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अमेरिका के पहले राष्‍ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन नहीं थे

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जब 1776 में अमेरिकी कॉलोनियों को ब्रिटिश साम्राज्‍य से स्‍वतंत्रता मिली, और 1789 में जॉर्ज वाशिंगटन पहले राष्‍ट्रपति अमेरिका चुने गए।  लेकिन इतिहास के पन्‍ने पलटने पर यह पता चला है,वर्जिनिया का पहला राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन नहीं हो सकता।
समस्‍या यह है कि इतिहासकारों ने अमेरिकी इतिहास के कुछ सालों को भूलाकर आगे से इतिहास लिखना शुरू कर दिया था। आजादी की लिखित घोषणा 1776 में हुई, लेकिन अमेरिका का संविधान 1787 में लिखा गया, और वाशिंगटन राष्‍ट्रपति 1789 में नियुक्त हुए।
उनबीच के वर्षों में अमेरिका को एक सरकार द्वारा चलाया गया। इसका मतलब साफ है कि इस दौरान किसी पहले राष्‍ट्रपति द्वारा अमेरिका का नेतृत्‍व संभाला गया।  जी हां, अमेरिका के पहले राष्‍ट्रपति जॉन हैनसन हैं।
1776 में राष्‍ट्रीय सरकार के समय जॉन हैनसन महाद्वीपीय कांग्रेस, अमेरिकन कॉलोनीज के अध्‍यक्ष थे। जब उन्‍होंने आजादी के घोषणा पत्र पर हस्‍ताक्षर किए, तत्‍काल उनको अमेरिका का राष्‍ट्रपति बनाया गया था। 
दूसरा, पहला राष्‍ट्रपति सैम्‍यूल होंटिंगटन थे, लेकिन उनको नजरअंदाज किया गया, क्‍यूंकि उसने एक परिभाषा परअपना टाइटलअर्जित किया था।…

बंदूकधारी युवक ने ली 20 मासूमों समेत 28 की जान

मां को मारने के बाद स्‍कूल पहुंचा

-: वाईआरएन सर्विस :-

अमरीका के कनेक्टीकट राज्य में एक बंदूकधारी ने 28 लोगों को गोलियों से भुन डाला। इस हमले में 20 बच्‍चों समेत 28 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में बंदूकधारी की मां भी शामिल है। इस हमले में हमलावर भी घटनास्‍थल पर मृत पाया गया है। हमलावर की उम्र लगभग 20 साल बताई जा रही है। पुलिस का मानना है कि हमलावर का स्‍कूल से संबंध हो सकता है। ये हादसा न्यूटाउन के सैंडी हुक एलिमेन्टरी स्कूल में हुआ।

इस हमले को अब तक के इतिहास के सबसे घातक हमलों में गिना जा रहा है। इससे पहले साल 2007 में वर्जिनिया में हुए हमले में 32 लोग मारे गए थे। इस हादसे के बाद घबराए हुए अभिभावक सैंकड़ों की संख्‍या में घटनास्‍थल पर पहुंचे।

इस हादसे को अंजाम देने वाले बंदूकधारी युवक की पहचान एडम लांजा के रूप में हुई और उसने घटना के बाद खुद को गोली मारकर आत्‍महत्‍या कर ली। बंदूकधारी की मां स्‍कूल में कार्यरत थी, जिसके शव को पुलिस ने उनके घर से बरामद किया। मरने वालों में अधिक संख्‍या 5 से 10 साल के बच्‍चों की है।

इस हमले के पीछे क्‍या कारण है, अभी पूरी तरह स्‍पष्‍ट नहीं, शायद एडम मन ही मन …

भारत सईद व पचास करोड़ पर ठोके दावा

सब जानते हैं कि अमेरिका शातर है, वो अपनी हर चाल सोच समझकर चलता है, अब साइद हाफिज को लेकर चली उनकी चाल को गौर से देखें, यह चाल अमेरिका ने कब चली, जब पाकिस्‍तानी राष्‍ट्रपति आसिफ अली जरदारी हिन्‍दुस्‍तान आने वाले थे। अमेरिका ने जैसे ही कहा,  सईद हाफिज मोहम्‍मद को पकड़वाने वाले को 50 करोड़ रुपए का नाम मिलेगा, तो सईद की दहाड़ते सुनते ही अमेरिका ने पल्‍टी मारते हुए कहा कि यह इनाम उसके खिलाफ साबूत पेश करने वाले को मिलेगा।
जैसे ही आसिफ ने भारत आने की बात स्‍वीकार की, वैसे ही हिन्‍दुस्‍तानी मीडिया को पंचायत बिठाने का मौका मिल गया। टीवी स्‍क्रीन पर मुददे खड़े किए जाने लगे, अमेरिका की नीयत पर शक किया जाने लगा, यहीं नहीं भारत के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह हाफिज को लेकर मुंह खोलेंगे कि नहीं को लेकर भी अटकलें शुरू हो गई, और यह चर्चाएं तब भी खत्‍म नहीं हुई, जब आसिफ अपने घर पाकिस्‍तान लौट चुके थे।
अटकलों का बाजार गर्म था, पंचायत छोटी स्‍क्रीन पर निरंतर बिठाई जा रही थी, और बहस शुरू थी कि क्‍या पाकिस्‍तान भारत के साथ अपने रिश्‍ते मजबूत करना चाहता है, अगर हां तो क्‍या वह हाफिज को भारत के हवाले करेगा, ल…