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हैप्पी अभिनंदन में निर्मला कपिला

हैप्पी अभिनंदन में आप ब्लॉगवुड की जिस हस्ती से मिलने जा रहे हैं, वे उन युवाओं के लिए किसी प्रेरणास्रोत से कम नहीं, जो समय न होने का बहाना लगाकर अपने कामों को बीच में छोड़ देते हैं। उम्र के जिस पड़ाव पर वीर बहुटी की लेखिका हैं, उस पड़ाव पर आपने ज्यादातर लोगों को राम राम कहते, गप्पे मारते या फिर सुबह की सैर करते हुए देखा होगा, लेकिन उन्होंने उस पड़ाव पर जाकर अपने शौक को नया आयाम दिया, और उम्र के इस छोर पर बैठी निर्मला कपिला जी छूटे हुए कई किनारों पर अफसोस करने की बजाय, उसको कोसने की बजाय, लुत्फ उठा रही हैं। कहें तो गुरदास मान के उस गीत के बोल को सच साबित कर रही हैं, जिसमें गुरदास मान ने कहा था, उम्र 'च की रक्खिया दिल होना चाहीदा जवान, उम्रां तां पूछ दे नादान। ब्लॉगवुड में कई बच्चों से माँ का दर्जा पा चुकी निर्मला कपिला से हुई कुलवंत हैप्पी की छोटी सी वार्तालाप के कुछ अंश :


कुलवंत हैप्पी : सुना है आप कम्प्यूटर ज्यादा नहीं जानती, फिर ब्लॉग अपडेट कैसे कर पाती हैं, ये जरूर जानना चाहेंगे?
निर्मला जी : जब मेरे दामाद ने मेरा ब्लॉग बनाया तो उस दिन उसने मुझे टाईप करना और पोस्टिन्ग करना सिखा दिया। उसके बाद जो भी मुश्किल आती उसे फोन करके पूछ लेती हूँ, बहुत कुछ तो फोन पर ही सीखा और कुछ ब्लॉगवुड के लोगों की मदद से जाना। कई बार team-viewer software लगाकर ललित ही अपडेट कर देते हैं मेरे पास अब इतना समय नहीं कि सीखने के लिए कहीं जाऊँ। क्योंकि ज़िन्दगी के सफर में बहुत पीछे रह गयी हूँ अभी मंज़िल तक पहुँचने के लिये बहुत काम पड़ा है। काम करते हुए धीरे धीरे सब सीख जाऊँगी। अपनी ये कमी बहुत खलती भी है।

कुलवंत हैप्पी : पंजाब में एक छोटे से खूबसूरत शहर नंगल मे होश सम्भाला तब से यहीं हूँ। मतलब सुसराल और मायका एक ही शहर में? ये कैसे सम्भव हुआ?
निर्मला जी :  मेरी कर्मस्थली पंजाब (नंगल) और जन्मस्थली हिमाचल (ऊना जिला) साथ साथ हैं। मेरा पालनपोशण और शिक्षा नंगल (पंजाब) में हुई और मेरे पिताजी का कारोबार भी नंगल में ही था। जब मेरी नौकरी नंगल, भाखड़ा बियास मैनेजमेन्ट बोर्ड के अस्पताल में लग गई तो पिता जी चाहते थे कि लडका भी ऐसी नौकरी में हो जहाँ से ट्राँस्फर न हो सके। क्योंकि चाहे मैं पंजाब सरकार की तरफ से नियुक्त हुई थी मगर यहाँ से ट्रांस्फर कम ही होती है। इसलिए पिताजी ने आसपास नज़र दौडाई तो नंगल में ही नैशनल फर्टेलाईजेशन पाईवेट लिमिटिड में रिश्ता मिल गया और शादी हो गयी। वैसे भी हमारे इलाके में अपने आस पास के गाचों में ही रिश्ता करना अच्छा समझा जाता है। तो बस सड़क के एक तरफ नंगल तो दूसरी तरफ मेरे ससुराल 3-4 कि. मी. के एरिया में ही सब रिश्तेदार हैं। इसके बाद कुछ साल गाँव मे रहने के बाद हम लोग नंगल में ही सरकारी मकान में रहने लगे बच्चों की पढाई की वजह से।

कुलवंत हैप्पी : आप ने अपनी प्रोफाइल में लिखा है "पुस्तकें पढ़ना और ब्लॉग पर लिखना मेरा शौक है" क्या आप ब्लॉग नहीं पढ़ती।
निर्मला जी : अरे पढना मतलब पढ़ना होता है ब्लॉग पढ़े बिना इतने कमेन्ट कैसे देती हूँ? आज कल किताब से अधिक ब्लॉग पढ़े जाते हैं।

कुलवंत हैप्पी : आप गजल, कविता और कहानियाँ लिखती हैं, आपको अभिव्यक्ति का सबसे अच्छा प्रारूप कौन सा लगता है?
निर्मला जी : मुझे कहानी और कविता दोनों ही सबसे अच्छे प्रारूप लगते हैं। अब तक मैं 70 के करीब कहानियां लिख चुकी हूँ। गज़ल तो अभी सीखनी शुरू की हैं।

कुलवंत हैप्पी : आपकी दो सौ के करीब पोस्टें हो चली हैं, और टिप्पणियों की संख्या चार हजार से ज्यादा है। ब्लॉगवुड से मिल रहा स्नेह पाकर कैसा महसूस करती हैं, अपने शब्दों में बयान करें?
निर्मला जी : ब्लॉगवुड का मुझे इतना स्नेह मिला है कि मैं उसे शब्दों मे ब्यान नहीं कर सकती। बस उस स्नेह की अनुभूति से ही मेरी ऊर्जा शक्ति बढ रही है, इस स्नेह को महसूस कर आँखें नम हो जाती हैं। ज़िन्दगी भर की शिकायतें दूर हो गयी। शायद इससे बड़ी अभिव्यक्ति इसे बताने की मेरे पास नहीं।

कुलवंत हैप्पी : कविता संग्रह, कहानी संग्राह के बाद क्या अब ब्लॉगर संग्राह आएगा, या कुछ और?
निर्मला जी : मैंने सोचा तो था कि हर साल एक पुस्तक लिखूँगी। लिखी भी अब भी तीन पुस्तकों का मसौदा मेरे पास है। मगर प्रकाशक पैसा बहुत मांगते हैं और मैं उन किताबों को बेच नहीं पाती इसलिए हर बार 25-30 हजार खर्च करना कुछ अच्छा नहीं लगा। अभी कहानी संग्रह छपने को तैयार है फिर गजल संग्रह के लिए तैयारी कर रही हूँ। कवितायें भी एक और पुस्तक जितनी हो चुकी हैं एक कैलिफोर्निया यात्रा पर संसमरण लिख रही हूँ जिसे अब अप्रैल में दोबारा वहाँ जाने के बाद पूरा करूँगी क्योंकि पिछली बार की जो फोटो वहाँ ली थी वो कैमरे से डिलीट हो गयी थी और तब मुझे इस बात का ध्यान भी नहीं था कि मैं अब लेखन मे सक्रिय रहूँगी। तब तक मेरी एक भी किताब नहीं छपी थी। एक उपन्यास भी शुरू किया हुया है मगर ब्लॉगिन्ग की वजह से समय नहीं मिल पा रहा। अब तो अमेरिका से आने के बाद ही सोचूँगी।

कुलवंत हैप्पी : जिन्दगी का हसीं पल जो हमारे साथ बांटना चाहती हों?
निर्मला जी : वैसे तो मैं ब्लॉग पर अपने संस्मरण लिखती रहती हूँ । मगर कुछ ऐसा खास नहीं है जिसे मैं ज़िन्दगी के हसीन पल कहूँ। शायद मेरी शादी के बाद के तीन दिन ही मेरी ज़िन्दगी के सब से हसीन पल थे, उसके बाद मौतों ने ऐसा समय बान्धा कि ज़िन्दगी क्या है सोच ही न सकीं। बस दूसरों के बच्चे पालते पोसते जीवन निकल गया। कुछ पंक्तियां यहाँ कहना चाहूँगी।

मुझे कुछ पता नहीं कि मैं क्या हूँ
कभी जर्रा तो लगता कभी खुदा हूँ

फुरसत मिली ही नहीं अपनी तलाश की
कभी इधर कभी उधर भटकती सदा हूँ

कभी सर्दियाँ मिली तो कभी तल्खियाँ
पतझड बसंतों का सिलसिला हूँ

हाँ, एक पल जरूर बाँटना चाहती हूँ  जिस दिन मेरा नया ब्लॉग बना, वो पल मेरी ज़िन्दगी की सबसे बडी खुशी थी क्योंकि शायद ही किसी दामाद ने अपनी सासू माँ को  ऐसा तोहफा दिया हो, जो उसकी जिन्दगी बदल दे। जब से ब्लॉगजगत में आयी हूँ सब दुख तकलीफें भूल गयी हूँ आप सब का स्नेह पा कर।


ऐसा सुखद एक और लम्हा... जब मेरे सब से छोटे दामाद ने कहा माँ, मुझे केवल अपना बेटा समझना दामाद नहीं। शायद वो मेरे लिये  खुशी का एक सुनहरा लम्हा था और आज भी वो किसी बेटे से कम मेरी चिन्ता नहीं करता। बाकी दोनों दामाद भी बहुत अच्छे हैं। एक सुखद अनुभूति जो आजकल होती है कि मैं तीन बेटियाँ और अच्छे दामाद पाकर खुद को दुनिया की सब से खुशनसीब औरत समझती हूँ। यूँ मेरे सभी बच्चे मेरे प्रेरणा स्त्रोत हैं। मेरे पति जिन से ज़िन्दगी जीने के बहुत से सूत्र सीखे हैं। उन्ही के कारण आज यहाँ हूँ।

चक्क दे फट्टे : भूरे मिस्त्री को उसका ससुर पीट रहा था। मैं भी पता करने पहुंच गया आखिर भूरे मिस्त्री का कसूर क्या है? पता चला कि भूरे मिस्त्री का सिर्फ इतना क्सूर था, जब उसकी पत्नि को बच्चा हुआ तो नर्स ने जो एसएमएस भूरे मिस्त्री को भेजा था, उसने वो सबको आगे भेज दिया। जिसमें लिखा था "बधाई हो आप बाप बन गए"।