Showing posts with label लालू प्रसाद यादव. Show all posts
Showing posts with label लालू प्रसाद यादव. Show all posts

यहां बे 'चारे' दोषी लालू, वहां क्‍या सोचते होंगे जेपी नारायण

चारा घोटाले में दोषी पाए गए लालू प्रसाद यादव। और रिपोर्टों मुताबिक जेल जाना निश्‍चित है। लालू प्रसाद यादव के लिये जेल जाना कोई नई बात नहीं, लेकिन बस फर्क इतना है कि वे कभी जेपी अंदोलन के कारण जेल जाते थे, और अब वे चारा घोटाले के दोष में जेल जाएंगे।

कहते हैं कि लालूप्रसाद यादव, जेपी नारायण के इतने खास थे कि वे लालू प्रसाद यादव को घर चलाने के लिए आर्थिक मदद तक देते थे। इतना ही नहीं, लालू प्रसाद यादव भी जेपी पर अपना कॉपीराइट मानते हैं, तभी तो जब अन्‍ना अंदोलन को जेपी अंदोलन से जोड़कर देखने की कोशिश की जाती है तो सबसे ज्‍यादा विरोधी सुर लालू प्रसाद यादव के होते हैं।

आज एक बार फिर जेपी को याद किया जा रहा है, हालांकि जेपी नारायण का जन्‍मदिवस अकसर अमिताभ बच्‍चन के जन्‍मदिवस की सुर्खियों में कहीं छुपा रह जाता है। जेपी, जय प्रकाश नारायण। यह नाम नहीं, एक अंदोलन था। जिसने इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस की जड़ों को उखाड़ फेंका था। उसकी जगह एक गैर कांग्रेसी सरकार को देश चलाने का मौका दिया। यह सरकार जनता पार्टी की थी, जिसका भी लघु नाम लिखा जाये तो जेपी बनेगा, हालांकि इस सरकार में जेपी ने कोई पद नहीं लिया था। वे हमेशा गैर राजनीतिक रहे।

शायद, स्‍वर्ग में कहीं विराजमान जेपी को आज दुख भी हो रहा होगा, और खुशी भी। खुशी इस बात की कि उनको कभी राजनीति की लत नहीं लगी, और दुख इस बात का, जो उसका सबसे करीबी चेला था, आज वे एक घोटाले में दोषी पाया गया।

वे सोच रहे होंगे। यह तो वे ही लालू है, जो कभी मेरे भ्रष्‍टाचार विरोधी अंदोलन में, सबसे आगे होता था। भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करता था। फिर सोचते होंगे, नहीं.. नहीं.. यह वे मेरा लालू नहीं, यह तो कोई राजनेता है। यह मेरा लालू नहीं हो सकता।

वे लालू तो कदम दर कदम अंदोलन को आगे बढ़ाता था। वे लालू तो मेरे समर्थकों में जान फूंकता था। मैंने लालू प्रसाद यादव को उसी दिन खो दिया था, जब वे जनता पार्टी की टिकट से सांसद बनकर लोक सभा पहुंचे थे। जब सत्‍ता के चक्‍कर में गठजोड़ की राजनीति पर उतारू हो गए थे।

मैं उस कहावत को भूल गया था, जो कदम दर कदम पढ़ाई जाती है, सिखायी जाती है कि एक मच्‍छली पूरे जल को बिगाड़ देती है, एक सेब दूसरे सेबों को खराब कर देता है, मैंने तो खराब सेबों के बीच अपना सेब रख दिया। मैंने तो गंदे जल में अपनी एक मच्‍छली छोड़ दी। आखिर नतीजा तो कुछ निकलना था।

सोच में पड़े होंगे जेपी, और सोच रहे होंगे, जब मेरी पुण्‍यतिथि में पांच दिन शेष होंगे, तब ( 03 अक्‍टूबर 2013 ) मेरे एक शार्गिद को अदालत सजा सुनाएगी। शायद इस वक्‍त मुझे कोई याद भी न करे।

वैसे भी मेरा जन्‍म एक महानायक की जन्‍म तारीख के साथ आता है। आज वे महानायक है, भले रुपहले पर्दे का, लेकिन मुझे से अधिक नाम है उसका। धन दौलत, शोहरत सब कुछ है उसके पास। उसको चाहने वालों की लम्‍बी फेहरिस्‍त है। मेरा नाम तो सियासतदान लेते हैं, वोट बैंक को निशाना बनाने के लिये, लोगों को भ्रमित करने के लिए।

वैसे लालू प्रसाद यादव, के कारण ही सही, कुछ लोग मुझे याद तो कर रहे होंगे। मेरा उन से शिकवा नहीं, जो मुझे अपना आदर्श मानते हैं। जो मेरी बातें करते हैं, और घर के किसी कोने में बैठे देश के सिस्‍टम को कोसते हैं, और किसी अंदोलन को जन्‍म नहीं देते।

वो लोग ही तो मेरे सच्‍चे आशिक हैं। वे नहीं चाहते मेरा अस्‍तित्‍व खत्‍म हो। जेपी अंदोलन की जगह कोई और अंदोलन जन्‍म ले। वे मुझे जिन्‍दा रखना चाहते हैं। वे मेरी कदर करते हैं।


कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

Yuva Rocks Dot Com से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook  पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करे।

जी हां, सठिया गए केजरीवाल

@अरविंद केजरीवाल ने संसद को लिखे जवाबी पत्र में कहा, मैं संसद की इज्‍जत करता हूं, लेकिन दागी सांसदों की नहीं, उनका यह जवाब सुनने के बाद बिहार को कई साल पिछले धकेल देने वाले लालू प्रसाद यादव कहते हैं, केजरीवाल सठिया गए हैं। मुझे नहीं लगता कि लालू मियां कुछ गलत कह रहे हैं, क्‍योंकि जब तक कोई हिन्‍दुस्‍तानी सठिएगा नहीं तो परिवर्तन आएगा नहीं, जब सिंहम में बाजीरॉव सिंहम सठियाता है तो जयकंद शिकरे के पसीने छूटते हैं। वहीं फिल्‍म ए वेडनेसडे में जब आदमी की सटकती है तो पुलिस कमिश्‍नर से लेकर पुलिस मंत्रालय तक पसीने से तर ब तर होता है। पता नहीं, पिछले दिनों किसकी सटकी कि पूरे देश के मंत्रियों को बौखलाहट के दौरे पड़ने शुरू हो गए, अभी तक पसीने छूट रहे हैं, अंदर खाते एक दूसरे को बचाने के लिए सुरक्षा कवच तैयार किए जा रहे हैं। कितनी हैरानी की बात है कि उंगली सरकार पर उठी, लेकिन सेनाध्‍यक्ष के खिलाफ आवाजें बाहर से बुलंद हुई, क्‍यों कि नेताओं को पता है कि अगर आग पड़ोस में लगती है तो आंच उनके घर तक भी आएगी।

@लालू प्रसाद यादव, अभी तक तो कुठ पढ़े लिखे व्‍यक्‍ितयों की सटकी है, और नेताओं के पसीने छूटने शुरू हो गए, लेकिन जब हर हिन्‍दुस्‍तानी की सटकेगी तो नेताओं का हश्र क्‍या होगा अंदाजा लगाना जरा मुश्‍किल सा लग रहा है। वो दूर नहीं, जब हर हिन्‍दुस्‍तानी की सटकेगी, क्‍योंकि घरों में बैठकर टीवी देखने वाले दिल से निकली आवाजों को सुनते हैं, जुबां से नहीं, क्‍योंकि जुबां को पलटते हुए देर नहीं लगती। मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं, मिस्र की क्रांति की, जो गत साल वहां घटित हुई। वहां पर भी 26 वर्षीय 'आसमा महफूज़' की सटकी थी, और उसने फेसबुक पर आकर इतना कहा था, मेरा मरना तय है, तो क्‍यूं न अपने देश के लिए मर जाउं, उसके बाद जो मिस्र के लोगों की सटकी, उसका पता तो पूरे विश्‍व को है, यहां तो अन्‍ना हजारे से लेकर केजरीवाल तक कई सिरफिरे घूम रहे हैं, सच कहूं तो इस गुलशन में फूल कम कांटें ज्‍यादा हैं, लालू प्रसाद यादव जी थोड़ा पल्‍लू संभालकर चलें।

चलते चलते एक और बात कहना चाहता हूं, जैसे कि आपने सेनाध्‍यक्ष वीके सिंह के बारे में आपने कहा था कि वह फर्स्‍टेड है, और उसके बाद प्राइम टाइम एडटीवी इंडिया में पहुंचे एक व्‍यक्‍ित ने कहा था कि वीके सिंह, चटटान पर तब तक सिर पटकेंगे, जब तलक वह चकना चूर न हो जाए, इस बात पर गौर फरमाने लायक है। जिसने यह शब्‍द कहें, वह वीके सिंह नहीं था, लेकिन उसके शब्‍द बताते थे कि वह वीके सिंह से बेहद प्रभावित है, तो हो सकता है कि कल को आपको हर चौराहे पर केजरीवाल, वीके सिंह या उनके हमशकल मिले, जरा बचकर मोड़ से।