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Inspirational Story : असम की डॉ.संयुक्‍ता पराशर का 'पेशन'

जेएनयू की छात्रा रही डॉ.संयुक्‍ता पराशर, जो कि असम की पहली आईपीएस महिला अधिकारी हैं, जिनके पास आईएएस बनने का मौका था, लेकिन उसने खाकी पहनना अधिक बेहतर समझा, क्‍यूंकि उन्‍हें लगता है कि पीड़ित को खाकी वाले सादी यूनिफॉर्म से ज्‍यादा मददगार साबित हो सकते हैं। असम सेहत सर्विस में कार्यरत मीना देवी और सिंचाई विभाग में बतौर इंजीनियर दुलाल चंद्रा बरुआ के घर जन्‍मीं डॉ. संयुक्‍ता ने शुरूआती पढ़ाई गुवाहटी से की। खेल कूद व अन्‍य गतिविधियों में भाग लेने वाली संयुक्‍ता ने स्नातक स्तर की पढ़ाई नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज से की। शुरूआती दौर में, उसको कम अंक होने के कारण छात्रावास में रहने की अनुमति नहीं मिली, हालांकि उसके बाद उसने अच्‍छे अंक प्राप्‍त किए, और उसको छात्रावास में रहने की अनुमति मिल गई।  इसके बाद उसने जेएनयू ज्‍वॉइन किया, और अपनी मास्‍टर डिग्री, जोकि अंतरराष्‍ट्रीय रिश्‍तों पर थी, को पूरा किया। 

जब संयुक्‍ता ने यूपीएससी के इम्‍तिहानों की तैयारी शुरू की तो उसके पास पढ़ाई के लिए पांच घंटों से अधिक का समय नहीं था। वे एक संस्‍था ऑब्‍जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के लिए काम भी कर रहीं थी। जब उनको पता चला कि आल इंडिया रैंकिंग में वे 85वें स्‍थान पर रहीं है तो खुशी का कोई टिकाना नहीं था। संयुक्‍ता को 2008 में मकुम में बतौर अस्‍िसटेंट कमांडेंट ज्‍वॉइन करने के दो घंटों के भीतर दंगे फसाद वाली जगह पर जाना पड़ा, जहां पर बोडो और बंग्‍लादेशी आतंकवादियों के बीच झड़प हो रही थी। वहां पहुंचते ही उसको अहसास हुआ कि किस तरह एक सेकेंड में व्‍यक्‍ति अपना सब कुछ खो देता है। 7 अगस्‍त 2008 को उसकी जिप्‍सी एक अन्‍य वाहन से टकराने के कारण दुर्घटनाग्रस्‍त हो गई, और वे बुरी तरह घायल हुई। संयुक्‍ता ने 2008 में डीसी चिरांग पुरु गुप्‍ता से की, और संयुक्‍ता मौजूदा समय में एसपी जोरहट में तैनात हैं।

एक बच्‍चे की मम्‍मी पुलिस की वर्दी में कड़क और नरम दिल रखती हैं। उन्‍होंने ट्रैफिक रूल तोड़ने वालों को जुर्माना और रूल को बरकरार रखने वालों को टॉफियां बांटने का प्रोजेक्‍ट शुरू किया हुआ है। ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी हेल्‍मेट न पहनने वालों को जुर्माना करते हैं, वहीं दूसरी तरफ हेल्‍मेट पहनने को वालों को रिवॉर्ड के तौर पर टॉफियां वितरित करते हैं। पुलिस विभाग को उम्‍मीद है कि इस मुहिम से लोग हेल्‍मेट पहनना शुरू कर देंगे। असम की संयुक्‍ता पराशर केवल असम की लड़कियों के लिए ही नहीं, बल्‍कि भारत देश की अन्‍य लड़कियों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत हैं।


इनपुट द सेंटीनल डॉट कॉम और जय हिन्‍द डॉट कॉ डॉट इन से


कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

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मलाला को 'राष्‍ट्र की बेटी' खिताब से सम्‍मानित करने की मांग

-:वाइआरएन सर्विस:-

9 अक्तूबर 2012 को उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के स्वात घाटी के मिंगोरा गांव में तालिबानी चरमपंथियों की गोली का निशाना बनी मलाला युसुफ़ज़ई को पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर 'पाकिस्तान की बेटी' के सम्मान से नवाज़े जाने की मांग की है।

इससे पूर्व पाकिस्‍तान राष्‍ट्रपति आसिफ अली जरदारी ब्रिटेन के अस्पताल में उपचाराधीन मलाला से मुलाकात की। इसके साथ ही उन्‍होंने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मलाला एजुकेशन फंड स्‍थापित करने की घोषणा की। इसके अलावा उधर लंडन में ब्रिटिश लेबर पार्टी के सांसद खालिद महमूद ने सरकार से अपील की है कि नॉबेल पुरस्‍कार के लिए मलाला को नामांकित किया जाए। नॉबेल पुरस्‍कार हेतु चलाए गए हस्‍ताक्षर मिशन के दौरान करीबन तीन लाख लोगों ने हस्‍ताक्षर किए।

इधर, पाकिस्‍तान असेंबली में मलाला को राष्‍ट्र पुत्री का सम्‍मान देने हेतु प्रस्ताव पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की सदस्य रोबिना सादत क़ैमख़ानी द्वारा प्रस्तुत किया गया है।

गौरतलब है कि तालिबान चरमपंथियों द्वारा किए गए हमले में मलाला के सिर और गले में गोलियां लगी थी। 15 अक्टूबर को मलाला को उपचार के लिए पाकिस्‍तान से ब्रिटेन पहुंचाया गया। मलाला ने बीबीसी उर्दू के लिए डायरी लिखने का कार्य करीबन तीन साल पूर्व शुरू किया था। मलाला ने पाकिस्‍तान के स्‍वात घाटी इलाके में लड़कियों को शिक्षा दिलाने के लिए अभियान छेड़ा था। यह इलाका तालिबान के कब्‍जे में है।