Showing posts with label बाबा रामदेव. Show all posts
Showing posts with label बाबा रामदेव. Show all posts

fact 'n' fiction : entrance exam बाबाओं के लिए 'न बाबा न'

Picture From myindiapictures.com
आध्‍यात्‍िमक गुरूओं पर लग रहे यौन शोषण के आरोपों के कारण कहीं देश की सर्वोच्‍च अदालत वेश्‍यावृत्‍ति संबंधी पूछे गये सवाल की तरह सरकार से इस बार भी न पूछ ले कि अगर आध्‍यात्‍मिक गुरूओं द्वारा किये जा रहे यौन शोषण को रोकना संभव नहीं तो इसको वैधता दे दी जाये।

इस बात से डरते हुए देश की सरकार ने इस मामले पर गंभीरता से सोचने का विचार किया है। सरकार चाहती है कि बाबाओं को भी entrance exam से गुजरना चाहिए। इस प्रस्‍ताव पर काल्‍पनिक लोक सभा में पहली बार में नेताओं की राय मांगी गई।

मलंगनगर से सांसद मलंग दास ने सुझाव देते हुए कहा कि बाबाओं को कुछ महीनों तक रेड लाइट इलाकों में रखा जाये, और उनके व्‍यवहार पर पैनी निगाह रखी जाये। अगर बाबा बनने के इच्‍छुक आवेदनकर्ता यहां से पास होते हैं तो उनको जर्मनी के उन बीचों पर तीन महीने के लिए छोड़ा जाये, जहां पर महिलायें व पुरुष नग्‍न अवस्‍था में मौज मस्‍ती करते हैं। जर्मन में ऐसे बीच हैं, जहां पर महिलायें और पुरुष नग्‍न अवस्‍था में घूमते मिल जाते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह महिला पुरुष बराबरता के विचार को प्रत्‍साहित करने के लिये अपनाया गया तरीका है। ऐसे बीचों पर तीन महीने गुजराने पर अगर बाबा बनने की तीव्र इच्‍छा खत्‍म नहीं होती तो उनको बाबा बनने का आज्ञा पत्र दिया जाये।

ग्रामीण क्षेत्र से आये सांसद ने अपने बैल का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हमारे गांव में साँड़ से बैल बनाने के लिए साँड़ को नसबंदी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, वैसे ही बाबाओं को भी नसबंदी प्रक्रिया से गुजारना चाहिए। सांड से बैल बनाये पशु को हम भैंसों और गायों के बीच रखते हैं, वहां ऐसी शिकायत नहीं आती, लेकिन साँड़ को वहां पर रखना हमेशा रिस्‍की रहता है।

एक अन्‍य सांसद ने सुझाव दिया कि हर बार की तरह इस बार भी क्‍यूं नहीं महिलाओं के लिए लक्ष्‍मण रेखा खींच दी जाये। अगर छोटा सुखी परिवार चाहिये तो ऑपरेशन महिलायें करवाती हैं, अगर अनचाहा गर्भ ठहर जाये तो गर्भनिरोधक गोलियां, महिलाओं के लिए। बाबाओं के मामले में ऐसा किया जा सकता है कि अगर महिलायें बाबाओं से एकांत में मिलती हैं, और उनके साथ रेप होता है तो उसकी जिम्‍मेदार महिला होगी, और उसके खिलाफ बाबा के ब्रह्माचार्य तोड़ने के आरोप में केस चलाया जायेगा।
महिला सांसद ने इस बात पर कड़ा एतराज जताते हुए संसद में हंगामा कर दिया और सुझाव प्रतिक्रियाओं का दौर थम गया व लोक सभा की कार्यवाही अगले सेशन तक के लिए स्‍थगित कर दी गई।

फेक टॉक के फर्जी सूत्रों से ख़बर मिल रही है कि अगर 2014 लोक सभा चुनावों के बाद भाजपा की अगुवाई वाली सरकार सत्‍ता में आई तो नरेंद्र मोदी अपने खास समर्थक बाबा रामदेव को मंत्री पद देने के लिये एक नये मंत्रालय को अस्‍तित्‍व में लायेंगे। इस मंत्रालय का नाम धर्म मंत्रालय होगा, और नये बाबाओं को यहां से स्‍वीकृति लेनी होगी।

यहां उल्‍लेखनीय है कि दिग्‍विजय सिंह के बयान के अनुसार बाबा रामदेव के पास आज से दस साल पहले साइकिल को पंक्‍चर लगवाने के पैसे नहीं थे, लेकिन आज उनके पास 11 सौ करोड़ की संपत्‍ति है। कहीं न कहीं,  दिग्‍विजय सिंह का यह बयान युवा पीढ़ी को बाबा बनने की तरफ प्रेरित करता है, राजनीति में भी इतनी ग्रोथ मिलना मुश्‍िकल है।

बाबा के करीबी फर्जी सूत्रों से सुनने में आया है कि बाबा यौन शोषण मामले को लेकर बेहद संवेदनशील हैं, उन्‍होंने अभी से इसके लिए खाका तैयार कर लिया है। अगर कोई बाबा यौन शोषण में लिप्‍त पाया गया तो उसको अगले 5 साल तक निरंतर 24घंटे कपाल भाति  प्राणायाम व भस्त्रिका प्राणायाम करना होगा, बिना कुछ खाये पीये। अगर बीच में रूका तो उसके ऊपर एक डंडे वाला पहरेदार होगा, जो रूकने पर लठ का इस्‍तेमाल करने के लिए स्‍वतंत्र होगा।

अगर आपके पास हैं कुछ बेहतरीन सुझाव हैं तो नीचे टिप्‍पणी बॉक्‍स में लिख सकते हैं।


कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

Yuva Rocks Dot Com से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook  पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करे।

जनता भैंस, अन्‍ना के हाथ में सिंघ, तो बाबा के हाथ में पूंछ

अन्‍ना हजारे का अनशन एवं बाबा रामदेव का प्रदर्शन खत्‍म हो गया। अन्‍ना हजारे ने देश की बिगड़ी हालत सुधारने के लिए राजनीति में उतरने के विकल्‍प को चुन लिया, मगर अभी तक बाबा रामदेव ने किसी दूसरे विकल्‍प की तरफ कोई कदम नहीं बढ़ाया, हालांकि सूत्रों के अनुसार उनका भी अगला विकल्‍प राजनीति है।

अपना अनशन खत्‍म करते हुए अन्‍ना टीम ने राजनीति को अपना अगला विकल्‍प बताया था और अब अन्‍ना टीम ने घोषणा भी कर दी है कि वो गांधी जयंती पर अपनी राजनीतिक पार्टी का नाम भी घोषित कर देंगे। मुझे लगता है कि पार्टी का गठन करना बड़ी बात नहीं, बड़ी बात तो उस पार्टी का अस्‍ितत्‍व में रहना है।

क्‍यूंकि देश सुधारने के नाम पर हिन्‍दुस्‍तान के हर राज्‍य में कई पार्टियां बनी और विलय के साथ खत्‍म हो गई। इसलिए पार्टियों का गठन करना एवं उनको खत्‍म करना, भारत में कोई नई बात नहीं। कुछ माह पहले पंजाब में विधान सभा चुनाव हुए, इन चुनावों के दौरान कई छोटी पार्टियां बड़ी पार्टियों में मिल गई, जैसे नालियां नदियों में। मगर कुछ नई पार्टियों का गठन भी हुआ। पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने राज्‍य के हालतों को सुधारने का बीड़ा उठाते हुए नई पार्टी का गठन किया, जब पार्टी का गठन हुआ तो हर तरफ से इस तरह के कयास थे कि मनप्रीत सिंह बादल कुछ न कुछ सीटें लेकर जाएगा। मगर अफसोस जब चुनावों के नतीजे सामने आए तो पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई।

अब जब गुजरात में विधान सभा के चुनाव होने में कुछ महीने बाकी बचे हैं, तो गुजरात के पूर्व मुख्‍यमंत्री केशुभाई पटेल ने नई राजनीतिक पार्टी का गठन करते हुए चुनाव लड़ने का एलान कर दिया। इस पार्टी में एक पुरानी पार्टी का विलय किया जाएगा। जब कोई नई पार्टी का गठन होता है तो राजनेता एक दूसरे पर आरो प्रति आरोप लगाने लगते हैं, मगर गुजरात में इसके उल्‍ट होने जा रहा है, क्‍यूंकि नरेंद्र मोदी ने केशुभाई पटेल के विरोध में एक भी शब्‍द कहने से अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं को मना कर दिया। केशुभाई पटेल की नई पार्टी इन चुनाव में कुछ नया करिश्‍मा कर पाती है, या फिर मनप्रीत सिंह बादल की पार्टी की तरह खाता खोले बिना, अगले चुनावों का इंतजार करेगी।

अब बाबा रामदेव और अन्‍ना हजारे पर लौटते हैं, जो कभी एक होने का दावा करते हैं, तो कभी अलग अलग खड़े नजर आते हैं। बाबा रामदेव कालेधन को वापिस लाने की लिए संघर्ष कर रहे हैं तो अन्‍ना हजारे भ्रष्‍टाचार के खिलाफ। मगर सवाल तो यह है कि काला धन कहां से आता है? भ्रष्‍ट तरीकों से। तो दोनों की लड़ाई अलग कैसे हो सकती है? जनता अलग अलग कैसे समर्थन दे सकती है। मेरे हिसाब से पकड़ दोनों भैंस को रहे हैं, मगर एक पूंछ से तो दूसरा सिंघों से। अन्‍ना हजारे कहते हैं कि जनता का समर्थन हमारे साथ है, वहीं बाबा रामदेव कहते हैं रामलीला मैदान में गूंज रही आवाज एक सौ तीस करोड़ भारतीयों की है। जबकि दोनों अलग अलग खड़े नजर आते हैं, तो भारत के नागरिक आखिर किस के साथ जाएं।

मुझे ऐसा लगता है कि बाबा रामदेव पूंछ से पूरी भैंस को देख रहे हैं, और अन्‍ना हजारे सिंघों से पूरी भैंस को देख रहे हैं। अगर दोनों एक ही भैंस को देख रहे हैं तो स्‍वप्‍न दुनिया से निकलकर एक मंच पर आना होगा। एक साथ आना होगा। वरना भैंस बाबा रामदेव को टांग और अन्‍ना हजारे को सिंघ मार कर भाजपा या कांग्रेस के घर में फिर से घुस जाएगी।