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'अकीरा' फिल्‍म नहीं, कहानी है एक 'लड़की' के साहस की

अकीरा फिल्‍म नहीं, एक कहानी है, एक दस्‍तां है, एक लड़की के साहस की, जोश की, हिम्‍मत की, संघर्ष की और बलिदान की, जो हमको सिल्‍वर स्‍क्रीन पर सुनाई जाती है। अकीरा सी लड़की पैदा करना हर मां बाप के बस की बात नहीं, ऐसी लड़की को ईश्‍वर किसी किसी को वरदान स्‍वरूप देता है।

अकीरा खूबसूरत है। अकीरा भी आम लड़कियों जैसी है। मगर, एक बात उसको अलग बनाती है, उसके भीतर की हिम्‍मत। फिल्‍म की शुरूआत में ही एक सूफी कहावत का जिक्र है, जिसमें फिल्‍म का पूरा निचोड़ है। ईश्‍वर आपके उस गुण की परीक्षा लेता है, जो आप में मौजूद है।

'अकीरा' की परीक्षा तो दस साल की उम्र से शुरू हो जाती है, जब अकीरा बस स्‍टैंड पर बदतमीजियां कर रहे लड़कों को निपटा देती है। अकीरा की शक्‍ति उसके पिता है, जैसे नीरजा में नीरजा की शक्‍ति उसके पिता थे। अकीरा 3 साल बाल सुधार गृह में गुजारने के बाद खूबसूरत जीवन जीने लगती है।


तभी किस्‍मत अकीरा के जीवन में मुम्‍बई जाना लिख देती है। कहते हैं ना जब पाप हद से ज्‍यादा बढ़ जाए तो पापियों का विनाश करने को एक परम-आत्‍मा जन्‍म लेती है। कुछ ऐसा ही अकीरा के बारे में कह सकते हैं, जब अकीरा मुम्‍बई को अचानक रवाना होती है।

मुम्‍बई पहुंचते ही अकीरा के जीवन में नए तूफान आने शुरू होते हैं। अकीरा की लड़ाई जाने अनजाने में पुलिस के कुछ लालची और घटिया अधिकारियों से हो जाती है, जो एक गलती को छुपाने के लिए पैर पैर नई गलती किए जाते हैं। कॉलेज में पढ़ने वाली अकीरा किस तरह पुलिस वालों के गले का फांस करती है और पुलिस वाले किस तरह अकीरा को खत्‍म करने के लिए अपनी शक्‍ति का इस्‍तेमाल करते हैं - ये फिल्‍म का वो हिस्‍सा है, जिसको प्रकट करना मतलब फिल्‍म की रोचकता या कहानी की रोचकता को मारना है।

निर्देशक एआर मुरुगदास ने अकीरा के माध्‍यम से बहुत सारे मुद्दों को उठाया। पुलिस अधिकारी किस तरह अपनी ताकत का इस्‍तेमाल कर सकते हैं या करते हैं। खूबसूरत लड़कियों के चेहरे की रौनक तेजाब कुछ बदतमीज लड़कों की हरकत के कारण किस तरह छीन लेता है। देखते समझते हुए अभिभावकों का आंख मूंद लेना, बच्‍चों को किस गर्त में फेंकता है।

सोनाक्षी सिन्‍हा, अनुराग कश्‍यप और कोंकणा सेनशर्मा मुख्‍य भूमिका में हैं, जो पूरी फिल्‍म को आगे बढ़ाते हैं। मगर, अन्‍य छोटे छोटे किरदार भी आपको प्रभावित करेंगे, चाहे अकीरा के पिता का किरदार, चाहे अकीरा के दोस्‍त किन्‍नर का किरदार, चाहे अकीरा के भाई-भाभी और भाई के साले का किरदार। हर कलाकार महत्‍वपूर्ण है और हर कलाकार अपने किरदार के साथ ईमानदारी बरतते हुए नजर आता है।

हां, चलते चलते इतना जरूर कहूंगा कि नीरजा भावनात्‍मक दास्‍तां थी जबकि अकीरा एक्‍शन दस्‍तां है।

आधे पौने घंटे की फिल्‍म वन्‍स अपॉन ए टाइम इन मुम्‍बई दोबारा

वन्‍स अपॉन ए टाइम इन मुम्‍बई दोबारा। यह 2010 में आई सुपरहिट फिल्‍म वन्‍स अपॉन ए टाइम इन मुम्‍बई का स्‍किवल है। इसका नाम पहले वन्‍स अपॉन ए टाइम इन मुम्‍बई अगेन था, लेकिन कहीं हिन्‍दी बुरा न मान जाए, इसलिए एक हिन्‍दी शब्‍द दोबारा का इस्‍तेमाल किया गया। एकता कपूर टूने टोटकों में विश्‍वास करती है, कहीं न कहीं यह बात उनके फिल्‍म टाइटल में नजर आई है, हर बार एक अलग अक्षर, जैसे इसमें ए के साथ छोटी सी वाय का इस्‍तेमाल किया गया है।

रजत अरोड़ा की पटकथा और मिलन लथुरिया का निर्देशन, एकता कपूर का पैसा वन्‍स अपॉन ए टाइम इन मुम्‍बई दोबारा। फिल्‍म की कहानी दाऊद इब्राहिम पर आधारित है, लेकिन बॉलीवुड स्‍वीकार करने से डरता रहता है। फिल्‍म में फेरबदल हुए थे, शायद उस दौरान क्रिकेट वाला सीन रिशूट कर डाला गया होगा, जो फिल्‍म की शुरूआत को कमजोर बनाता है। दाऊद इब्राहिम मुम्‍बई का बेताज बादशाह बने रहना चाहता है, जो शोएब  नाम से रुपहले पर्दे पर उतारा गया है। शोएब दाऊद की तरह एक पुलिस कर्मचारी का पुत्र, हाजी मस्‍तान के बाद मुम्‍बई का अगला डॉन, डोंगरी से संबंध रखता है। शोएब मुम्‍बई में सिर उठा रहे अपने एक दुश्‍मन रावल को मारने के लिए लौटता है, जो बेहद कमजोर खलनायक है। ऐसे में शोएब जैसे दमदार डॉन का मुम्‍बई आना बेहद बहुदा लगता है, इससे ज्‍यादा रौब तो हिन्‍दी फिल्‍मों के साधारण गुंडों का होता है।

शोएब यहां पहुंचते रावल को मारने का जिम्‍मा अपने गुर्गे असलम को सौंपता है। जिस किरदार को निभाया है इमरान खान ने। असलम, स्‍लम एरिये से आता है। जुर्म की दुनिया में उतरना उसके लिए मुश्‍िकल नहीं। वे डॉन का काम करने के लिए निकलता है। फिल्‍म की एक और कमजोर कड़ी, डॉन जिस दुश्‍मन को मारने आया है, उसको मारने की बजाय एक लड़की के चक्‍कर में पड़ जाता है, जो कश्‍मीर से मुम्‍बई अभिनेत्री बनने आई है। हालांकि असल जिन्‍दगी में भी दाऊद को एक पंजाबी लड़की से प्‍यार हुआ था, वे भी शोएब की तरह दाऊद को अंत में आकर ठुकरा देती है, जिसे बर्दाशत करना शोएब के लिए मुश्‍िकल।

फिल्‍म अंतिम आधे पौने घंटे में अपनी शिखर की तरफ बढ़ती है। इस आधा पौने घंटे में हर किरदार जीवंत नजर आता है। फिल्‍म अब दर्शकों को बांधने में कामयाब होती है, लेकिन पहले का सवा घंटा बेहद बकवास पकाऊ, उसकी जरूरत कहीं नजर नहीं आती, जुर्म की दुनिया आधारित फिल्‍म में प्‍यार का मसाला ठूंसने की कोशिश में निर्देशक और लेखक दोनों चूकते हुए नजर आए। सोनाक्षी सिन्‍हा, सोनाली बेंद्रे, इमरान खान, अक्षय कुमार ने अंतिम आधे घंटे में साबित किया कि निर्देशन और पटकथा लेखन में कमी है, उनमें तो क्षमता है खुद को साबित करने की।

'दबंग' के आगे आौर पीछे कोई नहीं

-: वाईआरएन सर्विस :- 

2012 की मेगा बजट एवं अंतिम फिल्‍म 21 दिसम्‍बर को रिलीज हो रही है। इस फिल्‍म से बॉलीवुड को बहुत ज्‍यादा उम्‍मीदें हैं। पांच दिन बाद रिलीज होने वाली इस फिल्‍म को ओपनिंग तो बहुत जोरदार मिलने वाली है, लेकिन फिल्‍म में दम कितना है, इसका पता फिल्‍म के रिलीज होने के बाद लग पाएगा। अगर फिल्‍म पिछली 'दबंग' की तरह लोगों को पसंद आई तो सलमान ख़ान अपनी ब्‍लॉकबस्‍टर फिल्‍म 'एक था टाइगर' का रिकॉर्ड तोड़ते हुए नए रिकॉर्ड की रचना करेंगे, क्‍यूंकि फिल्‍म रिलीज होने के बाद फिल्‍म के पास कमाई करने के लिए क्रिसमिस डे, सर्दी की छुट्टियां एवं नए साल की पूर्व संध्‍या जैसे अवसर हैं।

और 'दबंग 2' से एक सप्‍ताह पूर्व एवं दो सप्‍ताह बाद कोई बड़ी फिल्‍म रिलीज नहीं हुई। ऐसे में सिने प्रेमी दबंग देखने के लिए बेताब हैं। ज्ञात रहे कि 2009 से 2012 तक सलमान ख़ान ने करीबन आठ फिल्‍में की, जिनमें से ज्‍यादातर फिल्‍में 100 करोड़ से ऊपर बॉक्‍स ऑफिस पर क्‍लेकशन करने में सफल रही। बॉडीगार्ड एवं एक था टाइगर ने तो 200 करोड़ से ऊपर की कमाई की, इन दोनों फिल्‍मों ने बॉक्‍स ऑफिस पर पहले दिन क्रमश 20 करोड़ एवं 25 करोड़ की क्‍लेकशन कर  नए रिकॉर्ड बनाए।

'एक था टाइगर' ने बॉक्‍स ऑफिस पर कमाई तो रिकॉर्ड तोड़ की, लेकिन दर्शकों को पूरी तरह निराश किया। फिल्‍म देखने के बाद दर्शकों ने खुद को ठगा हुआ पाया। इस फिल्‍म के अधिक से अधिक कमाई करने के पीछे दो अहम कारण रहे एक तो यशराज बैनर्स का प्रमोशन एवं दूसरा सलमान ख़ान पर मीडिया की मेहरबानी। 'बॉडीगार्ड' की सफलता के बाद दर्शकों को सलमान ख़ान की अगली फिल्‍म का इंतजार था, इस बेताबी को बढ़ाने में यशराज बैनर्स के प्रमोशन स्‍टाइल ने बहुत बड़ा योगदान अदा किया, और फिल्‍म पहले ही कुछ दिनों में सौ करोड़ रुपए से ऊपर कमाने में कामयाब रही।

सोनाक्षी की दूसरी फिल्‍म और जन्‍मदिवस


सोनाक्षी सिन्‍हा, एक ऐसा नाम है। एक ऐसा चेहरा है। जो आज किसी पहचान का मोहताज नहीं। दबंग से पहले भले ही मायानगरी में होने वाली पार्टी में लोग उसको शॉटगन की बेटी के रूप में पहचानते हो, मिलते हो। मगर आज उसकी अपनी एक पहचान बन चुकी है। पहली ही फिल्‍म सुपर डुपर हिट और नवोदित अभिनेत्री पुरस्‍कार भी झोली में आन गिरा। ऐसा नहीं कि ऐसा केवल सोनाक्षी के साथ ही हुआ, पहले भी बहुत सी अभिनेत्रियों के साथ हुआ। मगर सोनाक्षी की आंखों में जो कशिश है, चेहरे पर जो नूर है, वो उसको बिल्‍कुल अलग करता है।

जहां दो जून को सोनाक्षी पच्‍चीस साल की हो जाएगीं, वहीं उनकी दूसरी फिल्‍म राउड़ी राठौड़ उनके जन्‍मदिवस से ठीक एक दिन पहले रिलीज हो रही है। इस फिल्‍म में उनके ऑपोजिट अक्षय कुमार हैं, जिसके सितारे बॉक्‍स ऑफिस पर ठीक बिजनस नहीं कर रहे। मगर दिलचस्‍प बात तो यह भी है कि इस फिल्‍म को प्रभु देवा निर्देशित कर रहे हैं, जिन्‍होंने वांटेड से सलमान खान की फ्लॉप सिरीज पर विराम लगाया था।

इस फिल्‍म के प्रोमो और गीत बताते हैं कि फिल्‍म पूरी तरह दक्षिण से प्रभावित है, आज कल छोटे पर्दे पर दक्षिण फिल्‍मों के हिन्‍दी रूपांतरणों का बोलबाला है। क्‍या प्रभु देवा छोटे पर्दे की तरह बड़े पर्दे पर भी दक्षिण की शैली से प्रभावित फिल्‍म को बॉक्‍स ऑफिस पर हिट करवा पाएंगे। अक्षय को तो फ्लॉप से ज्‍यादा फर्क नहीं पड़ेगा, मगर दबंग से सफलता की सिखर पर चढ़ बैठी सोनाक्षी को थोड़ा सा झटका जरूर लग सकता है, क्‍यूंकि अगले दिन जन्‍मदिवस जो है।

मिस सिन्‍हा अभिनेत्री से पहले फैशन डिजाइनर थी, उन्‍होंने बकायदा इसकी तालिम भी ली हुई है। उन्‍होंने 2005 में आई फिल्‍म मेरा दिल लेके देखो के लिए परिधान डिजाइन किए थे। उन्‍होंने कई फैशन शो भी किए। मगर किसी की नजर इस चेहरे पर नहीं गई। फिर अचानक एक दिन एक समारोह में उस पर सलमान की निगाह पड़ गई, और उन्‍होंने उसको दबंग फिल्‍म में रोल के लिए ऑफर किया। इस फिल्‍म के लिए सोनाक्षी को काफी वजन कम करना पड़ा। मेहनत रंग लाई और फिल्‍म बॉक्‍स ऑफिस पर हिट हो गई। आज सोनाक्षी के पास आधा दर्जन से ज्‍यादा फिल्‍में हैं, जिसमें एकआध फिल्‍म को छोड़कर बाकी सब फिल्‍में अधिक उम्र के स्‍टारों के साथ हैं, जिनमें अक्षय कुमार, अजय देवगन और सलमान खान शामिल हैं।

एक जून को रिलीज होने वाली राउडी राठौर सुपरहिट तेलुगु फिल्म विक्रमारकुडु का हिंदी रीमेक है। कहानी की बात करें तो शिव (अक्षय कुमार) की जो एक चोर है। इस चोर का महिलाओं पर खूब जादू चलता है और वे उसकी दीवानी हो जाती हैं। प्रिया (सोनाक्षी सिन्हा) से शिव की मुलाकात एक ऐसी शादी में होती है जहां उसे बुलाया ही नहीं गया है। प्रिया का वह दीवाना हो जाता है। शिव की जिन्‍दगी में तब समस्या पैदा होती है जब छ: वर्ष की नेहा बेवजह उसे पिता मानने लगती है। शिव इसका पता लगाने की कोशिश करता है कि नेहा उसे अपना पिता क्यों मानती है। नेहा के प्यार और उसके प्रति जिम्मेदारी शिव को इंसान के रूप में बदल देती है। राउडी राठौर कहानी है शिव (अक्षय कुमार) की जो एक चोर है। इस चोर का महिलाओं पर खूब जादू चलता है और वे उसकी दीवानी हो जाती हैं। प्रिया (सोनाक्षी सिन्हा) से शिव की मुलाकात एक ऐसी शादी में होती है जहां उसे बुलाया ही नहीं गया है। प्रिया का वह दीवाना हो जाता है। शिव न केवल नेहा के अतीत से परिचित होता है बल्कि वह बिहार स्थित छोटे शहर के लोगों के लिए वहां के एमएलए और गुंडों के खिलाफ मसीहा बनकर उभरता है।

अब देखना यह है कि सोनाक्षी अक्षय कुमार के साथ अपनी दूसरी हिट फिल्‍म देने में कामयाब होगी या नहीं। वैसे प्रभु देवा की भी यह दूसरी निर्देशित फिल्‍म है। इस फिल्‍म के निर्माताओं में संजय लीला भंसाली का भी नाम है, जो एक बेहतरीन निर्देशकों में गिने जाते हैं।