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गजब ये लड़कियां, हॉकी स्‍टिक से लिखा इतिहास

भारत की लड़कियों ने जर्मनी में इतिहास रच दिया है। महिला हॉकी के समूचे इतिहास में पहली बार, और किसी भी तरह की हॉकी में पूरे 38 साल बाद वे किसी वल्र्ड कप का कोई मेडल जीतकर भारत लाई हैं। और इस टूर्नामेंट के दौरान क्या शानदार हॉकी खेली है उन्होंने। स्पेन को 4:2 से, न्यूजीलैंड को 2:0 से और रूस को 10:-1 से दौड़ा दौड़ा कर मारा। इंग्लैंड के साथ ब्रांज मेडल के लिए हुए अपने अंतिम मैच से हजारों विदेशी दर्शकों के सामने ऐसी परफार्मेंस दी, जो शायद उन्हें जिन्दगी भर याद रहे। 

70 मिनट के नियमित समय में 1-:1 पर बराबर छूटे इस  मैच का फैसला टाईब्रेकर से होना था। भारत की गोल रक्षा का जिम्मा बुरी तरह थकी मणिपुर की निंगोमबाम की जगह झारखंड की बिगोन सोय ने संभाला, जिन्हें महिलाओं के इस जूनियर वल्र्ड कप में तब तक एक मिनट के लिए भी मैदान में उतरने का मौका नहीं मिला था। दूसरे टाई ब्रेकर में भारत की तरफ से दागे तीन में से दो गोल निशाने सही पड़े, जबकि इंग्लैंड की तरफ से मारे गए तीन में से सिर्फ एक ही शॉट को जाल में उलझने का मौका बिगोन सोय की तरफ से मिल पाया। भारत की तरफ से मैदान में सबसे बड़ा कमाल दिखाया मात्र 18 साल की हरियाणवी छोरी रानी रामपाल ने। उन्होंने रेगुलर टाइम में भारत की तरफ से एकमात्र फील्ड गोल किया, और फिर दोनों टाईब्रेकर में मिले एक एक मौके को गोल में बदलकर अपनी टीम को जीत के रास्ते पर डाल दिया।

मैच के अंतिम क्षण में इस्पाती धीरज दिखाते हुए विजयी गोल दागा हरियाणा की ही नवनीत कौर ने, जिनसे देश को आगे भी बहुत उम्मीदें हैं। क्या आप जानते हैं कि ये लड़कियां कौन हैं ? ये वही हैं, जिन्हें गर्भ में आने से पहले ही मार देने के तमाम डॉक्टरी नुस्खे अजमाए जाते हैं। जिन्हें कभी प्रेम करने के जुर्म में जिन्दा जलाया जाता है, तो कभी प्रेम न करने के जुर्म में तेजाब से नहला दिया जाता है। आओ सारी बुरी बातें भूलकर नये युग की इन महानायिकाओं का स्वागत करें।

लेकिन इससे पहले इन 18 लड़कियों में से सिर्फ एक के बारे में एक दो बातें जान लें। वह रानी रामपाल, जिनका जिक्र ऊपर दो बार आया है, हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के एक मेहनतकश परिवार से आती हैं। उनके पिता ठेला खींचते हैं और दोनों भाई बढ़ईगिरी का काम करते हैं। एक पिछड़े शहर की गरीब लड़की होना ही शायद उनकी खुशकिस्मती है, क्यूंकि किसी महानगरीय मध्यवर्गीय परिवार से आई होती तो अभी तक कोई न कोई बदकिस्मती जरूर उनका रास्ता काट गई होती और फील्ड की रानी बनने का यह मौका शायद उनके हाथ नहीं आता। यह रीयल लाइफ चक्क दे इंडिया। आईए, इन चैंपियनों को सलाम करें और इनके जैसी लाखों करोड़ों के उभरने का रास्ता तैयार करें।   साभार : नवभारत टाइम्‍स, लखनऊ संस्‍करण, संपादकीय