Showing posts with label ऑस्‍कर पुरस्‍कार. Show all posts
Showing posts with label ऑस्‍कर पुरस्‍कार. Show all posts

ऑस्‍कर 2014 के लिये भेजी एशियाई फिल्‍मों के ट्रेलर

आधिकारक रूप से 86वें ऑस्‍कर पुरस्‍कार समारोह के लिये सर्वोत्‍तम विदेशी भाषा फिल्‍म श्रेणी के तहत एशियाई मूल की नौ फिल्‍में भेजी गई हैं, जो 2 मार्च 2014 को लॉस एंजिलस के हॉलीवुड जिले में स्‍थित डॉलबाय थियेटर में दिखाई जायेगी।

The Good Road
भारत की ओर से इस श्रेणी के तहत ज्ञान कोरिया के निर्देशन में बनी गुजराती 'द गुड रोड' को भेजा गया है। इस फिल्‍म की कहानी एक ट्रक चालक व दो बच्‍चों के आस पास घूमती है। ट्रक चालक अपने परिजनों को अपनी जीवन बीमा राशि दिलाने के लिये झूठे सड़क हादसे का पूरा नाटक रचता है। आदित्‍य, जो अपने माता पिता से एक ढाबे पर खाना खाते वक्‍त जुदा हो जाता है। पूनम, जो अपने किसी की तलाश में हाइवे पर पहुंच जाती है। इन दिनों किरदारों के आसपास घूमती कहानी है 'द गुड रोड'। यह राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार जीत चुकी है। अब ऑस्‍कर में कहां तक पहुंचती है, के लिये इंतजार करना होगा।


Television

बंग्‍लादेश की ओर से इस श्रेणी के लिये टेलीविजन नामक फिल्‍म भेजी गई है, जो एक हिन्‍दु परिवार के संघर्ष पर आधारित है। यह हिंदु परिवार एक अच्‍छे क्षेत्र में रहता है, जहां पर इस्‍लामिक धर्मगुरू ने टेलीविजन देखने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। बच्‍चों की जिद्द के आगे परिवार वाले टेलीविजन लेकर आते हैं, और शुरू होता है संघर्ष। इस फिल्‍म का निर्देशन मुस्‍तफा सारवार ने किया है। इस फिल्‍म में शाहिर हुदा रूमी, चंचल चौधरी, मुशर्रफ करीम और नुर्सत इमरोज तीशा ने मुख्‍य भूमिकायें अदा की हैं।
 

Soongava: Dance of the Orchids

नेपाल की ओर से इस कैटेगिरी के लिये सूनगावा: डांस ऑफ द ओर्चिड्स नामक फिल्‍म भेजी गई है। यह फिल्‍म समलैंगिक रिश्‍तों पर आधारित है। इस फिल्‍म में दो लड़कियां मुख्‍य किरदारों में हैं, जो आपस में प्‍यार कर बैठती हैं। अचानक एक लड़की की शादी हो जाती है, लेकिन दोनों एक दूसरे के इतनी करीबी आ चुकी होती हैं कि शादी के बाद भी अपने रिश्‍ते को खत्‍म नहीं कर पाती, और धीरे धीरे यह रिश्‍ता जगजाहिर हो जाता है, और उनकी जिन्‍दगी में मुश्‍िकलें व समाज की चुनौतियां दस्‍तक देती हैं। इस फिल्‍म को कुछ अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह में अच्‍छा रिस्‍पॉन्‍स मिला है। 

 

Zinda Bhaag
पाकिस्‍तान की ओर से 'जिन्‍दा भाग' को इस श्रेणी के लिये भेजा गया है। इस फिल्‍म में नसीरुद्दीन शाह मुख्‍य किरदार में हैं। उन्‍होंने इस फिल्‍म में एक लाहौरी रसोइये व विलेन का किरदार अदा किया है। फिल्‍म की कहानी विदेश जाने के इच्‍छुक युवाओं से शुरू होती है, जो विदेश में जिन्‍दगी जीने का सपना देखते हैं। अचानक स्‍थितियां उनको गलत रास्‍ते पर खींचकर ले जाती हैं। इस संघर्ष का नाम है 'जिन्‍दा भाग'। 


Juvenile Offender
दक्षिण कोरिया की ओर से इस श्रेणी के लिये 'जुवेनाइल ओफेंडर' नामक फिल्‍म भेजी गई है, जो एक ऐसे बच्‍चे पर है, जिसको उसकी मां जन्‍म देने के बाद छोड़ती है, और वे एक लम्‍बे समय बाद अपनी मां से मिलता है। बीमार दादा की देखभाल और घर में अकेलापन महसूस करने वाला यह किशोर एक आपराधिक मामले में गिरफ्तार होता है। दादा की मौत के बाद वे अपनी मां की तलाश करता है। उसके साथ रहने लगता है, अचानक दोनों में पुरानी बातों को लेकर झगड़ा होता है, और इस कहानी का एक अहम हिस्‍सा किशोरी की गर्लफ्रेंड भी है। फिल्‍म की पुरस्‍कार जीत चुकी है।
 

ILO ILO

सिंगापुर की ओर से इस श्रेणी के लिये आईएलओ आईएलओ नामक फिल्‍म भेजी गई है, जो एक मां बेटे के रिश्‍ते पर आधारित है। इस फिल्‍म का ट्रेलर देखने के बाद महसूस होता है कि बच्‍चा अपने परिवार से नफरत करता है, वे अपने दादा से प्‍यार करता है। वे अपने परिवार से दूर भागता है। ऐसे में वे एक हादसे का शिकार हो जाता है। इस हादसे में बाद उनकी जिन्‍दगी में कुछ परिवर्तन आते हैं, इनको दर्शाती फिल्‍म है आईएलओ आईएलओ। यह फिल्‍म घर में होम सिक फील करने वाले बच्‍चों पर आधारित है। कई फिल्‍म फेस्‍टीवलों में यह फिल्‍म अपना परचम लहरा चुकी है।
 
Transit
फ़िलिपीन की ओर से इस श्रेणी के तहत भेजी गई फिल्‍म ट्रांजिस्‍ट, एक पिता के संघर्ष पर है, जो इजरायली लॉ के कारण अपने बच्‍चे को अपने से दूर न होने के लिये करता है। पिता अपने बच्‍चे का जन्‍मदिवस मनाने के लिये घर पहुंचता है, तो उसको पता चलता है कि इजरायल में एक नया लॉ आया है, जिसके तहत विदेशी बाल मजदूरों को विदेश भेजा रहा है। इस आदेश के बाद शुरू होती है एक पिता के संघर्ष की कहानी। इस फिल्‍म का निर्देशन हन्‍ना इस्‍पिया की ओर से किया गया है।


The Great Passage

द ग्रेट पैसेज, जापान की ओर से इस श्रेणी में भेजी गई एक फिल्‍म है। यह फिल्‍म एक नौजवान के आसपास घूमती है, जो किताबों से बेहद प्‍यार करता है। वे एक असफल सेल्‍समैन है, लेकिन उसको एक शब्‍दकोश तैयार करने वाली टीम के लिये चुन लिया जाता है। इस दौरान उसकी मुलाकात एक खूबसूरत लड़की से होती है, और उसका दिल जीतने के लिए वे अपनी पूरी जान लगा देता है। शब्‍दकोश कंपनी का मालिक उससे प्‍यार शब्‍द की परिभाषा देने के लिये पूछता है।
 

The Grandmaster

चीन ने इस श्रेणी के लिये अपनी 'द ग्रेंडमास्‍टर' मार्शल आर्ट्स आधारित एक फिल्‍म को चुना है। यह असल जिन्‍दगी से प्रेरित एक फिल्‍म है, जैसे भाग मिल्‍ख भाग 'मिल्‍खा सिंह' से प्रेरित है। इस फिल्‍म की कहानी 1930 के प्रसिद्ध मार्शल आर्ट्स किंग विंग चुन पर आधारित है, जिसकी एक हवाई यात्रा के दौरान मौत हो जाती है।






कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

Yuva Rocks Dot Com से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook  पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करे।

ऑस्‍कर से 42वीं भारतीय फिल्‍म रिजेक्‍टेड

-: वाईआरएन सर्विस :-

बॉक्‍स ऑफिस पर सौ करोड़ रुपए से अधिक कलेक्‍शन करने वाली एवं समीक्षकों के मुंह से वाह वाही लूटने वाली रणबीर कपूर एवं प्रियंका चोपड़ा अभिनीत फिल्‍म ऑस्‍कर की दौड़ में शामिल नहीं हो सकी। भारत द्वारा ऑस्‍कर के लिए भेजी गई 45 फिल्‍मों में से केवल तीन को ऑस्‍कर के लिए नॉमिनेट किया गया, बाकी सब फिल्‍मों के लिए भारत को न सुनने को मिली।

भारत ने ऑस्‍कर की ''उत्‍तम फिल्‍म विदेश भाषा'' श्रेणी के लिए पहली बार मदर इंडिया को 1957 में भेजा गया, जो ऑस्‍कर के लिए नामित हुई एवं अंत एक इटालियन फिल्‍म ले नॉटी दी कैबीरिया से केवल एक वोट के अंतर से हारी।

इसके बाद भारत इस पुरस्‍कार के लिए किसी साल फिल्‍म भेजता और किसी साल न भेजता। यह सिलसिला करीबन 1984 तक चला। इसके बाद केवल 2003 को छोड़कर भारत ऑस्‍कर पुरस्‍कार के लिए निरंतर फिल्‍में भेज रहा है।

भारत अब तक इस पुरस्‍कार के लिए करीबन 45 फिल्‍में भेजा चुका है, जिसमें 30 हिन्‍दी फिल्‍में हैं, बाकी अन्‍य क्षेत्रिय भाषाओं से चुनी गई फिल्‍में हैं। अगर हिन्‍दी सिनेमा की बात करें तो सुनील दत्‍त व आमिर ख़ान ऐसे सितारे हैं, जिनकी सबसे अधिक फिल्‍में ऑस्‍कर के लिए भेजी गई, लेकिन दोनों सितारों की केवल एक-एक फिल्‍म को ऑस्‍कर ने स्‍वीकार किया, जिसमें सुनील दत्‍त की मदर इंडिया और आमिर ख़ान की लगान। ज्ञात रहे कि आमिर ख़ान की चार एवं सुनील दत्‍त की तीन फिल्‍में ऑस्‍कर के लिए भेजी गई थीं।

बर्फी के रणबीर कपूर से पहले उनके पिता ऋषि कपूर भी सागर एवं हीना फिल्‍म के लिए ऑस्‍कर की दौड़ में शामिल होते होते दो बार रह चुके हैं।

अब तक भारत की ओर से भेजी गई हिन्‍दी फिल्‍में - सुनील दत्‍त की मदर इंडिया, अमरपाली व रेशमा और शेरा, दिलीप कुमार की मधुमति, गुरू दत्‍त की बीवी साहेब और गुलाम, देव आनंद की गाइड, जया बच्‍चन की उपहार, अमिताभ बच्‍चन की सौदागर व एकलव्‍य, स्‍मिता पाटिल की मंथन, संजीव कुमार की सतरंज के खिलाड़ी, राजेश खन्‍ना की आख़िरी ख़त, धर्मेंद्र की मझली दीदी, अनुपम खेर की सारांश, ऋषि कपूर की सागर व हीना, अनिल कपूर-जैकी श्रॉफ की परिंदा, डिम्‍पल कपाडिया की रूदाली, सीमा बिश्‍वास की बैंडिट क्‍वीन, आमिर ख़ान की अर्थ, लगान, रंग दे बंसती, तारे जमीं पर, कमल हसन की हे राम, शाहरुख की देवदास व पहेली।

जो तीन नॉमित हुई, लेकिन विजय नहीं, उनमें शामिल हैं मदर इंडिया, सलाम बॉम्‍बे और लगान।

बर्फी के बाहर होने के बाद ऑस्‍ट्रिया की अमोर, कनाडा की वर विच, चाइल की नो, डेनमॉर्क की ए रॉयल अफेयर, फ्रांस की द इनटॉचेबल, आइलैंड की द डीप, नॉर्वे की कोन टिकी, रोमानिया की बेयोंड द हिल्‍स, स्‍विस की सिस्‍टर दौड़ में शामिल हैं। इनमें से भी फिल्‍मों को शॉर्टलिस्‍ट किया जाएगा एवं अंतिम पांच की घोषणा दस जनवरी को की जाएगी।