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हैप्पी अभिनंदन में गिरीश बिल्लोरे

हैप्पी अभिनंदन में आज जिस ब्लॉगर हस्ती से आपकी मुलाकात होने जा रही है, वो लेखन ब्लॉगिंग से पॉडकास्टिंग ब्लॉगिंग तक पहुंच बना चुके हैं। वो जबलपुर में बैठकर भी दुनिया के किसी भी कोने में बैठे ब्लॉगर साथी के पास कुछ ही मिनटों में पहुंचकर, अपनी मधुर मीठी आवाज से उनके कानों में बातों का शहद खोलते, कुछ सवालों के मार्फत उनके भीतर के विचारों को जन जन तक पहुंचा देते हैं। अब उनके बारे में कुछ और कहने की जरूरत तो रह ही न गई, आप समझ ही गए होंगे मैं उनकी बात कर रहा हूँ, जो ब्लॉगर जगत के साँचे में बिल्कुल फिट बैठ गए, लेकिन गीत लिखने के शौकीन फिर भी कहते हैं गिरीश बिल्लोरे मिसफिट

कुलवंत हैप्पी : आपने ब्लॉगवुड में आगमन कब और कैसे किया?
गिरीश बिल्लोरे :
उस बच्चे के लिए नेट से जुड़ा जिसे आप सब आभास जोशी के नाम से जानतें हैं, बस मुझे नेट पर मिली श्रद्धा जैन जी और फिर पूर्णिमा वर्मा जी फिर छपाक से एक दिन मिले एक उड़न तश्तरी आई तीनों ने बना दिया ब्लॉगर।

कुलवंत हैप्पी : आपका लेखन ब्लॉगिंग से पॉडकास्टिंग ब्लॉगिंग की ओर जाना कैसे हुआ?
गिरीश बिल्लोरे :
किसी कवि नें कहा ''मैं वो परवाना नहीं जो आग में जल के मरे मुझको शम्मा के ज़लाने में मज़ा आता है" बस फिर मैंने पाया की पॉडकास्टिंग एक वो शमा है, जिसकी ओर कोई देख भी नहीं रहा ख़ुशी बेगानी जी और अन्य लोगों के बाद किसी ने इधर नहीं देखा बस दिमाग चल गया और चल निकली पाडकास्टिंग।
 

कुलवंत हैप्पी : एक प्रतिष्ठ ब्लॉगर के रूप में आपकी पहचान से तो हम रूबरू हैं, लेकिन असल जिन्दगी में रोजी रोटी चलाने के लिए  कौन सी जगह सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, हमें बताएं?
गिरीश बिल्लोरे :
भाई, अपनी जन्म कुण्डली में महिलाओं की सेवा का बिंदु दर्ज है, बस महिला बाल विकास में बाल विकास परियोजना अधिकारी सह प्रोटेक्शन-आफिसर डोमेस्टिक वायलेंस फॉर वूमेन एंड चाइल्ड के टूर पर काम कर रहा हूम स्टेट ऑफ़ एम् पी में।

कुलवंत हैप्पी : आप खुद एक प्रतिष्ठ ब्लॉगर हैं, इसके अलावा आप पॉडकास्टिंग साक्षात्कार के दौरान कई ब्लॉगरों से विचारों का आदान  प्रदान भी करते रहते हैं, उसके आधार हम जानना चाहेंगे आपकी ब्लॉग के भविष्य और वर्तमान के बारे में क्या प्रतिक्रिया है?  
गिरीश बिल्लोरे : सभी की नज़र में ब्लॉगिंग का कल बेहद उजियारा है. मुझे भी कोई शक नहीं आप भी शक मत कीजिए हैप्पी जी बी हैप्पी।

कुलवंत हैप्पी : आपने जब से पॉडकास्टिंग ब्लॉगिंग शुरू की है, आपने लेखन ब्लॉगिंग की ओर से ध्यान हट लिया, क्या अब आप इस ओर रुख नहीं करेंगे?
गिरीश बिल्लोरे : कहावत याद है न ''चोर चोरी छोड़ देगा हेरा फेरी कैसे छोड़ेगा?'' हैप्पी जी मूलत: लेखक गीतकार हूँ ! सवाल ही पैदा नहीं होता लेखन से अलविदा कहने का। अरे भाई इस दौरान मैं अपना लेखन जारी रखे हुए हूँ. देखिये मिसफिट पर.

कुलवंत हैप्पी : जहाँ तक मुझे जानकारी है, आप एक अच्छे ब्लॉगर होने के साथ साथ अच्छे गीतकार भी हैं, क्या आप हिन्दी संगीत  जगत में बतौर गीतकार स्थापित होने की सोच रहे हैं?
गिरीश बिल्लोरे : जी, मेरा लक्ष्य भी अपने हिन्दी गीतों को स्वर-बद्ध कराना है, अब तक मेरे दो एलबम निकल चुके हैं एक नर्मदा अमृत वाणी [पंडित रवीन्द्र शर्मा की आवाज़ में ], दूसरा बावरे-फकीरा [आभास जोशी की आवाज़ में ] तीसरे की तैयारी में हूँ जो टंगटविषटर [लिख नहीं पा रहा हूं जीभ-पलट गीत समझिए जी] गीतों/प्रेम गीतों का होगा।

कुलवंत हैप्पी : आप काफी सुलझे हुए ब्लॉगर में शामिल हैं, ऐसे में आप से एक सवाल पूछना चाहूँगा कि ब्लॉगर जगत में आए दिन  किसी न किसी बात को लेकर विवाद होता रहता है, क्या वो ब्लॉगवुड के हित में है?
गिरीश बिल्लोरे : कदापि नहीं-नहीं, यहां तक की उनके हित में भी नहीं, जो गैंगस्टर होते हैं. ऐसा वे सोचतें हैं. की वो जीत गए पर आईने में अपनी शक्ल देखें तो खुद को बांच सकते हैं. कितनी कालिख पुती होती है चेहरों पर।

कुलवंत हैप्पी : ब्लॉगर जगत में गुटबाजी भी देखने को मिलती है, क्या आप उस गुटबाजी को उचित मानते हैं, और क्या वो सार्थक  ब्लॉगिंग के लिए नुकसान देह नहीं है?
गिरीश बिल्लोरे :
गुटबाज़ लोग ब्लॉगिंग का नहीं खुद का इतिहास बिगाड़ रहे हैं. देखना कुलवंत भैया खरा सोना ही टिकेगा, बाकी सब ख़त्म हो जाएगा।

कुलवंत हैप्पी : आपकी जिन्दगी का एक रोचक लम्हा, जो आप हमारे साथ बाँटना चाहते हों?
गिरीश बिल्लोरे  :
कई हैं किन्तु हालिया अरे नहीं १४ मार्च २००९ की बात है बावरे-फकीरा लांचिंग की तैयारी के समय ऑडिटोरियम में तैयारीयां चल रही थी। मेरे एक मित्र ने अपनी विशेषज्ञता का परिचय देते हुए मेरे बड़े भाई साहब से लगभग तीन सौ सीट्स तक इशारा करते हुए कहा ''भैया, इस कार्यक्रम में तीन सौ लोग यानी 40 परसेंट सीट भर जाएँ तो समझिए आप सफल हुए'। मैंने देखा भाई साहब उस मित्र की बात सुन कर मुस्कुरा रहे थे। ठीक सात बजे हाल की पूरी बारह सौ कुर्सियां भर गईं और दीवारों से टिके लोग दिखाई दे रहे थे कुछ बाहर से कार्यक्रम सुन रहे थे, मित्र इस चमत्कार से हतप्रभ जब मुझसे कुछ कहने आये तो बस उस वक्त ईश्वर ने मुझसे कहलवा दिया ''भाई, तुमने सतीश भैया से जो कहा था उसे साईं बाबा ने दिल पे ले लिया और भेज दिए इतने लोग '' कुलवंत जी जो मैं कर रहा हूँ सच में मैं नहीं करता ईश्वर ही करता है। मैं तो बस करता हुआ दिखता हूँ जो कदापि घमंड की वज़ह ही नहीं ''बुल्ला की जाणां मैं कौण?'' यही ब्रह्म सत्य है।

कुलवंत हैप्पी : चलते चलते आप युवा सोच युवा खयालात के पाठकों और अन्य ब्लॉगर साथियों के एक संदेश जरूर दें?
गिरीश बिल्लोरे :
युवा सोच युवा खयालात के पाठकों को क्या कहूं सब एक से बढकर एक जबर्दस्त प्रतिभाशाली हैं। बस इतना ज़रूर कहूंगा ''इश्क कीजै सरेआम खुल कर कीजै- भला पूजा भी कोई छिप छिप के किया करता है?

चक्क दे फट्टे  
सुनना है कि एक बार हमारे प्रसिद्ध ब्लॉगर भूरा मिस्त्री की पत्नि अपने मायके गई हुई थी, करीबन बीस दिन बाद पत्नि का फोन आया, आकर ले जाओ, बीस दिन में आधी रह गई। आगे ब्लॉगर साहिब कहाँ कम थे, उन्होंने भी तुरंत कह दिया, कोई बात नहीं बस बीस दिन और ठहर जाओ।

भार
कुलवंत हैप्पी