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सावधान! देश उबल रहा है

मेरे घर गुजराती समाचार पत्र आता है, जिसके पहले पन्‍ने पर समाचार था कि देश की सुरक्षा को खतरा, इस समाचार को पढ़ने के बाद पहले पहल तो लगा कि देश का मीडिया देश हित की सोचता है या चीन जैसे दुश्‍मन की, जो ऐसी जानकारियां खुफिया तरीकों से जुटाने के लिए लाखों रुपए खर्च करता है। फिर एकांक विज्ञापन की एक पंक्‍ित 'देश उबल रहा है' याद आ गई, जो कई दिनों से मेरे दिमाग में बार बार बज रही है। जो कई दशकों से नहीं हुआ, और अब हो रहा है यह उबलते हुए देश की निशानी नहीं तो क्‍या है?

इस समाचार को पढ़ने के बाद मैं काम को निकल गया, हुआ वही जो मेरे दिमाग में समाचार पढ़ने के बाद आया, कि अब राजनेता सेनाध्‍यक्ष की कुर्सी को निशाना बनाएंगे, सभी नेताओं ने प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी, जो मुंह में आया बोल दिया, जानकारियां लीक करने वाले मीडिया के लिए जश्‍न का दिन बन गया, क्‍योंकि पूरा दिन पंचायत बिठाने का अवसर जो मिल गया था।

मीडिया ने एक की सवाल पूछा क्‍या सेनाध्‍यक्ष को बर्खास्‍त किया जाना चाहिए, किसी ने यह नहीं कहा कि जो सेनाध्‍यक्ष ने पत्र में लिखा, उस पर जांच बिठाई जानी चाहिए, आखिर कहां कमियां रह गई के देश का सुरक्षा तंत्र इतना खोखला हो गया। कितनी हैरानी की बात है कि सवा सौ करोड़ की आबादी खतरे में है, और जानकारी लीक करने पर अटकी हुई है, एक पूर्व सेना अधिकारी टीवी पर आकर कहते हैं कि यह आज की बात नहीं, पिछले चालीस सालों से यही स्‍िथति है, लेकिन किसी ने एक बार भी गम्‍भीरता से नहीं लिया, आखिर क्‍यों?

सवाल यह नहीं कि चिटठी को किसी ने लीक किया, सवाल यह है कि करोड़ों रुपए के बजट को आखिर सरकार कहां लगा रही है, जो जनता हर साल सरकार को टेक्‍स के रूप में अदा करती है। जो मुम्‍बई में हुआ, उसके लिए कसाब नहीं, हमारा घटिया सुरक्षा मंत्रालय और सरकार जिम्‍मेदार है। सरकार को मिस्र से नसीहत लेनी चाहिए क्‍यों कि देश उबल रहा है, अब वो दिन दूर नहीं, जब ताज उछाले जाएंगे।

इतना ही नहीं, घटिया वाहन खरीदने के लिए सेना प्रमुख को घूस देने का प्रयास किया जाता है और बात रक्षा मंत्री तक पहुंचती है, मगर कारवाई के नाम पर चुप्‍पी साध ली जाती है, देश के सुरक्षा मंत्री की रक्षा को लेकर इस तरह की उदासीनता अच्‍छी नहीं, इस बात पर तो देश के किसी मंत्री व नेता एंटनी से अस्‍तीफे की मांग नहीं की, क्‍यूं चोर चोर मसेरे भाई जो ठहरे।

चलते चलते इतना ही कहूंगा कि नेताओं सावधान हो जाओ, क्‍योंकि देश उबल रहा है।