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महात्मा गांधी के एक श्लोक ''अहिंसा परमो धर्म'' ने देश नपुंसक बना दिया!

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जब खुद में लड़ने का दम नहीं था तो गीता के श्लोक को आधा करके लोगों को नपुंसक बना दिया। भारत में अहिंसा के पुजारी का ढोंग करने वाले महात्मा गाँधी ने हिन्दुओं की सभा में हमेशा यही श्लोक पढ़ते थे लेकिन हिन्दुओं को कायर रखने के लिए गांधी इस श्लोक को अधूरा ही पढ़ता था।


ऐसी सैंकड़ों बातें आपको इंटरनेट पर तैरती हुई मिल जाएंगी, जब आप ''अहिंसा परमो धर्म:'' श्लोक को कॉपी पेस्ट करके गूगल सर्च में खोजने निकलेंगे। इस साहित्य को लिखने वाले आपको बताएंगे कि ''अहिंसा परमो धर्म'' अधूरा श्लोक है जबकि पूरा श्लोक तो 'अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च:' है, जिसका अर्थ है कि अहिंसा परम् धर्म है, तो धर्म के लिए हिंसा भी परम् धर्म है।

महात्मा गांधी का शरीर तो नत्थू राम गोडसे ने गोलियों से मार डाला। अब गोडसे के अनुयायी की ओर से महात्मा गांधी के विचारों को मारने की कोशिश पुरजोर चल रही है। इसमें कोई दो राय नहीं कि सोशल मीडिया पर कॉपी पेस्ट चलन के कारण उनके सफल होने की संभावनाएं ज्यादा हैं।

दिलचस्प बात तो यह है कि नरफत की आबोहवा पैदा करने के लिए लिखने वाले बेहतर जानते हैं …

क्या सच में पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 44 रुपये प्रति लीटर है?

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भारत के कुछ हिस्सों में पेट्रोल की कीमत 80 रुपये के आंकड़े को पार कर गई। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार की आलोचना हो रही है। लेकिन, सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब सामने नहीं आ रहा है। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार बढ़ती वाहन तेल कीमतों को एक झटके बदल नहीं सकते।


इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ संदेश वायरल हो रहे हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि अगर आपको भारत में बढ़ती पेट्रोल और डीजल कीमतों से दिक्कत है, तो पाकिस्तान चले जाओ, पाकिस्तान में तेल की कीमत 44 रुपये प्रति लीटर है। हालांकि, हर किसी की कीमत अलग अलग हैं। कोई 404 रुपये, तो कोई 26 रुपये तक पेट्रोल की कीमत बता रहा है।

लेकिन, क्या सच में पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 40 रुपये प्रति लीटर है? यदि देश के हिसाब से बात करूं तो बिलकुल ऐसा नहीं है। पाकिस्तान में भी पेट्रोल डीजल के भाव 70 रुपये की सीमा के पार चल रहे हैं। 30 अगस्त 2017 को द आॅयल एंड गैस रेगुलेटरी अथाॅरिटी ने पाकिस्तानी पेट्रोलियम मंत्रालय को डीजल पेट्रोल के भाव बढ़ाने की सिफारिश की है।

इस सिफारिश पत्र में कहा गया है कि डीजल में 0.7 रुपये और …

सरदार पटेल की बिखरती भारतमाला

सरदार पटेल, एक लौह पुरुष। जिसने बिखरते हुए भारत को एक लड़ी में पिरोने का कार्य किया था। जब भारत को आजाद करने का फैसला अंग्रेजों ने लिया तो भारतीय नेतृत्व के आगे सबसे बड़ी चुनौती थी, देश के बिखराव को रोकना, क्यूंकि अंग्रेजों ने राजा महाराजाओं को वे सब अधिकार वापस कर दिए थे, जो उनके पास अंग्रेजों के आने से पूर्व थे। अब राजे महराजे अपनी मनमर्जी मुताबिक फैसला ले सकते थे। अब राजे महाराजाओं पर निर्भर था, वे भारत का हिस्सा बनें या ना। भारत आजाद होने की कगार पर था, लेकिन समस्याओं का एक पहाड़ उसके सामने खड़ा था, जिस पर पार पाना जरूरी था। ऐसे में भारत के अंतिम वायसराय माउंटबेटन के साथ मिलकर वल्लभभाई पटेल ने एक योजना बनाई, जो भारत को एक डोरी में पिरोने की थी। देश की पांच सौ से अधिक रियासतों का भारत में विलय करना आसान काम नहीं था, जब जिन्ना जैसा व्यक्ति अलग देश की मांग लिए खड़ा हो। ऐसे में सरदार पटेल ने एक लौह पुरुष की भूमिका निभाई, आज जो भारत हमारे सामने है। उसमें बहुत बड़ा योगदान लौह पुरुष सरदार पटेल का है। अगर पटेल न होते तो शायद जोधपुर रियासत आज पाकिस्तान का हिस्सा होती, देश के कई हिस्से अलग…

दिलों में नहीं आई दरारें

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पिछले कई दिनों से मेरी निगाह में पाकिस्तान से जुड़ी कुछ खबरें आ रही हैं, वैसे भी मुझे अपने पड़ोसी मुल्कों की खबरों से विशेष लगाव है, केवल बम्ब धमाके वाली ख़बरों को छोड़कर। सच कहूँ तो मुझे पड़ोसी देशों से आने वाली खुशखबरें बेहद प्रभावित करती हैं। जब पड़ोसी देशों से जुड़ी किसी खुशख़बर को पढ़ता हूँ तो ऐसा लगता है कि अलग हुए भाई के बच्चों की पाती किसी ने अखबार के मार्फत मुझ तक पहुंचा दी। इन खुशख़बरों ने ऐसा प्रभावित किया कि शुक्रवार की सुबह अचानक लबों पर कुछ पंक्तियाँ आ गई।
दिल्ली से इस्लामाबाद के बीच जो है फासला मिटा दे, मेरे मौला, नफरत की वादियों में फिर से, मोहब्बत गुल खिला दे, मेरे मौला,
सच कहूँ, हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच अगर कोई फासला है तो वो है दिल्ली से इस्लामाबाद के बीच, मतलब राजनीतिक स्तर का फासला, दिलों में तो दूरियाँ आई ही नहीं। रिश्ते वो ही कमजोर पड़ते हैं, यहाँ दिलों में दूरियाँ आ जाएं, लेकिन यहाँ दूरियाँ राजनीतिज्ञों ने बनाई है। साहित्यकारों ने तो दोनों मुल्कों को एक करने के लिए अपनी पूरी जान लगा दी है। अगर दिलों में भी मोहब्बत मर गई होती तो शायद श्री ननकाणा साहिब जाने वाले सिखों …