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विश्‍व की सबसे बड़ी दस कंपनियां

हम सब ग्‍लोबल इकोनॉमी में रहते हैं। 1962 में कानेडियन दार्शनिक मार्शल मैकलुहान अपनी परिभाषा को 'ग्‍लोबल विलेज' के साथ आगे बढ़े। उन्‍होंने अपनी किताब में इस बात पर प्रकाश डाला कि किस तरह ग्‍लोबल और एक गांव के बीच संबंध स्‍थापित हो रहा है, एक इलेक्‍ट्रोनिक तकनीकी के कारण और जानकारी के तात्कालिक आंदोलन के कारण हर तिमाही पर हर जगह से एक ही समय पर सूचना उपलब्‍ध हो जाती है। इंटरनेट ने हमारे सोचने और सूचना प्राप्‍त करने का तरीका बदल दिया। हम बिजनस कर रहे हो या ट्रेवल, हमको हमेशा एक बात दिमाग में रखनी चाहिए कि हम ग्‍लोबल नेटवर्क में सक्रिय हैं। औद्योगिक क्रांति के कारण बढ़े कंप्यूटर के व्‍यापाक स्‍तर पर इस्‍तेमाल और बढ़ती जरूरतों के लिए व्‍यापाक पैमाने पर बढ़ी माल उत्‍पादन जरूरत ने छोटी कंपनियों को पीछे धकेल दिया, और इस क्रांति के कारण वे विश्‍व की सबसे बड़ी कंपनियों और फैक्‍ट्रियों के समूह बन गये। आज उनके पास लाखों कर्मचारी हैं, और अरबों में उनकी कीमत है। आज आप की मुलाकात विश्‍व की ऐसी दस बड़ी कंपनियों से करवाने जा रहे हैं, जिनका राजस्व बताता है कि उनकी हैसियत कितनी है।

वॉक्‍सवैगन {वॉल्क्सवेज़न} ग्रुप
राजस्‍व - 250 बिलियन डॉलर
वॉक्‍सवैगन ग्रुप की स्‍थापना 1937 में नेशनल सोशलिस्‍ट पार्टी की ओर से छोटी कार बनाने के लिए हुई थी, लेकिन मौजूदा समय में कंपनी के पास विश्‍व के 27 देशों में 100 ज्‍यादा फैक्‍ट्रियां हैं, और फैक्‍ट्रियों में पांच लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। इस कंपनी का मुख्‍यालय जर्मनी के वोल्फ़्सबर्ग में है। कंपनी का बिजनस 153 देशों में विस्‍तार कर चुका है। कंपनी का राजस्‍व 2012 में 250 बिलियन डॉलर था।

स्‍टेट ग्रिड कोर्पोरेशन ऑफ चाइना
राजस्‍व : 290 बिलियन डॉलर
यह विश्‍व की सबसे बड़ी बिजली वितरित करती कंपनी है। इस कंपनी में कर्मचारियों की संख्‍या 15 लाख से भी ज्‍यादा है। यह कंपनी पूरे चाइना में बिजली सप्‍लाई देती है। इस कंपनी की स्‍थापना 2002 में उस समय हुई, जब स्‍टेट पॉवर कोर्पोरेशन ऑफ चाइना का विभाजन हुआ। साल 2012 में कंपनी का राजस्‍व 290 बिलियन डॉलर था।

विटोल ग्रुप
राजस्‍व : 303 बिलियन डॉलर
विटोल ग्रुप डच स्वामित्व वाली बहुराष्ट्रीय व्यापार कंपनी है। इस कंपनी की स्‍थापना 1966 में रोर्टडम में की गई। विटोल समूह कच्‍चे तेल, कार्बन उत्सर्जन, कोयला, प्राकृतिक गैस, कृषि से जुड़े उत्‍पादों का व्‍यापार करता है। कंपनी के जहाज 400 मिलियन टन कच्‍चा तेल प्रति वर्ष ढोहते हैं। यह दुनिया में सबसे बड़ी ऊर्जा व्यापारी कंपनी है। विटोल एक निजी कंपनी है, जहां पर लगभग 2800 कर्मचारी काम करते हैं। इस कंपनी का 2013 जनवरी में राजस्‍व 303 बिलियन डॉलर था।

साउदी अमैर्को
राजस्‍व : 365 बिलियन डॉलर
साउदी अरबिया के डाहरान स्‍थित साउदी अमैर्को, का आधिकारिक नाम साउदी अरबियन ऑयल कंपनी है। यह प्राकृतिक ऑयल और गैस आधारित कंपनी है। यह कंपनी आज विश्‍व की सबसे बड़ी कंपनी है, जिसके पास सबसे बड़ा तेल भंडार क्षेत्र है। इस कंपनी की कीमत दस ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर कीमत हो चुकी है। साल 2011 में इसका राजस्‍व लगभग 365 बिलियन डॉलर था।

ब्रिटिश पेट्रोलियम
राजस्‍व : 370 बिलियन डॉलर
ब्रिटिश पेट्रोलियम बीपी ब्रिटिश ऑयल और गैस कंपनी, जिसका मुख्‍यालय लंडन में है, और आज कंपनी का कारोबार लगभग 80 देशों में चल रहा है। कंपनी प्रति दिन 3.3 मिलियन बैरल ऑयल का उत्‍पादन करती है। कंपनी के पास 20 हजार से अधिक सर्विस स्‍टेशन हैं। कंपनी का 2012 में रेवन्‍यु 370 बिलियन डॉलर था।

सिनेपॉक ग्रुप
राजस्‍व : 411 बिलियन डॉलर
चाइना पेट्रोकैमिकल कॉर्पोरेशन ऑयल रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल एंटरप्राइजेज के रूप में एशिया की सबसे बड़ी कंपनी है। साल 2007 में यह कंपनी चाइना के 500 एंटरपाइजेस में नंबर वन थी। साल 2012 में इस कंपनी का राजस्‍व 411 बिलियन डॉलर रहा।

चाइना नेशनल पेट्रोलियम कंपनी
रेवन्‍यु : 425 बिलियन डॉलर
चाइना नेशनल पेट्रोलियम कंपनी, सरकारी स्‍वामित्‍व वाला ऑयल और गैस निगम है। इस कंपनी में 4 लाख से अधिक कर्मचारी काम करते हैं और कंपनी 30 से अधिक अंतरराष्‍्ट्रीय अन्‍वेषण और उत्‍पादन परियोजनाओं को ऑपरेट कर रही है। कंपनी का साल 2012 में वाली 425 बिलियन डॉलर रहा।

एक्सॉन मोबिल
वाली : 453 बिलियन डॉलर
एक्सॉन मोबिल कॉर्पोरेशन अमेरिकी बहुराष्ट्रीय तेल और गैस निगम है। इसका मुख्‍यालय इरविंग, टेक्सास में है। इस कंपनी की सबसे बड़ी शेयरधारक बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन है। यह कंपनी इंपीरियल तेल के साथ जुड़ी हुई है, जो कनाडा से ऑपरेट होती है।  2012 में, इस कंपनी का राजस्‍व 453 बिलियन डॉलर था। एक्‍सॉन मोबिल कॉर्पोरेशन का गठन 1999 में हुआ, जब एक्‍सॉन और मोबिल का विलय हुआ, जिसका पूर्व नाम क्रमश: स्‍टैंडर्ड ऑयल ऑफ न्‍यू यॉर्क और स्‍टैंडर्ड ऑयल ऑफ न्‍यूजर्सी था।

रॉयल डच शैल
राजस्‍व : 467 बिलियन डॉलर
रॉयल डच शैल कंपनी का गठन 1907 में दो प्रतिद्वंद्वियों रॉयल डच पेट्रोलियम कंपनी और यूके की शैल ट्रांसपोर्ट एंड ट्रेडिंग कंपनी के विलय से हुआ। कंपनी विश्‍व के 90 देशों में 40 हजार से अधिक सर्विस स्‍टेशन ऑपरेट करती है। कंपनी 3.1 मिलियन बैरल ऑयल के आस पास प्रतिदिन उत्‍पादन करती है। कंपनी का साल 2012 में 467 बिलियन डॉलर राजस्‍व था।

वॉल मार्ट स्‍टार्स इंक
राजस्‍व : 469 बिलियन डॉलर
वॉल-मार्ट स्‍टोर्स इंक, जो वॉलमार्ट के नाम से विश्‍व भर में प्रसिद्ध है। यह एक अमेरिकी बहुराष्‍ट्रीय रिटेल कंपनी है, जो रियायत दर वाले बड़े बड़े करियाणा स्‍टोर व गोदाम चलाती है। 2013 की फॉर्च्‍यून ग्‍लोबल 500 रैंकिंग के अनुसार, यह कंपनी विश्‍व का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निगम है, और दो मिलियन कर्मचारियों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा निजी नियोक्‍ता है। इसके अलावा दुनिया का सबसे बड़ा खुदरा व्‍यापारी है। कंपनी का 2012 में राजस्‍व 469 बिलियन डॉलर था।

स्रोत : क्‍लिक टॉप टेन डॉट कॉम व अन्‍य स्रोत


कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

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आम आदमी का खुलासा ; अदानी के हाथों में खेलता है मोदी

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (एएपी) के राष्‍ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल मंगलवार को एक और खुलासा करने के दावे के साथ मीडिया से रूबरू हुए। इस बार अरविंद केजरीवाल ने गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने बनाते हुए कहा कि निजी कंपनियों के हाथों में खेल रहे हैं। इससे पूर्व अरविंद केजरीवाल भाजपा अध्‍यक्ष नितिन गड़करी को निशाना बना चुके हैं, जिसको लेकर भाजपा अभी तक दुविधा में है।

गुजरात चुनावों की तरफ ध्‍यान दिलाते हुए केजरीवाल ने कहा कि चुनावों में एक तरफ मोदी हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस। हमारे पास कागजात हैं जो ये साबित करते हैं कि दोनों मिलकर निजी कंपनियों का फायदा करवाते हैं। हमारे कागजात के मुताबिक अगर कांग्रेस मुकेश अंबानी की दुकान है तो क्या मोदी सरकार अदानी की दुकान है।

उन्‍होंने नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा सरकार आरोप लगाते हुए कहा कि 14306 एकड़ जमीन मात्र 1 रुपये से 32 रुपये प्रति यूनिट के भाव से क्यों दे दी जबकि एयरफोर्स को 8800 रुपये प्रति यूनिट के भाव से। ये सरकार देश के लिए काम कर रही है या प्राइवेट कंपनियों के लिए।

उन्‍होंने कहा कि भाजपा के नेता नरेंद्र मोदी खुद को दूध का धूला हुआ के तौर पर पेश कर रहे हैं, जबकि वो पूरी तरह भ्रष्‍ट नेता हैं।

युवारॉक्‍स व्‍यू

आम आदमी को इस तरह के बयानों से बचना होगा। वरना यह आम आदमी के लिए घातक हो सकते हैं, ऐसे आम आदमी अपनी विश्‍वनीयता खो देगा, क्‍यूंकि जितनी तेजी सकारात्‍मकता नहीं फैलती, उससे कई गुना रफतार से नकारात्‍मकता फैलती है, अगर एक बार नकारात्‍मकता फैल गई तो मिथुन चक्रवर्ती की तरह भले हर साल डेढ़ दर्जन फिल्‍में बाजार में उतारो, कोई देखने नहीं आएगा। मिथुन दा तो फिर उभर आए, अपनी उपस्‍थिति दर्ज करवाने में सफल हो गए, मगर अरविंद के लिए मुश्किल हो जाएगा, अन्‍ना तो उभर आएंगे। मीडिया का चस्‍का बुरा है। मीडिया से दूरी बनाएं, सही दिशा की ओर कदम बढ़ाएं।
                                                                               आम आदमी  से मतलब अरविंद केजरीवाल न्‍यू पार्टी

जी न्‍यूज के संपादकों की जमानत फैसला सुरक्षित

न्‍यूज रूम - जिंदल ग्रुप से सौ करोड़ रुपये की कथित उगाही मामले में जी ग्रुप के दोनों संपादकों की जमानत पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। सोमवार को बहस के बाद साकेत कोर्ट ने दोनों संपादकों सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया की जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

गौर तलब है कि दोनों संपादकों को गत मंगलवार को गिरफ्तार किया गया था। शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी के नहीं पहुंचने के चलते इनकी जमानत पर सुनवाई नहीं हो सकी थी। सूत्रों के अनुसार इस मामले में जी ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा और प्रबंध निदेशक पुनीत गोयनका भी आरोपी हैं। क्राइम ब्रांच दोनों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी कर चुकी है, लेकिन सुभाष चंद्रा ने पुलिस को भेजे जवाब में पांच दिसंबर तक देश से बाहर होने की बात कही है।

चलो चला गया कसाब, अफजल की विदाई मुश्‍किल

बाल ठाकरे की न्‍यूज को साइड पर रख चुका होगा मीडिया, न्‍यूज एंकर ब्रेड बटर खाकर घर से निकल चुके होंगे, जो जल्‍द पहुंचेगा, उसको मिलेगा एंकरिंग का अवसर ! कुछ एंकरों को तो आज का दिन ब्रेड बटर से काम चलाना पड़ेगा । कुछ चर्चा कार तो सुबह से ही तैयारी कर रहे होंगे चलो आज फिर टीवी स्‍क्रीन पर जाने का मौका मिलेगा, भले की कसाब की फांसी से सरकार को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन पूर्ण रूप से नहीं, क्‍यूंकि अफजल गुरू आजतक जिन्‍दा है, जिसको फांसी देना, एक फसाद को जन्‍म देना भी कुछ लोग मान रहे हैं, क्‍यूंकि वो कश्‍मीर से तालुक रखते हैं, और हमारी सरकार नहीं चाहती कि कश्‍मीर में पहले से हालात बने, देश में अलगाववादी नेताओं की कमी नहीं।  माइक्रो  संपादकीय
 
न्‍यूज डेस्‍क । 26/11 मुंबई अटैक के गुनहगार पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब को फांसी दे दी गई है। कसाब को मुंबई की ऑर्थर रोड जेल से पुणे की यरवडा जेल में शिफ्ट कर बुधवार सुबह 7.30 बजे फांसी पर लटकाया गया। फांसी के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। महाराष्ट्र के गृह मंत्री आर.आर. पाटिल ने इसकी पुष्टि कर दी है। वह थोड़ी ही देर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसकी जानकारी देंगे।

इससे पहले मंगलवार को प्रेजिडेंट प्रणव मुखर्जी ने अजमल कसाब की दया याचिका को खारिज कर दिया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय से सलाह के बाद यह फैसला लिया गया था। दया याचिका खारिज होने के तुरंत बाद मंगलवार को कसाब को मुंबई की ऑर्थर रोड जेल से पुणे की यरवडा जेल में गुपचुप तरीके से शिफ्ट कर दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि यरवडा जेल में फांसी देने का इंतजाम है। उसकी फांसी बुधवार सुबह साढ़े सात बजे तय की गई थी, जिसे तय समय पर अंजाम दे दिया गया। 25 वर्षीय कसाब को जनवरी 2008 से ऑर्थर रोड जेल में था।

कसाब उन 10 पाकिस्तानी आतंकियों में से एक था, जिन्होंने समंदर के रास्ते मुंबई में दाखिल होकर 26/11 हमले को अंजाम दिया था। इस हमले में 165 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हो गए थे। हमला करने से पहले इन आतंकियों ने गुजरात कोस्ट से एक भारतीय बोट को हाइजैक करके उसके कैप्टन को भी मार दिया था।

कसाब ने सितंबर में राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी थी। इससे पहले 29 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले को बेहद 'रेयर' बताकर कसाब की फांसी की सजा पर मुहर लगा दी थी। जस्टिस आफताब आलम और सी. के. प्रसाद ने मुंबई हमले में पकड़े गए एक मात्र जिंदा आतंकी कसाब के बारे में कहा था कि जेल में उसने पश्चाताप या सुधार के कोई संकेत नहीं दिखाए। वह खुद को हीरो और देशभक्त पाकिस्तानी बताता था। ऐसे में कोर्ट ने माना था कि कसाब के लिए फांसी ही एकमात्र सजा है।

क्राइम शो के होस्‍ट राघवेंद्र कुमार मुद्गल नहीं रहे

‘चैन से सोना है तो जाग जाओ’ कहने वाले राघवेंद्र नहीं रहे। टीवी चैनल पर चर्चित रहे क्राइम शो सनसनी के एंकर राघवेंद्र कुमार मुद्गल का रविवार को पटना में निधन हो गया। वे कई घंटों से वेंटिलेटर पर थे। उनका अंतिम संस्कार रविवार को ही पटना में किया गया। 
        
दिल का दौरा पडऩे के बाद वे कई दिनों से मगध अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे। राघवेंद्र की स्कूली शिक्षा बिलासपुर में हुई थी। उनके पिता आरटीओ अधिकारी थे। वे अंबिकापुर से रिटायर हुए। फिर वहीं बस गए। राघवेंद्र ने आकाशवाणी अंबिकापुर के ड्रामा आर्टिस्ट के तौर पर करिअर की शुरुआत की थी। 

   इप्टा में उन्होंने अपना अभिनय कौशल संवारा। दिल्ली और चंडीगढ़ में एनएसडी के कलाकारों के साथ भी काम किया। वे बीबीसी की कई डाक्यूमेंट्रीज में भी नजऱ आए। मुदगल ने एक भोजपुरी फिल्म ‘भोले शंकर’ में विलेन का रोल किया था। इसके हीरो मिथुन चक्रवर्ती थे। उन्होंने न्यूज़ एक्सप्रेस चैनल में भी काम किया।

वो बोझ नहीं ढोते, जेब का बोझ हलका करते हैं

जी हां, वो बोझ नहीं ढोते, जेब का बोझ हलका करते हैं। आप सोच रहे होंगे मैं किन की बात कर रहा है, तो सुनिए भारतीय रेलवे स्‍टेशन पर लाल कोट में कुछ लोग घूमते हैं, जो यात्रियों के सामान को इधर से उधर पहुंचाने का काम करते हैं, जिनको हम कुली कहकर पुकारते हैं, मगर सुरत के रेलवे स्‍टेशन पर लाल कोट पहनकर घूमने वाले कुली लोगों का बोझ ढोने की बजाय उनकी जेबों को हलका करने में ज्‍यादा दिलचस्‍पी लेते हैं।

हम को सूरत से इटारसी तक जाने के लिए तपती गंगा पकड़नी थी, जिसके लिए हम रेलगाड़ी आने से कुछ समय पहले रेलवे स्‍टेशन पहुंचे, जैसे ही हम प्‍लेटफार्म तक जाने सीढ़ियों के रास्‍ते ऊपर पहुंचे, वैसे ही लाल कोट वाले भाई साहेब हमारे पास आए और बोले चलत टिकट है, पहले तो समझ नहीं आया, लेकिन उसने जब दूसरी बार बात दोहराई तो हम बोले नहीं भाई रिजर्वेशन है, लेकिन वेटिंग, क्‍या बात है साहेब बनारस तक कंफर्म करवा देते हैं, इतने में मेरे साथ खड़े ईश्‍वर सिंह ने कहा, नहीं भई जब जाना तो इटारसी तक है, बनारस का टिकट क्‍या करेंगे, हम उसको वहीं छोड़ आगे बढ़ गए, इतने में हमारी निगाह वहां लगी लम्‍बी लाइन पर पड़ी, जहां पर कुछ यात्री लाइन में लगे हुए थे, जो जनरल डिब्‍बे बैठने के लिए कतार में खड़े थे, हैरानी की हद तो तब हुई जब जनरल डिब्‍बे में बैठने के लिए भी आपको दो से पांच सौ रुपए उन लाल कमीज वाले लुटेरों को देने पड़ रहे थे।

इतने में हमारी निगाह पैसे ले रहे व्‍यक्‍ित पर पड़ी तो हम ने उसको पास बुलाने की कोशिश की तो वह गुन गुन करते हुए वहां से भाग निकला, इतने में वहां कुछ और कुली आ गए, जैसे प्‍लेटफार्म उनके बाप का हो, हम से कहने लगे आपकी टिकट किसी कोच की है, हमने उनसे पूछा आपको लोगों की जेब काटने का अधिकार किस ने दिया, जब उनको पता चला कि यह व्‍यक्‍ित मीडिया से जुडे़ हुए हैं तो चाय पानी का ऑफर करने लगे।

इतने मैं मेरे मुंह से निकल गया, अगर चाय पानी के भूखे होते तो दोस्‍त आज भी किसी छोटे बड़े अखबार में काम कर चाय पानी बना रहे होते, लेकिन वो बनाना नहीं आता इस लिए मीडिया को हम रास नहीं आते।

उनका यह कार्य एक दिन का नहीं, बल्‍कि प्रति दिन का है, लेकिन सूरत का मीडिया आखिर कहां सो रहा है समझ से परे है, कहीं चाय पानी पर तो नहीं टिक गया।

टाइम में मोदी, मीडिया में खलबली क्‍यूं

टाइम पत्रिका के पहले पन्‍ने पर गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र सिंह मोदी की फोटो एक लाइन बिजनस मीन मोदी, बट केन ही लीड इंडिया के साथ प्रकाशित हुई, जो यह इशारा करती है कि इस बार टाइम ने गुजरात के मुख्‍यमंत्री को लेकर स्‍टोरी प्रकाशित की है, जो किसी भी पत्रिका का कार्य होता है, लेकिन जैसे ही इस पत्रिका ने अपना एशियाई अंक प्रकाशित किया, वैसे ही भारतीय मीडिया इसको लेकर एक स्‍टोरी बनाने बैठ गया, जैसे किसी पत्रिका ने पहली बार किसी व्‍यक्‍ित पर स्‍टोरी की हो, इंडिया टूडे उठाकर देख लो, क्‍या उस के फ्रंट पेज पर किसी व्‍यक्‍ित विशेष की फोटो नहीं होती, या फिर हिन्‍दुस्तान में प्रकाशित होने वाली पत्रिकाएं पत्रिकाएं नहीं हैं, सच कहूं तो दूर के ढोल सुहाने लगते हैं।

इस पत्रिका के जो जो अंश समाचार बनाकर सामने आए हैं, उनमें कुछ भी नया नहीं था, क्‍योंकि जो लाइन टाइम ने फ्रंट पेज पर लिखी है, वह पूछ रही है कि क्‍या मोदी भारत की अगुवाई कर सकते हैं, यह बात को पिछले लोक सभा चुनाव के दौरान हर मीडिया बोल रहा था, शायद मसालेदार खबरों को दिखाने वाले मीडिया की याददाश्‍त कमजोर है। अगर नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई लिखे तो बहुत अच्‍छी बात है, लेकिन पक्ष में लिखे तो खबर बनती है, समझ से परे है, मीडिया के पास मोदी पर उंगली उठाने के लिए एक ही इश्‍यू है, वो गोधरा कांड, वो ही मीडिया अमृतसर में हुए हमले को कैसे भूल जाती है, वह मीडिया दिल्‍ली में सिखों के साथ हुए जुल्‍म को कैसे भुला देती है,

अगर मोदी गुजरात के अंदर विकास नहीं कर रहा तो हर बार चुनाव जीत कर सत्‍ता में कैसे पहुंच जाता है, क्‍या गुजरात की जनता गूंगी बहरी है, क्‍या उसको अच्‍छे बुरे की समझ नहीं, अगर मीडिया मोदी के खिलाफ कुछ लिखना चाहता है तो उसके पास इसकी आजादी है, लेकिन अगर कोई अच्‍छा लिखता है, उसको खबर बनाकर मोदी पर उंगली उठाना वह उचित नहीं|

वैसे भी किसी ने कहा है कि बुरे व्‍यक्‍ित के भीतर एक अच्‍छा गुण होता है, तो यह भी स्‍वभाविक है कि एक अच्‍छे आदमी के भीतर एक बुरा गुण भी होगा, ये बात तो आंकलन वाले को देखनी होती है कि कौन सी चीज को उभारकर लोगों के सामने रखना है, जैसे कि आधा पानी का भरा हुआ गिलास, किसी को आधा खाली नजर आता है।