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अगर नहीं देखी तो 'बोल' देखिए

कुछ दिन पहले पाकिस्‍तानी फिल्‍म बोल देखने को मिली, जो वर्ष 2011 में रिलीज हूई थी, जिसका निर्देशन शोएब मंसूर ने किया था। एक शानदार फिल्‍म, जो कई विषयों को एक साथ उजागर करती है, और हर कड़ी एक दूसरे से बेहतरीन तरीके से जोड़ी है।

कहानी एक लड़की की है, जो अपने पिता के कत्‍ल केस में फांसी के तख्‍ते पर लटकने वाली है। एक लड़के के कहने पर लड़की फांसी का फंदा चूमने से पहले अपनी कहानी कहने के लिए राष्‍ट्रपति से निवेदन करती है। राष्‍ट्रपति उस लड़की के निवेदन को स्‍वीकार करते हैं और वे लड़की अपनी मीडिया से कहानी कहती है।

लड़की के पिता हकीम हैं, जिनका धंधा दिन प्रति दिन डूब रहा है, और हकीम साहेब बेटे की चाह में बेटियां ही बेटियां पैदा किए जा रहे हैं। अंत उनके घर एक बच्‍चे का जन्‍म होता है, जो लड़की है न लड़का। किन्‍नर संतान से हकीम नफरत करने लगते हैं।



लेकिन परिवार के अन्‍य सदस्‍य किन्‍नर को आम बच्‍चों की तरह पालने कोशिश में लग जाते हैं। सालों से घर की चारदीवारी में बंद किन्‍नर बाहरी दुनिया से अवगत हो, खुशी से जीवन जीए, यह सोचकर उसको बाहर भेजा जाता है, मगर, कुछ हवस के भूखे लोगों की निगाह में आ जाता है। एक रात हकीम अपनी ही किन्‍नर संतान को मार देते हैं।

मुसीबत कम होने की जगह बढ़ जाती है। पुलिस वाले हकीम को ब्‍लैकमेल कर उससे मोटी रकम उतरवा लेते हैं, जो मस्‍जिद के चंदे के लिए हकीम के पास आई हुई थी। अब दूसरी तरफ मस्‍जिद प्रबंधन हकीम से धन वापस चाहता है तो ऐसे में हकीम एक पुराने ग्राहक के यहां मदद के लिए जाते हैं, जो कोठा चलाता है।

कोठा चलाने वाला चौधरी हकीम को मदद देने के लिए राजी होता है। मगर, शर्त रखता है कि हकीम चौधरी की पत्‍नी मीना से संबंध बनाए और बेटी जने। अंत मजबूरी में हकीम करने को राजी हो जाते हैं। कुछ महीने बाद चौधरी के घर में लड़की की किलकारी सुनाई देती है।

कहानी के अंत से पहले हकीम के गुप्‍त विवाह का राज खुल जाता है, जब हकीम अपनी नई जन्‍मीं बच्‍ची को मारने का प्रयास करने लगता है तो उसकी बड़ी बेटी जैनब अपने पिता की ही हत्‍या कर देती है और खुद का गुनाह कबूल कर जेल चली जाती है।

कहानी दिखाती है कि एक समाज है जहां लड़कियां चाहिए, और दूसरा समाज जहां लड़कियां बोझ हैं। एक किन्‍नर को समाज किस तरह देखता है, और मानव मानव के साथ भी नीचता करने से नहीं टलता है। मजबूरी से बड़ा कभी आपका धर्म नहीं हो सकता। सबसे बड़ी बात तो लड़की अंत में कहती है कि अगर मारना अपराध है तो बच्‍चे पैदा करना भी गुनाह होना चाहिए, यदि आप खिलाने की क्षमता न हो।

बोल जैसी फिल्‍मों को बड़े स्‍तर पर रिलीज करना चाहिए। ऐसी फिल्‍मों का प्रचार प्रसार हद से ज्‍यादा करना चाहिए, शायद ऐसी फिल्‍मों के कारण फिल्‍म की शुरूआत में कहा जाने वाला संवाद सच साबित हो जाए, और आपके कारण किसी की जिन्‍दगी संवर जाए।

Cast
Manzar Sehbai as Hakim Sahib (Father)
Shafqat Cheema as Ishaq "Saqa" Kanjar (Panderer)
Iman Ali as Sabina (Meena)
Mahira Khan as Ayesha (Second sister)
Humaima Malik as Zainub (eldest sister)
Atif Aslam as Mustafa
Zaib Rehman as Suraiya (Mother)
Amr Kashmiri as Saifi (Brother/hijra)
Irfan Khoosat as Mustafa's father
Rashid Khawaja as the President of Pakistan
Meher Sagar as Young Saifi
Mahnoor Khan as Mahnoor (Third sister)
Gulfam Ramay as GuL G (Ayesha's friend)

ऑस्‍कर 2014 के लिये भेजी एशियाई फिल्‍मों के ट्रेलर

आधिकारक रूप से 86वें ऑस्‍कर पुरस्‍कार समारोह के लिये सर्वोत्‍तम विदेशी भाषा फिल्‍म श्रेणी के तहत एशियाई मूल की नौ फिल्‍में भेजी गई हैं, जो 2 मार्च 2014 को लॉस एंजिलस के हॉलीवुड जिले में स्‍थित डॉलबाय थियेटर में दिखाई जायेगी।

The Good Road
भारत की ओर से इस श्रेणी के तहत ज्ञान कोरिया के निर्देशन में बनी गुजराती 'द गुड रोड' को भेजा गया है। इस फिल्‍म की कहानी एक ट्रक चालक व दो बच्‍चों के आस पास घूमती है। ट्रक चालक अपने परिजनों को अपनी जीवन बीमा राशि दिलाने के लिये झूठे सड़क हादसे का पूरा नाटक रचता है। आदित्‍य, जो अपने माता पिता से एक ढाबे पर खाना खाते वक्‍त जुदा हो जाता है। पूनम, जो अपने किसी की तलाश में हाइवे पर पहुंच जाती है। इन दिनों किरदारों के आसपास घूमती कहानी है 'द गुड रोड'। यह राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार जीत चुकी है। अब ऑस्‍कर में कहां तक पहुंचती है, के लिये इंतजार करना होगा।


Television

बंग्‍लादेश की ओर से इस श्रेणी के लिये टेलीविजन नामक फिल्‍म भेजी गई है, जो एक हिन्‍दु परिवार के संघर्ष पर आधारित है। यह हिंदु परिवार एक अच्‍छे क्षेत्र में रहता है, जहां पर इस्‍लामिक धर्मगुरू ने टेलीविजन देखने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। बच्‍चों की जिद्द के आगे परिवार वाले टेलीविजन लेकर आते हैं, और शुरू होता है संघर्ष। इस फिल्‍म का निर्देशन मुस्‍तफा सारवार ने किया है। इस फिल्‍म में शाहिर हुदा रूमी, चंचल चौधरी, मुशर्रफ करीम और नुर्सत इमरोज तीशा ने मुख्‍य भूमिकायें अदा की हैं।
 

Soongava: Dance of the Orchids

नेपाल की ओर से इस कैटेगिरी के लिये सूनगावा: डांस ऑफ द ओर्चिड्स नामक फिल्‍म भेजी गई है। यह फिल्‍म समलैंगिक रिश्‍तों पर आधारित है। इस फिल्‍म में दो लड़कियां मुख्‍य किरदारों में हैं, जो आपस में प्‍यार कर बैठती हैं। अचानक एक लड़की की शादी हो जाती है, लेकिन दोनों एक दूसरे के इतनी करीबी आ चुकी होती हैं कि शादी के बाद भी अपने रिश्‍ते को खत्‍म नहीं कर पाती, और धीरे धीरे यह रिश्‍ता जगजाहिर हो जाता है, और उनकी जिन्‍दगी में मुश्‍िकलें व समाज की चुनौतियां दस्‍तक देती हैं। इस फिल्‍म को कुछ अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह में अच्‍छा रिस्‍पॉन्‍स मिला है। 

 

Zinda Bhaag
पाकिस्‍तान की ओर से 'जिन्‍दा भाग' को इस श्रेणी के लिये भेजा गया है। इस फिल्‍म में नसीरुद्दीन शाह मुख्‍य किरदार में हैं। उन्‍होंने इस फिल्‍म में एक लाहौरी रसोइये व विलेन का किरदार अदा किया है। फिल्‍म की कहानी विदेश जाने के इच्‍छुक युवाओं से शुरू होती है, जो विदेश में जिन्‍दगी जीने का सपना देखते हैं। अचानक स्‍थितियां उनको गलत रास्‍ते पर खींचकर ले जाती हैं। इस संघर्ष का नाम है 'जिन्‍दा भाग'। 


Juvenile Offender
दक्षिण कोरिया की ओर से इस श्रेणी के लिये 'जुवेनाइल ओफेंडर' नामक फिल्‍म भेजी गई है, जो एक ऐसे बच्‍चे पर है, जिसको उसकी मां जन्‍म देने के बाद छोड़ती है, और वे एक लम्‍बे समय बाद अपनी मां से मिलता है। बीमार दादा की देखभाल और घर में अकेलापन महसूस करने वाला यह किशोर एक आपराधिक मामले में गिरफ्तार होता है। दादा की मौत के बाद वे अपनी मां की तलाश करता है। उसके साथ रहने लगता है, अचानक दोनों में पुरानी बातों को लेकर झगड़ा होता है, और इस कहानी का एक अहम हिस्‍सा किशोरी की गर्लफ्रेंड भी है। फिल्‍म की पुरस्‍कार जीत चुकी है।
 

ILO ILO

सिंगापुर की ओर से इस श्रेणी के लिये आईएलओ आईएलओ नामक फिल्‍म भेजी गई है, जो एक मां बेटे के रिश्‍ते पर आधारित है। इस फिल्‍म का ट्रेलर देखने के बाद महसूस होता है कि बच्‍चा अपने परिवार से नफरत करता है, वे अपने दादा से प्‍यार करता है। वे अपने परिवार से दूर भागता है। ऐसे में वे एक हादसे का शिकार हो जाता है। इस हादसे में बाद उनकी जिन्‍दगी में कुछ परिवर्तन आते हैं, इनको दर्शाती फिल्‍म है आईएलओ आईएलओ। यह फिल्‍म घर में होम सिक फील करने वाले बच्‍चों पर आधारित है। कई फिल्‍म फेस्‍टीवलों में यह फिल्‍म अपना परचम लहरा चुकी है।
 
Transit
फ़िलिपीन की ओर से इस श्रेणी के तहत भेजी गई फिल्‍म ट्रांजिस्‍ट, एक पिता के संघर्ष पर है, जो इजरायली लॉ के कारण अपने बच्‍चे को अपने से दूर न होने के लिये करता है। पिता अपने बच्‍चे का जन्‍मदिवस मनाने के लिये घर पहुंचता है, तो उसको पता चलता है कि इजरायल में एक नया लॉ आया है, जिसके तहत विदेशी बाल मजदूरों को विदेश भेजा रहा है। इस आदेश के बाद शुरू होती है एक पिता के संघर्ष की कहानी। इस फिल्‍म का निर्देशन हन्‍ना इस्‍पिया की ओर से किया गया है।


The Great Passage

द ग्रेट पैसेज, जापान की ओर से इस श्रेणी में भेजी गई एक फिल्‍म है। यह फिल्‍म एक नौजवान के आसपास घूमती है, जो किताबों से बेहद प्‍यार करता है। वे एक असफल सेल्‍समैन है, लेकिन उसको एक शब्‍दकोश तैयार करने वाली टीम के लिये चुन लिया जाता है। इस दौरान उसकी मुलाकात एक खूबसूरत लड़की से होती है, और उसका दिल जीतने के लिए वे अपनी पूरी जान लगा देता है। शब्‍दकोश कंपनी का मालिक उससे प्‍यार शब्‍द की परिभाषा देने के लिये पूछता है।
 

The Grandmaster

चीन ने इस श्रेणी के लिये अपनी 'द ग्रेंडमास्‍टर' मार्शल आर्ट्स आधारित एक फिल्‍म को चुना है। यह असल जिन्‍दगी से प्रेरित एक फिल्‍म है, जैसे भाग मिल्‍ख भाग 'मिल्‍खा सिंह' से प्रेरित है। इस फिल्‍म की कहानी 1930 के प्रसिद्ध मार्शल आर्ट्स किंग विंग चुन पर आधारित है, जिसकी एक हवाई यात्रा के दौरान मौत हो जाती है।






कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

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movie review : संतोषी का अंदाज फटा पोस्‍टर निखरा शाहिद

भले ही फिल्‍म 'फटा पोस्‍टर निकला हीरो' के पोस्‍टर पर गलती से निकला 'निखला' हो गया हो, लेकिन फिल्‍म बनाते वक्‍त फिल्‍म निर्देशक राजकुमार संतोषी ने कोई चूक नहीं की, इसलिये 'फटा पोस्‍टर निकला हीरो' में सब कुछ निखरा निखरा नजर आया।

निर्देशक राजकुमार संतोषी, जिनकी 'अंदाज अपना अपना' के दूसरे भाग के लिए दर्शक आंखें बिछाये बैठे हैं, ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आज के समय में भी दो अर्थ वाली शब्‍दावली के इस्‍तेमाल के बगैरह एक अच्‍छी कॉमेडी फिल्‍म का निर्माण हो सकता है। आज भी किरण खेर जैसी मॉर्डन ओवर एक्‍टिंग वाली मां के बिना मां बेटे के रिश्‍ते पर एक फिल्‍म बन सकती है।

राजकुमार संतोषी ने पुराने समय की कहानी को चुना, लेकिन स्‍थितियां आज की रखी, और पूरा फोक्‍स महिला शक्‍तिकरण की तरफ था। एक नौजवान को किस तरह दो महिलायें एक योग्‍य पुलिस अधिकारी बनने में मदद करती हैं। फिल्‍म में एक नायक विश्‍वास राव (शाहिद कपूर) की मां पद्मिनी कोल्हापुरे, तो दूसरी प्रेमिका काजल ( इलियाना डीक्रूज )। नायक की मां नायक को इमानदार पुलिस अधिकारी बनते हुये देखना चाहती है, लेकिन बेटा हीरो बनना चाहता है। अंत में प्रेमिका के सहयोग से नायक की मां का सपना पूरा होता है। सुखद अंत के साथ फिल्‍म खत्‍म होती है। मगर फिल्‍म के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने के दौरान का जो रोमांच है, वे बेहद दिलकश है। उस में एक्‍शन भी है, रोमांस भी है, उसमें हंसी के ठहाके भी हैं।

फिल्‍म की शुरूआत एक इमानदार महिला ऑटो चालक से होती है, जो ट्रैफिक पुलिस वाले को सिग्‍नल तोड़ने का जुर्म स्‍वयं स्‍वीकार करते हुए सौ का नोट देती है, और रसीद भी गर्व से मांगती है। यह महिला एक बेईमानी पुलिस कर्मचारी की पत्‍िन है, जो एक हादसे में मारा जा चुका है। अब इस सपना है कि उसका बेटा अपने नाना की तरह इमानदार पुलिस ऑफिसर बने। बेटा हीरो बनना चाहता है, पुलिस मेडिकल चेकअप के दौरान उलटी पुलटी हकरत करता है, ताकि किस तरह रिजेक्‍ट हो जाये। अंत तक आते आते फिल्‍मी हीरो असली हीरो बनकर उभरता है। इसको कहते हैं 'फटा पोस्‍टर निकला हीरो'।

शाहिद कपूर ने कॉमेडी और एक्‍शन दोनों रंगों को खुद को खूब रंगा है। शाहिद ने साबित कर दिया कि अच्‍छी कहानी व अच्‍छा निर्देशक अगर उनको मिलता रहे, तो वे खुद को बॉलीवुड में बतौर सुपर स्‍टार स्‍थापित कर सकते हैं। नायिका इलियाना डी क्रूज ने एक बिंदास बाला का रोल अदा किया, जो समाज सेवा के लिये मुम्‍बई की सड़कों पर दौड़ती रहती है, और अन्‍य कलाकारों संजय मिश्रा, दर्शन जरीवाला, पद्मिनी कोल्‍हापुरे, सौरभ शुक्‍ला, मुकेश तिवारी ने भी अपने अपने किरदारों को बेहतरीन तरीके से निभाया। इनके सहयोग के बिना शाहिद कपूर भी कुछ नहीं कर सकते थे, क्‍यूंकि कॉमेडी सीन हमेशा ट्यूनिंग मांगते हैं। सलमान खान छोटी भूमिका में हैं, लेकिन राजकुमार संतोषी ने अपने पुराने कलाकार सलमान खान से इस छोटी सी भूमिका को भी शानदार बनवा लिया।

स्‍क्रीन प्‍ले, संवाद, स्‍टोरी और निर्देशन सब कुछ राजकुमार संतोषी के हाथों में था। शायद फिल्‍म के लिए यह सबसे अच्‍छी बात थी। राजकुमार संतोषी ने 'अजब प्रेम की गजब कहानी' के चार साल बाद रुपहले पर्दे पर दस्‍तक दी। घायल, दामिनी, बरसात, द लीजेंड शहीद भगत सिंह जैसी फिल्‍मों का निर्माण करने वाले राजकुमार संतोषी ने इस फिल्‍म से साबित कर दिया कि वे आज भी 'अंदाज अपना अपना' के निर्माण का मादा रखते हैं। फिल्‍म में हंसी पैदा करने के लिए उन्‍होंने दो अर्थी शब्‍दों का इस्‍तेमाल नहीं, बल्‍कि घटनाओं और हावभावों का अधिक इस्‍तेमाल किया। अंत में दर्शक तो कंफ्यूज्‍ड हो सकते हैं, यह सोचकर कि संतोषी ने अंत बनाते वक्‍त अपना ध्‍यान एकाग्र कैसे किया हो गया। 'अगल बगल' गीत बेहतरीन है, लेकिन अन्‍य गीतों की जरूरत नहीं थी, और यह फिल्‍म का मूड तोड़ते हैं।

चलते चलते इतना ही कहूंगा, परिवार के साथ जाइये, हंसी ठिठोली का खूब मजा उठाइए क्‍यूंकि फटा पोस्‍टर निकला हंसी का फुव्‍वारा।



कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

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trailer review : संजय की रामलीला का ट्रेलर 'फर्स्‍ट क्‍लास'

निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली की अगली रोमांटिक एक्‍शन ड्रामा फिल्‍म रामलीला का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है। गुजारिश के बाद बतौर निर्देशक लेकर आ रहे संजय लीला भंसाली के लिए यह फिल्‍म बेहद अहम होगी, और फिल्‍म का ट्रेलर देखने के बाद ऐसा लगता भी है कि फिल्‍म को बेहतर बनाने के लिए उन्‍होंने अपना सारा दम खम लगा दिया है।

इस फिल्‍म के हर पक्ष पर संजय लीला भंसाली ने अपनी निगाह रखी है। निर्देशन के अलावा लेखन, संगीत निर्देशन और धन लागत आदि में संजय लीला भंसाली का सहयोग है। फिल्‍म में संजय लीला भंसाली ने रणबीर सिंह और दीपिका पादुकोण को एक साथ रुपहले पर्दे पर उतारने की कोशिश की, जो सफल होती नजर आ रही है, क्‍यूंकि ट्रेलर देखने के बाद दोनों सितारे संतुष्‍ट करते हैं। 


कहानी भले ग्रामीण पृष्‍ठभूमि से जुड़ी है, लेकिन संवादों में मॉर्डन शब्‍दों का इस्‍तेमाल किया है। कुछ संवाद दो अर्थे हैं, जो शायद युवा पीढ़ी को ध्‍यान में रखकर बनाए गए।

फिल्‍म की कहानी लड़के और लड़की व समाज के बीच घूमेगी, ट्रेलर देखने के बाद लगता है कि लड़की और लड़के के किरदारों के बीच नोक झोंक के बाद सच प्‍यार होगा। बंदूकों की दुनिया में प्‍यार पनपता नजर आयेगा।

हालांकि बंदूकों की छाया में प्‍यार के लिए संघर्ष करते हुए किरदार हमने रुपहले पर्दे पर पिछले कुछ सालों में बहुत सारे देखे हैं, केवल इशकजादे के अलावा कोई जोड़ी अपना असर छोड़ने में सफल नहीं हुई।

सांवरिया, हम दिल दे चुके सनम, देवदास, गुजारिश की तरह संजय लीला भंसाली ने इस फिल्‍म में भी भव्‍य सेटों का इस्‍तेमाल किया है। फिल्‍म का ट्रेलर देखने के बाद लगता है कि एक बार तो फिल्‍म के लिए दांव खेलना चाहिए। बाकी तो 15 नवंबर 2013 को फिल्‍म रिलीज होने के बाद रहस्‍य खुल जायेगा।


कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

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fact 'n' fiction : 'मुकद्दर का सिकंदर' का रीमेक बनाएंगे रामू

शोले, डॉन, अग्‍निपथ और जंजीर के बाद अब 'मुकद्दर का सिकंदर' का रीमेक बनाया जाएगा। इसका निर्देशन शोले से प्रेरित होकर आरजीवी की आग बना चुके निर्देशक राम गोपाल वर्मा करेंगे। मुकद्दर का सिकंदर का नया नाम होगा 'डिजस्‍टर ऑफ द सेंचुरी'। खास बात तो यह है कि सह निर्देशक के रूप में सांवरिया फेम संजय लीला भंसाली को भी लेने की बात चल रही है।

इस फिल्‍म का निर्माण करने वाली कंपनी किसी भी तरह का रिस्‍क नहीं उठाना चाहती। फिल्‍म रिलीज होने से पहले ऑफर देने की योजना है। या तो नई डिजस्‍टर ऑफ द सेंचुरी देखने के लिए टिकट खरीदें, या फिर आरजीवी की आग को ऑन डिमांग वीडियो के जरिये बुक करवाकर नि:शुल्‍क देखें।

देश की आर्थिक राजधानी मुम्‍बई के लोग अब और धंधे में घाटा बर्दाशत नहीं कर सकते, इसलिए सरकार से बातचीत कर फिल्‍म के रिलीज के मौके उन सभी चैनलों को बैन करने की सिफारिश की है, जो डिजस्‍टर ऑफ द सेंचुरी के रिलीज मौके पर आरजीवी की आग को प्रस्‍तुत नहीं करेंगे।

महंगे सितारों की लिस्‍ट में शुमार हो चुके बॉलीवुड के सुपर स्‍टार तुषार कपूर को विनोद खन्‍ना के रोल के लिए चुना गया है। उम्‍मीद है कि अमिताभ बच्‍चन वाले किरदार के लिए हैरी बावेजा के बेटे हरमन बावेजा को चांस मिल सकता है। पुरानी फिल्‍म के गीत 'रोते हुए आते है सब हँसता हुआ जो जाएगा, वोह मुकद्दर का सिकंदर  जानेमन कहलाएगा' में थोड़ा सा शब्‍दों का फेरबदल किया जाएगा।

इस फिल्‍म के लिए धन पाकिस्‍तान से जुटाया जाएगा। दरअसल, अभी अभी उनको आईएमएफ की ओर से 6.7 बिलियन डॉलर का लोन पास हुआ है। पाकिस्‍तान चाहता है कि पैसे को अच्‍छी जगह निवेश किया जाए, इससे पहले दाऊद अब्राहिम एंड सईद हाफिज कंपनी में लगाया था, लेकिन इस डील में पाकिस्‍तान को बहुत बड़ा नुकसान हुआ, क्‍यूंकि टुंडा और यासीन जैसे उत्‍पाद बनाने के लिए निवेश पाकिस्‍तान ने किया, उत्‍पाद भारत को नेपाल बेच गया। पाकिस्‍तान एक तीर से दो निशाने साधा चाह रहा है, उसको पूरा विश्‍वास है कि राम गोपाल वर्मा इस बार आग से भी दो कदम आगे की फिल्‍म बनाएंगे, जो किसी भी अमेरिकी ड्रोन से कम नहीं हो गई।

उधर, बॉक्‍स ऑफिस पर निरंतर नये रिकॉर्ड बना रही अपनी रीमेक फिल्‍मों से खुश अमिताभ बच्‍चन ने टि्वटर पर लिखा है कि 'मुझे आज अति खुशी है कि मेरी फिल्‍मों की रीमेक बड़े पर्दे पर निरंतर नये रिकॉर्ड बना रही हैं। यह उनकी गाल पर तमाचे से कम नहीं, जो मुझे यानि कि एंग्री यंगमैन को सलीम जावेद की पैदाइश कहते थे। मुझे उम्‍मीद है कि राम गोपाल वर्मा शोले की रीमेक की तरह मेरी अगली मुक्‍कदर का सिकंदर फिल्‍म का रीमेक भी यादगार बनाएंगे। अगर वो मुझे अमजद ख़ान वाले रोल में लेना चाहते तो मुझे खुशी होगी।' हालांकि इस पूरे मामले में रामगोपाल की ओर से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई, लेकिन उनके करीबी सूत्रों ने बताया कि रामगोपाल वर्मा अपने अगले एडवेंचर को लेकर बेहद उत्‍सुक हैं, वे गहनता से पुरानी फिल्‍म का अध्‍ययन कर रहे हैं, ताकि सर्जरी करने में कोई दिक्‍कत न आए।

दर्शकों को थोड़ा सा इंतजार करना होगा, क्‍यूंकि रिकॉर्ड ब्रोकन फिल्‍मों के निर्माण में थोड़ा सा वक्‍त तो लगता है। उम्‍मीद है कि आरजीवी की आग की तरह यह फिल्‍म भी लोगों के जेहन में अमिट छाप छोड़े। वरना रीमेक बुरा मान जाएगी।

कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

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देखिए 'क्रिश 3' का ट्रेलर, पढ़िए कुछ और बातें

'कोई मिल गया'से शुरू हुआ रोमांचक सफर 'क्रिश 3' तक पहुंच गया है। आधुनिक तकनीक का इस्‍तेमाल कर बॉलीवुड में बनाई जा रही फिल्‍म 'क्रिश 3'कहीं न कहीं हॉलीवुड को पीछे छोड़ने की होड़ में बॉलीवुड की ओर से बढ़ाया एक कदम लगता है। राकेश रोशन भले ही रुपहले पर्दे पर बतौर नायक अच्‍छी पारी न खेल सकें, और लेकिन बतौर निर्देशक जो उन्‍होंने बॉलीवुड को अपना हुनर दिया, बेलजवाब रहा है। 
राकेश रौशन ने बॉलीवुड में बतौर निर्देशक पहली फिल्‍म शत्रुघ्‍न सिन्‍हा और जितेंद्र को लेकर खुदगर्ज बनाई थी, जिसका बाद में रीमेक तमिल में बना, जिसमें रजनीकांत ने काम किया, हालांकि इस फिल्‍म का निर्देशन सुरेश कृष्‍णा ने किया था। इसके बाद राकेश रौशन ने दूसरी फिल्‍म का निर्देशन किया, जो हिन्‍दी इतिहास के जगत में महानतम फिल्‍मों में शामिल हुई, 'खून भरी मांग'। फिल्‍म का नाम सुनते रेखा का अभिनव आंखों के सामने जीवंत हो उठता है। रेखा के जख्‍मों को लोग आज भी नहीं भूले।

शाह रुख खान और सलमान खान की यादगार फिल्‍म 'करण अर्जुन' का निर्देशन भी राकेश रोशन ने किया था, इस फिल्‍म की कहानी, किरदार और गीत लोगों के दिमाग पर आज भी अमिट छाप छोड़े हुए हैं, आज भी अगर शाह रुख खान और सलमान खान की बात सामने आती है तो करण अर्जुन का वो गीत खुद ब खुद याद आ जाता है, ये बंधन..., कोयला, कहो न प्‍यार है, कोई मिल गया और क्रिश तक राकेश रौशन ने बॉलीवुड को बेहतरीन स्‍वयं निर्देशित फिल्‍में दी।

राकेश रौशन के अगर निर्देशन कैरियर पर नजर डालें तो पता चलता है कि राकेश रौशन ने जितनी फिल्‍मों का निर्देशन किया, उन सबके टाइटल का पहला अक्षर 'के' है, 'खुदगर्ज', 'खून भरी मांग', 'काला बाजार', 'किशन कन्‍हैया', 'खेल', 'किंग अंकल', 'करण अर्जुन', 'कोयला', 'कारोबार', 'कहो ना प्‍यार है', 'कोई मिल गया', 'क्रिश' और क्रिश 3, जो कि इस दिवाली के मौके पर रिलीज होगी।


राकेश रौशन बतौर नायक भले ही रुपहले पर्दे पर टिक न सके, सह कलाकार, विलेन किरदारों में अपना दमदार अभिनय दिखाते रहे, लेकिन अपने बेटे ऋतिक रौशन को बॉलीवुड के सबसे बड़े स्‍टारों में लाकर खड़ा कर दिया। आज ऋतिक रोशन का कद्द इतना बड़ा हो चुका है कि उनकी फिल्‍म के लिए दर्शक और सिने मालिक दोनों तैयार रहते हैं। क्रिश सीरीज से बाप बेटा बॉलीवुड को नई बुलंदियों की तरफ खींचते हुए ले जा रहे हैं, जहां पिता निर्देशन में कोई कसर नहीं छोड़ता, वैसे बेटा अपने किरदार को जीवंत करने के लिए अपनी जान तक झोंक देता है। बस दर्शक को इंतजार है। इनकी अगली फिल्‍म का, जिसका नाम है क्रिश 3, उम्‍मीद है कि पिछली फिल्‍मों की तरह यह एक सुपर डुपर हिट हो, जैसा कि बॉलीवुड बिजनस पंडित मान रहे हैं।

ऐसी फिल्‍मों के साथ एक रिस्‍क रहता है। इनकी तुलना हमेशा हॉलीवुड हाई टेक्‍नीक लैस फिल्‍मों से की जाती है, जिनका बजट करोड़ों की सीमाओं को पार करता है। फिल्‍म का प्रोमो देखने के बाद उम्‍मीद है कि फिल्‍म एक बेहतरीन फिल्‍म साबित होगी।

गोलियों की रासलीला 'रामलीला'

फिल्‍म निर्देशक एवं निर्माता संजय लीला भंसाली  की अगली फिल्‍म गोलियों की रसलीला 'रामलीला' का पोस्‍टर रिलीज हो चुका है। शेक्‍सपियर की 'रोमियो जूलियट' प्रेम कहानी आधारित एवं दीपिका - रणबीर सिंह अभिनीत फिल्‍म रामलीला 29 नवम्‍बर 2013 को सिने पर्दे पर उतरेगी। इस फिल्‍म में पहले करीना को लेने की बात चल रही थी, लेकिन अंत दीपिका पादुकोण को फाइनल किया गया। इस फिल्‍म में दीपिका पादुकोण जिस लहंगे को पहनने वाली हैं, उसका वजन तीस किलोग्राम बताया जा रहा है जबकि डिजाइनर अंजू मोदी द्वारा तैयार किए गए इस लहंगे का घेरा करीबन 50 मीटर है।

सुभाष की खोज मिष्‍टी बनेगी कांची

सपना रीना रॉय कालीचरण, टीना टीना मुनीम कर्ज, राधा मिनाक्षी हीरो, राधा माधुरी दीक्षित रामलखन, राधा मनीषा कोईराला सौदागर, गंगा माधुरी दीक्षित खलनायक, गंगा महिमा चौधरी परदेस, मानसी, एश्‍वर्या ताल, ईशा करीना कपूर यादें, लक्ष्‍मी ईशा कृष्‍णा, अनुशका कैटरीना कैफ युवराज के बाद अब सुभाष घई दर्शकों को अपनी नई खोज कांची से मिलाने जा रहे हैं। कांची के लिए उन्‍होंने काफी लड़कियों के ऑडिशन लिए और अंत अपनी खोज को संपूर्ण किया।

मगर इत्‍तेफाक देखिए, सुभाष घई एक बार फिर से एम फेक्‍टर को अजमाने जा रहे हैं। जी हां, सुभाष घई की फिल्‍मों की ज्‍यादातर नायिकाओं के नाम एम से शुरू होते हैं, एम फेक्‍टर उनके लिए बेहद लक्‍की रहा है। कुछ फिल्‍मों में उन्‍होंने एम फेक्‍टर को भुला दिया था, मगर वो फिल्‍में बॉक्‍स ऑफिस पर पिट गई। यादें, कृष्‍णा एवं युवराज ऐसी फ्लॉप फिल्‍में हैं, जिनमें एम फेक्‍टर नहीं था, इसलिए शायद कांची के लिए उन्‍होंने मिष्‍टी को ढूंढ़कर एक बार फिर से एम फेक्‍टर को अजमाने की कोशिश की है। देखते हैं राधा गंगा से कितने कदम आगे निकल पाती है सुभाष की कांची। इस नयी लड़की नाम मिष्टी है। वह मूल रूप से कोलकाता की रहने वाली है।

मिष्‍टी की यह पहली फिल्‍म होगी, क्‍यूंकि अब तक उसने किसी फिल्म में भी काम नहीं किया। मिष्‍टी तक पहुंचने के लिए सुभाष घई को चार सौ लड़कियों के ऑडिशन लेने पड़े। मिष्टी का चयन इन चार सौ लड़कियों के बीच में से हुआ। नीली आंखों और घुंघराले बालों वाली यह लड़की सुभाष घई की फिल्म 'कांची' की नायिका बनेगी। इस फिल्म के लिए अभिनेता ऋषि कपूर और मिथुन चक्रवर्ती को पहले ही साइन किया जा चुका है। इस फिल्म में हीरो के रूप में कार्तिक तिवारी को साइन किया जा सकता है।

सुभाष घई अपनी फिल्मों में एक नयी लड़की को लांच करने के लिए जाने जाते हैं। माधुरी दीक्षित, मनीषा कोईराला, महिमा चौधरी, मीनाक्षी शेषाद्री और ईशा शेरवानी जैसी नायिकाओं को सुभाष घई ने ही अपनी फिल्मों से डेब्‍यू करवाया था। मुक्‍ता आर्ट्स ने कांची का प्रमोशन गत वर्ष 14 अगस्‍त से शुरू कर दिया था, मगर यह फिल्‍म इस साल 15 अगस्‍त को रिलीज होगी। उम्‍मीद है कि शोमैन जोरदार वापसी करेंगे।

मीडिया की सुर्खियों में मुम्‍बई की सनमीत

बिहार के सुशील कुमार के बाद मुम्‍बई की सनमीत कौन साहनी ने पांच करोड़ रुपए जीतकर मीडिया में सुर्खियां बटोर ली है। खासकर सनमीत कौर साहनी ने यह ईनाम राशि उस वक्‍त जीती है, जब पूरा मीडिया महिलामय हो चुका है। ऐसे में सनमीत कौर साहनी को सुर्खियां मिलना लाजमी है।

बीबीसी हिन्‍दी ने इस ख़बर को 'केबीसी: 12वीं पास महिला ने जीते पाँच करोड़' हैंडलाइन के साथ प्रकाशित किया है। शायद मीडिया को लगता है कि सामान्‍य ज्ञान  केवल बड़े बड़े डिग्री होल्‍डर के पास है, तभी तो मीडिया हैंडिंग हैरतजनक बनाया, 12वीं पास महिला ने पांच करोड़ जीत लिए, इस ख़बर के अंदर बताया गया है कि सनमीत कौर साहनी बच्‍चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं।

वहीं मुम्‍बई के प्रसिद्ध समाचार पत्र मिड डे ने इस ख़बर को 'वूमैन विन्‍स पांच करोड़ ऑन केबीसी' के टाइटल तले प्रकाशित की। इस टाइटल को पढ़ने के बाद उम्‍मीद है कि पुरुष थोड़ा सा शर्मिंदा होंगे, और तपाक मुंह से निकलेगा 'महिला ने जीते पांच करोड़'। अगर गम्‍भीरता से देखा जाए तो यह हैंडिंग भी अचकितवाचक लगता है। इतना ही नहीं, मुम्‍बई वासियों को खुश करने के लिए वुमैन के आगे मुम्‍बई भी लगा दिया गया है, सब हैंडिंग तो देखिए जनाब। शी इज ए हाऊसवाइफ, हू रेजिडेज इन मुम्‍बई। प्‍वाइंट नोट करने लायक है। पति अपनी पत्‍नि को ताना मार सकते हैं, देखो वो गृहिणी है, जिसने पांच करोड़ जीते।

सुशील के बाद सनमीत ने जीते पांच करोड़, अमर उजाला ने ख़बर की तरह पेश किया, कोई हलचल नहीं। शायद अमर उजाला वाले सोचते हैं, जीत के लिए खेल रही थी, तो जीतना लाजमी था। वहीं एबीपी न्‍यूज ने लिखा, केबीसी में महिला ने रचा इतिहास, जीते पांच करोड़। इस टाइटल को हम मान सकते हैं, बिल्‍कुल स्‍टीक है, अगर पहले किसी महिला प्रतिभागी ने यह उपलब्‍िध हासिल नहीं की। दैनिक जागरण ने भी अमर उजाला की तरह साधारण टाइटल केबीसी में सनमीत ने जीते पांच करोड़ के साथ ख़बर को प्रस्‍तुत किया। ख़बर एनडीटीवी ने लिखा, सनमीत ने केबीसी में जीते पांच करोड़।

चलते चलते। सभी मीडिया हाऊसों ने इस ख़बर को ब्रेकिंग न्‍यूज की तरह लिया, ब्रेकिंग न्‍यूज में गलतियां होना स्‍वाभविक है, वैसा ही इस ख़बर में भी हुआ, किसी ने उसको सुरमीत लिखा तो किसी ने सनमीत। अंत शायद उसका नाम सनमीत कौर साहनी है, वो मुम्‍बई की रहनी वाली है। शैक्षणिक योग्‍यता की बात करें तो पांच करोड़ उनकी झोली में पहुंच चुका है। आदमी शिक्षा दो चीजों के लिए हासिल करता है, नौकरी के लिए और जिन्‍दगी जीने के सही तौर तरीकों सीखने के लिए। फिलहाल सनमीत कौर ने दो मैदानों में अपना लोहा मनवा लिया।

डिस्‍कलेमर- घर जाकर पत्‍नि पर टौंट मत कसिएगा, देखो उसने पांच करोड़ जीते महिला होकर, क्‍यूंकि मुंह की खानी पड़ेगी प्‍यारे इससे पहले सुशील कुमार भी जीत चुके हैं।

कमल हसन का नया फंडा

सिने यात्रियों से अपील है कि लिएंडर पेस द्वारा चलाई जा रही राजधानी एक्‍सप्रेस में यात्रा करना बेहद घातक सिद्ध हो सकता है। अगर सिने यात्री इस वीएंड पर कहीं समय बतीत करना चाहते हैं तो उनके लिए परेश रावल एवं रंजीव खंडेलवाल का टेबल नम्‍बर 21 सुविधा जनक साबित हो सकता है।

और अगले हफ्ते पर्दे पर विश्‍वरूपम लेकर कमल हसन हाजिर हो रहे हैं। मगर वो इस बार नया तुजुर्बा करने जा रहे हैं। इस फिल्‍म को रिलीज करने से पूर्व इस फिल्‍म को डिश टीवी के बैनर तले प्रसारित किया जाएगा। यह अपने आप में एक नया तुजुर्बा है। कमल हसन मानते हैं कि ऐसा करने से नकली सीडी एवं डीवीडी बाजार पर नकेल कसी जा सकती है, हालांकि कमल हसन के इस प्रयोग से सिनेमा मालिक थोड़ा सा दुखी हैं। मगर कमल कहते हैं कि जो उनके असली दीवाने हैं, वो सिनेमा घरों में दस्‍तक देंगे।

5 जनवरी, 2013 तक बुक कराने वाले ग्राहक ‘विश्‍वरूपम’ का तमिल संस्करण 1000 रु में देख सकते हैं जबकि इसके बाद के ऑर्डर पर, सिंगल शो के लिए 1200 रु खर्च करने होंगे। हिंदी और तेलुगू संस्करणों का खर्च 500 रु है। ऐसा पहली बार होगा कि सिने प्रेमियों को नई मूवी देखने के लिए सिनेमा घर तक जाने की तकलीफ नहीं उठानी पड़ेगी।

तमिलनाडू फिल्‍म डिस्‍ट्रीब्‍यूटर्स एसोसिएशन ने कमल हसन के इस फैसले का पुरजोर विरोध करते हुए चेताया है कि अगर वो ऐसा करेंगे तो उनकी फिल्‍म को रिलीज नहीं किया जाएगा। इसके अलावा तामिलनाडू में मुस्‍लिम सुमदाय ने कमल हसन का विरोध करना शुरू कर दिया, उनका मानना है कि कमल हसन की इस फिल्‍म से मुस्‍लिमों की छवि समाज में बिगड़ सकती है।

चैन्‍ने एक्‍सप्रेस की पहली झलक

जब तक है जान के बाद 2013 में चैन्‍ने एक्‍सप्रेस में नजर आएंगे शाहरुख ख़ान। उनका साथ नजर आएंगी ओम शांति ओम गर्ल दीपिका पादुकोण। नव वर्ष के मौके पर रोहित शेट्टी द्वारा निर्देशित फिल्‍म चैन्‍ने एक्‍सप्रेस का पोस्‍टर रिलीज कर दिया। इस फिल्‍म में मुख्‍य भूमिका निभाने वाले शाहरुख ख़ान मुम्‍बई से रामेशेवरम की यात्रा करते हुए नजर आएंगे। इस दौरान कई घटनाएं घटित होंगी, जिनके जरिए रोहित शेट्टी शायद दर्शकों हंसाने में कामयाब होंगे। अब तक अजय देवगन के साथ नजर आने वाले रोहित शेट्टी शाहरुख खान के साथ नजर आएंगे, बतौर निर्देशक।



'इंकार' के लिए दो करोड़ सर्वे पर खर्च

-: वाईआरएन सर्विस :-

दिल्‍ली गैंगरेप की घटना से उभरकर जब हम 2013 में नए संकल्‍पों के साथ कदम आगे बढ़ा रहे होंगे, तभी हम सुधीर मिश्रा की अगली फिल्‍म 'इंकार' से टकराएंगे, जो कॉर्पोरेट्स ऑफिसों में होने वाले यौन शोषण को जग जाहिर करेगी।

अगर सूत्रों की मानने तो जिस विषय पर इस फिल्‍म को बनाया गया है, उसे विषय से संबंधित हकीकत जानने के लिए वाय कॉम 18 ने करीबन दो करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

वाय कॉम 18 ने चंडीगढ़, दिल्‍ली, बैंगलोर, मुम्‍बई, पूने एवं कोलकत्‍ता जैसे बड़े महानगरों में स्‍थित कार्योलयों के भीतर विपरित लिंग सह कर्मी के साथ किस तरह का व्‍यवहार होता है, जैसे विषय पर सर्वे करवाया, जिस पर करीबन दो करोड़ रुपए खर्च आए हैं।

गौरतलब है कि सुधीर मिश्रा की निर्देशित फिल्‍म इंकार का निर्माण वॉय कॉम 18 मोशन पिक्‍चर्स द्वारा किया जा रहा है, जिसमें अर्जुन रामपाल एवं चित्रांग्‍दा सिंह मुख्‍य भूमिका निभाते नजर आएंगे।

यो यो हनी सिंह का विरोध

-: वाईआरएन सर्विस :-

दिल्‍ली से सटे गुड़गांव में होगा यो यो हनी सिंह का प्रोग्राम। यो यो हनी सिंह अपने अश्‍लील गायन के चलते अक्‍सर आलोचकों के निशाने पर रहे हैं। अब लेखक कल्‍पना मिश्र ने उनके अश्‍लील गीतों का विरोध करते हुए गुड़गांव में होने वाले प्रोग्राम को रोकने के लिए संबंधित होटल को पत्र लिखा है, मगर उक्‍त पत्र के बावजूद उक्‍त प्रोग्राम पहले से तय किए समय एवं स्‍थल पर होगा।

प्रोग्राम संबंधी जब आयोजकों से संपर्क किया गया तो सामने से बात कहते हुए एक महिला आयोजक ने कहा, इस प्रोग्राम को रद्द नहीं किया गया एवं यह प्रोग्राम अपने निर्धारित समय पर होगा।

जहां एक तरफ यो यो हनी सिंह के अश्‍लील गीतों को यू ट्यूब पर प्रसारित किया जा रहा है, जिनमें बलात्‍कारी एवं पटियाला सलवार शामिल हैं, जो बेहद अश्‍लील भाषा में लिखे गए हैं, वहीं दूसरी तरफ यो यो हनी सिंह अपने टि्वटर खाते पर दिल्‍ली गैंगरेप को लेकर अफसोस जाहिर कर रहे हैं।

यो यो हनी सिंह के कभी सबसे ज्‍यादा नजदीक रहे गायक जस्‍सी जसराज, आज हनी सिंह का सबसे बड़ा विरोधी हैं, क्‍यूंकि यो यो हनी सिंह ने पैसे कमाने के चक्‍कर में पंजाबी संगीत को दल दल की तरफ धकेल दिया। पंजाब में जितना नकारात्‍मक लेखन हनी सिंह के बारे में हुआ, शायद ही किसी गायक के हिस्‍से आया हो।

इससे पूर्व दिल्‍ली के एक हिन्‍दी दैनिक ने भी यो यो हनी सिंह पर अश्‍लील गीतों को लेकर एक टिप्‍पणी की थी, मगर अभी तक इस मामले में हनी सिंह की ओर से कोई टिप्‍पणी नहीं की गई।

ऑस्‍कर से 42वीं भारतीय फिल्‍म रिजेक्‍टेड

-: वाईआरएन सर्विस :-

बॉक्‍स ऑफिस पर सौ करोड़ रुपए से अधिक कलेक्‍शन करने वाली एवं समीक्षकों के मुंह से वाह वाही लूटने वाली रणबीर कपूर एवं प्रियंका चोपड़ा अभिनीत फिल्‍म ऑस्‍कर की दौड़ में शामिल नहीं हो सकी। भारत द्वारा ऑस्‍कर के लिए भेजी गई 45 फिल्‍मों में से केवल तीन को ऑस्‍कर के लिए नॉमिनेट किया गया, बाकी सब फिल्‍मों के लिए भारत को न सुनने को मिली।

भारत ने ऑस्‍कर की ''उत्‍तम फिल्‍म विदेश भाषा'' श्रेणी के लिए पहली बार मदर इंडिया को 1957 में भेजा गया, जो ऑस्‍कर के लिए नामित हुई एवं अंत एक इटालियन फिल्‍म ले नॉटी दी कैबीरिया से केवल एक वोट के अंतर से हारी।

इसके बाद भारत इस पुरस्‍कार के लिए किसी साल फिल्‍म भेजता और किसी साल न भेजता। यह सिलसिला करीबन 1984 तक चला। इसके बाद केवल 2003 को छोड़कर भारत ऑस्‍कर पुरस्‍कार के लिए निरंतर फिल्‍में भेज रहा है।

भारत अब तक इस पुरस्‍कार के लिए करीबन 45 फिल्‍में भेजा चुका है, जिसमें 30 हिन्‍दी फिल्‍में हैं, बाकी अन्‍य क्षेत्रिय भाषाओं से चुनी गई फिल्‍में हैं। अगर हिन्‍दी सिनेमा की बात करें तो सुनील दत्‍त व आमिर ख़ान ऐसे सितारे हैं, जिनकी सबसे अधिक फिल्‍में ऑस्‍कर के लिए भेजी गई, लेकिन दोनों सितारों की केवल एक-एक फिल्‍म को ऑस्‍कर ने स्‍वीकार किया, जिसमें सुनील दत्‍त की मदर इंडिया और आमिर ख़ान की लगान। ज्ञात रहे कि आमिर ख़ान की चार एवं सुनील दत्‍त की तीन फिल्‍में ऑस्‍कर के लिए भेजी गई थीं।

बर्फी के रणबीर कपूर से पहले उनके पिता ऋषि कपूर भी सागर एवं हीना फिल्‍म के लिए ऑस्‍कर की दौड़ में शामिल होते होते दो बार रह चुके हैं।

अब तक भारत की ओर से भेजी गई हिन्‍दी फिल्‍में - सुनील दत्‍त की मदर इंडिया, अमरपाली व रेशमा और शेरा, दिलीप कुमार की मधुमति, गुरू दत्‍त की बीवी साहेब और गुलाम, देव आनंद की गाइड, जया बच्‍चन की उपहार, अमिताभ बच्‍चन की सौदागर व एकलव्‍य, स्‍मिता पाटिल की मंथन, संजीव कुमार की सतरंज के खिलाड़ी, राजेश खन्‍ना की आख़िरी ख़त, धर्मेंद्र की मझली दीदी, अनुपम खेर की सारांश, ऋषि कपूर की सागर व हीना, अनिल कपूर-जैकी श्रॉफ की परिंदा, डिम्‍पल कपाडिया की रूदाली, सीमा बिश्‍वास की बैंडिट क्‍वीन, आमिर ख़ान की अर्थ, लगान, रंग दे बंसती, तारे जमीं पर, कमल हसन की हे राम, शाहरुख की देवदास व पहेली।

जो तीन नॉमित हुई, लेकिन विजय नहीं, उनमें शामिल हैं मदर इंडिया, सलाम बॉम्‍बे और लगान।

बर्फी के बाहर होने के बाद ऑस्‍ट्रिया की अमोर, कनाडा की वर विच, चाइल की नो, डेनमॉर्क की ए रॉयल अफेयर, फ्रांस की द इनटॉचेबल, आइलैंड की द डीप, नॉर्वे की कोन टिकी, रोमानिया की बेयोंड द हिल्‍स, स्‍विस की सिस्‍टर दौड़ में शामिल हैं। इनमें से भी फिल्‍मों को शॉर्टलिस्‍ट किया जाएगा एवं अंतिम पांच की घोषणा दस जनवरी को की जाएगी।

'दबंग 2' से हुआ 'कैपरी सिनेमा' का पुन:उदय

-: वाईआरएन सर्विस :-
 
जहां पूरा विश्‍व 21 दिसम्‍बर 2012 को खत्‍म होने वाला था, वहीं राख़ हो चुके कैपरी सिनेमा हाल का दबंग 2 से 21 दिसम्‍बर को फिर उदय हुआ। कराची का सबसे सिंगल स्‍क्रीन लोकप्रिय कैपरी सिनेमा 21 सितम्‍बर को कुछ शरारती तत्‍वों द्वारा जला दिया गया था। इसके अलावा सात अन्‍य सिनेमाओं को भी निशाना बनाया गया था, जिसमें से पांच सिनेमा हाल कराची के थे, जबकि अन्‍य तीन पेशावर के।

सिने प्रेमियों की जरूरत को देखते हुए इस सिनेमा हाल को फिर से पुन:जीवित करने का फैसला किया गया। पहले उम्‍मीद थी कि यह सिनेमा सात दिसम्‍बर को शुरू हो जाएगा, और दर्शक खिलाड़ी 786 देख पाएंगे। मगर ऐसा हो न सका, अंत यह सिनेमा 21 दिसम्‍बर से पहले फिर बनकर तैयार हो गया, और इस की फिर शुरूआत सलमान ख़ान की बहुत चर्चित फिल्‍म दबंग 2 से की गई।

इस फिल्‍म को देखने के लिए दर्शकों की बेहद भीड़ सिनेमा हाल के बाहर देखी गई। पूरी सुरक्षा व्‍यवस्‍था के बीच सिनेमा हाल का पुन:संचालन किया गया है। इस सिनेमा हाल के मालिक ने पाकिस्‍तान समाचार पत्र द डान से बातचीत करते हुए कहा, उनको पूरी उम्‍मीद है कि दबंग 2 सप्‍ताह भर हाऊसफुल बिजनस देगी।

उधर, सिने प्रेमियों में भी खुशी की लहर है कि आख़िर तीन महीनों बाद ही सही, उनका प्रिय सिनेमा कैपरी फिर से शुरू तो हुआ।

बॉलीवुड रिपोर्ट बनाम बॉक्‍स ऑफिस 2012

इंडिया में दो चीजें बेहद पापुलर हैं एक क्रिकेट और दूसरा मूवीज। दोनों को देखने के लिए भारतीय दर्शक उतावले रहते हैं। सलमान ख़ान की दबंग 2 के साथ बॉलीवुड 2012 के बही ख़ाते को बंद करने जा रहा है। साल 2012 में रिलीज हुई फिल्‍मों में सलमान ख़ान की 'एक था टाइगर' बॉलीवुड में सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्‍मों में शुमार है एवं पहले दिन बॉक्‍स ऑफिस 32 करोड़ रुपए एकत्र करने का रिकॉर्ड भी इसी के नाम दर्ज हुआ, लेकिन पूरे साल भर की एकत्र राशि करने में अक्षय कुमार सबसे आगे रहे क्‍यूंकि अक्षय कुमार ने इस साल फिल्‍म निर्माताओं को चार सौ करोड़ से भी अधिक रुपयों का कलेक्‍शन करके दिया।

अक्षय कुमार, सलमान ख़ान के अलावा इस साल बॉक्‍स ऑफिस पर गंभीर दिखने वाले अजय देवगन ने भी काफी धमाल मचाई। अजय देवगन की बोल बच्‍चन ने जहां 100 करोड़ के क्‍लब में एंट्री मारी, वहीं सन ऑफ सरदार सौ करोड़ से कुछ कदम पीछे ठहर गई, लेकिन फिर भी यह फिल्‍म भारतीय सर्वाधिक कलेक्‍शन करने वाली फिल्‍मों की टॉप टेन सीरिज में है।

इस साल रिलीज हुई शाहरुख़ ख़ान की जब तक है जान ने बॉक्‍स ऑफिस पर सौ करोड़ से अधिक कलेक्‍शन की, लेकिन उतना जादू न दिखा सकी, जितने की इस फिल्‍म से उम्‍मीद थी। कुछ ऐसा ही हश्र हुआ, आमिर ख़ान की तलाश का भी। पिछले साल रॉकस्‍टार बनकर बॉक्‍स ऑफिस पर धूम मचाने देने वाले रणबीर कपूर ने बर्फी के जरिए जहां सिने खिड़की पर अच्‍छी कलेक्‍शन की, वहीं समीक्षकों से भी काफी वाहवाही लूटी। कुछ ऐसा ही हुआ, ऋतिक रोशन के साथ, जो इस साल फिल्‍म अग्‍निपथ में नजर आए। सिने खिड़की पर दर्शक भी मिले, और समीक्षकों ने भी खूब सराहा।

इस साल कुछ ऐसी फिल्‍में भी रिलीज हुई, जिन्‍होंने सौ करोड़ तो नहीं कमाया, लेकिन दर्शकों को वाह वाह कहने पर मजबूर कर दिया। इनमें सबसे ऊपर है, ओह माय गॉड, पान सिंह तोमर, कहानी, विक्‍की डॉनर,  इश्‍कजादे, इंग्‍लिश विंग्‍लिश आदि।

कुछ ऐसी फिल्‍में थी, जिन्‍होंने बॉक्‍स ऑफिस दर्शकों को खींचा, और धन कमाया। इन फिल्‍मों में तलाश, खिलाड़ी 786, कॉकटेल, गैंग्‍स वासेपुर, जन्‍नत, क्‍या सुपर कूल हैं हम, राज 3, स्‍टूडेंट ऑफ द ईयर, रिटर्न इविल 1920, जन्‍नत टू एवं तेरे नाम लव हो गया आदि शामिल हैं।

कुछ ऐसी फिल्‍में थी, जिन्‍होंने दर्शकों के अंदर जिज्ञासा तो जगाई, लेकिन दर्शकों संतुष्‍ट नहीं कर पाईं। इन फिल्‍मों में प्‍लेयर्स, तेज, विनोद एजेंट, लंडन पेरिस न्‍यूयार्क, ब्‍लड मनी, बिट्टू बॉस, डेंजर्स इशक, डिपार्टमेंट, तेरी मेरी कहानी, जिस्‍म 2, जोकर, हीरोइन, कमाल धमाल मालामाल, चक्रव्‍यूह, भूत रिटर्नस आदि शामिल हैं।

सौ करोड़ से अधिक कमाने वाली फिल्‍मों में सबसे ऊपर सलमान ख़ान की एक था टाइगर, दूसरे नम्‍बर अक्षय कुमार की राउड़ी राठौड़, तीसरे पर ऋतिक रोशन की अग्‍निपथ, चौथे पर अक्षय कुमार की हाऊस फुल 2, पांचवें नम्‍बर पर रणबीर कपूर की बर्फी, छठे नम्‍बर पर शाहरुख ख़ान की जब तक है जान, सातवें नम्‍बर पर आज देवगन की बोल बच्‍चन है।

चलेगी सलमान ख़ान की दबंगिरी

-: वाईआरएन सर्विस :-
इस साल की मेगा बजट एवं अंतिम फिल्‍म दबंग 2 बॉक्‍स ऑफिस पर इतिहास बनाने में सफल रहेगी। बॉलीवुड पर निगाह रखने वाले जी-ईटीसी बॉलीवुड ने अपने टि्वटर खाते पर लिखा है कि पूरे भारत में इस फिल्‍म के शाम के शो पूरी तरह पहले से हाऊसफुल हैं, इतना ही नहीं सलमान ख़ान की लोकप्रियता को देखते हुए सिनेमा मालिकों ने टिकटों रेटों में भी इजाफा किया है। एक था टाइगर के वक्‍त भी ऐसा ही हुआ था।

फिल्‍म दबंग टू की फिल्‍म समीक्षा को लेकर सभी फिल्‍म समीक्षक अलग अलग राय रखते हैं, लेकिन सलमान ख़ान की उपस्‍थिति होने के कारण फिल्‍म के हिट होने की गारंटी जरूर दे रहे हैं। हिन्‍दी वेबदुनिया के फिल्‍म समीक्षक समय ताम्रकर एक जगह लिखते हैं, 'दबंग 2 एक तरह से दबंग का ही रीमेक है। इसमें नया कुछ नहीं है। दरअसल यह फिल्म उन लोगों के लिए है जिन्हें चुलबुल की चुलबुली हरकतें पसंद हैं'। सोनाक्षी सिन्‍हा के बारे में लिखते हैं कि चुलबुल की बुलबुल सोनाक्षी सिन्हा बीच-बीच में कपड़े सुखाती रहती हैं, जिससे पता चलता रहता है कि वे भी फिल्म में हैं।

एनडीटीवी ख़बर पर प्रशांत सिसोदिया फिल्‍म की समीक्षा करते हुए लिखते हैं कि शुरू के करीब 15 मिनट की फिल्म देखकर लगा कि बॉलीवुड में भी एक रजनीकांत का जन्म हो गया है, यानी सलमान खान, जिन्हें दर्शक किसी भी रूप में पसंद करते हैं और उनके लिए तालियां और सीटियां बजाते हैं, पर यह कहना जरूरी है कि फिल्म सिर्फ और सिर्फ सलमान खान की है। कहानी में कोई नयापन नहीं है। गाने अच्छे हैं, लेकिन कहानी के साथ पिरोए नहीं गए। हालांकि जितने अच्छे डायलॉग 'दबंग' के थे, उतने 'दबंग-2' के नहीं हैं। हां, चुलबुल पांडे के किरदार को थोड़ा और तराशा गया है। चुलबुल और उनके पिता बने विनोद के साथ कुछ अच्छे सीन्स और खूबसूरत लम्हे दिखाए गए हैं।

हिन्‍दी डॉट इन डॉट कॉम पर फिल्‍म की समीक्षा करते हुए लिखते हैं कि कुछ छोटी बातों को छोड़ दें तो यह फिल्म काफी मनोरंजक है और पांडे जी मल्टीप्लेक्स में काफी सीटी बटोरेंगे। ‘दबंग 2’ आपको कहीं भी बोर नहीं होने देती, पर अपने पहले भाग के बराबर नहीं कही जा सकती।

युवा रॉक्‍स व्‍यू - एक था टाइगर में कुछ नहीं था, फिर भी दो सौ करोड़ से ऊपर की कमाई करने में सफल रही, यह तो फिर भी सलमान की कॉमेडी कम एक्‍शन फिल्‍म है, जिस पर पैसे खर्च करने के बाद दर्शक ज्‍यादा नहीं तो यह तो कहेंगे पैसा वसूल।

उधर, फिल्‍म निर्देशक कुणाल कोहली अपने टि्वटर खाते पर लिखते हैं कि हॉलीवुड हेज स्‍पाइडरमैन, सुपरमैन, बट बॉलीवुड हेज सलमान। कुल मिलाकर कहें तो सलमान ख़ान के साथ किस्‍मत है, और जिसके साथ किस्‍मत है, वो किसी को भी मात दे सकता है।

स्‍पेशल छब्‍बीस के प्रमोशन का नया फंडा

-: वाईआरएन सर्विस :-

कुछ दिनों पहले आप ने कुछ अख़बारों में पढ़ा होगा कि एक एमएलए के घर पर फेक सीबीआई रेड, दरअसल यह समाचार नहीं बल्‍कि प्रमोशन का नया फंडा था।

इस नए फंडे को ईजाद करने वाले अक्षय कुमार हैं। जी हां, अक्षय कुमार ने अपनी अगली फिल्‍म 'स्‍पेशल छब्‍बीस' के प्रमोशन के लिए स्‍पेशल फंडा निकाला है। इस फंडे के कारण 'स्‍पेशल छब्‍बीस' को प्रमोशन मिल रहा है, जिसे ए वेडनेस डे फेम नीरज पांडे निर्देशित कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, अक्षय कुमार की अगली फिल्‍म स्‍पेशल छब्‍बीस का प्रोमो आपको दबंग टू फिल्‍म के साथ मुफ्त देखने को मिल सकता है, क्‍यूंकि फिल्‍म यूनिट इसको इस फिल्‍म के साथ रिलीज करने का मन बना रही है।

इस फिल्‍म में अक्षय कुमार के साथ जिम्‍मी शेरगिल, मनोज वाजपेयी और अनुपम खेर मुख्य भूमिका में नज़र आएंगे।

कुत्‍ते की मौत से सदमे में आस्‍ट्रेलियन

-:वाईआरएन सर्विस:-

2011 में रिलीज हुई रेड डॉग फिल्‍म में मुख्‍य भूमिका निभाने वाले कुत्‍ते 'कोको' की कल पर्थ स्‍थित एक डॉग्‍स हाउस में दिल की बीमारी के कारण मौत हो गई। सूत्रों के अनुसार 'कोको' की उम्र सात साल के करीब थी। उनकी मौत की ख़बर ने उनके चाहने वालों को गहरा झटका दिया। उनकी मौत के बाद पर्थ डॉग्‍स रिफ्यूजी हाउस को करीबन 70 से अधिक लोगों ने अनुदान राशि भेजी, जिसकी कुल राशि 2000 डॉलर से ऊपर आंकी जा रही है।

रेड डॉग फिल्‍म बेहद प्रसिद्ध नॉवेल 'ल्‍यूस दे बर्निर्स' पर आधारित थी। इस फिल्‍म ने बॉक्‍स ऑफिस पर जोरदार सफलता आर्जित की थी। यह आस्‍ट्रेलियन फिल्‍मों में आठ नम्‍बर की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्‍मों में दर्ज हुई। इस फिल्‍म को देखने वाले कोको को फिल्‍म का नायक मानते थे। कोको की मौत से जहां सिने प्रेमियों को दुख हुआ, वहीं इस फिल्‍म के निर्माता नेलसन वाश बेहद दुखी हैं।

पश्‍िचमी आस्‍ट्रेलियाई कुत्‍ता शरणार्थी घर के प्रमुख करेन रहॉडेस का कहना है कि उनके पास काफी सारे कॉल आ रहे हैं, 70 से अधिक दान कॉल आ चुके हैं, लोग कोको की मौत से बेहद दुखी हैं। सब कोको को दुखी मन से श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

'विक्‍की डॉनर' की तो निकल पड़ी

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'विक्‍की डॉनर' से सिने खिड़की पर जोरदार एंट्री मारने वाले अयुशमन खुराना को यशराज बैनर्स ने अपनी अगली फिल्‍म के लिए साइन किया है। इस फिल्‍म में उनके साथ काम करती नजर आएंगी सोनम कपूर, जिनकी दो फिल्‍में अगले साल निरंतर रिलीज होने वाली हैं, जिनमें भाग मिल्‍खा भाग एवं रांझना शामिल हैं।

'विक्‍की डॉनर' की सफलता के बाद अयुशमन खुराना को जहां रोहन सिप्‍पी ने अपनी अगली फिल्‍म नौटंकी साला के लिए साइन किया था, वहीं फिर से जॉन अब्राहिम ने उनको अपने अगले प्रोजेक्‍ट 'हमारा बजाज' के लिए साइन किया। इस अयुशमन खुराना के साथ यमी गौतम भी नजर आएंगी।

अयुशमन के पास दो फिल्‍मों के अलावा अब यशराज बैनर्स की फिल्‍म भी आ चुकी है। इस फिल्‍म का निर्देशन कार्य मुझसे फ्रेंडशिप करोगे फेम नुपुर अस्‍थाना के हाथों में है, जबकि पटकथा इश्‍कजादे फेम हबीब फैजल लिख रहे हैं।