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विद्या के हाथों पर सिद्धार्थ की मेहंदी

-: वाईआरएन सर्विस :-
बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन आज यूटीवी के प्रमुख सिद्धार्थ रॉय कपूर के साथ परिणय सूत्र में बंध गईं। बॉलीवुड के इस शादी समारोह में पंजाबी और तमिल परंपराओं का मेलजोल देखने को मिला।

34 साल की इस विद्या ने गत गुरुवार को अपने हाथों में सिद्धार्थ के नाम की मेहंदी रचाई थी। मेहंदी की रस्म जुहू के आलीशान होटल में सम्पन्न हुई, जहां नजदीकी रिश्तेदार और दोस्त ही शामिल हुए थे। शादी समारोह में बॉलीवुड की बहुत कम हस्‍तियों को बुलाया गया था।

कैरियर
केरल में जनमीं एवं मुम्‍बई में पली बढ़ी विद्या बालन ने अभिनय की दुनिया में कदम एक टीवी सीरियल 'हम पांच' से अपने कैरियर की शुरूआत की, मगर गत दिसम्‍बर में रिलीज हुई 'द डर्टी पिक्‍चर' ने विद्या बालन को हॉट अभिनेत्रियों में शुमार कर दिया। इसके बाद इसी साल रिलीज हुई 'कहानी' ने तो विद्या बालन के कैरियर को नया आयाम दिया।

गौरतलब है कि विद्या बालन ने अपने सात साल के कैरियर में बहुत कम फिल्‍में की हैं, लेकिन ज्‍यादातर फिल्‍में सफल हुई हैं। उनकी सफल फिल्‍मों में 'परिणीता' 'लगे रहो मुन्‍ना भाई' 'गुरू' 'हे बेबी' 'भूलभलैया' 'पा' 'इश्‍किया' 'नो वन क्‍लिड जैसिका' 'द डर्टी पिक्‍चर' 'कहानी' आदि शामिल हैं।


छोटी सी लव स्‍टोरी
विद्या बालन और सिद्धार्थ कपूर की लव स्‍टोरी 2011 में शुरू हुई, जब विद्या बालन यूटीवी मोशन की फिल्‍म 'नो वन क्‍लिड जैसिका' के लिए शूटिंग कर रही थी। विद्या बालन की यह पहली शादी है जबकि सिद्धार्थ तीसरी शादी कर रहे हैं। संयोग देखो, इस 'नो वन क्‍लिड जैसिका' में उनकी सहयोगी कलाकार रही रानी मुखर्जी भी अगले साल यशराज फिल्‍म्‍ज के प्रमुख आदित्‍या चोपड़ा के साथ शादी कर सकती हैं।

हैरत में बॉलीवुड
'द डर्टी पिक्‍चर' एवं 'कहानी' के बाद विद्या का कैरियर शिख़र पर पहुंच गया था, और ऐसे समय में विद्या ने शादी कर सब को हैरत में डाल दिया, विशेषकर उनको तो जो अपनी अगली फिल्‍मों के लिए विद्या को साइन करने की सोच रहे थे। इस समय विद्या बालन केवल इक्‍का दुक्‍का फिल्‍में कर रही हैं, जिनमें बालाजी टेलीफिल्‍म्‍ज की घनचक्‍कर शामिल है। करीना कपूर के बाद विद्या बालन दूसरी बॉलीवुड की बड़ी अदाकारा हैं, जो दुल्हन बनी हैं। आश्चर्य की बात यह है कि जिस तरह फिल्मों में विद्या की सादगी दिखाई देती है, कुछ ऐसी ही सादगी उनकी निजी जिंदगी में भी है।

विद्या बालन की 'द डर्टी पिक्‍चर'

रविवार के समाचार पत्र में एक बड़ा सा विज्ञापन था, जिसमें द डर्टी पिक्‍चर का पोस्‍टर और टीवी पर फिल्‍म प्रसारित होने का समय छपा हुआ था, यकीनन लोगों ने समय पर टीवी शुरू किया होगा, मगर हुआ बिल्‍कुल उनकी उम्‍मीद से परे का, क्‍यूंकि टीवी पर उस समय कुछ और चल रहा था, ऐसा ही कुछ हुआ था, पेज थ्री के वक्‍त हमारे साथ।

हम पांच लोग टिकट विंडो से टिकट लेकर तेज रफ्तार भागते हुए सिनेमाहाल में पहुंचे, जितनी तेजी से अंदर घुसे थे, उतनी तेजी से बाहर भी निकले, क्‍यूंकि सिनेमा हॉल के बाहर पोस्‍टर पेज थ्री का था, और अंदर फिल्‍म बी ग्रेड की चल रही थी। शायद द डर्टी पिक्‍चर देखने की उम्‍मीद लगाकर रविवार को 12 बजे टीवी ऑन करने वालों के साथ कुछ ऐसा ही हुआ होगा। यकीनन लोग घर से बाहर तो नहीं भागे होंगे, मगर निराशा होकर चैनल तो जरूर बदल दिया होगा।

द डर्टी पिक्‍चर, इस लिए अपने निर्धारित समय पर प्रसारित नहीं हुई, क्‍यूंकि कोर्ट ने इसके प्रसारण रोक लगाते हुए इसको रात्रि ग्‍यारह बजे के बाद प्रसारित करने का आदेश दिया है। मगर मसला तो यह उठता है कि अगर 'द डर्टी पिक्‍चर' इतनी ही गंदी है, जितनी कि कोर्ट मान रही है तो इस फिल्‍म को राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से क्‍यूं नवाजा गया? बात तब समझ से परे हो जाती है, जब एक तरफ फिल्‍म को राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जाता है, और वहीं दूसरी तरफ कोर्ट द्वारा इसके प्रसारण पर रोक लगा दी जाती है।

अगर कोर्ट एक फिल्‍म के प्रसारण पर रोक लगाती है तो बुरी बात मानी जानी चाहिए, हां अगर कोर्ट ए सर्टिफिकेट हासिल सभी फिल्‍मों पर रोक लगाने का फैसला सुनाती है, तो हमको स्‍वागत करना चाहिए। मगर अफसोस की बात है कि पिछले कुछ सालों में बहुत कम ऐसी फिल्‍में बनी हैं, जिनको प्रसारण का हक मिलना चाहिए, लेकिन मिल रहा है। अभी पिछले दिनों आई रासक्‍ल, दिल तो बच्‍चा है, मॉर्डर, दम मारो दम, कितनी साफ सुधरी हैं, जो बार बार प्रसारित की जा रही हैं।

कुर्बान फिल्‍म में करीना कपूर का बेलिबास दृश्‍य, अभी रिलीज हुई हेट स्‍टोरी में नायिका नग्‍न पोस्‍टर और जिस्‍म 2 में सन्‍नी लियोन का नग्‍न शरीर पर पारदर्शी चुनरी ओढ़कर लेटना क्‍या रोक लगाने वाले मामले नहीं हैं। जब जंगल पूरी तरह आग के आगोश में चला जाता है, तब हमारी सांस्‍कृति को बचाने वालों की आंख खुलती है, और रोक लगाने की बातें शुरू होती हैं, जो एक प्रचार से ज्‍यादा कुछ नहीं होती।

चलते चलते  इतना ही कहूंगा कि यह फिल्‍म भी प्रसारित हो जाती चुपके से, मगर इसका नाम 'द डर्टी पिक्‍चर' ही सबसे बड़ी प्रॉब्‍लम खड़ी कर गया, 'द डर्टी पिक्‍चर' बोले तो 'गंदी छवि', और 'गंदी छवि' को कैसे प्रसारित किया जा सकता है। वैसे भी कहावत है, बद से बदनाम बुरा। और 'द डर्टी पिक्‍चर' बदनाम हो चुकी है। भले ही इसके डॉयलॉग छोटे पर्दे पर पुरस्‍कार समारोह की शान बने हों, मगर कोर्ट हमारी दलीलों व साबूतों पर अपना फैसला सुनाती है।