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जनता की पसंद, एक बुद्धू तो दूसरा बांदर

देश में दो नाम पिछले लम्‍बे समय से चर्चाओं का केंद्र बने हुए हैं। दोनों को देश का भावी प्रधान मंत्री बनाने का सपना भारतीय जनता संजो रही है। मगर हैरानी की बात है कि जनता की पसंद एक बुद्धू तो दूसरा बांदर है। यकीन नहीं आता तो आप सुब्रमण्यम स्वामी का बयान सुनिए और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा बरखा सिंह का बयान सुनिए।

गौर तलब है कि :-

जनता पार्टी प्रमुख सुब्रमण्यम स्वामी ने गुरूवार को एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी पर एक समाचार पत्र को 90 करोड़ का कर्ज देने की बात कहते हुए 1600 करोड़ की संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया था। इस बयान के बाद राहुल गांधी ने कहा कि वो स्‍वामी पर मानहानि का दावा करेंगे। राहुल का बयान आते ही कानून की मदद से सोनिया गांधी के रास्‍ते में मुश्‍िकलें खड़ी करने वाले स्‍वामी ने राहुल गांधी को 'बुद्धू' कहा है। स्वामी ने ट्विटर पर राहुल को बुद्धू लिखते हुए कहा, 'इस (बुद्धू को) मानहानि के कानून पर जानकारी लेने की जरूरत है। पब्लिक सर्वेंट एवं सांसद होने के नाते उन्हें यह साबित करना होगा कि जो कुछ मैंने कहा है, वह झूठ है, न कि मुझे यह साबित करना होगा कि जो कुछ मैंने कहा है वह सच है।'

चुटकियां  लेकर बात करने में माहिर गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड जैसे संवाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। इस बयान के बाद नरेंद्र मोदी के वैवाहिक जीवन को लेकर भी सवाल उठने लगे। इस दौरान नरेंद्र मोदी की इस टिप्‍पणी पर कड़ा नोटिस लेते हुए गुरुवार को आयोग की अध्यक्ष बरखा सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई एवं मांग की कि मोदी इसके लिए सुनंदा थरूर से माफी मांगें। बरखा सिंह ने आलोचना करते हुए मोदी पर बातों-बातों में एक शेर दाग दिया। उन्होंने कहा- 'नफरतें पालना दुर्भाग्‍य रहा हो जिसका, वो किसी रिश्‍ते की अज़मत कहां पहचानता है। प्‍यार को पैसे में तौलने वाले से कहो, कोई बंदर अदरक का मजा कहां जानता है...'

ताकि बुरा न लगे  
राहुल गांधी को स्‍वामी के कहे शब्‍दों का बुरा नहीं मानना चाहिए, क्‍यूंकि पंजाब में एक कहावत है, लल्‍लू करे कवल्‍लियां, रब्‍ब सिद्धियां पावै, और रही बात बांदर की तो नरेंद्र मोदी वैसे भी आज भाजपा के लिए संकट मोचन बने हुए हैं। संकट मोचन वो बांदर था, जिसने रावण की लंका को जलाकर राख कर दिया था, अब देखना है कि कलयुग का यह बांदर देश को किस ओर लेकर जाता है, और बुद्धू के कार्यों को भगवान क्‍या दिशा देते हैं।

अब बयान न दें

राहुल बाबा को बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, क्‍यूंकि स्‍वामी सोनिया गांधी के सबसे बड़े दुश्‍मन हैं, कहते हैं कि जब सोनिया गांधी प्रधान मंत्री की कुर्सी से दो कदम दूर थी तो बीच में मीलों की खाई खोदने वाले स्‍वामी ही थे, जो कानून की तलवार से सोनिया गांधी पर निरंतर वार कर रहे हैं।  स्‍वामी को रोकने के लिए हिन्‍दुस्‍तान से कानून नामक की चिड़िया को उड़ाना होगा। वरना राहुल बाबा आपका ध्‍यान स्‍वामी पर अटक जाएगा, और नरेंद्र मोदी, जिससे बरखा सिंह बांदर कह रही हैं, उस गद्दी पर आकर बैठ जाएगा, जिस पर नरेंद्र मोदी के मौन मोहन सिंह बैठे हुए हैं। वैसे भी हवाएं अब कांग्रेस के खिलाफ हैं। पहले तो केवल स्‍वामी था, अब तो अरविंद केजरीवाल भी आ गए। बीच बीच में रिटायर्ड सेनाध्‍यक्ष भी फायर कर जाते हैं।