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वो मासूम सी लड़की

वो मासूम सी लड़की मुझसे जुदा हो जाए।
बस ख्वाबों में आए, और खुदा हो जाए।

मैं ही जानता हूं पागल दिल को संभाला है कैसे।
उनकी चाहत को बच्चों की तरह पाला है कैसे।

कभी सूखा पड़ा तो कभी बाढ़ आई
हौंसले ​गिराने आफत हर बार आई

हा​लत देखकर आशिकों की अब मैं, हैप्पी यूं ही परेशान नहीं होता
पता है मुझे, किसी की याद में डूबकर उभरना आसान नहीं होता

आओ हंसते हुए मिलने की, दुश्मनों पर मेहरबानी करते हैं।
चलो आज हैप्पी, हम भी कुछ तूफानी करते हैं।

बंद कमरों में रोना बंद कर ​दिया, क्यूंकि नीर ए अश्क फर्श सोखता नहीं,
हैप्पी अगर जमीं पीती अश्क मेरे, तो आंखों से बहता दरिया मैं रोकता नहीं