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केजरीवाल से इ​सलिए नाराज!

एक थका मंदा आदमी नौकरी से घर पहुंचा। पत्नि ने ठंडे पानी का गिलास मुस्कराते हुए दिया। पति ने गिलास को पकड़ा, जैसे थका मंदा आदमी पकड़ता है। थोड़ी देर बाद पत्नि चाय लेकर आई और बोली। बड़े दिनों से मेरा मन कर रहा है कि आप एक दिन के लिए नौकरी से छुट्टी ले लेते, तो हम यहां आस पास किसी पि​कनिक वाली जगह पर घूम आते।

पति ने कहा, बॉस छुट्टी नहीं देगा। तुम को पता है कि इन दिनों मुझे ​आफिस में बहुत अधिक काम रहता है। पत्नि बोली, 365 दिनों में से सिर्फ इन्हीं दिनों काम रहता है, तो दूसरे दिन तुम क्या करते हो, अगर मुझे पहले बताया होता तो वो दिन चुन लेती, नहीं नहीं ऐसा नहीं, काम तो हर रोज रहता है। पत्नि तपाक से बोली, यही तो मैं भी कहना चाहती हूं, काम तो हर रोज रहता है, लेकिन छुट्टी तो कभी कभार ली जाती है।

नहीं, छुट्टी नहीं मिलेगी। बॉस मुझे आफिस से निकाल देगा। बाद में इतनी अच्छी जॉब भी नहीं मिलेगी। अच्छा तो यह बात है, हम से ज्यादा नौकरी प्यारी है। जब तुम दोस्त की पंचायत बिठाते हो, और अरविंद केजरीवाल को भगोड़ा कहते हो तो तब तुम को समझ नहीं आती कि उसने तो आपसे भी बड़ी कर्सी छोड़ी केवल देश में बदलाव के लिए, जो आज तक प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार ने नहीं छोड़ी और तुम से अपनी पत्नि की खुशी के लिए बॉस की नाराजगी मोल नहीं ली जा सकती।

भगोड़ा वो नहीं तुम हो! जो अपनी सुविधा के लिए मोह पाल लेते हो, वो तो मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर फिर भाग दौड़ में लग गया, हालांकि उसको पता भी नहीं कि उसकी पार्टी लोक सभा चुनावों में टिकेगी कि नहीं, लेकिन विश्वास है कि हम लौटेंगे, अच्छे बहुमत से!

दूसरे को गाली देने से बेहतर है कि आप कुछ करने की क्षमता व विश्वास रखें। अगर काबिलयत हुई तो हजारों राहें होंगी, नहीं तो एक दिन वो भी छूट जाएगा, जो तुम्हारे पास है। यूं गुस्से में बुड़बुड़ाते हुए पत्नि वहां से निकल गई। पति सोच रहा था, सच में मैं इसको खुश नहीं कर पा रहा, तो केजरीवाल पूरे इंडिया को किस तरह खुश रख सकता है।

उसने फालूत की पंचायत करनी छोड़ दी और घर के बाहर लिखकर लगा दिया, अगर मैं नहीं कर सकता तो यह न सोचें कि कोई दूसरा भी नहीं कर सकता।



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