार पार्क ज्‍यून हाय इन चुनावों में भारी मतों के साथ जीत दर्ज करते हुए देश की पहली महिला राष्‍ट्रपति होने का सम्‍मान हासिल कर लेंगी।

दक्षिण कोरिया में इलेक्‍शन क्‍वीन के नाम से प्रसिद्ध पार्क ज्‍यून हाय, ग्रांड नेशनल पार्टी की चेयरपर्सन 2004 से 2006 एवं 2011 से 2012 तक रही, जिसका नाम बदलकर अब सियनरी पार्टी कर दिया गया है। पार्क ज्‍यून हाय, दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्‍ट्रपति पार्क चुंग ही की बेटी हैं, जिनको उनके मुख्‍य इंटेलीजेंस चीफ ने 1979 में मार दिया था।

राष्‍ट्रीय चुनाव कमिश्‍न ने जानकारी देते हुए कहा कि पार्क विपक्ष डेमोक्रेटिक युनाइटेड पार्टी के उम्‍मीदवार मूनन जी इन को हराते हुए देश की पहली महिला राष्‍ट्रपति बनेगी। रात्रि 11 बजे तक हुए 78 फीसद मतदान गणना में पार्क पूरी तरह मजबूत थी, मून के मुकाबले। देश के बड़े चैनलों के एग्‍जिट पोल पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि पार्क को जीत मिलेगी।

जीत का पूर्ण विश्‍वास मिलने के बाद उनकी पार्टी ने अपने समर्थकों को तहेदिल से शुक्रिया अदा किया।

कुत्‍ते की मौत से सदमे में आस्‍ट्रेलियन

-:वाईआरएन सर्विस:-

2011 में रिलीज हुई रेड डॉग फिल्‍म में मुख्‍य भूमिका निभाने वाले कुत्‍ते 'कोको' की कल पर्थ स्‍थित एक डॉग्‍स हाउस में दिल की बीमारी के कारण मौत हो गई। सूत्रों के अनुसार 'कोको' की उम्र सात साल के करीब थी। उनकी मौत की ख़बर ने उनके चाहने वालों को गहरा झटका दिया। उनकी मौत के बाद पर्थ डॉग्‍स रिफ्यूजी हाउस को करीबन 70 से अधिक लोगों ने अनुदान राशि भेजी, जिसकी कुल राशि 2000 डॉलर से ऊपर आंकी जा रही है।

रेड डॉग फिल्‍म बेहद प्रसिद्ध नॉवेल 'ल्‍यूस दे बर्निर्स' पर आधारित थी। इस फिल्‍म ने बॉक्‍स ऑफिस पर जोरदार सफलता आर्जित की थी। यह आस्‍ट्रेलियन फिल्‍मों में आठ नम्‍बर की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्‍मों में दर्ज हुई। इस फिल्‍म को देखने वाले कोको को फिल्‍म का नायक मानते थे। कोको की मौत से जहां सिने प्रेमियों को दुख हुआ, वहीं इस फिल्‍म के निर्माता नेलसन वाश बेहद दुखी हैं।

पश्‍िचमी आस्‍ट्रेलियाई कुत्‍ता शरणार्थी घर के प्रमुख करेन रहॉडेस का कहना है कि उनके पास काफी सारे कॉल आ रहे हैं, 70 से अधिक दान कॉल आ चुके हैं, लोग कोको की मौत से बेहद दुखी हैं। सब कोको को दुखी मन से श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

कौन थी शिल्‍पा सिंह से पहले, मिस यूनिवर्स की दौड़ में


सुंदरता के ताज पर फैसला आज 

-:वाईआरएन सर्विस:-
 
अमेरिका के लॉस वेगास के प्लैनेट हॉलीवुड रिसॉर्ट में आयोजित हो रही मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता-2012 का फैसला आज 17 सदस्‍यीय कमेटी सुनाएगी। इस सुंदरता के खिताब के लिए 89 देशों की सुंदरियां भाग ले रही हैं, इनमें एक भारत की शिल्‍पा सिंह भी हैं, जिनको मिस यूनिवर्स इंडिया उर्वशी रौटेला की जगह, उस समय इस प्रतियोगिता के लिए चुना गया, जब उर्वशी की उम्र को लेकर विवाद हो गया था। शिल्‍पा सिंह आई एम शी मिस इंडिया 2012 की पहली रनर अप थीं।
आज से पचास साल पूर्व शुरू हुए मिस यूनिवर्स मुकाबले में इस ताज पर अब तक भारत दो बार कब्‍जा करने में सफल रहा है, पहली बार जब 1994 में भारत का नेतृत्‍व करने वाली सुष्‍मिता सेन ने इस पर अपना कब्‍जा किया था, और दूसरी बार आज से करीबन 12 साल पूर्व लारा दत्‍त इस सम्‍मान को भारत लेकर आई थीं।

अब सब की निगाहें शिल्‍पा सिंह पर टिकी हुई हैं, जो पेशे से इंजीनियर हैं, इंफोसिस टेक्‍नोलॉजी में कार्यरत हैं, और बिहार से तालुक रखती हैं। शिल्‍पा सिंह आईएमशी मिस इंडिया 2012 में उर्वशी से एक कदम पीछे रह गई थी, लेकिन बदकिस्‍मती से उम्र के विवाद ने उर्वशी को मिस यूनिवर्स का हिस्‍सा नहीं बनने दिया।

इस प्रतियोगिता में गेबन एवं लिथुनिया आदि जहां पहली बार हिस्‍सा ले रहा हैं, वहीं बुल्‍गारिया, इथियोपिया, नमीबिया एवं नॉर्वे इस प्रतियोगिता में वापिस लौटा है, जबकि मिश्र, कजाख़स्‍थान, पुर्तगाल, सलोविनिया, तुकर्स एवं यूएस वर्जिन आइलेंड ने इस प्रतियोगिता से दूरी बनाई। इस बार भारत समेत ऐसे आठ देश हैं, जिनको किसी न किसी कारण अपने पहले प्रतिभागी की जगह किसी और को देनी पड़ी।

'फेसबुक' से बड़ा 'मार्क का दिल'

-:वाईआरएन सर्विस:-

'फेसबुक' की खोज से दुनिया को एक मंच पर खींचकर लाने वाला 28 वर्षीय युवक मार्क जुकरबर्ग युवाओं के लिए ही नहीं बल्‍कि बिजनसमैनों के लिए प्रेरणा स्रोत बनकर उभर रहा है। मंगलवार को फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने सेन फ्रांसीसिको की एक संस्‍था को 500 मिलीयन डॉलर आर्थिक सहायता के लिए रूप में दान देने की घोषणा की। इस फंड का इस्‍तेमाल सेहत सेवाओं एवं शिक्षा के क्षेत्र में किया जाएगा।

मार्क जुकरबर्ग द्वारा दान किए 18 मिलियन फेसबुक शेयरों की कीमत मंगलवार को बंद होने के वक्‍त करीबन 498.8 मिलियन डॉलर आंकी गई। इन शेयरों को उपहार में प्राप्‍त करने वाली सिलीकॉन वैली कम्‍यूनिटी फाउंडेशन, एक नॉन प्रोफिट संगठन है, जो दानदाताओं द्वारा दिए गए दान से चलता है।

यह मार्क जुकरबर्ग का अब तक सबसे बड़ा दान है। इससे पहले मार्क जुकरबर्ग 2010 में 100 मिलियन डॉलर नेवॉर्क पब्‍िलक स्‍कूल को दान के रूप में दे चुके हैं। इसके बाद उन्‍होंने माइक्रो सॉफ्ट संस्‍थापक बिल गेट्स की अगुवाई वाली संस्‍था ज्‍वॉइन की।