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fact 'n' fiction : दिग्‍गी सुर्खियों से गैरहाजिर, तो जनपथ होना पड़ा लाइन-हाजिर

बुधवार की सुबह। सोनिया अपने आवास पर गॉर्डन में टेंशन भरी मुद्रा में घूम रही थी, मानो कोई बड़ा विज्ञापन छूटने के बाद संपादक। बस इंतजार था, बयानवीर दिग्‍विजय सिंह का। कब आयें, कब लेफ्ट राइट सेंटर किया जाये।

दरवाजे खुले एक गाड़ी आई। गाड़ी में वो सवार थे, जिनका इंतजार था। पास आये, मैडम का चेहरा और आंखें लाल। साथ आये सलाहकार ने पूछा, मैडम क्‍या गुस्‍ताखी हुई ? जो इतना गुस्‍से में हैं। तुम को शर्म आनी चाहिए, अब गुस्‍ताखी पूछते हो ? अख़बार और टेलीविजन चैनलों से समझ नहीं पड़ता, आख़िर चूक कहां हो रही है ? गुस्‍से में लाल पीली मैडम ने साजो सामान समेत की चढ़ाई। मैडम आप साफ साफ बतायें बात क्‍या हुई, दिग्‍विजय सिंह का सलाहकार बोला।

नरेंद्र मोदी ने रेवाड़ी पहुंचकर हम पर हल्‍ला बोला। कोई प्रतिक्रिया नहीं, हमारी ओर से। मोदी का जन्‍मदिवस ऐसे मनाया गया, जैसे देश का कोई उत्‍सव, कोई प्रतिक्रिया नहीं हमारी ओर से। वहां नरेंद्र मोदी बयान के ड्रोन दागे जा रहा है, ताकि हमारा जनपथ ध्‍वस्‍त किया जाये, और आप गुस्‍ताखी पूछते हो ? मुझे बिल्‍कुल पसंद नहीं, पाकिस्‍तान निरंतर सीमा पर हमले करे, और आप मनमोहन सिंह जैसी चुप्‍पी धारण किये बैठे रहें।

गुस्‍ताखी, मैडम, दरअसल कुछ दिनों से दिग्‍विजय सिंह अचानक मौनव्रत में चले गये। कारण कुछ समझ नहीं आ रहा है, और हमने ऑनलाइन एचआर सिस्‍टम में सिक लिव के लिए अपलाई कर दिया था, और आपको सीसी में राहुल के साथ रखा गया था। शायद अमेरिका ने हमारा मेल आप तक पहुंचने नहीं दिया, वे अभी तक हमारी इंग्‍लिश को रीड नहीं कर पायें होंगे, वे संदिग्‍ध किस्‍म के लोग हैं, इसी कारण ब्राजीलियन राष्‍ट्रपति ने वहां का दौरा रद्द कर दिया, बेचारी के साथ भी ऐसा ही हुआ था।

अच्‍छा अच्‍छा। ठीक है। कब तक ठीक होंगे हमारे दिग्‍गी महाराज। सलाहकार ने जवाब दिया, कुछ भी कहना मुश्‍किल है, डॉक्‍टरों को समझ नहीं आ रहा है। शकील मियां बोले, कहीं किसी विरोधी पार्टी ने काला जादू तो नहीं कर दिया। मैडम ने आदेश दिया, जाओ गाड़ी से लेकर घर तक की तलाशी लो, अगर संदिग्‍ध चीज मिले तो फौर लेकर आओ। कुछ समय बाद तलाशी दल लौटा, साथ में एक टॉफी कवर लिये। कवर पर लिखा हुआ था सेंटर फ्रेश। कवर देखते ही शकील का दिमाग चकराया। मैडम समझ गया, यह काले जादू का नहीं, सेंटर फ्रेश का कमाल है। जुबान पर रखे लगाम। मैडम ने जोर से तमाचा शकील के गाल पर जड़ दिया, कमबख्‍त यह जुबान पर लगाम लगती है, हाथों पर नहीं, इससे टि्वटर तो अपडेट हो सकता था। 

जाओ, अंदर से मेटॉस मिन्‍ट लेकर आओ। शकील, मैडम गुस्‍ताखी माफ, मेटॉस मिन्‍ट तो बारा रैली पर जाने से पहले राहुल बाबा खत्‍म कर गये। ओ सिट। चलो डीएचए वाला पाउडर लाकर दूध में घोल कर पिला दीजिये। सेंटर फ्रेश की मार रहे झेल दिग्‍विजय सिंह को डीएचए वाला दूध में घोलकर पाउडर पिलाया गया, बुधवार शाम तक असर दिखा, जब दिग्‍विजय सिंह की जिज्ञासा उभरकर सामने आई, सबसे पहला सवाल दागा, अगर नरेंद्र मोदी सबसे धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हैं, तो सबसे अधिक सांप्रदायिक व्यक्ति कौन? 

बयानवीर के के जिज्ञासा भरे सवाल के बाद मैडम का कुछ ऐसा हाल था। 


कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

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fact 'n' fiction : entrance exam बाबाओं के लिए 'न बाबा न'

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आध्‍यात्‍िमक गुरूओं पर लग रहे यौन शोषण के आरोपों के कारण कहीं देश की सर्वोच्‍च अदालत वेश्‍यावृत्‍ति संबंधी पूछे गये सवाल की तरह सरकार से इस बार भी न पूछ ले कि अगर आध्‍यात्‍मिक गुरूओं द्वारा किये जा रहे यौन शोषण को रोकना संभव नहीं तो इसको वैधता दे दी जाये।

इस बात से डरते हुए देश की सरकार ने इस मामले पर गंभीरता से सोचने का विचार किया है। सरकार चाहती है कि बाबाओं को भी entrance exam से गुजरना चाहिए। इस प्रस्‍ताव पर काल्‍पनिक लोक सभा में पहली बार में नेताओं की राय मांगी गई।

मलंगनगर से सांसद मलंग दास ने सुझाव देते हुए कहा कि बाबाओं को कुछ महीनों तक रेड लाइट इलाकों में रखा जाये, और उनके व्‍यवहार पर पैनी निगाह रखी जाये। अगर बाबा बनने के इच्‍छुक आवेदनकर्ता यहां से पास होते हैं तो उनको जर्मनी के उन बीचों पर तीन महीने के लिए छोड़ा जाये, जहां पर महिलायें व पुरुष नग्‍न अवस्‍था में मौज मस्‍ती करते हैं। जर्मन में ऐसे बीच हैं, जहां पर महिलायें और पुरुष नग्‍न अवस्‍था में घूमते मिल जाते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह महिला पुरुष बराबरता के विचार को प्रत्‍साहित करने के लिये अपनाया गया तरीका है। ऐसे बीचों पर तीन महीने गुजराने पर अगर बाबा बनने की तीव्र इच्‍छा खत्‍म नहीं होती तो उनको बाबा बनने का आज्ञा पत्र दिया जाये।

ग्रामीण क्षेत्र से आये सांसद ने अपने बैल का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हमारे गांव में साँड़ से बैल बनाने के लिए साँड़ को नसबंदी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, वैसे ही बाबाओं को भी नसबंदी प्रक्रिया से गुजारना चाहिए। सांड से बैल बनाये पशु को हम भैंसों और गायों के बीच रखते हैं, वहां ऐसी शिकायत नहीं आती, लेकिन साँड़ को वहां पर रखना हमेशा रिस्‍की रहता है।

एक अन्‍य सांसद ने सुझाव दिया कि हर बार की तरह इस बार भी क्‍यूं नहीं महिलाओं के लिए लक्ष्‍मण रेखा खींच दी जाये। अगर छोटा सुखी परिवार चाहिये तो ऑपरेशन महिलायें करवाती हैं, अगर अनचाहा गर्भ ठहर जाये तो गर्भनिरोधक गोलियां, महिलाओं के लिए। बाबाओं के मामले में ऐसा किया जा सकता है कि अगर महिलायें बाबाओं से एकांत में मिलती हैं, और उनके साथ रेप होता है तो उसकी जिम्‍मेदार महिला होगी, और उसके खिलाफ बाबा के ब्रह्माचार्य तोड़ने के आरोप में केस चलाया जायेगा।
महिला सांसद ने इस बात पर कड़ा एतराज जताते हुए संसद में हंगामा कर दिया और सुझाव प्रतिक्रियाओं का दौर थम गया व लोक सभा की कार्यवाही अगले सेशन तक के लिए स्‍थगित कर दी गई।

फेक टॉक के फर्जी सूत्रों से ख़बर मिल रही है कि अगर 2014 लोक सभा चुनावों के बाद भाजपा की अगुवाई वाली सरकार सत्‍ता में आई तो नरेंद्र मोदी अपने खास समर्थक बाबा रामदेव को मंत्री पद देने के लिये एक नये मंत्रालय को अस्‍तित्‍व में लायेंगे। इस मंत्रालय का नाम धर्म मंत्रालय होगा, और नये बाबाओं को यहां से स्‍वीकृति लेनी होगी।

यहां उल्‍लेखनीय है कि दिग्‍विजय सिंह के बयान के अनुसार बाबा रामदेव के पास आज से दस साल पहले साइकिल को पंक्‍चर लगवाने के पैसे नहीं थे, लेकिन आज उनके पास 11 सौ करोड़ की संपत्‍ति है। कहीं न कहीं,  दिग्‍विजय सिंह का यह बयान युवा पीढ़ी को बाबा बनने की तरफ प्रेरित करता है, राजनीति में भी इतनी ग्रोथ मिलना मुश्‍िकल है।

बाबा के करीबी फर्जी सूत्रों से सुनने में आया है कि बाबा यौन शोषण मामले को लेकर बेहद संवेदनशील हैं, उन्‍होंने अभी से इसके लिए खाका तैयार कर लिया है। अगर कोई बाबा यौन शोषण में लिप्‍त पाया गया तो उसको अगले 5 साल तक निरंतर 24घंटे कपाल भाति  प्राणायाम व भस्त्रिका प्राणायाम करना होगा, बिना कुछ खाये पीये। अगर बीच में रूका तो उसके ऊपर एक डंडे वाला पहरेदार होगा, जो रूकने पर लठ का इस्‍तेमाल करने के लिए स्‍वतंत्र होगा।

अगर आपके पास हैं कुछ बेहतरीन सुझाव हैं तो नीचे टिप्‍पणी बॉक्‍स में लिख सकते हैं।


कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

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कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी, और एक शोध का दावा

हर साल की तरह इस बार भी, श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आज आधी रात करोड़ों हिन्दुओं के आराध्य, सोलह कलाओं तथा 64 विद्याओं के पारंगत, चक्र सुदर्शनधारी भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्मोत्सव परंपरागत और उल्लासपूर्वक मनाया जायेगा।

संयोग देखिए, जब विश्‍व का एक समुदाय भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्‍मोत्‍सव बनाने की तैयारियों में जुटा हुआ था, तब जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय का एक अध्‍ययन सामने आया, जिसमें कहा गया कि नवजात बच्चे को मां के गर्भ में रहते हुए अपनी जननी की और अन्य लोगों की आवाज़ें याद रहती हैं। शोधकर्ताओं ने शोध के दौरान 74 महिलाओं का परीक्षण किया जो 36 हफ्तों की गर्भवती थीं। उन्हें दो मिनट तक कहानियां सुनाने को कहा गया और इस दौरान गर्भ में पल रहे शिशु की धड़कनों और हरकतों का परीक्षण किया गया।

इस शोधकार्य के दौरान पता चला कि औसतन एक बच्चा एक ही शब्द 25 हज़ार बार सुन सकता है। जीवन के पहले महीने में बच्चा उस संगीत के प्रति प्रतिक्रिया दिखाता है जो उसने गर्भावस्था की अंतिम तिमाही में सुना था। आप सोच रहे होंगे, इस का कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी से क्‍या संबंध है ?

कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी का संबंध श्रीकृष्‍ण भगवान से है, और श्रीकृष्‍ण भगवान से जुड़ी एक कथा तो आपको याद होगी, जिसमें बताया जाता है कि श्रीकृष्‍ण भगवान बहन सुभद्रा को चक्रव्‍यूह भेदने का तरीका बता रहे थे, लेकिन बात के बीच में गर्भवती सुभद्रा की आंख लग गई, और वो सो गई, बात अधर में रह गई, और गर्भ में अभिमान्‍यु केवल चक्रव्‍यूह भेदने तक सुन पाया, आगे नहीं। जो शोध अब सामने आई है, यह उस बात की पुष्‍टि कर रही है, जो बहुत पहले से भारतीय धर्मों में बताई जा रही है।

इतना ही नहीं, कुछ महीने पहले एक अन्‍य संस्‍थान अमेरिकी शैक्षणिक संस्‍थान पैसिफिक लुथरीन यूनिवर्सिटी ने भी इस तरह की बात कही थी। वैसे ज्‍यादातर महिलाएं गर्भावस्‍था के दौरान गर्भ में पल रहे अंश की अठखेलियों को महसूस करती हैं। उनके उदास होने, उनके खुश होने, उनके अठखेलियां करने आदि को महसूस करती हैं। बच्‍चे की किक तो बहुत से पिताओं ने महसूस की हो गई, लेकिन अन्‍य हकरतें केवल मां महसूस कर सकती है।

यह हरकतें बच्‍चा बाहर हो रही गतिविधियों पर प्रतिक्रियाएं देते हुए करता है। कुछ महिलाएं तो यहां तक कहती हैं कि अगर गर्भ में पल रहा शिशु शांत है तो लड़का, अगर शरारती है, तो लड़की। कभी कभी ऐसे कयास स्‍टीक भी बैठते हैं।

वाह रे ममता बेनर्जी वाह

तृणमूल कांग्रेस के पश्‍िचमी बंगाल में लाल के लिए कोई जगह नहीं। लाल को सत्‍ता से बर्खास्‍त कर चुकी ममता बेनर्जी की अगुवाई वाली सरकार ने गत 5 अगस्‍त को आये सर्वोच्‍च अदालत के फैसले लाल बत्‍ती का दुरुप्रयोग रोकना चाहिए के बाद फैसला लिया कि लाल रंग की बत्‍ती को हरे में बदल दिया जाएगा। ममता बेनर्जी सरकार के इस फैसले से हैरान सीपीएम कहती है कि सरकार करने क्‍या जा रही है यह समझ से परे है। 

मदन मित्रा, खेल और परिवहन मंत्री ने कहा कि एक राज्‍यपाल की कार को छोड़कर बाकी सब पर वीआईपी लोगों की कारों पर लाल की जगह अब हरी बत्‍ती लगेगी। उनका कहना है कि पश्‍चिमी बंगाल में लाल के लिए कोई जगह नहीं है। इस संदर्भ में उनको ममता बेनर्जी से मंजूरी मिल चुकी है। इससे पहले सरकार सरकारी दीवारों और अन्‍य कार्यालयों को हरे रंग में रंग चुकी है।
 
अगर अदालती आदेश की बात करें तो अदालत ने कहा था कि लाल बत्‍ती सायरन के कारण लोग प्रभावित होते हैं, मगर पश्‍िचमी बंगाल सरकार ने लाल को हरा कर अदालती आदेश के आधे हिस्‍से पर रंग चढ़ा दिया है, पूरे पर नहीं, क्‍यूंकि लाल बत्‍ती हो या हरी। इससे फर्क नहीं पड़ता, फर्क पड़ता है अलग पहचान से। जो पहचान कल तक लाल बत्‍ती की थी, अब वे ग्रीन की हो जाएगी। रंग बदलने से फर्क तो कुछ नहीं पड़ेगा। केवल मन समझने के लिए, आंखों में धूल झोंकने के लिए काफी है। लाल तो ममता की आंखों में पहले से ही चुभता था, अदालत के आदेश ने इसको हटाने में ममता की ओर मदद कर दी। वाह रे ममता वाह।

बेटर फोटोग्राफी के कवर पेज पर धनबाद के मुकेश

वेद प्रकाश ओझा धनबाद

पेशे से तो हैं वे इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं, लेकिन कैमरे पर उनकी उंगलियां अजब कमाल दिखाती हैं. उनके घर के ड्राइंग रूम में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है जैसे आप किसी प्रोफेशनल फोटोग्राफर के स्टूडियों में हैं. राजस्थान से लेकर आस्ट्रेलिया के नजारे वहां दिखते हैं. कैमरे व तसवीरें ही मुकेश श्रीवास्तव की पूरी दुनिया है. खान सुरक्षा महानिदेशालय के निदेशक के पद से रिटायर मुकेश श्रीवास्तव की उतारी गयी तसवीरें दुनिया में प्रोफेशनल फोटोग्राफी की सभी साइट्स पर हैं. फोटोग्राफी की नामचीन मैगजीन बेटर फोटोग्राफी के अप्रैल 2013 के कवर पेज उनकी चर्चित तस्वीर थ्रस्ट (प्यास) को जगह दी है. यह अंक अभी बाजार में नहीं आया है. एमआइटी से ही कैमरे से रिश्ता मूलत: सीवान के चकरी गांव के मुकेश ने एमआइटी मुजफ्फरपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है. उन्हें प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बेंगलुरू से पीजी डिग्री हासिल करने का भी गौरव हासिल है.

हिन्‍दी दैनिक प्रभात ख़बर

मोदी के ड्रीम प्रोजेक्‍ट गिफ्ट सिटी का हुआ लोकार्पण

-: वाईआरएन सर्विस :-
गांधीनगर। मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरूवार को राज्‍य के सबसे ऊंचे इमारती प्रोजेक्‍ट गिफ्ट सिटी के अंदर बनकर तैयार हो चुके पहले 28 मंजिला टॉवर का लोकार्पण किया। हालांकि इस मौके पर मुख्‍यमंत्री ने वादा किया कि बहुत जल्‍द दूसरे टॉवर का निर्माण कार्य भी मुकम्‍मल कर दिया जाएगा। उन्‍होंने कहा, इस इमारत के प्रवेश द्वारा पर सरस्‍वती के साथ साथ लक्ष्‍मी जी भी विराजमान रहेंगी।

मोदी ने टॉवरों का लोकार्पण करने के बाद कहा कि उनका पहला सपना साकार हुआ, आधुनिक शहरों के लिए गिफ्ट सिटी एक मॉडल बनेगी। गिफ्ट सिटी को बेहतर वित्तीय सेवाओं का केंद्र बनाने के भरोसे के साथ कहा कि युवाओं के लिए हाईटेक वित्तीय सेवाओं का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
गिफ्ट सिटी के अध्यक्ष व पूर्व सचिव सुधीर मांकड ने बताया गिफ्ट का पहला टॉवर रिकार्ड 14 माह में बनकर तैयार हो गया जबकि दूसरा टॉवर अगले दो माह में तैयार हो जाएगा। दोनों टावर पर अनुमानित एक हजार करोड़ रु की लागत आएगी। गिफ्ट वन 29 मंजिला है तथा इसमें करीब 8 लाख वर्गफीट का स्पेस है। इसका 60 फीसद व्यापारिक सेवाओं के लिए जबकि शेष आवासीय, होटल, हॉस्पीटल, शॉपिंग सुविधा के काम में लिया जाएगा। प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से इससे दस लाख युवाओं को रोजगार मिल सकेगा।

गौरतलब है कि राज्‍य की राजधानी गांधीनगर के निकट लगभग 886 एकड़ भूखंड में बनने वाली गिफ्ट सिटी के निर्माण पर करीबन 78 हजार करोड़ रुपए के करीब लागत आने की संभावना है। राज्‍य सरकार ने गुजरात को वित्‍तीय सेवा क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण ग्‍लोबल फाइनेंसियल हब बनाने का संजोकर गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक सिटी का गठन किया था। गुजरात सरकार के संयुक्‍त उपक्रम जीआईएफटीसीएल एवं इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर लीजिंग एवं फाइनेंस सर्विस द्वारा विकसित की जा रही गिफ्ट सिटी में दुबई व हांगकांग के समकक्ष वित्‍त केंद्रों का निर्माण करने की योजना है।

साल 2013 हो महिला सुरक्षा को समर्पित: प्रणब

-: वाईआरएन सर्विस :-

देश के 13वें राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 2013 को महिला सुरक्षा को समर्पित करने की अपील की। उन्‍होंने अपने नव वर्ष के संदेश में कहा, 'हम ऐसे समय नववर्ष में कदम रख रहे हैं, जब राष्ट्र एक बहादुर युवती की मौत का शोक मना रहा है, जो घृणित अपराध का शिकार हो गई'।

राष्ट्रपति ने लोगों को हैदराबाद स्थित ‘राष्ट्रपति निलयम’ में उन्हें नव वर्ष की शुभकामनाएं देने न आने की अपील करते हुए 2013 को महिलाओं की सुरक्षा में सुधार और कल्याण के लिए समर्पित करने के लिए कहा। याद रहे कि  ‘राष्ट्रपति निलयम’ राष्ट्रपति के दो आधिकारिक निवासों में से एक है।

वहीं, दिल्‍ली में शोक व्‍यक्‍त कर रहे कुछ युवाओं ने भी देश वासियों से अपील की है कि वो केवल मोमबत्‍तियां न जलाएं। वो मोमबत्‍ती से ज्ञान का प्रकाश लेकर बुराई एवं हवश के अंधकार को दूर भगाएं। यह मोमबत्‍ती तो प्रकाश का प्रतीक है। मोमबत्‍ती दिखाने का अर्थ है कि देश में अंधकार फैल चुका है, अब उसको दूर करने की जरूरत है।

केआरके ने कहा, डेरा सच्‍चा सौदा प्रमुख को मायकल जैक्‍श्‍ान

-:वाईआरएन सर्विस :-
 
देश द्रोही फिल्‍म से बड़े पर्दे पर दस्‍तक देने वाले एवं अपने बड़बोलेपन के कारण इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया में सुर्खियां बटोरने वाले कमाल आर ख़ान ने अपने टि्वट खाते पर इस बार आध्‍यात्‍मिक गुरू श्री गुरमीत राम रहीम सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि

उन्‍होंने बहुत सारे नौटंकी धर्म गुरूओं को देखा है, वो सबसे डेरा सच्‍चा सौदा सिरसा के धर्म गुरू से नीचे हैं। उन्‍होंने डेरा सच्‍चा सौदा के प्रमुख श्री गुरमीत राम रहीम सिंह को माइकल जैक्‍सन के नाम से संबोधित किया। शायद उनका यह टि्वट आजकल टैलीविजन चैनलों पर आने वाले डेरा सच्‍चा सौदा सिरसा के विज्ञापन से प्रेरित है, जिसमें डेरा प्रमुख अपने अनुयायियों के साथ नाचते हुए नजर आते हैं।

याद रहे कि डेरा सच्‍चा सौदा सिरसा अनुयायियों ने आगे बढ़कर अपना योगदान दिया है, जब जब देश में किसी कुदरती आपदा ने मानवी जीवन को अस्त व्‍यस्‍त किया है। मगर कुछ समय से सिख समुदाय एवं डेरा प्रेमियों के बीच टकराव हो रहा है, जो बेहद चिंता का विषय है।

यो यो हनी सिंह का विरोध

-: वाईआरएन सर्विस :-

दिल्‍ली से सटे गुड़गांव में होगा यो यो हनी सिंह का प्रोग्राम। यो यो हनी सिंह अपने अश्‍लील गायन के चलते अक्‍सर आलोचकों के निशाने पर रहे हैं। अब लेखक कल्‍पना मिश्र ने उनके अश्‍लील गीतों का विरोध करते हुए गुड़गांव में होने वाले प्रोग्राम को रोकने के लिए संबंधित होटल को पत्र लिखा है, मगर उक्‍त पत्र के बावजूद उक्‍त प्रोग्राम पहले से तय किए समय एवं स्‍थल पर होगा।

प्रोग्राम संबंधी जब आयोजकों से संपर्क किया गया तो सामने से बात कहते हुए एक महिला आयोजक ने कहा, इस प्रोग्राम को रद्द नहीं किया गया एवं यह प्रोग्राम अपने निर्धारित समय पर होगा।

जहां एक तरफ यो यो हनी सिंह के अश्‍लील गीतों को यू ट्यूब पर प्रसारित किया जा रहा है, जिनमें बलात्‍कारी एवं पटियाला सलवार शामिल हैं, जो बेहद अश्‍लील भाषा में लिखे गए हैं, वहीं दूसरी तरफ यो यो हनी सिंह अपने टि्वटर खाते पर दिल्‍ली गैंगरेप को लेकर अफसोस जाहिर कर रहे हैं।

यो यो हनी सिंह के कभी सबसे ज्‍यादा नजदीक रहे गायक जस्‍सी जसराज, आज हनी सिंह का सबसे बड़ा विरोधी हैं, क्‍यूंकि यो यो हनी सिंह ने पैसे कमाने के चक्‍कर में पंजाबी संगीत को दल दल की तरफ धकेल दिया। पंजाब में जितना नकारात्‍मक लेखन हनी सिंह के बारे में हुआ, शायद ही किसी गायक के हिस्‍से आया हो।

इससे पूर्व दिल्‍ली के एक हिन्‍दी दैनिक ने भी यो यो हनी सिंह पर अश्‍लील गीतों को लेकर एक टिप्‍पणी की थी, मगर अभी तक इस मामले में हनी सिंह की ओर से कोई टिप्‍पणी नहीं की गई।

''दामिनी'' को ''गूगल'' की श्रद्धांजलि

-: वाईआरएन सर्विस :-
 
खुद सदा के लिए सो कर पूरे हिन्‍दुस्‍तान को जगाने वाली अस्‍मरणीय दामिनी को पूरे हिन्‍दुस्‍तान ने ही नहीं बल्‍कि विश्‍व के सबसे बड़े सर्च इंजनों में शामिल गूगल ने भी मोमबत्‍ती जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। गूगल होम पेज पर नजर आने वाली मोमबत्ती पर जैसे ही माऊस जाता है तो वहां पर ''इन मैमोरी ऑफ द दिल्‍ली ब्रेवहार्ट'' लिखा मिलता है।

पीड़िता के साथ 16 दिसंबर को एक चलती बस में 6 पुरुषों ने गैंग रेप करने के बाद उसे सड़क किनारे फेंक दिया था। और उसके बाद उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया। वहां उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और गत शनिवार तड़के उसकी मौत हो गई।

इस घटना ने पूरे हिन्‍दुस्‍तान को महिलाओं के प्रति हो रहे अत्‍याचारों के खिलाफ एकसुर किया। इस आंदोलन ने केंद्र सरकार की जड़ों को पूरी तरह हिलाकर रख दिया। यह आजादी के बाद पहला ऐसा जनाक्रोश था, जिसका नेतृत्‍व किसी ने नहीं किया, बल्‍कि आम लोगों ने किया।

समाचार पत्रों में 'दिल्‍ली जनाक्रोश'

पूरा दिन हिन्‍दी इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया ने दिल्‍ली जनाक्रोश को कवरेज दी। इस जनाक्रोश को घरों तक पहुंचाया। वहीं अगले दिन सोमवार को कुछेक हिन्‍दी समाचार पत्रों ने दिल्‍ली जनाक्रोश को सामान्‍य तरीके से लिया, जबकि कुछेक ने जनाक्रोश को पूरी तरह उभारा। भारतीय मीडिया के अलावा दिल्‍ली जनाक्रोश पर हुए पुलिस एक्‍शन को विदेश मीडिया ने भी कवरेज दिया।

इंग्‍लेंड के गॉर्डियन ने अपने अंतर्राष्‍ट्रीय पृष्‍ठ पर 'वी वांट जस्‍टिस' एवं 'किल देम' जैसे शब्‍द लिखित तख्‍तियां पकड़ रोष प्रकट कर रही लड़कियों की फोटो के साथ, किस तरह पुलिस ने उनको खदेड़ने के लिए आंसू गैस एवं पानी की बौछारों का इस्‍तेमाल किया, समाचार प्रकाशित कर इंग्‍लेंड की जनता को भारतीय पुलिस रवैया से अवगत करवाया।

वहीं, न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स ने अपने डिजीटल संस्‍कार में दिल्‍ली जनाक्रोश की ख़बर को 'रोष प्रदर्शन हिंसा में बदला' के शीर्षक तले प्रकाशित किया। इस रिपोर्ट अंदर रविवार को हुए पूरे घटनाक्रम का बड़ी बारीकी से लिखा गया है। ख़बर में बताया गया कि किस तरह लोग दिल्‍ली में एकत्र हुए। किस तरह इस जनाक्रोश में राजनीतिक पार्टियों ने घुसना शुरू किया एवं किस तरह शक्‍ति बल के जरिए इस प्रदर्शन को दबाने की कोशिश की गई। उन्‍होंने पुलिस के प्रति रोष प्रकट करते हुए कुछ प्रदर्शनकारियों की बातों को भी विशेषता से प्रकाशित गया, जैसे के पुलिस से जनता का सवाल करना, आप जहां क्‍यूं नहीं आए, हमारे साथ क्‍यूं नहीं खड़े हुए एवं जो हुआ क्‍या आप से गुस्‍साए नहीं।

पाकिस्‍तान द डॉन तो निरंतर दिल्‍ली घटनाक्रम को प्रकाशित कर रहा है। कल बाद दोपहर से द डॉन ने इस ख़बर को अपने होमपेज पर नम्‍बर तीन पर रखा, जबकि मुख्‍य लीड में पाकिस्‍तान नेता की ख़बर थी, जिनकी एक बम्‍ब धमाके में मौत हो गई, जिनको कल पूरे रीति रिवाजों के साथ खाके सुपुर्द किया गया।

अगर भारतीय समाचार पत्रों की बात करें तो अमर उजाला ने सचिन की ख़बर को प्रमुखता से लिया, लेकिन अख़बार के पहले तीन कॉलम दिल्‍ली जनाक्रोश को दिए। वहीं राजस्‍थान पत्रिका ने सचिन की ख़बर को नम्‍बर दो पर रखते हुए दिल्‍ली जनाक्रोश की ख़बर को 'छावनी बना इंडिया गेट' शीर्षक के तले प्रमुखता से प्रकाशित किया।

कड़के की ठंड में उबलती रही दिल्‍ली के शीर्षक तले दैनिक जागरण ने इस घटनाक्रम से जुड़ी तमाम ख़बरों को प्रकाशित किया एवं अंत बॉटम में 'क्रिकेट के भगवान ने किया एकदिवसीय का परित्‍याग' से सचिन तेंदुलकर को भी स्‍पेस दिया।

वहीं, दैनिक हिन्‍दुस्‍तान ने एक भावुक करती छवि के साथ 'डंडे बरसे, बिगड़े हालत' ख़बर को प्रमुखता से प्रकाशित किया।

अंत मीडिया कवरेज पर राज्‍य सभा चैनल पर मीडिया मंथन में कई तरह के सवाल उठाए गए। इसमें कहा गया कि मीडिया ने जनाक्रोश को भड़काने का प्रयास किया। मीडिया भी कहीं न कहीं इस गुस्‍से की लय में बह गया। अंत कोई कुछ भी कहे। देश की सरकार को इस झटके की जरूरत थी। इस मीडिया ने जो जनाक्रोश को कवरेज दिया, वो काफी सराहनीय थे, वरना दिल्‍ली की क्ररूरता जो कैमरों के सामने भी कम न हुई, वो कैमरों से परे कितना कहर बरपाती, इसका अंदाजा लगाना बेहद मुश्‍किल है।

चलते चलते इतना कहूंगा। हमारी इज्‍जत गई, अब तो शर्म करो दिल्‍ली के हुक्‍मरानों।

तो मोदी का सिर मांग लेता मीडिया

सुषमा स्‍वराज  टि्वट के जरिए लोगों को संबोधित करते हुए कहती हैं, 'मैं आपकी भावनाओं को समझती हूं, आपके गुस्‍से का सत्‍कार करती हूं, हमें कुछ वक्‍त दें, हम बातचीत कर रहे हैं, जल्‍द ही किसी नतीजे पर पहुंचेंगे'। उधर, तस्‍लीमा नस्‍रीन  लिखती हैं, 'यह औरतों की सुरक्षा का सवाल नहीं, केवल औरतों के लिए नहीं, बल्‍कि मानव अधिकारों का सवाल है, हर किसी को इस मार्च में शामिल होना चाहिए'।

वहीं आजसमाज  ने टि्वट पर लिखा है कि अगर यह मसला गुजरात के अंदर बना होता तो मीडिया अब तक नरेंद्र मोदी का सिर मांग चुका होता, लेकिन अभी तक मीडिया एवं अन्‍य पार्टियों ने शीला दीक्षित से नैतिकता के तौर पर अस्‍तीफा देने जैसे सवाल नहीं उठाए।

वहीं कुछ मित्रों ने फेसबुक पर लिखा है कि लोगों का जनाक्रोश अब किसी दूसरी तरफ मोड़ खाता नजर आ रहा है, ऐसे में किसी अनहोनी के होने से पहले लोगों को सतर्क होते हुए वापिस जाना चाहिए।

वहीं, मीडिया के रुख पर गुस्‍साए अभिनेता परेश रावल अपने टि्वट पर लिखते हैं, ''ख़बर कमरे में बैठकर लोगों के गुस्‍से को गलत बताने वाले पत्रकारों को घटनास्‍थल पर जाकर आंसू गोलों, पानी की ठंडी बौछारों का सामना करना चाहिए, और फिर बताएं प्रदर्शनकारियों का गुस्‍सा गलत या सही।

नरेंद्र मोदी को मिला 'जन समर्थन'

-: वाईआरएन सर्विस :-

तीन बार बतौर मुख्‍यमंत्री अपनी जिम्‍मेदारी निभा चुके नरेंद्र मोदी पर गुजरात की जनता ने एक बार फिर विश्‍वास जताते हुए अपना फैसला सुना दिया।

भले चुनाव नतीजों में पूरा गुजरात भाजपा के नारे की तरह एकमत गुजरात नजर न आया हो, लेकिन नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा 115 सीटों पर जीतकर सत्‍ता में लौट रही है।

भाजपा से अलग हुए केशुभाई पटेल की अगुवाई वाली गुजरात परिवर्तन पार्टी चुनावों में दो सीटें जीतकर अपना खाता खोलने में सफल रही। केशुभाई की अगुवाई में भाजपा दो बार सत्‍ता में आई थी, लेकिन चली नहीं, उसके बाद ही नरेंद्र मोदी को भाजपा ने कामन सौंपी थी।

उधर, सत्‍ता की राह देख रही कांग्रेस पार्टी को 61 सीटों पर विजय मिली, जो कांग्रेसी नेताओं के अनुमान के हिसाब से बिल्‍कुल ठीक है, मगर इन चुनावों में कांग्रेस के लिए बेहद बुरी बात यह है कि जिन कंधों पर वो चुनाव लड़ रही थी, वो कंधे कमजोर निकले, विपक्ष नेता अर्जुन मोढ़वाडिया एवं कांग्रेस प्रमुख शक्‍ति सिंह गोहिल।

भाजपा को सौराष्‍ट्र कच्‍छ, दक्षिण गुजरात एवं मध्‍य गुजरात से बेहद सफलता मिली, लेकिन नरेंद्र मोदी के गृह क्षेत्र उत्‍तर गुजरात से नरेंद्र मोदी की भाजपा केवल 27 में से केवल 13 सीटें निकाल पाई। इस क्षेत्र में नरेंद्र मोदी को प्रफुल्‍ल पटेल, जयनारायण व्‍यास एवं फकीरभाई वाघेला जैसे मंत्रियों की सीटें गंवानी पड़ी।

गुजरात को मिली एनएसजी क्षेत्रीय हब की मंजूरी

-: वाईआरएन सर्विस :-

गुजरात में एनएसजी क्षेत्रीय हब स्‍थापना करने के लिए केंद्र से मंजूरी मिल गई है। गुजरात सरकार इसकी स्‍थापना के लिए जगह देख रही है। गांधीनगर एवं अहमदाबाद के बाहरी इलाकों में इसके स्‍थापित होने की उम्‍मीद की जा रही है।
 
गौरतलब है कि गत 12 दिसम्‍बर को गृह राज्‍य मंत्री श्री आरपीएन सिंह ने राज्‍यसभा में पूछे गए एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि गुजरात सरकार से अनुरोध प्राप्‍त होने पर, गृह मंत्रालय ने गुजरात में राष्‍ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के क्षेत्रीय हब की स्‍थापना करने के लिए अपने ‘सिद्धांत रूप में’ अनुमोदन की सूचना गुजरात सरकार को दे दी है, बशर्ते राज्‍य सरकार एनसीजी द्वारा उपयुक्‍त पाए गए स्‍थान पर नि:शुल्‍क जमीन उपलबध कराए।

एक अंग्रेजी समाचार पत्र के अनुसार मंत्री सिंह ने हब में कमांडों समूहों की संख्‍या राष्‍ट्रीय सुरक्षा के हित में प्रकट करते हुए कहा कि गुजरात सरकार हब के लिए गांधीनगर के नजदीक 20 से 30 एकड़ जगह देने के लिए योजना बना रही है, हालांकि कुछ अन्‍य गतिविधियों के लिए अहमदाबार के बाहरी इलाके में भूमि लेने संबंधी भी विचार किया जा रहा है।

पत्र सूचना कार्यालय की वेबसाइट के अनुसार सरकार ने मानेसर, हैदराबाद, कोलकाता, चेन्‍नई और मुम्‍बई में राष्‍ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के बेस/हबों की स्‍‍थापना पहले ही कर दी है और उसे चालू भी कर दिया है। इन हबों/‍बेस में कमांडों समूहों की संख्‍या/नफरी राष्‍ट्रीय सुरक्षा के हित में प्रकट नहीं की जा सकती।

चुनाव संपन्‍न, मोदी को मिलेगा बहुमत

-: वाईआरएन सर्विस :- 
गुजरात विधान सभा चुनावों के नतीजे तो 20 दिसम्‍बर को आएंगे, लेकिन यह भविष्‍यवाणी तो एग्जिट पोल गुरू कर रहे हैं। विधान सभा चुनाव संपन्‍न होने के बाद सामने आए एग्‍जिट पोल में नरेंद्र मोदी को 120 से 130 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जबकि आम राजनीति में रुचि रखने वाले लोगों की भी यह राय है। मगर कुछेक लोगों का मानना है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा इस बार अनुमान से ज्‍यादा सीटें खींचने में पूरी तरह सफल रहेगी।

केशु बापा के अलग पार्टी बनाने से नरेंद्र मोदी को झटका लगने की संभावना से इंकार तो नहीं किया जा सकता, लेकिन इससे नरेंद्र मोदी को कम और कांग्रेस को ज्‍यादा झटका लगेगा। इस बार हुई रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग नरेंद्र मोदी की जीत का संकेत देती है। एग्‍जिट पोलों की मानें तो कांग्रेस का इस बार बुरा हश्र होने वाला है।

भारत में प्रसारित होने वाले अलग अलग न्‍यूज चैनलों ने अलग अलग अनुमान लगाएं हैं, मगर सभी न्‍यूज चैनलों ने नरेंद्र मोदी को बहुमत मिलने की बात कही है।

पंजाबियत के 'मान' को 'डी लिट' का सम्‍मान

-: वाईआरएन सर्विस :-

पंजाबियत के मान पंजाबी गायक एवं अभिनेता गुरदास मान को पटियाला स्‍थित पंजाबी यूनिवर्सिटी में गत शुक्रवार को आयोजित हुए 36वें वार्षिक दीक्षांत समारोह के दौरान पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटिल ने डॉक्टरेट ऑफ लिटरेचर (डी-लिट) की डिग्री सम्‍मानित किया।

इससे पहले 2010 में ब्रिटेन के वोल्वरहैम्टन विश्वविद्यालय ने पंजाबी गायक गुरदास मान को विश्व संगीत में डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया था। गुरदास मान के संगीत कैरियर की शुरूआत 1980 में जालंधर दूरदर्शन पर नववर्ष के कार्यक्रम में गाए 'दिल दा मामला है' गीत से हुई। इस गीत की सफलता ने उनको संगीत की दुनिया में उतरने के लिए मजबूर कर दिया।

उनका परिवार नहीं चाहता था कि वो संगीतक दुनिया में कदम रखें, लेकिन आज केवल उनका परिवार ही नहीं, पूरा पंजाब उन पर गर्व करता है, क्‍योंकि उन्‍होंने पंजाबी संगीत को देश विदेश में लोकप्रिय ही नहीं बनाया, बल्‍कि उन्‍होंने हमेशा साफ सुथरी गायकी को प्राथमिकता दी।

केरल की छवि पर ब्‍लैक डॉट्स

-: वाईआरएन सर्विस :-

चलती बस में हुए गैंग रेप की घटना ने जहां दिल्‍ली पुलिस प्रशासन पर एक बार फिर से सवालिया निशान लगाएं हैं, वहीं केरल में लगातार सामने आ रही बलात्‍कार की घटनाओं ने केरल की छवि को धूमिल कर दिया है।

चौदह वर्षीय एक लड़की ने अपने भाई एवं उसके दोस्‍त पर बलात्‍कार करने का आरोप लगाया है। पुलिस इस मामले में दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया है। पीड़िता के अनुसार वो पिछले दो सालों से निरंतर उसके साथ जबरी शारीरिक संबंध बना रहे थे।

यह मामला उस समय सामने आया जबकि पुलिस ने पीड़िता को एक होटल में देर रात कुछ लोगों के साथ पकड़ा था एवं पुलिस पूछताछ की। पुलिस अधिकारियों का कहना है, लड़की को कर्नाटका के अलग अलग स्‍थानों पर रखकर उसके साथ रेप किया गया है। 

केरल में इस तरह की घटनाएं निरंतर सामने आ रही हैं। कुछ हफ्ते पहले इरनाकुलुम के पारावूर में 17 वर्षीय लड़की ने अपने पिता एवं अन्‍य दर्जन भर लोगों पर जबरदस्‍ती करने का आरोप लगाया था। लड़की के अनुसार वो उसके साथ कई महीनों से इस तरह कर रहे थे।

इस तरह कुछ दिन पूर्व एक अधेड़ उम्र के पिता द्वारा अपनी छह वर्षीय बच्‍ची के साथ यौन शोषण करने का मामला सामने आया था जबकि कन्‍नूर जिले के धर्मधाम नामक जगह पर एक 13 वर्षीय लड़की ने अपने पिता, भाई एवं अंकल पर कई महीनों तक रेप करने का आरोप लगाया था।

इस तरह की घटनाएं कहीं न कहीं केरल की कुदरती सुंदरता की छवि पर ब्‍लैक डॉट्स का काम कर रही हैं।

जोश में नजर आए 'नरेंद्र मोदी'

-: वाईआरएन सर्विस :-

गुजरात विधान सभा चुनावों में तीसरी बार जीत का परचम लहराने के लिए संघर्षरत गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी आज दूसरे चरण के मतदान दौर में अपना मत देने के बाद 'जोश' में नजर आए। नरेंद्र मोदी ने आज सुबह करीबन पौने दस बजे राणिप स्‍थित एक स्‍कूल में स्‍थापित इलेक्‍शन बूथ पर अपनी वोट डाली।

वोट करने के बाद नरेंद्र मोदी पूरे जोश ए खरोश में नजर आए। उनके चेहरे पर जोश देखने लायक था। वो बूथ से अपनी गाड़ी तक विक्‍ट्री चिन्‍ह दिखाते हुए आए। उन्‍होंने कहा, 'संतोष है कि गुजरात के में चुनाव शांति पूर्ण संपन्‍न हो रहे हैं, एवं लोग अपनी जिम्‍मेदारी समझते हुए इलेक्‍शन बूथों पर पहुंचकर, अपने मत अधिकार का इस्‍तेमाल कर रहे हैं'।

पूरे आत्‍मविश्‍वास के साथ नरेंद्र मोदी ने कहा कि भाजपा फिर से सत्‍ता सम्‍हालेगी, क्‍यूंकि भाजपा ने जो विकास की गाथा गुजरात में लिखी है, वो भाजपा को फिर से विजय बनाने में अहम रोल अदा करेगी। गौरतलब है कि आज नरेंद्र मोदी समेत 820 उम्‍मीदवारों की किस्‍मत ईवीएम मशीनों में बंद होने वाली है। अभी तक करीबन 60 फीसदी मतदान हो चुका है। नरेंद्र मोदी मणिनगर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जिनका मुकाबला निलंबित आईपीएस अफसर संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट से है, जिसको कांग्रेस ने टिकट दिया है। इस सीट पर कांग्रेस को जीजीपी का समर्थन मिला हुआ है।

'मोदीनु माफिया राज' पुस्‍तक बाजार में

-:वाईआरएन सर्विस:-

गुजरात विधान सभा चुनाव 2012 का प्रथम दौर आज संपन्‍न हुआ जबकि दूसरे दौर के लिए मतदान 17 दिसम्‍बर को होने वाला है। इसी दौरान मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को जनता में बिगाड़ने के लिए कुछ व्‍यक्‍तियों ने 'मोदीनु माफिया राज' नामक पुस्‍तक को बाजार में धकेल दिया।

इसके कवरपेज पर घबराहट वाले नरेंद्र मोदी, और दूसरी तरफ इनसेट में उनकी कथित पत्‍नी यशोद्धाबेन मोदी की पिक्‍चर लगाई है। इसके नीचे रोष प्रदर्शनों की फोटो को मिक्‍स कर प्रकाशित किया गया है। इस किताब के अंतिम पेज पर उन भाजपा नेताओं की तस्‍वीरें हैं, जो भाजपा को छोड़कर चले गए। इस किताब में नरेंद्र मोदी की तुलना दाऊद अब्राहिम से की गई है, जिनके आईक्‍यू को लेकर भाजपा अध्‍यक्ष नितिन गड़करी मुश्किल में आ गए थे।

इस पुस्‍तक पर प्रकाशक के तौर पर गुजरात महासंघ, प्रमुख सवाई मार्ग, संस्‍कार सोसायटी के समीप, सुरेंद्रनगर गुजरात लिखा है, और यह किताब नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र मणिनगर में खूब धड़ल्‍ले से सप्‍लाई हो रही है।

गुजरात विस चुनाव का प्रथम चरण संपन्‍न, 68 फीसद मतदान

-:वाईआरएन सर्विस:-
 
गुरूवार सुबह आठ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक सौराष्‍ट्र, दक्षिण गुजरात और अहमदाबाद जिले की चार विधान सभा सीटों पर पहले दौर का मतदान संपन्‍न हुआ। पहले दौर के मतदान में 87 विधान सभा सीटों पर लगभग 68 फीसद मतदान हुआ।

राजनीतिक जानकारों की माने तो दक्षिण गुजरात की पांच एवं सौराष्‍ट्र की 48 सीटों पर गुजरात परिवर्तन पार्टी का प्रभुत्‍व है। इस पार्टी का गठन गुजरात के पूर्व मुख्‍यमंत्री केशुभार्इ पटेल द्वारा किया गया है, जो भाजपा से इस लिए अलग हो गए थे, क्‍यूंकि नरेंद्र मोदी का बढ़ा प्रभुत्‍व उनकी छवि को पीछे धकेल रहा था।

इस क्षेत्र के नतीजे यह तय करेंगे कि आख़िर किस की साख़ ज्‍यादा मजबूत है एक मुख्‍यमंत्री की या एक पूर्व मुख्‍यमंत्री की, जो एक बड़ी पार्टी को छोड़कर अपने दम पर चुनाव लड़ रहे हैं।