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13 साल से कम उम्र के लिए फेसबुक बैन!

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दुनिया की अग्रणी सोशल नेटवर्किग साइट फेसबुक से अपनी साइट के मुख्य पेज पर यह चेतावनी जारी करने के लिए कहा कि 13 वर्ष से कम आयु के बच्चे यहां अपना खाता नहीं खोल सकते।

न्यायालय की कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बी. डी. अहमद एवं न्यायाधीश विभु बाखरू की पीठ ने फेसबुक से 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों को खाता खोलने की इजाजत न देने के लिए कहा।

फेसबुक की तरफ से न्यायालय के समक्ष उपस्थित वरिष्ठ वकील पराग त्रिपाठी ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि साइट अपने मुख्य पेज पर 13 वर्ष से कम आयु के बच्चो के खाता न खोलने से संबंधित चेतावनी जारी करेगा।

न्यायालय ने केंद्र सरकार से भी यह बताने के लिए कहा कि बच्चों को ऑनलाइन सोशल नेटवर्किग साइटों पर होने वाली अभद्रता से बचाने के लिए उसके पास क्या कानून है।

अभिव्‍यक्‍ित की तालाबंदी

अब वक्‍त बदलने का है, बंदिशें व प्रतिबंध लगाने का नहीं। एक बात और अब कहां कहां प्रतिबंध लगाएंगे, क्‍यूंकि रूम डिसक्‍शन, अब ग्‍लोबल डिसक्‍शन में बदल चुकी है, इंटरनेट लगा डाला, तो लाइफ जिंगालाला। हर व्‍यक्‍ित सरकार के व्‍यवहार से तंग है, जैसे ईमानदार संवाददाता बेईमान संपादक से। मंगो मैन सरकार के खिलाफ कुछ न कुछ कह रहा है, जो उसका संवैधानिक अधिकार है।
 
ए सरकार, तुम को वोट देकर वो एक बार नहीं, पिछले कई सालों से अपने अधिकार के साथ खिलवाड़ कर रहा है, लेकिन अब वो अभिव्‍यक्‍ित के अधिकार से ही सही, लेकिन तेरे खिलाफ कुछ तो बोल रहा है, जो तुझको पसंद रही आ रहा है। इस मैंगोमैन को रुपहले पर्दे पर विजय दीननाथ चौहान से लेकर बाजीराव सिंघम तक सब किरदार अच्‍छे लगते हैं, मगर अफसोस इसको विजय दीनानाथ चौहान मिलता है तो मीडिया मार देता है, जो तेरी चौखट पर बंधी हुई कुत्तिया से ज्‍यादा नहीं भौंक सकता। काटने पर भी अब जहर नहीं फैलती, क्‍यूंकि इंजेक्‍शन जो पहले से दे रखा है। सरकार के खिलाफ अंदोलन हो तो इनका अंदोलन अंदोलन करने वाले के खिलाफ होता है। उसकी मंशा पर शक करते हैं, मुद्दे तो कैटरीना की मांग में भरे सिंदूर में या ऐश्‍वर्या राय बच्‍चन के बढ़े हुए वजन में कहीं खो जाते हैं।

टि्वटर, फेसबुक और गूगल अब सरकार की निगाह में खटक रहे हैं। यह तब नहीं, खटकते जब चुनावों में प्रचार के लिए बराक ओबामा की तरह जम कर इनका इस्‍तेमाल किया जाता है। यह कमबख्‍त तब ही आंख में किरकिरी बनते हैं, जब यह सरकार के खिलाफ बोलते हैं। सरकार को बोलने का हक है, मगर जनता को सरकार के खिलाफ बोलने का हक नहीं। असम दंगों की बात निकली तो ठीकरा सोशल मीडिया के सिर फोड़ा गया, सोशल मीडिया के सुर ऊंचे हुए तो रडार का रुख पाकिस्‍तान की तरफ मोड़ दिया गया। पाकिस्‍तान ने साबूत मांगे तो टि्वटर, गूगल एवं फेसबुक को कुछ कंटेंट और खाते ब्‍लॉक करने के लिए बोल दिया गया। वाह सरकार वाह। इस दौरान इलैक्‍ट्रोनिक मीडिया ने भी सरकार के सुर में सुर मिलाया, और गाया मिले सुर मेरा तुम्‍हारा। इतना ही नहीं, मीडिया बेचारा तो पिछले दस बारह दिन से यशराज बैनर्स के लगे हुए पैसे को बचाने में जुटा हुआ था, अगर इस बार भी बॉक्‍स पर एक था टाइगर पिट जाती तो यशराज बैनर्स को बहुत बड़ा लॉस होता, और सलमान की लोकप्रियता में गिरावट आ जाती। खुद की लोकप्रियता कितनी भी गिर जाए कोई फर्क नहीं पड़ता, मगर टीवी की टीआरपी नहीं गिरनी चाहिए, सरकार की तरह।

बर्मा ने तो 48 साल पुरानी सेंसरशिप को खत्‍म कर दिया, मगर भारत सरकार ने  अभिव्‍यक्‍ित की तालाबंदी करने की कदम बढ़ाने शुरू कर दिए।

मैं हूं सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट

सरकार अपनी नाकामियों का ठीकरा मेरे सिर फोड़ रही है। मैं हूं सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट। मैं किस से कहूं अपने दिल की बात। सब कहते हैं मेरे द्वारा दुनिया भर से अपने दिल की बात। मैं दुखी हूं, जब कोई मेरे खिलाफ बयान देता है। भारतीय सरकार एवं भारतीय मीडिया तो मेरे पीछे हाथ धोकर पड़े हुए हैं, जबकि देश की सरकार एवं कई मीडिया संस्‍थानों के बड़े धुरंधर मेरे पर आकर अपना उपदेश जनता को देते हैं। खुद को ब्रांड बनाने के लिए मेरा जमकर इस्‍तेमाल करते हैं। फिर भी आज वो ही मुझ पर उंगलियां उठा रहा है, मुझ पर आरोपों की झाड़ियां लगा रहा है, जो मीडिया कभी लिखता था मैंने कई साल पहले बिछड़े बेटे को मां से मिलवाया एवं मैंने असहाय लोगों को बोलने का आजाद मंच प्रदान किया, आज वो मीडिया भी मेरी बढ़ती लोकप्रियता से अत्‍यंत दुखी नजर आ रहा है। शायद उसकी ब्रेकिंग न्‍यूज मेरे तेज प्रसारण के कारण आज लोगों को बासी सी लगने लगी है और मेरा बढ़ता नेटवर्क उसकी आंख में खटकने लगा है।

मेरे पर मीडिया कर्मियों, नेताओं और आम लोगों के खाते ही नहीं, फिल्‍म स्‍टारों के भी खाते उपलब्‍ध हैं, कुछ मीडिया वालों ने तो मेरे पर लिखी जाने वाली बातों को प्रकाशित करने के लिए अख़बारों में स्‍पेशल कॉलम भी बना रखें हैं, जब भी देश में कोई बड़ी बात होती है तो मीडिया वाले पहले मेरे पर आने वाली प्रतिक्रियाओं का जायजा लेते हैं, मेरे पर आने वाली प्रतिक्रियाओं को स्‍क्रीन पर फलैश भी करते हैं।

मगर मैंने इस पर कभी आपत्ति नहीं जताई। कभी रोष प्रकट नहीं किया। मैंने कभी नहीं किया, मैं मीडिया से बड़ी हूं। मैंने कभी नहीं कहा, मैं मीडिया से तेज हूं। मैंने कभी नहीं कि मैं मीडिया से ज्‍यादा ताकतवर हूं। मैं तो कुछ नहीं कहा। मैं चुपचाप पानी की भांति चल रही हूं। मैं तो मीडिया आभारी हूं, जिसने शोर मचा मचाकर मुझे पब्‍लिक में लोकप्रिय बना। अगर मीडिया ने मुझे समाचारों में हाइलाइट न किया होता, तो मैं घर घर कैसे पहुंचती। मेरे जन्‍मदाता कुछ ही सालों में करोड़पति कैसे बनते?

अब मैं सोचती हूं कि मैंने ऐसा क्‍या कर दिया जो भारतीय सरकार एवं मीडिया मुझसे खफा होने लगा है। मुझे ऐसा लग रहा है कि मीडिया को लगने लगा है कि मैं पब्‍लिक आवाज बनती जा रही हूं। नेताओं को डर लगने लगा रहा है कहीं, मैं उनके खिलाफ जन मत या जनाक्रोश न पैदा कर दूं।

अगर सरकार एवं मीडिया वाले सोचते हैं कि मेरे बंद होने से जनाक्रोश थम जाएगा। सच्‍चाई सामने आने से रुक जाएगी। तो सरकार एवं मीडिया गलत सोचते हैं, मैं तो एक जरिया हूं, अगर यह जरिया या रास्‍ता बंद होगा तो जन सैलाब कोई और रास्‍ता खोज लेगा। क्‍यूंकि जनाक्रोश को तो बहना ही है किस न किस दिशा में, अगर सरकारें एवं मीडिया उसको नजरअंदाज करता रहेगा।

मैं तो सोशल नेटवर्किंग साइट हूं। जो पब्‍लिक बयान करती है, मैं उसको एक दूसरे तक पहुंचाती हूं। मेरे मालिकों को खरीद लो। मैं खुद ब खुद खत्‍म हो जाऊंगी। जैसे मीडिया को आप विज्ञापन देकर खरीदते हैं, उसकी आवाज को नरम करते हैं वैसे ही मेरे मालिकों की जेब को गर्म करना शुरू कर दो। वो खुद ब खुद को ऐसी युक्‍त निकालेंगे सांप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी। मगर सोशल नेटवर्किंग अपनी लोकप्रियता खो देगी और मैं मर जाउंगी। फिर किसी नए रूप में अवतार लेकर फिर से आउंगी। जालिम अंग्रेजों सबक सिखाने के लिए मैं तेज धार कलम बनी थी। देश विरोधी सरकारों को निजात दिलाने के लिए मैं सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट बनी हूं। अगली क्रांति के लिए मैं कुछ और बनूंगी।