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बैंड—बाजा, बारात और 'आप' की टोपी

वाराणसी में निकली आप की टोपी पहने बारात की ख़बर।
हिसार (हरियाणा) चुनाव की खुमारी अब सिर चढ़कर बोलने लगी है। राजनीतिक पार्टियों के समर्थक अपने-अपने दल के लिए प्रचार का कोई तरीका नहीं छोड़ रहे हैं। इसी कड़ी में हरियाणा में जिला सिरसा के गांव सलारपुर के एक युवक ने भी आम आदमी पार्टी के प्रचार-प्रसार के लिए अनोखा तरीका अपनाया।

आम आदमी पार्टी के इस पक्के समर्थक मुकेश धंजु ने अपनी शादी में सेहरा तो पहना, मगर उस पर टोपी पहनी 'आप' की। उसने बारात में शामिल होने वाले दोस्तों-रिश्तेदारों को भी 'आप' की टोपी पहनने का आग्रह किया। दूल्हे के आग्रह को कोई ठुकरा नहीं पाया। दूल्हे की बहनों और महिला बारातियों ने भी सिर पर टोपी पहनकर बारात में शिरकत की। गांव सलारपुर से 'आप' की टोपी पहने मुकेश धंजू की बारात ऐलनाबाद पहुंची।

दुल्हे मुकेश ने बताया कि मैं हमेशा से ही भ्रष्टाचार विरोधी विचारधारा का रहा हूं। मैं 'आप' के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की नीतियों से प्रभावित रहा हूं। इसी से प्रभावित होकर और प्रेरणा लेकर मैं शुरू से ही केजरीवाल के साथ जुड़ा हुआ हूं और उनके आंदोलनों में बढ़चढ़ कर भाग लेता रहा हूं। जहां भी मुझे मौका मिलता है, भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाने से मैं नहीं चूकता।

अब चुनावी माहौल में सोमवार को जब मेरी शादी हुई, तो मैंने इसे भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और सिरसा से 'आप' प्रत्याशी का चुनाव प्रचार करने का यह अनूठा तरीका सूझा और मेरे परिवारवालों और मित्रों ने भी इसमें उसका पूरा सहयोग किया।

दूल्हे के दोस्त प्रदीप सचदेवा ने बताया कि मुकेश आम आदमी पार्टी के आंदोलन को देश के नवनिर्माण का सच्चा आंदोलन मानते हैं, इसलिए इन पलों को यादगार बनाने के लिए ही उसने यह कदम उठाया। दूल्हे के दोस्त और पार्टी के डॉक्टर कुलदीप, पंकज कामरा, प्रदीप सचदेवा और मंगल सिंह ने अपनी ओर से मुकेश के उज्जवल वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए उसे शुभ कामनाएं दीं।

स्रोत : नवभारत टाइम्स डॉट कॉम

केजरीवाल से इ​सलिए नाराज!

एक थका मंदा आदमी नौकरी से घर पहुंचा। पत्नि ने ठंडे पानी का गिलास मुस्कराते हुए दिया। पति ने गिलास को पकड़ा, जैसे थका मंदा आदमी पकड़ता है। थोड़ी देर बाद पत्नि चाय लेकर आई और बोली। बड़े दिनों से मेरा मन कर रहा है कि आप एक दिन के लिए नौकरी से छुट्टी ले लेते, तो हम यहां आस पास किसी पि​कनिक वाली जगह पर घूम आते।

पति ने कहा, बॉस छुट्टी नहीं देगा। तुम को पता है कि इन दिनों मुझे ​आफिस में बहुत अधिक काम रहता है। पत्नि बोली, 365 दिनों में से सिर्फ इन्हीं दिनों काम रहता है, तो दूसरे दिन तुम क्या करते हो, अगर मुझे पहले बताया होता तो वो दिन चुन लेती, नहीं नहीं ऐसा नहीं, काम तो हर रोज रहता है। पत्नि तपाक से बोली, यही तो मैं भी कहना चाहती हूं, काम तो हर रोज रहता है, लेकिन छुट्टी तो कभी कभार ली जाती है।

नहीं, छुट्टी नहीं मिलेगी। बॉस मुझे आफिस से निकाल देगा। बाद में इतनी अच्छी जॉब भी नहीं मिलेगी। अच्छा तो यह बात है, हम से ज्यादा नौकरी प्यारी है। जब तुम दोस्त की पंचायत बिठाते हो, और अरविंद केजरीवाल को भगोड़ा कहते हो तो तब तुम को समझ नहीं आती कि उसने तो आपसे भी बड़ी कर्सी छोड़ी केवल देश में बदलाव के लिए, जो आज तक प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार ने नहीं छोड़ी और तुम से अपनी पत्नि की खुशी के लिए बॉस की नाराजगी मोल नहीं ली जा सकती।

भगोड़ा वो नहीं तुम हो! जो अपनी सुविधा के लिए मोह पाल लेते हो, वो तो मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर फिर भाग दौड़ में लग गया, हालांकि उसको पता भी नहीं कि उसकी पार्टी लोक सभा चुनावों में टिकेगी कि नहीं, लेकिन विश्वास है कि हम लौटेंगे, अच्छे बहुमत से!

दूसरे को गाली देने से बेहतर है कि आप कुछ करने की क्षमता व विश्वास रखें। अगर काबिलयत हुई तो हजारों राहें होंगी, नहीं तो एक दिन वो भी छूट जाएगा, जो तुम्हारे पास है। यूं गुस्से में बुड़बुड़ाते हुए पत्नि वहां से निकल गई। पति सोच रहा था, सच में मैं इसको खुश नहीं कर पा रहा, तो केजरीवाल पूरे इंडिया को किस तरह खुश रख सकता है।

उसने फालूत की पंचायत करनी छोड़ दी और घर के बाहर लिखकर लगा दिया, अगर मैं नहीं कर सकता तो यह न सोचें कि कोई दूसरा भी नहीं कर सकता।



Chauraha Express 

एक ख़त आम आदमी पार्टी के नाम

नमस्कार। सबसे पहले आप को बधाई शानदार शुरूआत के लिए। कल जब रविवार को न्यूज चैनलों की स्क्रीनें, क्रिकेट मैच के लाइव स्कोर बोर्ड जैसी थी, तो मजा आ रहा था, खासकर दिल्ली को लेकर, दिल्ली में कांग्रेस का पत्ता साफ हो रहा था, तो भाजपा के साथ आप आगे बढ़ रहे थे, लेकिन दिलचस्प बात तो यह थी कि चुनावों से कुछ दिन पहले राजनीति में सक्रिय हुई पार्टी बाजी मारने में सफल रही,हालांकि आंकड़ों की बात करें तो भाजपा शीर्ष है, मगर बात आप के बिना बनने वाली नहीं है। यह बात तो आपको भी पता थी कि कुछ समीकरण तो बिगड़ने वाला है, मगर आप ने इतने बड़े फेरबदल की उम्मीद नहीं की थी। अगर आपको थोड़ी सी भी भनक होती तो यकीनन सूरत ए हाल कुछ और होता। आप प्रेस के सामने आए, बहुत भावुक थे, होना भी चाहिए, ऐसा क्षण तो बहुत कम बार नसीब होता है। अब आप को अपने कार्यालय के बाहर एक शेयर लिखकर रखना चाहिए,

मशहूर हो गया हूं तो जाहिर है दोस्तो, अब कुछ इलजाम मेरे स​र भी आएंगे
जो गुरबत में अक्सर नजर चुराते थे, अब देने बधाई मेरे घर भी आएंगे

मगर अब आप विपक्ष में बैठने की बात कर रही है, जो सही नहीं। नतीजे आप ने बदले हैं, मुख्यमंत्री को आप पार्टी ने हराया है, तो यकीनन सत्ता आप के हाथों में होनी चाहिए। गेंद को बीजेपी के पाले में धकेलने का मतलब दिल्ली की जनता के साथ किए वचनों से किनारा करना है। अगर कांग्रेस व भाजपा को उखाड़ना चाहते थे, लेकिन अब सत्ता से छीनकर दूसरे को देना चाहते हैं। न इंसाफी है। क्यूंकि आटे में नमक जितना तो गुनाह माफ है। पूरी सत्ता पुरानी पार्टी के हाथ में देने से अच्छा है, कुछ कांग्रेसियों को साथ ले लो, क्यूंकि राजनी​ति में अच्छे लोग भी होते हैं। मैं फिर कहता हूं, आप को सत्ता संभालनी चाहिए, राजनीति व जंग में सब जायज है। अगर आप अब पीछे हटते हैं तो शायद दिल्ली की जनता के साथ न इंसाफी होगी, क्यूंकि आप का विपक्ष में बैठना, स्वयं को सुरक्षित करना होगा। क्यूंकि आप के ज्यादातर राजनीतिक प्रतिनिधि राजनीति से दूर रहे हैं, उनको प्रजातंत्र में शासन करना अभी से नहीं आएगा, शायद इसलिए आप सत्ता के लोभी नजर नहीं आ रहे, या फिर वह एक माहौल बना रहे हैं, ताकि जनता का समर्थन मिल जाए, व बड़ी सुखद के साथ कांग्रेस के साथ चले जाएं।

केजरीवाल अब आप सत्ता से केवल एक फैसला दूर हैं, लेकिन मैं भी जानता हूं, और आप भी कि फैसले लेने से अधिक चुनौतीपूर्ण कार्यकाल होगा, क्यूंकि आप को उन वायदों पर पूरा उतरना होगा, जो सीना ठोक कर किए हैं, अगर भाजपा आती है तो उनको पांच साल सुरक्षित रहने का मौका मिल जाएगा, और राजनीति में स्वयं को परिपक्व कर पाएंगे। मगर मैं दूसरे नजरिये से सोचता हूं, अनाड़ी आदमी संभालकर वाहन चाहता है, तो धीमा चलता है, मगर अच्छा चलता है, अगले साल देश में क्रांति का बिगुल बज सकता है, अगर आप विपक्ष की बजाय सत्ता संभालें। आपको सकारात्मक रहना है तो विपक्ष के साथ रहें, अपनी रखें, व उनकी सुनें।   

मगर मेरा निजी ख्याल है कि आप केजरीवाल को राजनीति में उतरने के बाद, इतना स्नेह व समर्थन पाने के बाद अब कदम पीछे नहीं हटाना चाहिए, उनको कांग्रेस के साथ दिल्ली में सरकार बनाते हुए आगे बढ़ना चाहिए, इससे दो फायदे होंगे, उनके नेताओं को भी कुछ सीखने को मिलेगा, और आपको भी कांग्रेस के अनुभवियों से सीखने को मिलेगा।

आप के साहस को सलाम। मगर अब आप को वह फैसला लेना है, जो दिल्ली के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। विपक्ष में बैठकर शायद मांगों को पूरा करवाना वैसा ही जैसे मनमोहन सिंह के निजी तरीकों को सोनिया गांधी की मंजूरी के बाद लागू करना, सत्ता आप को अपने हाथ में लेनी चाहिए। रोटी तो दिल्ली वासियों ने परोस दी है, लेकिन निवाला तोड़कर मुंह में स्वयं को डालना होगा, दिल्लीवासियों के विश्वास का कर्ज अदा करना होगा।

बाकी जीत आपकी, फैसला आपका। देश इंतजार में है। मैं भी। चलते चलते एक और शेयर आपके नाम।

हक़ीकत की तह तक पहुँच तो गए लेकिन सच में ख़ुद को उतारेंगे कैसे।
न जीने की चाहत, न मरने की हसरत यूँ दिन ज़िन्दगी के गुज़ारेंगे कैसे।