Showing posts with label factNfiction. Show all posts
Showing posts with label factNfiction. Show all posts

fact 'n' fiction : सड़क मेरे मोहल्‍ले वाली

भारत में सड़क सलामत बन जाये, शायद यह उस सड़क का अपना भाग्‍य होगा, वरना यहां पर सड़क बनने के बाद उस पर कुदाल आदि चलते हैं। पिछले दिनों मेरे मोहल्‍ले वाली सड़क बन गई, सही सलामत। यह उसका अपना भाग्‍य था। सच में उसका भाग्‍य, क्‍यूंकि उसको एक सही सोच वाले अधिकारी का दिमाग मिल गया था।

यह पहली सड़क थी, जो सब रीति रिवाज पूरे होने के बाद संपन्‍न हुई। इसलिये यह सलामत बन गई। आप सोच रहे होंगे। यह कैसी पहेली है। पहेली को सुलझाने के लिये एक लघु कथा सुनाता हूं। छोटी कहानी। कहानी शुरू होती है कुछ महीने पहले। एक अख़बार में ख़बर प्रकाशित हुई, मेरे मोहल्‍ले की सड़क बन गई। इस सुर्खी ने कई विभागों की नींद उड़ा दी। बस फिर क्‍या था, दूर संचार, वॉटर सप्‍लाई और बिजली विभाग के अधिकारियों ने कमर कस ली। नई सड़क बनने के बाद के रीति रिवाज पूरे करने के लिये, दूसरे देशों का तो पता नहीं, लेकिन हमारे भारत में यही रीति है, पहले सड़क बनेगी, फिर अन्‍य रीति रिवाज विधिवत संपन्‍न होंगे, जैसे वॉटर सप्‍लाई लाइन, टेलीफोन लाइन व स्‍ट्रीट लाइटिंग पोल।

सभी विभाग के कर्मचारी नई बनी सड़क पर पहुंचते हैं। देखते हैं चादर सी पतली बंजरी व तारकोल मिश्रित पट्टी, जो पुरानी कच्‍ची सड़क के ऊपर डाली गई, देखते ही बोले, इस विभाग की चांदी है। देखो कितना घपला, केवल बीस फीसद से काम चला दिया, 80 फीसद खा गये। भ्रष्‍टाचार की बातें करते करते सभी विभागों के कर्मचारी अपने अपने काम में जुट गये। शाम होते होते कुछ पत्रकार पहुंचे, फोटो खींचे गये। अगले दिन सुर्खियों में सड़क को खोदे जाने की ख़बरें। सभी विभाग हर्ष के मारे फूले नहीं समा रहे थे। खुश थे कि इस बार भी सुर्खियां हमारे नाम रही।

कुछ दिन बीते। अख़बार में एक और सुर्खी आई। इस सड़क के संदर्भ में, जिसमें एक नगरपालिका का अधिकारी सड़क का रीबन काटते हुए उद्घाटन कर रहा है, और उसकी दाहिनी ओर एक अन्‍य फोटो प्रकाशित हुई, जिसमें नगरपालिका अधिकारी को सम्‍मानित करते हुये मोहल्‍ला वासी उपस्‍थित थे, और पीछे लगे बैनर पर लिखा था, What an Idea Sirji....पहली सड़क, जो अपने रीति रिवाज पूरे होने के बाद बनी।

चलते चलते एक चुटकला, नहीं.... नहीं... कटुकला

टीचर.... टीचर.... यह राजनीति क्‍या होती है ?

बेटे राजनीति, वो लकीर है, जो दो चचेरे भाईयों को एक दूसरे के सामने खड़ा कर देती है।

टीचर.... टीचर.... example


बेटा जैसे #Sukhbir Singh Badal, #Manpreetsingh Badal #Rahulgandhi #varungandhi #udhav thackeray #raj thackeray





कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

Yuva Rocks Dot Com से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook  पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करे।

fact 'n' fiction : नरेंद्र मोदी का चुनावी घोषणा पत्र

वैसे तो हर बार राजनीतिक पार्टियां या गठबंधन अपना चुनावी घोषणा पत्र चुनावों से पूर्व जारी करते हैं, लेकिन इतिहास में पहली बार 'नरेंद्र मोदी : द मैन इन पीएम रेस' की ओर से अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी किया गया है।

इस चुनावी घोषणा पत्र की एक कॉपी हमारे फर्जी सूत्रों द्वारा उपलब्‍ध करवाई गई है। केंद्र सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान करने वाले नरेंद्र मोदी की ओर से चुनावी घोषणा पत्र युवा पीढ़ी और आम जनता को ध्‍यान में रखकर बनाया गया है। विकास पुरुष की ओर से इसमें विकास संबंधी कोई घोषणा नहीं, जो है वे आपके सामने रखने जा रहे हैं।

सोशल मीडिया स्‍वतंत्रता
मैं सोशल मीडिया के अस्‍तित्‍व को बरकरार रखने के लिये पुरजोर कोशिश करूंगा। मुझे पता है कि यह एक अभिव्‍यक्‍ति का सशक्‍त प्‍लेटफॉर्म है, बशर्ते कि आप इस तरह की गतिविधियों का संचालन नहीं करेंगे, जिससे मेरी सरकार को ख़तरा पैदा हो। पहले स्‍पष्‍ट कर दूं, मैं मनमोहन सिंह की तरह बेदाग और इमानदार रहूंगा, लेकिन नेताओं की गारंटी लेना मुश्‍िकल है। पांच उंगलियां एक बराबर नहीं होती।

हर शहर में लाल किला
सोशल मीडिया के अस्‍तित्‍व को बरकरार रखने के बाद मेरा अगला कदम होगा, हर शहर में लाल किला हो। मुझे इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर में बहुत विश्‍वास है। आप गुजरात में आकर देखिये, यहां पर वैशनूदेवी से लेकर बालाजी धाम तक के प्रतिरूप मॉडल मिलेंगे। महात्‍मा गांधी मंदिर के लिये करोड़ों खर्च कर रहा हूं, यह ओर्जिनल है। लाल किला जब हर शहर में होगा, तो मैं प्रधानमंत्री के रूप में आपके शहर में 15 अगस्‍त मना पाउंगा। हालांकि दीवाली का प्रोग्राम तो सीमा पर सेना जवानों के साथ पाकिस्‍तानी सरहद पर बम फोड़कर मनाने का फिक्‍स है।

एलके आडवाणी राष्‍ट्रपति होंगे
मेरे प्रिय व भाजपा को मजबूत करने वाले मेहनतकश नेता एलके आडवाणी, जिनकी वेटिंग रद्द हो गई, को प्रमोशन देते हुए राष्‍ट्रपति नियुक्‍त किया जायेगा, बशर्ते वे मेरे साथ राज्‍यपाल कमला बेनीवाल जैसा रिलेशन न रखें। नहीं तो मजबूरन, अध्‍यादेश लाने के कानूनों में बदलाव करने होंगे, जिसके लिये मौजूदा समय में राष्‍ट्रपति की जरूरत पड़ती है।

पाकिस्‍तान विलय
हमारे लोहपुरुष सरदार पटेल का स्‍वप्‍न अधूरा रहा गया, वे चाहते थे कि भारत एक सूत्र में  बंधे, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता, क्‍यूंकि जिन्‍ना का जिन्‍न कुछ रियासतों को अपने साथ लेकर जाने में सफल हुये। हमारी कोशिश होगी कि आतंकवाद जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे अपने पाकिस्‍तान को इस बीमारी से मुक्‍त किया जाये, और विलय से बेहतर विकल्‍प कोई नजर नहीं आता। भारत, वैसे तो इसका अर्थ प्रकाश, रत, लेकिन युवा पीढ़ी अर्थ कम ढूंढती है, उसको केवल पहले अक्षर का अर्थ भार समझ आता है, इसलिये इस भार को हल्‍का करने के लिये, भारत को 'हिन्‍दू' स्‍तान में परिवर्तित किया जायेगा, इंडिया को खत्‍म क्‍यूंकि इसके भी शुरूआती अक्षर, इंदिरा की याद दिलाते हैं।

ऑन लाइन वोटिंग सिस्‍टम

इस सिस्‍टम को लाना बहुत जरूरी है, क्‍यूंकि देश तरक्‍की की राह पर है। यहां के युवा आलसी हैं। जब से फेसबुक, टि्वटर, ऑनलाइन शॉपिंग, ऑनलाइन बिल पे सिस्‍टम शुरू हुआ है, तब से लाइनों में लगना बंद कर दिया, केवल आम आदमी लाइन में लगता है। और मेरी जीत की गारंटी फेसबुकिये और टि्वटरिये हैं। इसलिये इनके लिये ऑनलाइन वोटिंग प्रणाली जरूरी है, क्‍यूंकि यह क्‍यू में नहीं लगेंगे, और नहीं लगेंगे तो मेरा जीतना मुश्‍िकल है।

दागी नेताओं की छुट्टी
सत्‍ता में आने के बाद दागी नेताओं की छुट्टी करने पर विचार किया जायेगा। दागी नेताओं को बाहर का रास्‍ता दिखाने के लिये अदालती आदेशों को माना जायेगा, लेकिन उससे पहले सीबीआई व अन्‍य जांच एजेंसियों से बीजेपी के सभी नेताओं को क्‍लीन चिट दिलाई जायेगी। इस प्रक्रिया में विरोधी पार्टी के नेता भी शामिल हो सकते हैं, बशर्ते दिल्‍ली वाली गर्लफ्रेंड छोड़नी होगी।

बीजेपी के उच्‍च पदाधिकारियों ने इस संदर्भ में संपर्क करने पर बताया कि यह घोषणा पत्र पूर्ण रूप से फर्जी है। इसका वास्‍तविकता से कोई लेन देन नहीं, हालांकि कुछ तथ्‍य सही हो सकते हैं, बाकी कहानी काल्‍पनिक है। विश्‍वास कीजिये।

Disclaimer : fact 'n' fiction  सीरीज में व्‍यक्‍तियों के नाम असली हो सकते हैं, लेकिन इसकी लेखन शैली व कंटेंट पूर्ण रूप से काल्‍पनिक है। कुछ असली तथ्‍यों को आधार बनाकर कल्‍पना से इसकी रचना की जाती है।


कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

Yuva Rocks Dot Com से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook  पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करे।

fact 'n' fiction : राहुल गांधी को लेने आये यमदूत

सुबह सुबह का समय था। राहुल गांधी अपने बिस्‍तर पर नींदफरमा थे। आंख खुली तो देखा, उसके बिस्‍तर के पास दो लोग खड़े हैं। राहुल ने चौकते हुए पूछा, आप कौन हैं ? सामने से उत्‍तर आया .. यम ऐम्‍बेसी से आये हैं। राहुल तपाक से बोले ... क्‍या मैं प्रधान मंत्री बन गया ?

नहीं.. नहीं.. यमन ऐम्‍बेसी से नहीं, यम लोक वाली ऐम्‍बेसी से आये हैं। तो आप यहां क्‍यूं आये ? राहुल ने परेशानी वाले लिहाजे में पूछा। दरअसल हमारे लोक में एक रियालिटी शो का आयोजन होने जा रहा है। उसी के सिलसिले में आपको लेने आये हैं, आपका नाम राहुल है न ? यम दूतों ने पूछा।

राहुल ने हौसला भरते हुये कहा, हां मेरा नाम राहुल है, लेकिन मुझे पता है, आप बिग बॉस बना रहें हैं, जहन्‍नुम का अओ, और जन्‍नत का वओ कंसेप्‍ट पर, लेकिन इस शो में पहले भाग ले चुका राहुल मैं नहीं, वे राहुल महाजन हैं।

नहीं.. नहीं ... वो नहीं चाहिए। हम को ऐसा प्रतिभागी चाहिये जो लम्‍बा खेल सके। अच्‍छा.. अच्‍छा.., आपको राहुल द्राविड़ की तलाश कर रहे हैं। हां.... हां... मुझे पता है वे अच्‍छा क्रिकेट खेलते हैं। टेस्‍ट में तो उनको द वॉल का टैग भी मिला हुआ है, तो क्‍या आपको उसका एड्रेस दूं।

नहीं... नहीं... खिलाड़ी नहीं चाहिए, हम को संजीदगी भरा अभिनय करने वाला चाहिये, जो चेहरे से गंभीर नजर आये। अच्‍छा.... अच्‍छा.... अब समझा। आपका को राहुल बॉस की तलाश है, लेकिन वो तो बॉम्‍बे रहते हैं, और आप गलती से दिल्‍ली आ गये। कहो तो वीआईपी कोटे में रिजर्वेशन करवा दूं।

नहीं.... नहीं..... ऐसा प्रतिभागी चाहिए, जो लीड कर सके। जिसमें लीडरशिप क्‍वालिटी हो, जैसे एक सफल बिजनसमैन में होती है। ओके... ओके.... देट्स गूड। आपको राहुल बजाज की जरूरत है। हां, उनके पास राजनीति और सफल बिजनसमैन का अनुभव है। वे आपके लिये बिल्‍कुल शूट हैं। तो आप उनसे मिलना चाहेंगे।

नहीं.... नहीं... हम को ये क्‍वालिटी किसी एक ही व्‍यक्‍ति में चाहिये। हमको  इतने सारे प्रतिभागियों की जरूरत नहीं। हमें तो बस ऑल इन वन चाहिये।

सुझाव दे दे तंग आ चुके राहुल गांधी ने दूतों के हाथों से वारंट पेपर छीना और टुकड़े टुकड़े कर दिया। सालो ! सुबह सुबह बनाने के लिये मैं ही मिला आपको। सालो ! पप्‍पू समझा, क्‍वालिटियां नरेंद्र मोदी की, और नाम राहुल का।

हंसते हंसते यमदूत दौड़ गये। पीछे एक चिट छोड़ गये। हम तो फर्जी यमदूत थे। भले ही सीबीआई से जांच करवा लेना।

Disclaimer : fact 'n' fiction  सीरीज में व्‍यक्‍तियों के नाम असली हो सकते हैं, लेकिन इसकी लेखन शैली व कंटेंट पूर्ण रूप से काल्‍पनिक है। कुछ असली तथ्‍यों को आधार बनाकर कल्‍पना से इसकी रचना की जाती है।



कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

Yuva Rocks Dot Com से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook  पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करे।

fact 'n' fiction : सोनिया गांधी के नाम मल्‍लिका शेरावत का पत्र

नमस्‍कार, सोनिया गांधी जी। आज सुबह जब दरवाजे के नीचे से कुछ अख़बार आये, हर सुबह की तरह। मैंने उनको दौड़कर उठाया। शायद किसी सुर्खी में मेरा नाम हो, लेकिन एक सुर्खी ने मुझे पत्र लिखने के लिए मजबूर कर दिया। उस सुर्खी में पूर्व सेना अध्‍यक्ष वीके सिंह का नाम था, और उन पर किसी गुप्‍तचर एजेंसी की स्‍थापना व गलत इस्‍तेमाल करने का आरोप था।

सोनिया जी, यह वीके सिंह वहीं हैं ना, जो पिछले दिनों मेरे मूल राज्‍य हरियाणा के रेवाड़ी शहर में नरेंद्र मोदी के साथ नजर आये थे, एक पूर्व सैनिक रैली में। मुझे लगता है शायद उसी कार्य के लिए वीके सिंह सम्‍मानित किये जाने के प्रयासों का हिस्‍सा है यह सुर्खी। और एक संकेत है कि इस तरह के कार्य करने वाले अन्‍य लोगों को भी किसी न किसी रूप से सम्‍मानित किया जा सकता है, मैं सम्‍मानित नहीं होना चाहती, मुझे सम्‍मान पसंद नहीं, क्‍यूंकि मैं तो पहले ही बेरोजगारी का शिकार हूं, सम्‍मान वाले व्‍यक्‍ति तो छोटा मोटा काम नहीं कर सकते। रोजगार पाने के मकसद से तो गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्‍मदिवस पर गीत गाया था, शायद किसी को मेरी आवाज पसंद आ जाये, और किसी रैली में मुझे नृत्‍य प्रदर्शन के लिये बुला लिया जाये, क्‍यूंकि अमीरों के लिए मेरा ठुमका अब काम का नहीं रहा, उनको सनी लियोन के ठुमके अच्‍छे लगते हैं, करोड़ों रुपये खर्च कर देते हैं, दुबई तक बुला लेते हैं।

इस सदी की शुरूआत में मैंने घर छोड़ा, शादीशुदा जीवन छोड़ा, क्‍यूंकि आम जिन्‍दगी जीना मेरे के लिए मुश्‍िकल था, और आपकी मनरेगा योजना तो मेरी कमर तोड़कर रख देती, इतनी नाजुक हूं, इतना वजन नहीं उठा सकती, पौष्‍टिक आहार उतनी लेबर में नहीं मिलता। अधिक लेबर के लिए कभी कभी यौन शोषण से भी गुजरना पड़ता है, लेकिन मुम्‍बई की चमकीली दुनिया में होने वाले यौन शोषण जितना मेहनताना और नाम नहीं मिलता। यहां नाम के साथ इज्‍जत मिलती है।

इस ख्‍वाहिश में मुम्‍बई आई। पहली फिल्‍म ख्‍वाहिश ही करने को मिली। इस फिल्‍म में चुंबन से काम चल गया। कहते हैं कि अगर गुड देने से बंदा मर जाये तो जहर देने की जरूरत क्‍या, अगर किस देकर इज्‍जत बच जाये, और पैसा मिल जाये तो बुराई क्‍या है ?


पहली फिल्‍म में 17 चुंबन देकर रिकॉर्ड बनाया। कुछ और फिल्‍में मिल गई। मर्डर से मैंने तलाकशुदा स्‍त्री रीमा लांबा का मर्डर कर दिया, और मल्‍ल्‍िका शेरावत बनकर उभरी। अब 17 चुंबन का असर खत्‍म हो चुका है, क्‍यूंकि यहां पर 27 चुंबन वाली मॉर्डन जमाने की गर्ल परिणीति चोपड़ा आ गई। अब तक की सभी फिल्‍मों में चुंबन और अंतरंग सीन दिये हैं, आप घर लाकर अकेले में देख सकती हैं।

मैं चुंबन से आगे बढ़ने का प्रयास करती कि उस जगह को सनी लियोन नामक एक विदेशी बाला ने भर दिया। अच्‍छा खासा उसको वहां काम मिल रहा था, लेकिन भट्ट परिवार उसको भारत खींच लाया, यह वही परिवार है, जिसने मुझे मार्डर जैसी फिल्‍म से बॉलीवुड में इतने साल रहन बसर करने का लाइसेंस दिला दिया, वरना इस शहर में टिकना बेहद मुश्‍िकल था।

अब मैं बेरोजगार हूं, केआरके की तरह। नाम तो सुना होगा केआरके। एसआरके नहीं, केआरके, इस बंदे का पूरा नाम है कमाल राशिद ख़ान। यह भोजपुरी फिल्‍मों में नहीं चले, तो बॉलीवुड चले आये, देशद्रोही पहली फिल्‍म बनाई, आज तक उसकी का दूसरा भाग बना रहे हैं। बनाने की गति इतनी धीमी कि एक्‍टर यूट्यूब के जरिये एक फिल्‍म क्रिटिक्‍स बन गया। वैसे भी हमारे धर्म गुरू कहते हैं खाली दिमाग शैतान का घर। ऐसे में कोई न कोई शैतानी तो होई जाती है। जैसे पिछले दिनों नरेंद्र मोदी के जन्‍मदिवस पर मुझे से हुई,  आप तो समझदार हैं, समझ ही गई होंगी, क्‍यूंकि आपका विपक्ष के साथ अच्‍छा अनुभव रहा है।

एक समय था, जब राम गोपाल वर्मा का नाम चलता था। आजकल उनका केवल टि्वट खाता चलता है। उनकी हालत भी मेरी जैसी है। कल तक हीरोइनें उनकी फिल्‍म में आने के लिए तरसती थीं, लेकिन अब स्‍थिति वैसी तो नहीं, अब वे हीरोइनें के लिए तरसते हैं। तभी तो उन्‍होंने पिछले दिनों मिस अमेरिका नीना दावुलूरी की तारीफ करने के बजाय सनी लियोन की तारीफ की, क्‍यूंकि उनको पता है चांद की तारीफ करने से चांद जमीन पर नहीं आयेगा, लेकिन जो पास है उसको कह दे दिया जाये, शायद कोई मौका हाथ लग जाये। राम गोपाल वर्मा को भी उम्‍मीद होगी कि इस टि्वट के बाद उनके बेरोजगारी भरे दिन खत्‍म हो जायेंगे और सनी लियोन उनको अपनी किसी विदेशी फिल्‍म के लिए बतौर एक्‍टर साइन कर लेगी, वैसे भी एक्‍टर डायरेक्‍टर बन रहे हैं, और डायरेक्‍टर एक्‍टर बन जायें तो इसमें बुराई क्‍या है।

सोनिया जी, इस सुर्खी से पहले भी मुझे संकेत मिल गये थे, जब आपने अदानी समूह को 200 करोड़ के जुर्माने वाला प्रेम पत्र भेजा था। उससे पहले इंफोसिस को 582 करोड़ का, और बाबा रामदेव के नाम तो काफी पैसा बोलता है, यह सभी लोगों ने वो ही भूल की, जो पिछले दिनों वीके सिंह ने रेवाड़ी में की। आप समझदार हैं, अब विस्‍तार से लिखूंगी, तो ज्‍यादा स्‍याही और पेज बिगड़ेगा।

मेरे पास इन दिनों काम नहीं, और जो कमाया था, उसको रोजगार पाने के लिए उड़ा रही हूं, उम्‍मीद है कि एक औरत होकर एक औरत की मजबूरी को समझेंगी। मैं सब कुछ रोजगार के लिए कार रही हूं, जब राहुल बाबा का जन्‍मदिवस आयेगा, मैं तब भी गाउंगी, अगर आप मुझे कहीं से लोक सभा की टिकट देना चाहें तो मैं चुनाव भी लड़ना चाहुंगी, लेकिन सीट पर जीत कंफर्म हो। ख़तरे वाली सीट पर बैठना, और सफर करना मुझे पसंद नहीं, क्‍यूंकि स्‍थिति पहले ही खराब है।

मुझे उम्‍मीद है कि मेरे द्वारा पिछले दिनों किये गए नरेंद्र मोदी संबंधित कार्यों के लिए आप मुझे सम्‍मानित नहीं करेंगी।
Disclaimer : fact 'n' fiction सीरीज में व्‍यक्‍तियों के नाम असली हो सकते हैं, लेकिन इसकी लेखन शैली व कंटेंट पूर्ण रूप से काल्‍पनिक है। कुछ असली तथ्‍यों को आधार बनाकर कल्‍पना से इसकी रचना की जाती है।


कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

Yuva Rocks Dot Com से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook  पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करे।