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जांच कमेटी हमारी, रिपोर्ट हमारी तो 'फैसला' किसी का

अरे भैया। राजनेताओं से भी आगे निकल गई बीसीसीआई। संगत की रंगत है। खुद कमेटी बिठाते हैं। खुद जांच रिपोर्ट तैयार करते हैं, और खुद को देते हैं क्‍लीन चिट। हां, हां, अपने एन श्रीनिवासन के दामाद और भारतीय दामाद की भारत कर रहा हूं। भारतीय दामाद! चौंकिए मत। बताता हूं भाई। बताता हूं भाई। राज कुंदरा साहिब, जो अपनी पहली वाली छोड़कर 'इंडियन गर्ल' शिल्‍पा शेट्टी से शादी बनाए हैं। 

शिल्‍पा शेट्टी, जो भारतीय मंच पर एक गोरे को सरेआम पप्‍पी देती हैं, तो विदेशी मंच पर मगरमच्‍छ के आंसू बहाकर विश्‍व से हमदर्दी बटोर चुकी हैं। प्‍यार के चक्‍कर में पहली वाली छोड़ी। विदेश छोड़ा, देश आ गए। हां, हां, राज कुंदरा पर लौट रहा हूं, और भारतीय पत्‍नि के कहने पर भारतीय खेल में पैसे का निवेश किया, निवेश तो बिजनस में होता है, लेकिन भारत में क्रिकेट ऐसा खेल है, जो सिर्फ और सिर्फ अपने लिए खेला जाता है, लेकिन हम समझ नहीं पाते, हमको लगता है कि क्रिकेट मैदान पर चल रहा खेल हमारे लिए है। 

खेल मैदान के पीछे भी खेल चलता है। इसमें भी ताऊ चोखी कमानीहै। सट्टा लगाओ, खूब कमाओ, लेकिन लिंक किसी बीसीसीआई के पदाधिकारी से होने चाहिए। यहां पर आपको कुछ दिनों में क्‍लीन चिट मिल जाएगी, भले ही दिल्‍ली पुलिस, मुम्‍बई पुलिस विलम्‍ब करे। बीसीसीआई, वैसे तो क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड है, लेकिन यहां पक्ष और विपक्ष के नेताओं की खिचड़ी खूब पकती है। राजनीतिक मंच पर भले पक्ष और विपक्ष विरोधी नजर आएं, लेकिन शराबखाने की तरह, बीसीसीआई में धर्म जात मायने नहीं रखती, सब एक ही गिलास में उतरते हैं।

कुछ लोग मानते हैं कि अगर बीसीसीआई का ऐसा ही हाल रहा तो आने वाले दिनों में भारतीय ओलंपिक संघ जैसा हाल होगा। लेकिन वे लोग भूल रहे हैं कि आज के जमाने में पैसा बोलता है, और पैसे के मामले में बीसीसीआई की तूती बोलती है, विश्‍व के क्रिकेट संघों में। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड, भले ही आउट ऑफ कंट्रोल हो, और रहना चाहता हो, मगर पैसे के मामले में इसका कोई सानी नहीं। यही एक कारण है कि आरटीआई के दायरे में आकर नंगा नहीं होना चाहता। अगर लोकतंत्र में सरकार गिरानी हो तो जनादेश का रुख बदलना जरूरी है। क्रिकेट के मामले में भारतीय युवा पीढ़ी की रुख बदलना शुरू हुआ है। अब वे क्रिकेट के अलावा अन्‍य गेमों में दिलचस्‍पी दिखाने लगा है। नतीजन, भारत को अच्‍छी प्रतिभाओं से रूबरू करवा रहा है।

उम्‍मीद है कि जो मोटर साइकिल, जो जेल, जो टायर, जो पॉलिसी आज टेलीविजन के जरिए क्रिकेट स्‍टार बेच रहे हैं, कल को उन उत्‍पादों की बिक्री के लिए टेनिस स्‍टार, हॉकी स्‍टार, बैडमिंटन स्‍टार स्‍क्रीन पर उतारे जाएंगे, बच्‍चों के पीने वाले पाउडर  के लिए सचिन नहीं, कोई दिमाग वाला सतरंज खिलाड़ी उतारा जाएगा। खिलाड़ी से हम उस खिलाड़ी की तरफ लौटते हैं, जो फिर से बीसीसीआई में खेलने के लिए लौटने वाला है। पहले तो रुखस्‍त हुआ, अपनी शर्तों से। अब पद पर आसीन होगा, अपनी मर्जी से तैयार करवाई रिपोर्टों से। इससे बड़ा खिलाड़ी कौन होगा।

बीसीसीआई ने रविवार को कोलकाता में हुई वर्किंग कमेटी की बैठक में चेन्नई सुपर किंग्स के टीम प्रिंसिपल गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के सहमालिक राज कुंद्रा को क्लीन चिट दे दी, क्योंकि दो सदस्यीय जांच समिति को उनके खिलाफ गड़बड़ी का कोई साक्ष्य नहीं मिला। हालांकि जांच कमेटी घर की थी। जिसकी जांच से खुद खेल मंत्रालय, इस बोर्ड से जुड़े रहे अन्‍य अधिकारी सहमत नहीं, लेकिन क्‍लीन चिट तो क्‍लीन चिट होती है। राज्‍य सभा सांसद बीरेंद्र सिंह ने तो कल राज्‍य सभा सीट संबंधित कीमत को उजागर कर दिया था, जिसकी कीमत 100 करोड़ रुपये हैं, एक भारतीय फिल्‍म का बजट, लेकिन अब देखना यह है कि बीसीसीआई की इस कुर्सी की कीमत कौन और कितनी आंकता है।

पुरुषों की टीम में खेलेंगी सारा टेलर

इंग्लैंड की राष्ट्रीय महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर बल्लेबाज सारा टेलर को घरेलू क्रिकेट टीम ससेक्स के अगले सत्र के लिए पुरूषों की टीम में शामिल किया जा सकता है। क्रिकेट जगत पर पैनी निगाह रखने वाली बेवसाइट ने ब्रिटेन के द गार्जियन अख़बार के हवाले से बताया कि टेलर की ससेक्स के अगले सत्र के लिए पुरूषों की टीम में शामिल होने को लेकर लगातार बातचीत जारी है।

टेलर ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि ससेक्स ने महिला टीम के कोच मार्क लेन से इस बाबत बातचीत की है। जानकार कहते हैं कि एकदिवसीय महिला क्रिकेट विश्वकप के लिए टेलर अगले सप्ताह भारत दौरे पर आएंगी। टेलर ने स्कूल स्तर पर ससेक्स के लिए क्रिकेट खेला है। अब सारा पुरूषों की काउंटी टीम का हिस्सा बनेंगी, जो कि प्रथम श्रेणी क्रिकेट से केवल एक स्तर ही पीछे है।

23 वर्षीय टेलर अगर पुरुषों की टीम में खेलती हैं तो इसको एक अच्‍छी पहल भी माना जा सकता है। हो सकता है कि इस पहल के कई सकारात्‍मक नतीजे सामने आएं। 2006 में भारत के खिलाफ खेलते हुए एक दिवसीय क्रिकेट में कदम रखने वाली टेलर ने 60 एकदिवसीय मैचों में करीबन 1821 स्‍कोर बनाए हैं, जिसमें तीन शतक एवं आठ अर्ध शतक शामिल हैं।

'सचिन' की जगह 'आमिर' होता तो अच्‍छा लगता

मैं सचिन की जगह आमिर का नाम किसी फिल्‍म के लिए नहीं बल्‍कि राज्‍य सभा सांसद के लिए सुझा रहा हूं। दोनों ही भारत की महान हस्‍तियों में शुमार हैं। दोनों ही अपने क्षेत्र में दिग्‍गज हैं। दोनों का कद काठ भी एक सरीखा है। मगर सोच में अंतर है, जहां आमिर खान सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखता है, वहीं सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के मामलों में भी ज्‍यादा स्‍पष्‍ट राय नहीं दे पाते। सचिन को क्रिकेट के मैदान पर शांत स्‍वभाव से खेलना पसंद है, मगर आमिर खान को चुनौतियों से आमना सामना करना पसंद है, भले ही उसकी फिल्‍म को किसी स्‍टेट में बैन ही क्‍यूं न झेलना पड़े।

न मैं आमिर का प्रसंशक नहीं हूं, और न सचिन का आलोचक। मगर कल जब अचानक राज्‍य सभा सांसद के लिए सचिन का नाम सामने आया तो हैरानी हुई, यह हैरानी मुझे ही नहीं, बल्‍कि बहुत से लोगों को हुई, केवल सचिन के दीवानों को छोड़कर।

हैरानी तो इस बात से है कि उस सचिन ने इस प्रस्‍ताव को स्‍वीकार कैसे कर लिया, जो भारतीय क्रिकेट टीम की कप्‍तानी लेने से इसलिए इंकार करता रहा कि उसके खेल पर बुरा प्रभाव पड़ता है। सचिन का नाम सामने आते ही हेमा मालिनी का बयान आया, जो शायद चुटकी से कम नहीं था, और उसको साधारण समझा भी नहीं जाना चाहिए, जिसमें हेमा मालिनी कहती हैं कि राज्‍यसभा रिटायर लोगों के लिए है। अगर हेमा मालिनी, जो राज्‍य सभा सांसद रह चुकी हैं, के बयान को गौर से देखते हैं तो पहला सवाल खड़ा होता है कि क्‍या सचिन रिटायर होने वाले हैं?

नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता, क्‍योंकि कुछ दिन पहले तो ख़बर आई थी कि सचिन ने कहा है, अभी उनमें दम खम बाकी है, और वह लम्‍बे समय तक क्रिकेट खेलेंगे। अगर सचिन अभी और क्रिकेट खेलना चाहते हैं। यकीनन वह रिटायर नहीं होने वाले, तो फिर राज्‍य सभा सांसद बनने का विचार उनके मन में कैसे आया?

मुझे लगता है कि क्रिकेट जगत से जुड़े कुछ राजनीतिक लोगों ने सचिन को फ्यूचर स्‍िक्‍यूर करने का आइडिया दे दिया होगा। यह आईडिया भी उन्‍होंने सचिन के अविवा वाले विज्ञापन से ही मारा होगा, क्‍यूंकि हक मारना तो नेताओं की आदत जो है। यह याद ही होगा न, इस विज्ञापन में सचिन सबको लाइफ स्‍क्‍ियूर करने की सलाह देते हैं।

सचिन की जगह आमिर को मैं इसलिए कहता हूं, क्‍यूंकि वह सामाजिक मुद्दों को लेकर बेहद संवेदनशील है, उसके अंदर एक आग है, जो समाज को बदलना चाहती है। अगर सचिन राजनीति में कदम रखते हैं तो मान लीजिएगा कि भारतीय राजनीति को एक और मनमोहन सिंह मिल गया। चुटकला मत समझिएगा, क्‍यूंकि मुझे चुटकले बनाने नहीं आते।

चलते चलते इतना ही कहूंगा, देश की राष्‍ट्रपति प्रतिभा पाटिल जी, जो देश की प्रथम नागरिक हैं, ऐसे लोगों का चुनाव करें, जो राजनीति में आने की दिली इच्‍छा रखते हों,और जिन्‍दगी में वह समाज सुधार के लिए अड़ भी सकते हों, वरना राज्‍य सभा में अगर कुछ कुर्सियां खाली भी पड़ी रहेंगी तो कोई दिक्‍कत नहीं होगी जनता को, क्‍यूंकि न बोलने वाले लोगों का होना भी न होने के बराबर है, जैसे कि हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी, पता नहीं कब बोलते हैं, बोलते भी हैं तो इंग्‍लिश में जो ज्‍यादातर भारतीयों को तो समझ भी नहीं आता, जबकि मैडम सोनिया हिन्‍दी में भाषण देती हैं, जो मूल इटली की हैं, इसको कहते है डिप्‍लोमेसी।

आज चौथी तारीख है, कुछ जल्‍द हो जाए


सर जी, आज चौथी तारीख है, कुछ जल्‍द हो जाए। क्‍यूं जी? क्‍या आज पत्‍नि को डिनर पर लेकर जाना है? नहीं तो, क्‍या बच्‍चों को इम्‍िहतानों की तैयारी करवानी है? नहीं तो, क्‍या आज मां या बाप को डॉक्‍टर के यहां चेकअप के लिए लेकर जाना है? नहीं जी, तो आखिर फिर आज ऐसा क्‍या करना है, जिसके लिए जल्‍दी छूटी चाहिए, जी आज आइपीएल शुरू होने वाला है, बहुत अच्‍छा, आइपीएल देखने के लिए जल्‍दी जाना है, खूब मियां, आज से देश व्‍यस्‍त हो जाएगा, और भूल जाएगा, काले धन के मुद़दे को, भूल जाएगा सेनाध्‍यक्ष की चिट़ठी से हुए खुलासे को, भूल जाएगा देश में बढ़ती कीमतों को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को। चलो ठीक है, जल्‍दी चले जाओ।

इस ट्रैफिक को भी आज ही रास्‍ता रोकना था, इतने में साथ खड़ा व्‍यक्‍ित कहता है, यार यह तो रोज की समस्‍या है, शायद आज तुम ही पहले आ गए, यहां तो ट्रैफिक की यही स्‍थिति है, वैसे घर जाने से पहले ही आइपीएल शुरू हो जाएगा, क्‍या तुम भी आइपीएल देखोगे, क्‍या मजाक करते हो, हिन्‍दुस्‍तान में रहते हो, और क्रिकेट नहीं देखते तो क्‍या जीना है, यही तो एक काम है, जो सब चीजों को भुला देता है पत्‍िन के पीठ दर्द को, उसकी डांट को, पड़ोसी के साथ हुई नोक झोंक को, बॉस की गालियों को, चलो आगे बढ़ो, हरी बत्‍ती हो गई।

घंटी बजी, दरवाजा खुला, क्‍या बात है, आज तो जल्‍दी आ गए, मैं फोन ही करने वाली थी कि तुम आते हुए बाजार से सब्‍जी ले आना, क्‍योंकि घर में मम्‍मी और छोटी बहन आने वाली है। क्‍या? तुम इतने शॉकर्ड क्‍यूं हो गए? मैंने ऐसा क्‍या कह दिया। ठीक है ठीक है, सब्‍जी गली में देने आता है, उससे ही ले लो न, वो महंगी देता है, एक दिन महंगी सब्‍जी ले लोगी तो कोई फर्क नहीं पड़ जाएगा, और मैं कुछ समय में लिए रोहन के घर जा रहा हूं, ठीक है।

रोहन तुम कहां चले? मैं तो तुम्‍हारे घर आ रहा था। क्‍यूं? आज मेरे घर रिश्‍तेदार आने वाले हैं, और पूरा आइपीएल का मजा खराब हो जाएगा। यार तेरी भी वही समस्‍या है, जो मेरी, मेरे घर भी रिश्‍तेदार आने वाले हैं। हे भगवान इन रिश्‍तेदारों को भी आज ही आना था।

यह आइपीएल का नशा ही कुछ ऐसा प्‍यारे।