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वो मासूम सी लड़की

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वो मासूम सी लड़की मुझसे जुदा हो जाए।
बस ख्वाबों में आए, और खुदा हो जाए।

मैं ही जानता हूं पागल दिल को संभाला है कैसे।
उनकी चाहत को बच्चों की तरह पाला है कैसे।

कभी सूखा पड़ा तो कभी बाढ़ आई
हौंसले ​गिराने आफत हर बार आई

हा​लत देखकर आशिकों की अब मैं, हैप्पी यूं ही परेशान नहीं होता
पता है मुझे, किसी की याद में डूबकर उभरना आसान नहीं होता

आओ हंसते हुए मिलने की, दुश्मनों पर मेहरबानी करते हैं।
चलो आज हैप्पी, हम भी कुछ तूफानी करते हैं।

बंद कमरों में रोना बंद कर ​दिया, क्यूंकि नीर ए अश्क फर्श सोखता नहीं,
हैप्पी अगर जमीं पीती अश्क मेरे, तो आंखों से बहता दरिया मैं रोकता नहीं

मजबूर हूं, वरना मैं देश बदल देता।

माता पिता के ख्‍वाबों का जिम्‍मा है
मेरे महबूब के गुलाबों का जिम्‍मा है

मजबूर हूं, वरना मैं देश बदल देता।

जॉब से छुट्टी नहीं मिलती विद पे
ऐसे उलझे भैया क्‍या नाइट क्‍या डे

मजबूर हूं, वरना मैं देश बदल देता।

भगत सिंह की है जरूरत बेहोशी को
मगर यह सपूत देना मेरे पड़ोसी को

मजबूर हूं, वरना मैं देश बदल देता।

क्रांति आएगी, लिखता हूं यह सोचकर
वो भी भूल जाते हैं एक दफा पढ़कर

मजबूर हूं, वरना मैं देश बदल देता।

अन्‍ना हो रामदेव हो लताड़े जाएंगे
मैडलों के लिए बेगुनाह मारे जाएंगे

मजबूर हूं, वरना मैं देश बदल देता।

वरना, रहने दे लिखने को

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तुम्हें बिकना है, यहाँ टिकना है, तो दर्द से दिल लगा ले दर्द की ज्योत जगा ले लिख डाल दुनिया का दर्द, बढ़ा चढ़ाकर रख दे हर हँसती आँख रुलाकर हर तमाशबीन, दर्द देखने को उतावला है बात खुशी की करता तू, तू तो बावला है मुकेश, शिव, राजकपूर हैं देन दर्द की दर्द है दवा असफलता जैसे मर्ज की साहित्य भरा दर्द से, यहाँ मकबूल है बाकी सब तो बस धूल ही धूल है, संवेदना के समुद्र में डूबना होगा, गम का माथा तुम्हें चूमना होगा, बिकेगा तू भी गली बाजार दर्द है सफलता का हथियार सच कह रहा हूँ हैप्पी यार माँ की आँख से आँसू टपका, शब्दों में बेबस का दर्द दिखा रक्तरंजित कोई मंजर दिखा खून से सना खंजर दिखा दफन है तो उखाड़, आज कोई पंजर दिखा प्रेयसी का बिरह दिखा, होती घरों में पति पत्नि की जिरह दिखा हँसी का मोल सिर्फ दो आने, दर्द के लिए मिलेंगे बारह आने फिर क्यूं करे बहाने, लिखना है तो लिख दर्द जमाने का वरना, रहने दे लिखने को