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इससे बड़ी दुर्घटना क्या होगी?


लेखक कुलवंत हैप्पी
जिन्दगी सफर थी, लेकिन लालसाओं ने इसको रेस बनाकर रख दिया। जब सफर रेस बनता है तो रास्ते में आने वाली सुंदर वस्तुओं का हम कभी लुत्फ नहीं उठा पाते, और जब हम दौड़ते दौड़ते थक जाते हैं अथवा एक मुकाम पर पहुंचकर पीछे मुड़कर देखते हैं तो बहुत कुछ छूटा हुआ नजर आता है। उसको देखकर हम फिर पछताने लगते हैं, और हमें हमारी जीत भी अधूरी सी लगती है। अगर जिन्दगी को सफर की तरह लेते और रफतार धीमे रखते तो शायद मंजिल तक पहुंचने में देर होती, लेकिन दुर्घटना न होती। उससे बड़ी दुर्घटना क्या होगी, रूह का दमन हो जाए, और हड्डियों का साँचा बचा रह जाए। जिन्दगी जैसे खूबसूरत सफर को हम दौड़ बनाकर रूह का दमन ही तो करते हैं, जिसका अहसास हमको बहुत देर बाद होता है। जो इस अहसास को देर होने से पहले महसूस कर लेते हैं, वो इस सफर के पूर्ण होने पर खुशी से भरे हुए होते हैं, उनके मन में अतीत के लिए कोई पछतावा नहीं होता।

पिछले दिनों बीबीसी की हिन्दी वेबसाईट पर रेणु अगाल का भूटान डायरी सिरलेख से लिखा एक लेख पढ़कर इसलिए अच्छा लगा क्योंकि उन्होंने अपने लेख के मार्फत दुनिया के विकासशील देशों को आईना दिखाने की कोशिश की, जो आर्थिक मजबूती की होड़ में अपने असली धन (प्रकृति) को बर्बाद किए जा रहे हैं।

बीबीसी संवाददाता रेणु अगाल लिखती हैं कि दक्षिण एशिया के ज़्यादातर देशों में अभी तापमान ने कीर्तिमान खड़ा कर रखा है, ऐसे में पहाड़ों से घिरे खुशनुमा मौसम का लुत्फ़ ही अलग है, और भूटान के माहौल का मज़ा सभी अतिथि उठाते दिख रहे है। यहाँ अपने पारंपरिक कपड़ों, पुराने डिजाइन की लकड़ी पर साज सज्जा कर बनाए मकान सभी सहेज के रखे गए हैं। यहाँ तक की सरकार अपनी देश की पहचान बनाए रखने और अपने संस्कृति को बचाने के लिए ज्यादा पर्यटकों को भी नहीं आने देती। हर सैलानी को दो सौ डॉलर रोज़ देने पड़ते है यानि दुनिया का सबसे महंगा पर्यटक स्थल आप भूटान को कह सकते है। यहाँ तक की पड़ोसी नेपाल से आने वाले लोगों को भी यहाँ ज्यादा पसंद नहीं किया जाता, पर भारतीयों को न तो यहाँ डॉलर देने पड़ते है और न ही उन्हें वैमनस्य से लोग देखते है।

थोड़े की ज़रूरत है...

यहाँ की सरकार का फ़लसफा थोड़ा अलग है. थोड़ा है, थोडे की ज़रूरत है और थोड़ा ही काफ़ी है। भूटान सरकार सीमित संख्या में पर्यटकों को आने देती है। सोच के देखिए कि अगर आपका नज़रिया ऐसा हो जाए तो न आप पैसे के पीछे भागेंगे, न आप जीवन की दौड़ में किसी को मात देने में व्यस्त होंगे। आप कमाएँगे और मौज करेंगे। न ब्लड प्रेशर, न दिल का दौरा, बस होठों पर मुस्कान और गुलाबी गाल। ऐसे जीवन का मजा लेने के लिए ही सही आप भूटान आ सकते हैं और अगर नहीं तो अगली बार जिन्दगी की मार धाड़ में जुटने के पहले सोचिएगा क्या वाकई यह सब जरूरी है।