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राहुल गांधी बोल रहे हैं !

मेरी मां मुझे अक्सर कहती थी कि समय पर काम होते हैं आैर बे समय केवल सिर पटकना होता है। आज मां तो नहीं है, लेकिन उनकी कही बात मुझे याद आ रही है, क्योंकि कांग्रेस के उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी आज जगह जगह सिर जो पटक रहे हैं।

मैं साफ कर दूं कि राहुल गांधी की वापसी कांग्रेस के लिए उम्मीदजनक, आशा की किरण, डूबने वाले तिनके का सहारा आदि हो सकती है। मगर, देश के आम नागरिक की नजर में केवल मौकापरस्ती या अवसरवाद है।

इस बात में कोर्इ शक नहीं है कि कांग्रेस के उपाध्यक्ष वापसी के बाद काफी सक्रिय हो चुके हैं। मगर, इस बात का राष्ट्र के सुनहरे भविष्य से कोर्इ लेन देन नहीं है, क्योंकि अब तक सत्ता उसी परिवार के हाथों में रही है, जिस परिवार के उत्तराधिकारी राहुल गांधी हैं।

गत दिवस फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के नए अध्यक्ष गजेन्द्र चौहान की नियुक्ति के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों के समर्थन में खड़े होते हुए कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ''लोकतांत्रिक रूप से अगर ज्यादातर छात्र यह कहते हैं कि उन्हें वह अध्यक्ष के रूप में स्वीकार नहीं है तो उनको वहां नहीं होना चाहिए।''

मैं सोच रहा हूं कि सच में ये राहुल गांधी बोल रहे हैं, जिनका स्वयं की पार्टी में निरंतर विरोध होता रहा है, जिनको हटाने के लिए पार्टी के भीतर जद्दोजहद चलता रहा है। क्या राहुल गांधी को उस समय लोकतंत्र की परिभाषा नहीं आती थी ? या केवल मौका देखकर शब्दों से खेलना राहुल गांधी ने भी सीख लिया है ?

राहुल गांधी भले ही वापसी के बाद चातुर या शब्दों से खेलने वाले नेता बनकर लौट आए हों, मगर, उनके भीतर एक सशक्त लीडर आज भी कहीं मरा पड़ा है। आप केवल शब्दों की हेरफेर से नेता नहीं बन सकते, नेता का अर्थ अगुआ होता है, जो एक भीड़ का नेतृत्व करता है, जो सामने से आने वाली चुनौतियों को भीड़ से पहले भांपता है, आैर उनसे निबटता है।

पहले संसद के सत्र के दौरान राहुल गांधी लापता हो गए थे। अब वापस लौटते हैं, तो संसद के सत्र की कार्यवाही आगे बढ़ने का नाम नहीं ले रही। इस तरह सदन का अपमान करना किसी भी नेता या पार्टी को शोभा नहीं देता। हालांकि, विपक्ष का हमेशा एेसा ही रवैया रहा है, मगर, अच्छे नेता समय के ढांचों को बदल देते हैं। उम्मीद करता हूं कि राहुल गांधी अपनी पार्टी का नेतृत्व करते हुए संसद के सत्र की कार्यवाही को बहाल करवाएंगे। मौकापरस्ती का समय नहीं, बल्कि एक अच्छा विपक्ष बनने का समय है।

मोदी काठमांडू सीट से लड़ेंगे !

पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी देश के प्रधान मंत्री पद के लिए उम्मीदवार चुने गए। इस बात से देश को खुशी होनी चाहिए थी, लेकिन अफसोस के देश के भीतर राजनीतिक पार्टियां उनको रोकने के लिए चुनाव मैदान में उतर गई। बड़ी हैरानीजनक बात है, भला कोई इस तरह करता है। माना कि देश में लोकतंत्र है, लेकिन किसी की भावनायों को भी समझना लोकतंत्र का फर्ज है कि नहीं।

बेचारे मोदी कहते हैं कि भ्रष्टाचार रोको। तो विरोधी कहते हैं मोदी रोको। मोदी कहते हैं कि गरीबी रोको तो विरोधी कहते हैं मोदी रोको। कितनी नइंसाफी है। वाराणसी से चुनाव लड़ने का मन बनाया था लेकिन मुरली मनोहर जोशी कहने लगे पाप कर बैठे जो वाराणसी से लड़ बैठे।​ स्थिति ऐसी हो चुकी है कि भाजप से न तो मुरली मनोहर जोशी को पाप मुक्त करते बनता है न ही पाप का भागीदार बनाते बनता है।

राजनाथ सिंह : आप बनरास से लड़े
नरेंद्र मोदी : जीतने की क्या गारंटी है ?
राजनाथ सिंह : गारंटी चाहिए तो arise इनवेटर ले आएं।

भाई गारंटी तो चाहिए क्यूंकि मुरली मनोहर जोशी के दीवाने भी अड़चन पैदा कर सकते हैं। अंत नरेंद्र मोदी ने फैसला किया है कि वो काठमांडू से चुनाव लड़ेंगे। वहां शांति हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि वहां उनको कोई रोकने वाला भी नहीं है। सबसे सुरक्षित सीट। फिर क्या हुआ अगर काठमांडू नेपाल में है। अब भारत में तो सभी बेचारे मोदी को रोक रहे हैं, यह भी कोई लोकतंत्र है।

सही। नरेंद्र मोदी को काठमांडू से चुनाव लड़ना चाहिए।

देना ‘बब्‍बर थाली’, वो ’12′ वाली

मुम्‍बई के बाहरी रेलवे स्‍टेशनों पर ट्रेनों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया है, और साथ में कुछ उड़ानों को उतरने पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा मुम्‍बई के बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया गया, ताकि अन्‍य क्षेत्र के लोग मुम्‍बईया सीमा के भीतर घुस न सकें, खासकर तब तक जब तक स्‍थिति सामान्‍य न हो जाए। स्‍थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब देश के एक राजनेता के एक बयान के बाद हर कोई ‘बब्‍बर थाली’ की  तलाश में मुम्‍बई की तरफ निकल पड़ा।

मुम्‍बई के होटलों के बाहर हाउसफुल के बोर्ड लटकते हुए देखे गए। कहीं कहीं तो बब्‍बर थाली के लिए लोगों में हिंसक झड़प के समाचार भी मिले हैं। मुम्‍बई के हर होटल पर बब्‍बर थाली की मांग बढ़ रही है, हर किसी जुबान पर है ‘देना बब्‍बर थाली, वो ’12′ वाली। हालांकि ऐसी कोई थाली मुम्‍बई के जीरो स्‍टार ढाबे से लेकर फाइव स्‍टार होटल में कहीं भी नहीं उपलब्‍ध, ऐसा नहीं कि ग्राहकों की बढ़ी तादाद के कारण ऐसा हुआ, बल्‍कि ऐसी कोई थाली है ही नहीं।

दरअसल इस थाली की मांग ‘राजनेता’ राज बब्‍बर के बयान के बाद बढ़ी, जिसमें उन्होंने 12 रुपये में भर पेट खाना मिलने की बात कही थी। हालांकि बाद में राज बब्‍बर के करीबियों ने बताया कि एक दिन राज बब्‍बर दोपहर का खाना खाने के लिए मुम्‍बई के एक होटल में गए थे, वहां उन्‍होंने जम कर खाना खाया। जब बिल देने की बारी आई तो होटल के मालिक ने राज बब्‍बर से केवल 12 रुपये लिए, यह 12 रुपये खाने के नहीं, बल्‍कि शागुन के थे। वैसे तो शागुन में 11 रुपये दिए जाते हैं, लेकिन उस दिन राज साहिब के पास एक रुपया छूटा नहीं था, ऐसे में उन्‍होंने दो का सिक्‍का दिया और कहा, चलो एक रुपया टिप समझ कर रख लेना।

कुछ करीबियों का तो यह भी कहना है कि जब वे लंदन से मुम्‍बई शिवाजी टर्नीमल पर उतरे तो उनको काफी भूख लगी हुई थी। ऐसे में वे पास के किसी होटल में खाने के लिए गए। खाना खाने के बाद जब बिल देने की बारी आई तो जेब में राज बब्‍बर ने हाथ डाला, डॉलर निकले, होटल मालिक ने डॉलर देखकर कहा, जनाब केवल 12 दे दीजिए।

राज बब्‍बर खुश हो उठे वाह केवल 12 में इतना अच्‍छा खाना, दरअसल उनको याद ही नहीं रहा कि उन्‍होंने जो 12 का भुगतान किया, वे रुपये नहीं, बल्‍कि डॉलर थे। इस बातों को अभी कुछ दिन ही बीते थे कि अचानक राज बब्‍बर की नई कंपनी, यानि कि कांग्रेस ने घोषणा की कि गरीबों को सस्‍ता खाना उपलब्‍ध करवाने के लिए फूड सिक्‍यूरिटी बिल लाना अति जरूरी है। फूड सिक्‍यूरिटी बिल की बात राज बब्‍बर तक पहुंची तो उनको फूड से याद आया अपना पुराना अनुभव, वैसे भी लोग कहते हैं या तो आप बीती कहिए या जग बीती। ऐसे में राज बब्‍बर ने आप बीती कह डाली, लेकिन वे क्‍लीयर करना भूल गए कि मुम्‍बई में उन्‍होंने 12 रुपये का खाना कैसे और कब खाया था। दरअसल उपरोक्‍त कहानी, राज बब्‍बर के बयान सी है, जिसका जमीनी स्‍तर बिल्‍कुल नहीं, केवल ख्‍याली पुलाव टाइप है।

मगर राज बब्‍बर के इस बयान से हैरानी होती है कि जब टमाटर का रेट 60 से ऊपर चल रहा हो, जब एक किलो गोभी खरीदते वक्‍त सौ का नोट खप जाए, ऐसे में आप 12 रुपये में पेट भर खाने की बात स्‍थितियों का मजाक उड़ाने भर से अधिक नहीं हो सकता। वैसे ही इन दिनों कांग्रेस नेताओं को राहुल गांधी की बात समझ में नहीं आ रही, जिसको वे प्रधानमंत्री बनाने की बात कह रहे हैं। राहुल गांधी से याद आया, उनके एक प्रिय चाचा श्री हैं, जिनको लोग दिग्‍गी राजा के नाम से जानते हैं, वे मंदसौर में एक जनसभा को संबोधन कर रहे थे तो उन्‍होंने राहुल गांधी की अति करीबी को सौ टंच का माल कहकर बाजार में आग लगा दी। सबसे दिलचस्‍प बात तो यह थी कि यह शब्‍द खासकर तब एक फब्‍ती सा लगता है जब आप बात को चबकर कह रहे हों, जैसे कि दिग्‍गविजय सिंह ने अपने भाषण में कहा, वे तो राहुल गांधी और सोनिया गांधी का दिल जीत चुकी हैं। वे तो सबसे आगे हैं। वे हैं सौ टंच का माल, मैं तो पुराना जौहरी हूं।

यह बात किसी से नहीं छुपी कि राहुल गांधी के करीबियों में मीनाक्षी नटराजन का नाम आता है। लेकिन यह करीबियां कहां तक है, ये बात तो वे दोनों ही बता सकते हैं, लेकिन दिग्‍गी का बयान कुछ और संकेत कर रहा है। अगर मीडिया नरेंद्र मोदी के पिल्‍ले के पीछे के अर्थ ढूंढ़ सकता है तो दिग्‍गविजय सिंह तो बहुत गहरी बात कह गए। चलो जाने भी दो, हम तो निकले थे 12 रुपये वाली, बब्‍बर थाली लेने, लेकिन यह थाली मिलती कहां है, हमारे तो यहां दबेली, बड़ा पाव भी 15 रुपये में मिलता है, जो दो खाये बिन पेट नहीं भरता।

कांग्रेसियों का 'ब्रह्मचर्य व्रत'

कहते हैं जो पकड़ा गया वो चोर बड़ा। जो समय रहते स्‍वीकार कर गया वो सबसे बड़ा महान, जैसे कि मोहनदास कर्म चंद गांधी। मगर अफसोस है कि अब कांग्रेसी नेताओं को स्‍वीकार करने का मौका ही नहीं मिलता या तो लड़कियां आत्‍म हत्‍या कर नेताओं को बेनकाब कर देती हैं या फिर कुछ साल बाद गलतियां पुत्रों का जन्‍म लेकर जग जाहिर हो जाती हैं।

शायद महात्‍मा गांधी की परंपरा को कांग्रेसी नेता बरकरार रखने की कोशिश में लगे हुए हैं, भले दूसरी तरफ सत्‍ता में बैठी कांग्रेस महिलाओं की सुरक्षा का पूरा पूरा जिम्‍मा उठाने का भरोसा दिला रही है। कथित तौर पर कुछ महीनों से ब्रह्मचर्य का व्रत, जिससे हम बलात्‍कार भी कह सकते हैं,  कर रहे एक नेता विक्रम सिंह ब्रह्मा को क्षुब्‍ध महिलाओं ने असम में पीट डाला, और कांग्रेस को एक बार फिर शर्मिंदा होना पड़ा। शायद कांग्रेस शर्मिंदा न होती। अगर आज हमारे राष्‍ट्रपिता की तरह विक्रम सिंह ब्रहमा भी जनता के बीच आकर महिला के साथ किए अपने ब्रह्मचर्य व्रत की स्‍वीकृति करते।

जैसे गांधी जी ने एक पत्र में लिखा था कि 'मुझे मालूम है कि शिविर के सभी लोग जानते हैं कि मनु मेरी खाट में साझेदारी करती है। वैसे भी मैं छुपाकर कुछ नहीं करना चाहता हूं। मैं इसको विज्ञापित नहीं कर रहा हूँ। यह मेरे लिए अत्यंत पवित्र चीज है। संदेह और अविश्वास को दूर करने के लिए फरवरी 1947 में गांधीजी ने नोआखाली की एक प्रार्थना सभा में मनु के साथ बिस्तर की साझेदारी की बात सबके सामने रखी। लेकिन यह नहीं बतलाया कि इस साझेदारी में मनु वस्त्रहीन अवस्था में होती थी।

कुछ माह पहले गीतिका नामक लड़की ने आत्‍महत्‍या कर ली और पीछे एक सुसाइड नोट छोड़ गई, जिसमें लिखा था कि उनकी आत्‍महत्‍या के पीछे कांग्रेसी नेता का हाथ है। यकीनन यह मामला भी महिला के साथ शारीरिक प्रयोग का था, जिसमें महिला को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। मगर जब आरोपी नेता का जन्‍मदिवस आया तो एक अन्‍य कांग्रेसी नेता ने कहा, 'गोपाल कांडा ने गलती से गलत नौकर रख लिया था'। यकीनन गीतिका मनु सी न थी, ईमानदार पैरोकार न था।

कांग्रेस के दिग्‍गज नेताओं में शुमार एनडी तिवारी, जो तीन बार उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री भी रह चुके हैं, को ब्रह्मचर्य व्रत प्रयोग उस समय महंगा पड़ गया, जब हाईकोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर रोहित शेख़र को उनका पुत्र मान लिया। एनडी तिवारी ने इसको एक साजिश बताया तो वहीं डीएनए टेस्ट रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद उज्ज्वला शर्मा ने कहा था, जो सच्चाई केवल वह जानती थीं, अब वह सच्चाई पूरी दुनिया के सामने आ गई है। यह सच की जीत है और उनके बेटे के मां के प्रति प्रेम की जीत है।

कथित तौर पर पिछले वर्ष कांग्रेस के फायरब्रांड वकील नेता अभिषेक मनु सिंघवी को भी उनके चालक ने ब्रह्मचर्य व्रत प्रयोग करते हुए एक वीडियो में कैच कर लिया था। इस वीडियो के रिलीज होने के बाद बात सामने आई कि वो वकील महिला को बदले में उच्‍च पदवी देने वाले थे। कांग्रेसी नेता अपने प्रेरणास्रोत एवं देश के राष्‍ट्रपिता के प्रयोग करने की कोशिश करते हुए पकड़े जाते हैं। उनको जनता महात्‍मा गांधी बनने से रोक लेती है। वैसे तो राहुल गांधी भी इस तरह के आरोप को झेल चुके हैं।

आज रात एनडीटीवी पर प्राइम टाइम शो देखते हुए एक सवाल सुनने को मिला कि महाभारत से द्रोपदी चीरहरण को हटा देना चाहिए। मुझे लगता है कि देश के राष्‍ट्रपिता की कुछ ऐसी स्‍वीकृतियों को भी नहीं हटा देना चाहिए।

सुन सनकर तंग आए ''देश का अगला...........?"

कांग्रेस, हम ने कल लोक सभा में एफडीआई बिल पारित करवा दिया। अब हम गुजरात में भी अपनी जीत का परचम लहराएंगे। मीडिया कर्मी ने बीच में बात काटते हुए पूछा, अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, अगर मध्‍याविधि चुनाव हों तो।  अगर देश का प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तरह जनता से बातचीत नहीं करेगा तो, मीडिया तो ऐसे सवाल पूछता ही रहेगा।

                                          नोट  पेंट की एड का पॉलिटिकल वर्जन

देश के लोकतंत्र में शायद पहली बार हो रहा है कि बात बात पर एक सवाल उभरकर सामने आ जाता है ''देश का अगला प्रधान मंत्री कौन होगा ?'' यह बात तब हैरानीजनक और कांग्रेस के लिए शर्मजनक लगती है जब चुनावों में एक लम्‍बा समय पड़ा हो, और बार बार वो ही सवाल पूछा जाए कि ''देश का अगला प्रधान मंत्री कौन होगा ?'' जब इस मामले से जोर पकड़ा था तो देश के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था, ''कांग्रेस जब भी कहे, मैं राहुल गांधी के लिए खुशी खुशी कुर्सी छोड़ने को तैयार हूं, मैं जब तक इस पद पर हूं, अपना दायित्‍व निभाता रहूंगा''।

देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भले देश की स्‍थिति से अनजान हों, मगर कांग्रेस की स्‍थिति से अच्‍छी तरह अवगत हैं, कांग्रेस की स्‍थिति चीन जैसी है, जो अंदर ही अंदर कई टुकड़ों में बांटा हुआ है, लेकिन बाहर से एक संगठित राष्‍ट्र। राहुल गांधी को कुछ मक्‍खनबाज नेता प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं, खासकर दिग्‍गविजय सिंह। पीएम बनना तो सोनिया भी चाहती थी, लेकिन रास्‍ते में एक पहाड़ आता है, जिसका नाम सुब्रह्मण्यम स्वामी, जिसको फांदकर पीएम की कुर्सी तक जान राहुल गांधी एवं सोनिया के लिए आसान नहीं, और दूसरी बात, जो मंत्री पद की जिम्‍मेदारी लेने से डरता है, वो देश के महत्‍वपूर्ण पद की जिम्‍मेदारी कैसे उठाएगा ?

देश का अगला प्रधान मंत्री कौन होगा ? सवाल को सुनते सुनते मनमोहन सिंह अपना दूसरा कार्यकाल पूरा कर जाएंगे, लेकिन यह बेहद शर्मनाक हादसा होगा, जब देश में निरंतर चल रही सरकार से एक ही सवाल बार बार पूछा जा रहा हो कि देश का अगला प्रधान मंत्री कौन होगा ?। कांग्रेस ने तो अपना पल्‍लू यह कहते हुए झाड़ लिया कि उनके रीति नहीं पीएम पद का उम्‍मीदवार घोषित करना, लेकिन विदेशी पत्रिका इकोनोमिस्‍ट ने कांग्रेस की ओर से अगले प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में पी चिदंबरम को देखने का साहस किया है। इस पद के दूसरे मजबूत दावेदार कांग्रेस की ओर से राष्‍ट्रपति पद तक पहुंच चुके हैं।

उधर, भारतीय जनता पार्टी जो कल तक नरेंद्र मोदी के नाम को नकार रही थी, वो आज उसको प्रधान मंत्री पद का उम्‍मीदवार मानने से इंकार नहीं कर रही, क्‍यूंकि भाजपा अब विपक्ष में बैठकर ऊब चुकी है, वो नहीं चाहती कि अगले कुछ साल फिर विपक्ष में बैठना पड़े। सुषमा स्‍वराज ने कहा है कि भाजपा के पास पीएम के बहुत सारे उम्‍मीदवार हैं, लेकिन यह भाजपा की कमजोरी नहीं, शक्‍ति है, जिस तरह सुषमा स्‍वराज ने लोक सभा में अपने भाषणों से भारतीय जनता पार्टी को आम जनता तक पहुंचाया, वो भाजपा के लिए काफी कारगार सिद्ध हो सकता है।

चलते चलते - मनमोहन सिंह को नैतिक तौर पर अपने पद से इस्‍तीफा दे देना चाहिए, क्‍यूंकि देश की जनता एक सवाल को सुन सुन कर तंग आ गई, भले ही वो नहीं आए या फिर एक दमदार पीएम की भूमिका निभाएं, किसी परिवार सेवक की नहीं।

जनता की पसंद, एक बुद्धू तो दूसरा बांदर

देश में दो नाम पिछले लम्‍बे समय से चर्चाओं का केंद्र बने हुए हैं। दोनों को देश का भावी प्रधान मंत्री बनाने का सपना भारतीय जनता संजो रही है। मगर हैरानी की बात है कि जनता की पसंद एक बुद्धू तो दूसरा बांदर है। यकीन नहीं आता तो आप सुब्रमण्यम स्वामी का बयान सुनिए और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा बरखा सिंह का बयान सुनिए।

गौर तलब है कि :-

जनता पार्टी प्रमुख सुब्रमण्यम स्वामी ने गुरूवार को एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी पर एक समाचार पत्र को 90 करोड़ का कर्ज देने की बात कहते हुए 1600 करोड़ की संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया था। इस बयान के बाद राहुल गांधी ने कहा कि वो स्‍वामी पर मानहानि का दावा करेंगे। राहुल का बयान आते ही कानून की मदद से सोनिया गांधी के रास्‍ते में मुश्‍िकलें खड़ी करने वाले स्‍वामी ने राहुल गांधी को 'बुद्धू' कहा है। स्वामी ने ट्विटर पर राहुल को बुद्धू लिखते हुए कहा, 'इस (बुद्धू को) मानहानि के कानून पर जानकारी लेने की जरूरत है। पब्लिक सर्वेंट एवं सांसद होने के नाते उन्हें यह साबित करना होगा कि जो कुछ मैंने कहा है, वह झूठ है, न कि मुझे यह साबित करना होगा कि जो कुछ मैंने कहा है वह सच है।'

चुटकियां  लेकर बात करने में माहिर गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड जैसे संवाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। इस बयान के बाद नरेंद्र मोदी के वैवाहिक जीवन को लेकर भी सवाल उठने लगे। इस दौरान नरेंद्र मोदी की इस टिप्‍पणी पर कड़ा नोटिस लेते हुए गुरुवार को आयोग की अध्यक्ष बरखा सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई एवं मांग की कि मोदी इसके लिए सुनंदा थरूर से माफी मांगें। बरखा सिंह ने आलोचना करते हुए मोदी पर बातों-बातों में एक शेर दाग दिया। उन्होंने कहा- 'नफरतें पालना दुर्भाग्‍य रहा हो जिसका, वो किसी रिश्‍ते की अज़मत कहां पहचानता है। प्‍यार को पैसे में तौलने वाले से कहो, कोई बंदर अदरक का मजा कहां जानता है...'

ताकि बुरा न लगे  
राहुल गांधी को स्‍वामी के कहे शब्‍दों का बुरा नहीं मानना चाहिए, क्‍यूंकि पंजाब में एक कहावत है, लल्‍लू करे कवल्‍लियां, रब्‍ब सिद्धियां पावै, और रही बात बांदर की तो नरेंद्र मोदी वैसे भी आज भाजपा के लिए संकट मोचन बने हुए हैं। संकट मोचन वो बांदर था, जिसने रावण की लंका को जलाकर राख कर दिया था, अब देखना है कि कलयुग का यह बांदर देश को किस ओर लेकर जाता है, और बुद्धू के कार्यों को भगवान क्‍या दिशा देते हैं।

अब बयान न दें

राहुल बाबा को बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, क्‍यूंकि स्‍वामी सोनिया गांधी के सबसे बड़े दुश्‍मन हैं, कहते हैं कि जब सोनिया गांधी प्रधान मंत्री की कुर्सी से दो कदम दूर थी तो बीच में मीलों की खाई खोदने वाले स्‍वामी ही थे, जो कानून की तलवार से सोनिया गांधी पर निरंतर वार कर रहे हैं।  स्‍वामी को रोकने के लिए हिन्‍दुस्‍तान से कानून नामक की चिड़िया को उड़ाना होगा। वरना राहुल बाबा आपका ध्‍यान स्‍वामी पर अटक जाएगा, और नरेंद्र मोदी, जिससे बरखा सिंह बांदर कह रही हैं, उस गद्दी पर आकर बैठ जाएगा, जिस पर नरेंद्र मोदी के मौन मोहन सिंह बैठे हुए हैं। वैसे भी हवाएं अब कांग्रेस के खिलाफ हैं। पहले तो केवल स्‍वामी था, अब तो अरविंद केजरीवाल भी आ गए। बीच बीच में रिटायर्ड सेनाध्‍यक्ष भी फायर कर जाते हैं।

नटराजन का ख्‍वाब; पिंजरे की बुलबुल

एक के बाद एक घोटाला उछलकर बाहर आ रहा है। कांग्रेस की छवि दिन ब दिन महात्‍मा गांधी की तरह धूमिल होती जा रही है। कांग्रेस के नेता पूरी तरह बुखला चुके हैं, वो अपने निकम्‍मे नेताओं को सुधारने की बजाय पूरी शक्‍ति मीडिया को ''पिंजरे की बुलबुल'' बनाने पर खर्च कर रहे हैं, जो लोकतंत्र के बिल्‍कुल उल्‍ट है।

शायद कांग्रेस के नेता पानी के बहा को नहीं जानते, वो सोचते हैं कि पानी के बहा को बड़े बड़े बांध बनाकर रोका जा सकता है, लेकिन वो नहीं जानते कि पानी अपना रास्‍ता खुद बनाता है, पानी जीवन है तो विनाश भी है। अगर आप मीडिया के मुंह पर ताला जड़ेंगे तो लोग अपनी बात कहने के लिए दूसरे साधनों को चुनेंगे।

अंग्रेजों के वक्‍त इतना बड़ा और इतना तेज तर्रार मीडिया भी तो नहीं था, मगर फिर भी जनमत तैयार करने में मीडिया ने अहम योगदान अदा किया था। कांग्रेसी नेता की पोल किसी अधिकारिक मीडिया ने तो नहीं खोली, जिस पर मीनाक्षी नटराजन बिल लाकर नकेल कसना चाहती हैं। शायद मीनाक्षी नटराजन राहुल बाबा की दोस्‍ती में इतना व्‍यस्‍त रहती हैं कि उनको वो लाइन भी याद नहीं होगी, जो लोग आम बोलते हैं, ''एक दरवाजा बंद होता है तो दूसरा दरवाजा आपके लिए खुलता है''।

जिस बिल को कांग्रेस ने मीनाक्षी की निजी राय बताकर पूरे मामले से पल्‍लू झाड़ लिया, क्‍या मीनाक्षी ने उस बिल को लाने की बात करने से राहुल गांधी से एक बार भी सलाह विमर्श नहीं किया? क्‍या अब कांग्रेस के नेता इतने बड़े हो चुके हैं, जो अपनी निजी राय के अनुसार बिल बनाने की बात करने लगे हैं? या फिर नेता ऐसा सोचने लगे हैं कि जिस पर राहुल बाबा ने मोहर लगा दी, वो निजी राय नहीं एक विधयेक बन जाता है?

मीडिया को ''पिंजरे की बुलबुल'' बनाने से कांग्रेस की छवि सुधरने वाली नहीं, क्‍यूंकि सफेद कुर्ते पर इतने दाग लग चुके हैं, जो महंगे से महंगे सरफ इस्‍तेमाल करने से भी जाने वाले नहीं। अब तो कांग्रेसी नेताओं को लिबास ही चेंज करना होगा। सच कहूं तो उनको 10 जनपद छोड़ना होगा, क्‍यूंकि वहां एक इटली की मेम रहती है, जो इटली से आई है, भारत को अच्‍छी तरह से नहीं जानती, और उसका एक पुत्र भी है, जो कुछ नेताओं की मक्‍खनबाजी से बेहद खुश है।

किसी समझदार ने कहा है कि अगर आप अपना रिमोट किसी और के हाथों में देते हैं तो आप भूल जाइए कि आप कुछ अपनी मर्जी का कर पाएंगे। आज कल कांग्रेसी नेताओं का रिमोट सोनिया के हाथ में है, और राहुल गांधी का रिमोट कुछ कांग्रेसी नेताओं के हाथ में। ऐसे में कांग्रेस का क्‍या हश्र होने वाला है, यह तो राम जाने।

लेकिन एक बात कांग्रेस को समझ लेनी चाहिए कि मीडिया को पिंजरे की बुलबुल बनाने से बेहतर होगा कि कांग्रेस के भीतर बैठे भ्रष्‍ट लोगों को कांग्रेस आउट करे, नहीं तो कांग्रेस को लोग आउट कर देंगे, चाहे बेटिंग के लिए कांग्रेस के पास सचिन नाम का बेस्‍टमैन ही क्‍यूं न हो।

चलते चलते- कांग्रेस डॉक्‍टर के पास गई, मगर डॉक्‍टर था नहीं, वो पास की शॉप पर पूछने गए, दुकानदार ने पूछा, आप कौन हैं, और डॉक्‍टर से क्‍यूं मिलना चाहते हैं तो कांग्रेस बोली मैं कांग्रेस हूं, देश की सबसे बड़ी पार्टी, अच्‍छा अच्‍छा दुकानदार बोला, आपको डॉक्‍टर की नहीं, मैन्टोफ्रेश, सेंटरफ्रेश व हैप्‍पीडंट की जरूरत है।

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