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मी​डिया को लेकर, जो AAP ने कहा, क्या झूठ है जरा बताएं ?

अपने विवादित बयानों से घिरे अरविंद केजरीवाल के बचाव में आम आदमी पार्टी ने मीडिया के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में प्रवक्ताओं की फौज के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मीडिया पर हमला बोला। पार्टी के प्रवक्ता मीडिया को धमकी देने वाले केजरीवाल के बयान को सही ठहराने की कोशिश करते नजर आए, तो साथ ही कुछ न्यूज चैनलों पर केजरीवाल के खिलाफ मुहिम चलाने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग में शिकायत की धमकी भी दी। गौरतलब है कि केजरीवाल ने गुरुवार रात नागपुर में पार्टी के एक कार्यक्रम में मीडियावालों को जेल भेजने की धमकी दी थी,हालांकि बाद में वह अपने बयान से पलट गए थे।

दिल्ली में शुक्रवार को आम आदमी पार्टी अपने चार बड़े चेहरों संजय सिंह, आशुतोष, आशीष खेतान, दिलीप पांडे के साथ मीडिया के सामने आई। आप नेता संजय सिंह ने केजरीवाल के विवादित बयान पर कहा कि मीडिया पर सवाल उठाना गलत नहीं है। उन्होंने न्यूज चैनलों इंडिया टीवी, इंडिया न्यूज, जी न्यूज, टाइम्स नाउ का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि यह आम आदमी पार्टी और केजरीवाल के खिलाफ मुहिम चलाए हुए हैं। संजय सिंह ने कहा कि पार्टी के पास इन चैनलों की फुटेज है और वे इसके खिलाफ चुनाव आयोग जाएंगे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आम आदमी पार्टी के नेता संवाददाताओं से उलझते रहे। आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रवक्ता और चांदनी चौक से पार्टी के प्रत्याशी आशुतोष ने केजरीवाल के मीडिया सेटिंग-गेटिंग वाले विडियो पर सफाई देते हुए कहा कि एडिटर का नेता के साथ बैठना कोई गुनाह नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ होने के नाते मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह सही खबरों को दिखाए।

आशुतोष ने कहा कि अरविंद केजरीवाल का साफतौर पर कहना है कि मीडिया और न्यूज चैनलों का एक तबका मोदी का एजेंडा चला रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के बीच में एक बड़ा तबका ईमानदार भी है। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में काम करना मुश्किल होने जा रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद पार्टी के नेता और नई दिल्ली पार्टी के उम्मीदवार आशीष खेतान ने भी मीडिया पर हमला बोलते हुए कहा कि मीडिया अरविंद केजरीवाल के पीछे पड़ा है। उन्होंने कहा कि आप के नाम पर चैनलों में खाली कुर्सी रख दी जाती है। 'नमो नमो' चलाया जाता है। जबकि नरेंद्र मोदी के विकास के दावों पर एक भी सवाल नहीं पूछा जाता है। गुजरात की सच्चाई नहीं दिखाई जाती है। अरविंद केजरीवाल जब लाइव बैठते हैं, तो उनसे सारे सवाल पूछे जाते हैं, लेकिन मोदी से पब्लिक से जुड़े सवाल नहीं पूछे जाते हैं।

Ad Review : क्‍या देखा गूगल का यह विज्ञापन ?

आज ऑफिस से लौटकर जैसे ही टेलीविजन का स्‍विच ऑन किया तो टाटा स्‍कायी की ओर से एक विज्ञापन चलाया जा रहा था। इस विज्ञापन से आगे मेरा टेलीविजन नहीं बढ़ा। विज्ञापन इतना प्‍यार था कि दिल को छू गया। मुझे लगा कि शायद जो बात ढ़ाई से साढ़े तीन घंटे की फिल्‍म नहीं कह सकती है, वे बात इस तीन मिनट कुछ सेकेंड के विज्ञापन ने कह दी।

यह विज्ञापन था विश्‍व प्रसिद्ध सर्च इंजन गूगल का। सबसे दिलचस्‍प बात तो यह है कि इस विज्ञापन को गूगल की ओर से यूट्यूब पर भी आज ही प्रकाशित किया गया है। इस विज्ञापन से जो बात आपको जोड़ती है, वे है इसका भावनात्‍मक पहलु। भले ही देश का एक खेमा पाकिस्‍तान को पी पी कर कोसता था, लेकिन एक खेमा ऐसा भी है, जो आज भी पाकिस्‍तान की आबोहवा में सांस लेने के लिये तरसता था।
इस विज्ञापन के किरदारों भारत व पाकिस्‍तान में आज भी मौजूद होंगे। जो आज भी अपने पुराने घरों को याद करते होंगे। जो आज भी अपने दोस्‍तों से मिलने के लिये तरसते होंगे। आने वाले समय में जब हमारी पुरानी पीढ़ियां चली जायेंगी, तो हो सकता है पाकिस्‍तान के प्रति हमारा प्‍यार रखने वाला एक खेमा मर जाये। और बच जाये, वो खेमा, जो पाकिस्‍तान को सिर्फ एक दुश्‍मन के रूप में देखता है।

गूगल का यह विज्ञापन कई दिलों को छूकर गुजरेगा। आइडिया भी अक्‍सर एक अच्‍छा आइडिया लेकर आता है, लेकिन शायद इस बार गूगल वाट एन आइडिया सर जी से बाजी मार गया। इस बात को पूरे दावे के साथ कहा जा सकता है। एक और बात। शायद एक निर्देशक साढ़े तीन घंटे की फिल्‍म में जो बात नहीं कह पाता, वो बात बड़े सलीके के साथ गूगल एड के निर्देशकों ने केवल कुछ मिनटों में कह दी। इसलिये हम तो कहें, आपका पता नहीं, गूगल बाबा की जय।



कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, सामग्री लेखक GaneshaSpeaks.com। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

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कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी, और एक शोध का दावा

हर साल की तरह इस बार भी, श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आज आधी रात करोड़ों हिन्दुओं के आराध्य, सोलह कलाओं तथा 64 विद्याओं के पारंगत, चक्र सुदर्शनधारी भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्मोत्सव परंपरागत और उल्लासपूर्वक मनाया जायेगा।

संयोग देखिए, जब विश्‍व का एक समुदाय भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्‍मोत्‍सव बनाने की तैयारियों में जुटा हुआ था, तब जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय का एक अध्‍ययन सामने आया, जिसमें कहा गया कि नवजात बच्चे को मां के गर्भ में रहते हुए अपनी जननी की और अन्य लोगों की आवाज़ें याद रहती हैं। शोधकर्ताओं ने शोध के दौरान 74 महिलाओं का परीक्षण किया जो 36 हफ्तों की गर्भवती थीं। उन्हें दो मिनट तक कहानियां सुनाने को कहा गया और इस दौरान गर्भ में पल रहे शिशु की धड़कनों और हरकतों का परीक्षण किया गया।

इस शोधकार्य के दौरान पता चला कि औसतन एक बच्चा एक ही शब्द 25 हज़ार बार सुन सकता है। जीवन के पहले महीने में बच्चा उस संगीत के प्रति प्रतिक्रिया दिखाता है जो उसने गर्भावस्था की अंतिम तिमाही में सुना था। आप सोच रहे होंगे, इस का कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी से क्‍या संबंध है ?

कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी का संबंध श्रीकृष्‍ण भगवान से है, और श्रीकृष्‍ण भगवान से जुड़ी एक कथा तो आपको याद होगी, जिसमें बताया जाता है कि श्रीकृष्‍ण भगवान बहन सुभद्रा को चक्रव्‍यूह भेदने का तरीका बता रहे थे, लेकिन बात के बीच में गर्भवती सुभद्रा की आंख लग गई, और वो सो गई, बात अधर में रह गई, और गर्भ में अभिमान्‍यु केवल चक्रव्‍यूह भेदने तक सुन पाया, आगे नहीं। जो शोध अब सामने आई है, यह उस बात की पुष्‍टि कर रही है, जो बहुत पहले से भारतीय धर्मों में बताई जा रही है।

इतना ही नहीं, कुछ महीने पहले एक अन्‍य संस्‍थान अमेरिकी शैक्षणिक संस्‍थान पैसिफिक लुथरीन यूनिवर्सिटी ने भी इस तरह की बात कही थी। वैसे ज्‍यादातर महिलाएं गर्भावस्‍था के दौरान गर्भ में पल रहे अंश की अठखेलियों को महसूस करती हैं। उनके उदास होने, उनके खुश होने, उनके अठखेलियां करने आदि को महसूस करती हैं। बच्‍चे की किक तो बहुत से पिताओं ने महसूस की हो गई, लेकिन अन्‍य हकरतें केवल मां महसूस कर सकती है।

यह हरकतें बच्‍चा बाहर हो रही गतिविधियों पर प्रतिक्रियाएं देते हुए करता है। कुछ महिलाएं तो यहां तक कहती हैं कि अगर गर्भ में पल रहा शिशु शांत है तो लड़का, अगर शरारती है, तो लड़की। कभी कभी ऐसे कयास स्‍टीक भी बैठते हैं।