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आधे पौने घंटे की फिल्‍म वन्‍स अपॉन ए टाइम इन मुम्‍बई दोबारा

वन्‍स अपॉन ए टाइम इन मुम्‍बई दोबारा। यह 2010 में आई सुपरहिट फिल्‍म वन्‍स अपॉन ए टाइम इन मुम्‍बई का स्‍किवल है। इसका नाम पहले वन्‍स अपॉन ए टाइम इन मुम्‍बई अगेन था, लेकिन कहीं हिन्‍दी बुरा न मान जाए, इसलिए एक हिन्‍दी शब्‍द दोबारा का इस्‍तेमाल किया गया। एकता कपूर टूने टोटकों में विश्‍वास करती है, कहीं न कहीं यह बात उनके फिल्‍म टाइटल में नजर आई है, हर बार एक अलग अक्षर, जैसे इसमें ए के साथ छोटी सी वाय का इस्‍तेमाल किया गया है।

रजत अरोड़ा की पटकथा और मिलन लथुरिया का निर्देशन, एकता कपूर का पैसा वन्‍स अपॉन ए टाइम इन मुम्‍बई दोबारा। फिल्‍म की कहानी दाऊद इब्राहिम पर आधारित है, लेकिन बॉलीवुड स्‍वीकार करने से डरता रहता है। फिल्‍म में फेरबदल हुए थे, शायद उस दौरान क्रिकेट वाला सीन रिशूट कर डाला गया होगा, जो फिल्‍म की शुरूआत को कमजोर बनाता है। दाऊद इब्राहिम मुम्‍बई का बेताज बादशाह बने रहना चाहता है, जो शोएब  नाम से रुपहले पर्दे पर उतारा गया है। शोएब दाऊद की तरह एक पुलिस कर्मचारी का पुत्र, हाजी मस्‍तान के बाद मुम्‍बई का अगला डॉन, डोंगरी से संबंध रखता है। शोएब मुम्‍बई में सिर उठा रहे अपने एक दुश्‍मन रावल को मारने के लिए लौटता है, जो बेहद कमजोर खलनायक है। ऐसे में शोएब जैसे दमदार डॉन का मुम्‍बई आना बेहद बहुदा लगता है, इससे ज्‍यादा रौब तो हिन्‍दी फिल्‍मों के साधारण गुंडों का होता है।

शोएब यहां पहुंचते रावल को मारने का जिम्‍मा अपने गुर्गे असलम को सौंपता है। जिस किरदार को निभाया है इमरान खान ने। असलम, स्‍लम एरिये से आता है। जुर्म की दुनिया में उतरना उसके लिए मुश्‍िकल नहीं। वे डॉन का काम करने के लिए निकलता है। फिल्‍म की एक और कमजोर कड़ी, डॉन जिस दुश्‍मन को मारने आया है, उसको मारने की बजाय एक लड़की के चक्‍कर में पड़ जाता है, जो कश्‍मीर से मुम्‍बई अभिनेत्री बनने आई है। हालांकि असल जिन्‍दगी में भी दाऊद को एक पंजाबी लड़की से प्‍यार हुआ था, वे भी शोएब की तरह दाऊद को अंत में आकर ठुकरा देती है, जिसे बर्दाशत करना शोएब के लिए मुश्‍िकल।

फिल्‍म अंतिम आधे पौने घंटे में अपनी शिखर की तरफ बढ़ती है। इस आधा पौने घंटे में हर किरदार जीवंत नजर आता है। फिल्‍म अब दर्शकों को बांधने में कामयाब होती है, लेकिन पहले का सवा घंटा बेहद बकवास पकाऊ, उसकी जरूरत कहीं नजर नहीं आती, जुर्म की दुनिया आधारित फिल्‍म में प्‍यार का मसाला ठूंसने की कोशिश में निर्देशक और लेखक दोनों चूकते हुए नजर आए। सोनाक्षी सिन्‍हा, सोनाली बेंद्रे, इमरान खान, अक्षय कुमार ने अंतिम आधे घंटे में साबित किया कि निर्देशन और पटकथा लेखन में कमी है, उनमें तो क्षमता है खुद को साबित करने की।

बॉलीवुड रिपोर्ट बनाम बॉक्‍स ऑफिस 2012

इंडिया में दो चीजें बेहद पापुलर हैं एक क्रिकेट और दूसरा मूवीज। दोनों को देखने के लिए भारतीय दर्शक उतावले रहते हैं। सलमान ख़ान की दबंग 2 के साथ बॉलीवुड 2012 के बही ख़ाते को बंद करने जा रहा है। साल 2012 में रिलीज हुई फिल्‍मों में सलमान ख़ान की 'एक था टाइगर' बॉलीवुड में सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्‍मों में शुमार है एवं पहले दिन बॉक्‍स ऑफिस 32 करोड़ रुपए एकत्र करने का रिकॉर्ड भी इसी के नाम दर्ज हुआ, लेकिन पूरे साल भर की एकत्र राशि करने में अक्षय कुमार सबसे आगे रहे क्‍यूंकि अक्षय कुमार ने इस साल फिल्‍म निर्माताओं को चार सौ करोड़ से भी अधिक रुपयों का कलेक्‍शन करके दिया।

अक्षय कुमार, सलमान ख़ान के अलावा इस साल बॉक्‍स ऑफिस पर गंभीर दिखने वाले अजय देवगन ने भी काफी धमाल मचाई। अजय देवगन की बोल बच्‍चन ने जहां 100 करोड़ के क्‍लब में एंट्री मारी, वहीं सन ऑफ सरदार सौ करोड़ से कुछ कदम पीछे ठहर गई, लेकिन फिर भी यह फिल्‍म भारतीय सर्वाधिक कलेक्‍शन करने वाली फिल्‍मों की टॉप टेन सीरिज में है।

इस साल रिलीज हुई शाहरुख़ ख़ान की जब तक है जान ने बॉक्‍स ऑफिस पर सौ करोड़ से अधिक कलेक्‍शन की, लेकिन उतना जादू न दिखा सकी, जितने की इस फिल्‍म से उम्‍मीद थी। कुछ ऐसा ही हश्र हुआ, आमिर ख़ान की तलाश का भी। पिछले साल रॉकस्‍टार बनकर बॉक्‍स ऑफिस पर धूम मचाने देने वाले रणबीर कपूर ने बर्फी के जरिए जहां सिने खिड़की पर अच्‍छी कलेक्‍शन की, वहीं समीक्षकों से भी काफी वाहवाही लूटी। कुछ ऐसा ही हुआ, ऋतिक रोशन के साथ, जो इस साल फिल्‍म अग्‍निपथ में नजर आए। सिने खिड़की पर दर्शक भी मिले, और समीक्षकों ने भी खूब सराहा।

इस साल कुछ ऐसी फिल्‍में भी रिलीज हुई, जिन्‍होंने सौ करोड़ तो नहीं कमाया, लेकिन दर्शकों को वाह वाह कहने पर मजबूर कर दिया। इनमें सबसे ऊपर है, ओह माय गॉड, पान सिंह तोमर, कहानी, विक्‍की डॉनर,  इश्‍कजादे, इंग्‍लिश विंग्‍लिश आदि।

कुछ ऐसी फिल्‍में थी, जिन्‍होंने बॉक्‍स ऑफिस दर्शकों को खींचा, और धन कमाया। इन फिल्‍मों में तलाश, खिलाड़ी 786, कॉकटेल, गैंग्‍स वासेपुर, जन्‍नत, क्‍या सुपर कूल हैं हम, राज 3, स्‍टूडेंट ऑफ द ईयर, रिटर्न इविल 1920, जन्‍नत टू एवं तेरे नाम लव हो गया आदि शामिल हैं।

कुछ ऐसी फिल्‍में थी, जिन्‍होंने दर्शकों के अंदर जिज्ञासा तो जगाई, लेकिन दर्शकों संतुष्‍ट नहीं कर पाईं। इन फिल्‍मों में प्‍लेयर्स, तेज, विनोद एजेंट, लंडन पेरिस न्‍यूयार्क, ब्‍लड मनी, बिट्टू बॉस, डेंजर्स इशक, डिपार्टमेंट, तेरी मेरी कहानी, जिस्‍म 2, जोकर, हीरोइन, कमाल धमाल मालामाल, चक्रव्‍यूह, भूत रिटर्नस आदि शामिल हैं।

सौ करोड़ से अधिक कमाने वाली फिल्‍मों में सबसे ऊपर सलमान ख़ान की एक था टाइगर, दूसरे नम्‍बर अक्षय कुमार की राउड़ी राठौड़, तीसरे पर ऋतिक रोशन की अग्‍निपथ, चौथे पर अक्षय कुमार की हाऊस फुल 2, पांचवें नम्‍बर पर रणबीर कपूर की बर्फी, छठे नम्‍बर पर शाहरुख ख़ान की जब तक है जान, सातवें नम्‍बर पर आज देवगन की बोल बच्‍चन है।

स्‍पेशल छब्‍बीस के प्रमोशन का नया फंडा

-: वाईआरएन सर्विस :-

कुछ दिनों पहले आप ने कुछ अख़बारों में पढ़ा होगा कि एक एमएलए के घर पर फेक सीबीआई रेड, दरअसल यह समाचार नहीं बल्‍कि प्रमोशन का नया फंडा था।

इस नए फंडे को ईजाद करने वाले अक्षय कुमार हैं। जी हां, अक्षय कुमार ने अपनी अगली फिल्‍म 'स्‍पेशल छब्‍बीस' के प्रमोशन के लिए स्‍पेशल फंडा निकाला है। इस फंडे के कारण 'स्‍पेशल छब्‍बीस' को प्रमोशन मिल रहा है, जिसे ए वेडनेस डे फेम नीरज पांडे निर्देशित कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, अक्षय कुमार की अगली फिल्‍म स्‍पेशल छब्‍बीस का प्रोमो आपको दबंग टू फिल्‍म के साथ मुफ्त देखने को मिल सकता है, क्‍यूंकि फिल्‍म यूनिट इसको इस फिल्‍म के साथ रिलीज करने का मन बना रही है।

इस फिल्‍म में अक्षय कुमार के साथ जिम्‍मी शेरगिल, मनोज वाजपेयी और अनुपम खेर मुख्य भूमिका में नज़र आएंगे।

खिलाड़ी कुमार ने दी समकालीनों को मात

-: वाईआरएन सर्विस :-
'खिलाड़ी 786' भले ही बॉक्‍स ऑफिस पर 65 करोड़ रुपए कमाने में सफल हुई, मगर कुल मिलाकर 2012 अक्षय कुमार के लिए बेहद लक्‍की ईयर रहा है, क्‍यूंकि इस साल रिलीज हुई अक्षय कुमार की फिल्‍मों ने लगभग चार सौ करोड़ तक की कमाई की।

रविवार को अंधेरी स्‍पोर्ट्स कम्‍पलेक्‍स में आयोजित तीसरे बिग स्‍टार इंटरटेनमेंट अवार्ड 2012 समारोह में अक्षय कुमार ने तीन पुरस्‍कारों पर अपना कब्‍जा जमाया। इस समारोह के दौरान अक्षय कुमार बेस्‍ट एक्‍शन हीरो, बेस्‍ट फिल्‍म निर्माता एवं बेस्‍ट कामेडी एक्‍टर के लिए पुरस्कृत किया गया, क्रमश: रौउड़ी राठौड़, ओह माय गॉड एवं हाऊसफुल।

इस मौके पर अक्षय कुमार की लक्‍की चैम रही कैटरीना कैफ को रोमांटिक रोल एवं एक्‍शन रोल के लिए सम्‍मानित किया गया, जो उन्‍होंने क्रमश: जब तक है जान एवं एक था टाइगर में निभाए। इसके अलावा शाहरुख ख़ान एवं कैटरीना कैफ को बेस्‍ट कपल ऑन स्‍क्रीन पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया।

फिल्‍म समीक्षा 'तलाश' से 'खिलाड़ी 786' तक

-: वाईआरएन सविर्स :-

'तलाश' बड़े नामों के साथ बनाई गई एक साधारण फिल्‍म। आमिर ख़ान के साथ लोगों का ब्रांड पर विश्‍वास वाला रिश्‍ता हो सकता है, लेकिन 'तलाश' फिल्‍म निराश करती है। फिल्‍म की कहानी एक सड़क हादसे से शुरू होती है और खत्‍म भी एक सड़क हादसे के बाद। मगर इस दौरान फिल्‍म में बहुत साधारण सी कहानी है, सस्‍पेंस के नाम पर आपको वहां कुछ भी नहीं मिलेगा। अंत में आप कई सवालों के जवाब की तलाश में तलाश को अलविदा कहेंगे।

इस फिल्‍म को कहानी से जोड़कर देखने वालों के लिए इस फिल्‍म में निराशा के सिवाय कुछ नहीं। गम्‍भीर अभिनय तो आमिर बाख़ूबी कर लेते हैं। टूटे परिवार के रिश्‍तों को चलते चलते में रानी मुखर्जी से पहले भी रुपहले पर्दे पर जीवंत कर चुकी हैं। वेश्‍या के रूप में करीना को देखना कहीं भी सुकून नहीं देता। इससे बेहतर होता अगर कोंकणासेन को इस रोल के लिए चुना होता। फिल्‍म का सस्‍पेंस तो इंटरमेशन में तोड़ देते हैं। सीबीआई एवं अन्‍य मर्डर मिस्‍ट्री हल करने वाले सीरियल देख चुके लोगों के लिए तलाश में कुछ भी खास नहीं।

अंतिम हादसे से पूर्व करीना की एंट्री जबरदस्‍त है। अगर वहां आकर निर्देशक कहानी का सस्‍पेंस तोड़ते तो शायद फिल्‍म को देखने का कुछ मजा भी आता। अगर आप मुस्‍कराहटें गीत को सुनना चाहते हैं तो फिल्‍म शुरू होने से पूर्व पहुंचे, क्‍यूंकि नम्‍बरिंग के दौरान इस गीत को फिल्‍माया गया है।

अब बात करते हैं 'खिलाड़ी 786' की

अगर आप 'गोलमाल 3' 'वेलकम' 'दे दनादन' 'चुप चुपके से' 'ढोल' 'हाऊस फुल' जैसी हल्‍की फुल्‍की कामेडी फिल्‍मों को देखकर कहते हैं, चलो मनोरंजन तो बढ़िया हुआ, तो आपके लिए 'खिलाड़ी 786' एक अच्‍छी फिल्म हो सकती है। फिल्‍म की कहानी शादी टूटने से शुरू होती है, और शादी संपूर्ण कर खत्‍म होती है। इस फिल्‍म में डायलॉग आपको हंसाएंगे। फिल्‍म के डायलॉग छोटे हैं। दो अर्थी शब्‍दों का इस्‍तेमाल नहीं किया गया। अक्षय कुमार की कई फिल्‍मों की झलक आपको इसमें मिल सकती है, जैसे कि नमस्‍ते लंडन, वेलकम, सिंह इज किंग, तीस मार ख़ान आदि। हिमेश रेशमिया, अक्षय कुमार, मिथुन चक्रवर्ती, जोनी लीवर, असीन आदि के किरदार आपको सिने हाल से बाहर आने के बाद भी याद रहेंगे, उनके संवाद आपको हंसाएंगे।

क्‍यूं है उम्‍मीद ''खिलाड़ी 786'' से

-: वाईआरएन सर्विस :-

जहां ''तलाश'' से निराशा दर्शक ''खिलाड़ी 786'' उम्‍मीद लगाए बैठे हैं, वहीं फिल्‍मी पंडितों का मानना है कि अक्षय कुमार की यह तीसरी फिल्‍म होगी 2012 की, जो 100 करोड़ के क्‍लब में एंट्री बहुत जल्‍द अपना नाम दर्ज करेगी, इससे पहले इस क्‍लब में हाऊसफूल, राउडी राठौड़ है, जबकि 20 करोड़ के बजट में तैयार हुई ओह माय गॉड भी केवल 17 करोड़ के फर्क से पीछे रह गई।

उम्‍मीद क्‍यूं
दरअसल हिमेश एवं अक्षय की जोड़ी क्रमश संगीतकार एवं अदाकार के रूप में बेहद पुरानी है, भले ही अदाकार एवं निर्माता के रूप में नई हो। अक्षय कुमार जब बुरे दौर से गुजर रहा था, जब उसकी फिल्‍में बॉक्‍स ऑफिस खिड़की पर पानी भी नहीं मांग रही थी, जब हिमेश के संगीत ने दर्शकों को सिने खिड़की तक खींचकर लाने में बड़ा योगदान अदा किया। अक्षय कुमार की एतराज, इंसान, हम को दीवाना कर गए, नमस्‍ते लंडन, ओह माय गॉड तक का म्‍यूजिक हिमेश ने तैयार किया। इस बार भी हिमेश का म्‍यूजिक और अक्षय की अदाकारी दर्शकों को बेहद पसंद आ रही है।

एक और कारण
वो है फिल्‍म के टाइटल में खिलाड़ी शब्‍द का होना। अक्षय कुमार की पहचान बन चुका यह वो शब्‍द है, जो ''खिलाड़ी'' फिल्‍म के निर्माता गिरिश जैन को बिल्‍कुल पसंद नहीं था, और अब्‍बास मस्‍तान इस टाइटल से फिल्‍म रिलीज करना चाहते थे, गिरिश को डर था कि ''खिलाड़ी'' टाइटल देखकर शायद दर्शक नहीं आएंगे, मगर फिल्‍म को मिली सफलता ने अक्षय कुमार को नया नाम दे डाला खिलाड़ी कुमार। इसके अगले ही साल अक्षय कुमार को चम्‍पक जैन ने ''मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी'' के लिए साइन कर लिया। यह फिल्‍म भी सफल रही। मगर धीरे धीरे खिलाड़ी का बॉक्‍स ऑफिस पर बुरा दौर शुरू हो गया, अक्षय कुमार ने ''खिलाड़ी 420'' के बाद खिलाड़ी टाइटल से कोई फिल्‍म नहीं बनाई, जबकि छोटे पर्दे के लिए उन्‍होंने ख़तरों के खिलाड़ी शो जरूर किया। अब लम्‍बे अर्से पर अक्षय कुमार अपने पुराने टाइटल खिलाड़ी के साथ रुपहले पर्दे पर उतर रहे हैं। उनकी खिलाड़ी टाइटल वाली फिल्‍मों में खिलाड़ी, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, सबसे बड़ा खिलाड़ी, खिलाड़ियों का खिलाड़ी, मिस्‍टर एंड मिसेज खिलाड़ी, इंटरनेशनल खिलाड़ी, खिलाड़ी 420 आदि शामिल है।

अनुमान
अगर अक्षय कुमार की ''खिलाड़ी 786'' जिस तरह दर्शकों को अपने संगीत की ओर आकर्षित कर रही है, अगर वो वैसे ही दर्शकों को सिने हाल के अंदर भी टिका पाई तो उम्‍मीद है कि अक्षय कुमार इस फिल्‍म से दो सौ करोड़ के क्‍लब में एंट्री मारेंगे, क्‍यूंकि उनकी फिल्‍म के पास कुल मिलाकर दो वीक्‍स हैं, जो किसी भी बड़े बजट सुपर प्रमोशन वाली फिल्‍म के लिए काफी होते हैं। हाऊसफुट 2, ओह माय गॉड में मिथुन दा के साथ बेहतरीन काम कर चुके अक्षय कुमार अभी खिलाड़ी 786 में भी मिथुन दा के साथ काम करते हुए नजर आएंगे।

बनेगा ओह! माय गॉड का स्‍किवल

मराठी सिनेमा में प्रवेश करने के बाद होगा पंजाबी, बंगाली एवं दक्षिण की तरफ रुख 

 अभिनेता, निर्माता अक्षय कुमार एवं परेश रावल की अभिनीत फिल्‍म ओह! माय गॉड का स्‍िकवल बनेगा। 43वां अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍मोत्‍सव होस्‍ट कर रहे अक्षय कुमार अपनी बिजनस पार्टनर अश्‍िवनी जर्डी के साथ एक मराठी फिल्‍म कोल्‍हापुर 72 माइल्‍स एक प्रवास का निर्माण भी कर रहे हैं। इस फिल्‍म के बाद हो सकता है अक्षय कुमार एवं अश्‍विनी यार्डी की संयुक्‍त फिल्‍म निर्माण कंपनी गेजिंग गोट ओह! माय गॉड का निर्माण करे। सूत्रों की माने तो अक्षय कुमार का मानना है कि और भी काफी मुद्दे हैं, जिस पर फिल्‍म निर्माण किया जा सकता है।

अब देखना यह है कि ओह! माय गॉड का स्‍किवल दर्शकों को कितना पसंद आता है, वैसे भी बॉलीवुड में स्‍िकवल बनाने की होड़ सी लगी हुई है। रेस टू, दबंग टू, रॉक ऑन टू, वन्‍स टाइम अपन एट मुम्‍बई टू, हाऊस फुल टू ब्‍लॉ ब्‍लॉ।

सुनने में तो यह भी आया है कि अक्षय कुमार बहुत जल्‍द पंजाबी, बंगाली एवं दक्षिण की तरफ रूख करने वाले हैं। ऐसा लगता है कि अक्षय कुमार एवं अश्‍िवनी यार्डी बॉलीवुड से बाहर निकलकर कुछ ऐसा करने चाहते हैं जो बड़े बैनर्स करने में नाकाम रहे हैं।

ऐसे में अक्षय कुमार एवं अश्‍िवनी यार्डी को युवारॉक्‍स बेस्‍ट ऑफ लक कहेगा।

43वां भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव आज से शुरू

43वां भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव मंगलवार से गोवा में शुरू हो रहा है। यह महोत्सव 20 से 30 नवंबर तक चलेगा। उद्घाटन समारोह के लिए सिने सितारे अक्षय कुमार मुख्य अतिथि होंगे। इस अवसर पर सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी उपस्थित होंगे। उनके साथ पोलैंड के संस्कृति मंत्री और गोवा के मुख्य मंत्री मनोहर पर्रिकर भी मौजूद होंगे।

दस दिवसीय इस महोत्सव में दर्शकों के उत्कृष्ट सिनेमा का प्रदर्शन किया जाएगा। भारतीय परिदृश्य जैसे वर्गों के तहत फीचर और गैर फीचर सिनेमा को शामिल किया गया है। इसके अलावा भारतीय सिंहावलोकन, श्रद्धांजलि, उत्कृष्ट तथा विद्यार्थी फिल्मों और काफी कुछ शामिल किया गया है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय स्क्रीनिंग वर्ग के तहत महोत्सव के विभिन्न पक्ष, विश्व सिनेमा, विदेशी सिंहावलोकन, श्रद्धांजलि, प्रमुख देश, पर्दे पर रेखाचित्र (एनिमेशन और थ्री डी सिनेमा), वृतचित्र जैसे विशेष पहलू दर्शाए जाएंगे।

दस दिवसीय इस अवधि में 200 से अधिक फिल्में दिखाई जाएंगी। इसमें ऑस्कर पुरस्कार प्राप्त आंग ली की लाइफ ऑफ पाई का भी प्रदर्शन किया जाएगा और साथ ही महोत्सव में अंतिम फिल्म के तौर पर मीरा नायर की द रिलकटेंट फंडामेंटलिस्ट दिखाई जाएगी। भारतीय सिनेमा के शताब्दी वर्ष के समारोह के तहत महोत्सव में- ‘शताब्दी समारोह’ के लिए एक विशेष अंश शामिल किया गया है जिसमें भारतीय सिनेमा के गौरवशाली 1क्क् वर्षो के इतिहास की चुनिंदा फिल्मों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा शताब्दी वर्ष के मद्देनजर ‘शताब्दी फिल्म पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा जिसका चयन एक विशेष ज्यूरी पैनल द्वारा किया जाएगा।

सरदार के बाद खिलाड़ी मुश्‍िकल में

तलाश के बाद होगी रिलीज खिलाड़ी 786


सन ऑफ सरदार एवं जब तक है जान के बीच की टक्‍कर खत्‍म हो गई, दोनों फिल्‍में बॉक्‍स ऑफिस पर अच्‍छा धन जुटाने में सफल रही। अगर आंकड़ों को देखते तो सन ऑफ सरदार ने यशराज ग्रुप को कड़ी टक्‍कर देते हुए जीत हासिल की, क्‍यूंकि अजय देवगन की फिल्‍म केवल 2000 स्‍क्रीनों पर रिलीज हुई, जबकि जब तक है जान करीबन 2500 स्‍क्रीन पर। यशराज फिल्‍म का खर्च 85 से 90 करोड़ के बीच बताया जा रहा है, जबकि सन ऑफ सरदार का खर्च केवल 65 से 75 के बीच बताया जा रहा है।

वैसे अजय देवगन बॉक्‍स ऑफिस क्‍लेकशन को देखने के बाद काजोल एवं बच्‍चों के साथ गोवा रवाना हो चुके हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सन ऑफ सरदार पूरी तरह सफल रहा। जब तक है जान को वो रिस्‍पांस नहीं मिला, जो मिलना चाहिए था, कहीं न कहीं यशराज बैनर्स को निराशा हाथ लगी है, भले ही फिल्‍म अपना खर्च निकालने में कामयाब हो जाए।

फिल्‍मों के बढ़ते बजट के कारण सितारों के बीच अब युद्ध तो चलता ही रहेगा। अब आगे रिलीज होने वाली दो फिल्‍मों के बीच टक्‍कर का माहौल बताया जा रहा है, क्‍यूंकि अमीर खान की फिल्‍म तलाश नवंबर अंत में रिलीज हो रही है और सिनेमा हालों को पहले से हर बुक कर दिया गया है। सुनने में आया है कि सिंगल स्‍क्रीन मालिकों को फिल्‍म को लगातार दो हफ्ते लगाए रखने को कहा गया है, जो अक्षय कुमार की खिलाड़ी 786 के लिए शुभ संकेत नहीं, क्‍यूंकि एक्‍श्‍ान फिल्‍मों को हमेशा कमाई सिंगल स्‍क्रीन से हुई है, जबकि रोमांस भरपूर फिल्‍मों को मल्‍टीप्‍लेक्‍स से, और अक्षय कुमार एक्‍शन फिल्‍म लेकर आ रहे हैं। गौर तलब है कि नवम्‍बर अंत में आमिर की तलाश रिलीज हो रही है, वहीं दूसरी तरफ उसके अगले हफ्ते अक्षय कुमार की खिलाड़ी 786 रिलीज हो रही है।

 अब देखना यह है कि आमिर खान ने सिंगल स्‍क्रीन वालों को जो आदेश दिया है, उसको टिका पाने में उनकी फिल्‍म तलाश कामयाब होती है या नहीं। फिल्‍म प्रोमो देखने से एक बात तो साफ होती नजर आ रही है कि फिल्‍म की कहानी एक सख्‍त पुलिस ऑफिसर के आस पास घुमती है, जिसके बेटे को किसी ने अगवा कर लिया है, और उसको बचाने के लिए पुलिस अधिकारी एक कॉलगर्ल का सहारा लेगा, मगर कहा जा रहा है कि फिल्‍म में रहस्‍यमयी है, ऐसे में अब देखना यह है कि फिल्‍म के गीतों में नजर आ रही कहानी के पीछे वो कौन सा रहस्‍य है, जिसके कारण फिल्‍म से जुड़े लोगों ने कहा, फिल्‍म को दो हफ्ते टिकाए रखना?

उधर, अक्षय कुमार पूरी ऊर्जा में नजर आ रहे हैं, क्‍यूंकि उनकी ओह माई गॉड ने बॉक्‍स ऑफिस पर खूब कमाई की है, भले ही शिरीष कुंदर का जोकर पिट गया हो। इसके बाद रिलीज हो गई सलमान खान की दबंग टू, और 2012 का अंत।

'थप्‍पड़ कांड' के बाद शिरिष कुंदर का 'जोकर'

दस करोड़ में बनी 'जानेमन' ने बॉक्‍स ऑफिस पर लगभग 50 करोड़ का क्‍लेक्‍शन किया। फिल्‍म का गीत 'हम को मालूम है' बेहद लोकप्रिय हुआ, मगर अफसोस की बात कि फिल्‍म निर्देशक को सिने प्रेमियों ने याद ही नहीं रखा। इतना ही नहीं, उन को अपनी दूसरी फिल्‍म निर्देशित करने के लिए भी करीबन छह साल लग गए, जो बेहद हैरत वाली बात है।

जानेमन के बाद जब शिरिष कुंदर ने अपनी जोकर के लिए शाहरुख खान से बातचीत की तो उन्‍होंने मना कर दिया, जो फरहा खान, जो शिरिष की पत्‍नी हैं, के अच्‍छे दोस्‍त हैं, कई फिल्‍में एक साथ भी की। फिल्‍म शिरिष कुंदर अक्षय कुमार के पास पहुंचे, तो उन्‍होंने भी मना कर दिया, क्‍यूंकि जानेमन में अंतरिक्ष विज्ञानी बनकर भी वो कुछ नहीं कमा पाए। फिर शिरिष कुंदर पहुंचे सैफ अली खान के दरवाजे पर, जिन्‍होंने रोल के लिए हां बोल दी, क्‍यूंकि करीना के प्‍यार ने उनको पहले से ही जोकर बना रखा था। फिर पता नहीं, कहानी में कब और कैसे टि्वस्‍ट आया कि सैफ ने मना कर दिया, और बाद में पता नहीं शिरिष कुंदर ने कौन सा पासा फेंक कर अक्षय कुमार को साइन कर लिया, जिन्‍होंने फरहा खान के साथ तीस मार खान की। जो सिने हाल में तो नहीं चली, लेकिन टेलीविजन प्रेमियों को बेहद अच्‍छी लग रही है।

अब जब बड़ी मुश्‍िकलों के बाद 'जोकर' बना कर रिलीज होने किनारे है, तो फिल्‍म का नायक व नायिका प्रमोशन नहीं कर रहे, वो नाराज चल रहे हैं, तो शिरिष कुंदर ने अपनी रडार सलमान खान की तरफ मोड़ दी, जो एक था टाइगर से सुर्खियां बटोर रहे हैं।

शिरिष कुंदर कह रहे हैं कि उनकी फिल्‍म जोकर में एलियन सलखान खान का बहुत बड़ा फैन है। इस फिल्‍म की पटकथा लेकर नायक की तलाश में शिरिष कुंदर पीछे चाल साल से घुम रहे हैं, लेकिन अब जब फिल्‍म बनकर रिलीज होने किनारे है तो अपने नायक को नाराज कर दिया, जिसने शिरिष कुंदर की फिल्‍म को उस समय साइन किया, जब शिरिष कुंदर के लिए सभी नायकों ने दरवाजे बंद कर दिए थे।

हो सकता है कि शिरिष कुंदर ने जो सीन अभी अभी पटकथा में मेंशन किया, उसी से फिल्‍म का नायक रूठ गया हो, क्‍यूंकि जब कोई किसी की काबलियत पर शक करता है तो सामने वाला बुरा मान ही जाता है, जब पूरी फिल्‍म में अक्षय कुमार नायक की भूमिका कर रहा है तो प्रमोशन के वक्‍त एक था टाइगर वाला नायक कैसे आ सकता है।


शिरिष कुंदर को निर्देशक के रूप में तो बहुत कम जानते हैं, लेकिन शाहरुख खान का थप्‍पड़ खाने वाले इस शख्‍स को सब पहचानते हैं। थप्‍पड़ कांड इतना फेमस हुआ था कि अमूल ने इसको अपना थीम बना लिया था। लोगों ने कहा था, कुंदर की अगली फिल्‍म का नाम होगा थप्‍पड़ की गूंज, मगर शिरिष की अगली फिल्‍म का नाम थप्‍पड़ की गूंज नहीं, किक्‍क है। काश! वो थप्‍पड़ कांड अब हुआ होता, जब शिरिष कुंदर की दूसरी फिल्‍म जोकर रिलीज हो रही है, प्रमोशन तो हो जाता।

देखते हैं 31 अगस्‍त को सिनेमा हॉल पर उतरने वाला शिरिष कुंदर का जोकर बाजी को जीतता है या हारता है।

सोनाक्षी की दूसरी फिल्‍म और जन्‍मदिवस


सोनाक्षी सिन्‍हा, एक ऐसा नाम है। एक ऐसा चेहरा है। जो आज किसी पहचान का मोहताज नहीं। दबंग से पहले भले ही मायानगरी में होने वाली पार्टी में लोग उसको शॉटगन की बेटी के रूप में पहचानते हो, मिलते हो। मगर आज उसकी अपनी एक पहचान बन चुकी है। पहली ही फिल्‍म सुपर डुपर हिट और नवोदित अभिनेत्री पुरस्‍कार भी झोली में आन गिरा। ऐसा नहीं कि ऐसा केवल सोनाक्षी के साथ ही हुआ, पहले भी बहुत सी अभिनेत्रियों के साथ हुआ। मगर सोनाक्षी की आंखों में जो कशिश है, चेहरे पर जो नूर है, वो उसको बिल्‍कुल अलग करता है।

जहां दो जून को सोनाक्षी पच्‍चीस साल की हो जाएगीं, वहीं उनकी दूसरी फिल्‍म राउड़ी राठौड़ उनके जन्‍मदिवस से ठीक एक दिन पहले रिलीज हो रही है। इस फिल्‍म में उनके ऑपोजिट अक्षय कुमार हैं, जिसके सितारे बॉक्‍स ऑफिस पर ठीक बिजनस नहीं कर रहे। मगर दिलचस्‍प बात तो यह भी है कि इस फिल्‍म को प्रभु देवा निर्देशित कर रहे हैं, जिन्‍होंने वांटेड से सलमान खान की फ्लॉप सिरीज पर विराम लगाया था।

इस फिल्‍म के प्रोमो और गीत बताते हैं कि फिल्‍म पूरी तरह दक्षिण से प्रभावित है, आज कल छोटे पर्दे पर दक्षिण फिल्‍मों के हिन्‍दी रूपांतरणों का बोलबाला है। क्‍या प्रभु देवा छोटे पर्दे की तरह बड़े पर्दे पर भी दक्षिण की शैली से प्रभावित फिल्‍म को बॉक्‍स ऑफिस पर हिट करवा पाएंगे। अक्षय को तो फ्लॉप से ज्‍यादा फर्क नहीं पड़ेगा, मगर दबंग से सफलता की सिखर पर चढ़ बैठी सोनाक्षी को थोड़ा सा झटका जरूर लग सकता है, क्‍यूंकि अगले दिन जन्‍मदिवस जो है।

मिस सिन्‍हा अभिनेत्री से पहले फैशन डिजाइनर थी, उन्‍होंने बकायदा इसकी तालिम भी ली हुई है। उन्‍होंने 2005 में आई फिल्‍म मेरा दिल लेके देखो के लिए परिधान डिजाइन किए थे। उन्‍होंने कई फैशन शो भी किए। मगर किसी की नजर इस चेहरे पर नहीं गई। फिर अचानक एक दिन एक समारोह में उस पर सलमान की निगाह पड़ गई, और उन्‍होंने उसको दबंग फिल्‍म में रोल के लिए ऑफर किया। इस फिल्‍म के लिए सोनाक्षी को काफी वजन कम करना पड़ा। मेहनत रंग लाई और फिल्‍म बॉक्‍स ऑफिस पर हिट हो गई। आज सोनाक्षी के पास आधा दर्जन से ज्‍यादा फिल्‍में हैं, जिसमें एकआध फिल्‍म को छोड़कर बाकी सब फिल्‍में अधिक उम्र के स्‍टारों के साथ हैं, जिनमें अक्षय कुमार, अजय देवगन और सलमान खान शामिल हैं।

एक जून को रिलीज होने वाली राउडी राठौर सुपरहिट तेलुगु फिल्म विक्रमारकुडु का हिंदी रीमेक है। कहानी की बात करें तो शिव (अक्षय कुमार) की जो एक चोर है। इस चोर का महिलाओं पर खूब जादू चलता है और वे उसकी दीवानी हो जाती हैं। प्रिया (सोनाक्षी सिन्हा) से शिव की मुलाकात एक ऐसी शादी में होती है जहां उसे बुलाया ही नहीं गया है। प्रिया का वह दीवाना हो जाता है। शिव की जिन्‍दगी में तब समस्या पैदा होती है जब छ: वर्ष की नेहा बेवजह उसे पिता मानने लगती है। शिव इसका पता लगाने की कोशिश करता है कि नेहा उसे अपना पिता क्यों मानती है। नेहा के प्यार और उसके प्रति जिम्मेदारी शिव को इंसान के रूप में बदल देती है। राउडी राठौर कहानी है शिव (अक्षय कुमार) की जो एक चोर है। इस चोर का महिलाओं पर खूब जादू चलता है और वे उसकी दीवानी हो जाती हैं। प्रिया (सोनाक्षी सिन्हा) से शिव की मुलाकात एक ऐसी शादी में होती है जहां उसे बुलाया ही नहीं गया है। प्रिया का वह दीवाना हो जाता है। शिव न केवल नेहा के अतीत से परिचित होता है बल्कि वह बिहार स्थित छोटे शहर के लोगों के लिए वहां के एमएलए और गुंडों के खिलाफ मसीहा बनकर उभरता है।

अब देखना यह है कि सोनाक्षी अक्षय कुमार के साथ अपनी दूसरी हिट फिल्‍म देने में कामयाब होगी या नहीं। वैसे प्रभु देवा की भी यह दूसरी निर्देशित फिल्‍म है। इस फिल्‍म के निर्माताओं में संजय लीला भंसाली का भी नाम है, जो एक बेहतरीन निर्देशकों में गिने जाते हैं।

नो एंट्री, वेलकम और थैंक यू

कुलवंत हैप्पी
आप ने अक्सर देखा होगा कि आप "थैंक्स" कहते हैं तो सामने से जवाब में "वेलकम" सुनाई पड़ता है, मेंशन नॉट तो गायब ही हो गया। ये ऐसे ही हुआ, जैसे अमिताभ के स्टार बनते ही शत्रूघन सिन्हा एवं राजेश खन्ना की स्टार वेल्यू। कभी कभी थैंक्स एवं वेलकम का क्रम बदल भी जाता है, वेलकम पहले और थैंक्स बाद में आता है। शायद फिल्म निर्देशक अनीस बज्मी दूसरे क्रम पर चल रहे हैं, तभी तो उन्होंने पहले कहा, "नो एंट्री", फिर कहा, "वेलकम" और अब कह रहे हैं "थैंक यू"। अनीस के नो एंट्री कहने पर भी हाऊसफुल हो गए थे, और वेलकम कहने पर भी, लेकिन सवाल उठता है कि क्या दर्शक उनके थैंक यू कहने पर वेलकम कहेंगे?

सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि इस बार अक्षय कुमार के साथ उनकी लक्की गर्ल कैटरीना नहीं, और उनका वक्त वैसे भी ख़राब चल रहा है, फिल्म आती है और बिन हाऊसफुल किए चली जाती है, वो बात जुदा है कि अक्षय कुमार ने इससे भी ज्यादा बुरा वक्त देखा है, और वो इस स्थिति को संभाल लेंगे, मगर लगातार दो फिल्म फ्लॉप देने वाली अनिल कपूर की बेटी का कैरियर धर्मेंद्र की बेटी ईशा देओल की तरह लटक सकता है, क्योंकि फिल्मी दुनिया में चढ़ते सूरज को सलाम होता है।

अगर अनीस जी अपने निर्देशन के बल पर फिल्म को हिट करवा गए तो अक्षय की असफल फिल्म यात्रा थम जाएगी, जो चाँदनी चौंक टू चाईना से शुरू हुई है और अभी तक अविराम जारी है। इतना ही नहीं, साँवरिया गर्ल एवं दिल्ली छ: की मसककली का नसीबा खुल जाएगा। नो एंट्री के बाद अनीस बज्मी पर हास्यस्पद फिल्म निर्देशक का ठप्पा लग गया, और सिंह इज किंग ने जहाँ अक्षय कुमार को शिखर पर खड़ा किया, वहीं अनीस बज्मी का हौसला बढ़ाया, जबकि अनीस जी ने अपने कैरियर के शुरूआती दिनों में प्रेम रोग, हलचल, प्यार तो होना ही था जैसी एक्शन, गम्भीर और रोमांटिक फिल्म निर्देशित की। अक्षय कुमार की तरह अनीस को हास्यस्पद फिल्में भी रास आई, और उनको सफल निर्देशकों की कतार में लाकर खड़ा कर दिया।

जैसे जैसे आप शिखर की तरफ जाते हैं, लोगों की उम्मीद आपसे ज्यादा होने लगती हैं। वो आप से और बेहतर की उम्मीद करते हैं, और वैसे ही जैसे रियालटी शो के जज प्रतिभागियों से करते हैं। रामगोपाल वर्मा एवं संजय लीला भंसाली ने एक से एक बेहतर दी, लेकिन जैसे ही उनकी क्रमश: आग और साँवरिया फ्लॉप हुई, तो उनको आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा, उनकी फिल्में फ्लॉप श्रेणी से निकल सुपर फ्लॉप श्रेणी में पहुंच गई। जब आप शिखर की तरफ जाते हैं, तो आपकी छोटी सी चूक भी बहुत बड़ी हो जाती है, ऐसे में शिखर की तरफ जाते हुए बहुत सावधान रहना पड़ता है। पहाड़ पर चढ़ते हुए, आप जितने नीचे होते हैं, उतना जोखिम कम, और जितना ऊपर पहुंचते हैं उतना जोखिम ज्यादा।

ऐसे में अनीस को चौकसी बरतनी होगी? खासकर तब तो विशेष जब फ्लॉप सितारों के साथ आप फिल्म बना रहें हो, अनीस की थैंक यू में अक्षय कुमार, सोनम कपूर के अलावा बॉबी दिओल भी हैं। सोनम, बॉबी दिओल कॉमेडी सितारे नहीं, स्टार कास्ट देखकर लग रहा है कि वो हास्यरहित फिल्म बनाने का जोख़म उठाने जा रहे हैं, ऐसे में तो और भी ज्यादा गम्भीर रहना होगा। वैसे अब तक के लिए अनीस जी को थैंक यू कहा जा सकता है।

संघर्ष का दूसरा नाम 'अक्षय'


'कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो' यह पंक्ति उस वक्त बिल्कुल हकीकत नजर आती है, जब हम पिछले साल चार हिट फिल्में देकर सफलता की शिख़र पर बैठने वाले अक्षय कुमार की जिन्दगी में झाँकते हैं. आज अक्षय कुमार का नाम सफलतम सितारों में शुमार हो गया, हर किसी को उसका हर लुक भा रहा है, चाहे वो एक्शन हो, चाहे रोमांटिक या चाहे कामेडी. आज दर्शक उसकी सफलता देखकर वाह अक्षय वाह कह रहे हैं, मगर ज्यादातर दर्शकों को अक्षय के संघर्षशील दौर के बारे में पता नहीं, हां मगर, जिनको पता है वो अक्षय को संघर्ष का दूसरा नाम मानते हैं. गौरतलब है कि होटलों, ट्रेवल एजेंसी व आभूषण बेचने जैसे धंधों में किस्मत आजमाने वाले राजीव भाटिया ने बच्चों को मार्शल आर्ट भी सिखाया. इसी संघर्ष के दौर में उनको मॉडलिंग करने का ऑफर मिला. जिसके बाद दिल्ली के चांदनी चौक में रहने वाला राजीव भाटिया अक्षय कुमार के रूप में ढल गया और बड़े पर्दे पर अपनी अदाकारी के जलवे दिखाने लगा. अक्षय कुमार ने फिल्म 'सौगंध' के मार्फत बालीवुड में कदम रखा, उसके बाद खिलाड़ी, सैनिक, मोहरा, हम हैं बेमिसाल, वक्त हमारा है, एलान, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, मैदान-ए-जंग जैसी कई एक के बाद एक एक्शन फिल्में दी. इस दौर में अक्षय की ज्यादातर फिल्में हिट या औसत रहती थी, जिसके चलते अक्षय बालीवुड में टिका रहा, मगर फिर एक दौर आया, जब अक्षय की हर फिल्म बॉक्स आफिस पर आकर दम तोड़ने लगी. इसके बाद फिर अक्षय की डुबती नैया को संघर्ष, जानवर, धड़कन, हेराफेरी, आँखें जैसी फिल्मों ने बचा लिया. इस दौरान अक्षय कुमार का नाम रवीना टंडन और फिर शिल्पा शेट्टी के साथ जुड़ने लगा, मगर अक्षय ने समझदारी से काम लेते हुए ट्विंकल खन्ना से शादी करके सभी अटकलों पर अंकुश लगा दिया. शादी के बाद अक्षय कुमार की जिन्दगी धीरे धीरे सफलता की तरफ बढ़ने लगी, बॉक्स आफिस पर आने वाली अक्षय कुमार की ज्यादातर फिल्में हिट होने लगी, मगर वर्ष 2006 और 2007 ने तो अक्षय कुमार को सफलता के रथ पर सवार करवा ही दिया. इन सालों के दौरान अक्षय कुमार की 'हम को दीवाना कर गए', 'फिर हेराफेरी', 'जानेमन', 'भागमभाग', 'नमस्ते लंदन', 'हे बेबी', 'भूल भुलैया', 'ओम शांति ओम' (मेहमान भूमिका) और वैलकम आदि फिल्में रिलीज हुई, जिन्होंने अक्षय कुमार की तकदीर के पत्ते ही पलट दिए. आज अक्षय कुमार के पास बड़े बड़े निर्माता निर्देशक आ रहे हैं, मगर अक्षय कुमार के पास वक्त नहीं,सफलता की शिख़र पर बैठे अक्षय कुमार अपने कैरियर को लेकर कितना सजग हो चुके हैं, इस बात का पता तो पिछले दिनों सामने आई एक घटना से लगाया जा सकता है. हुआ यूं कि पिछले दिनों यशराज बैनर ने अक्षय कुमार को टशन के अलावा एक और फिल्म के लिए साईन करना चाहा, मगर जब अक्षय ने फिल्म की कहानी सुनी तो फिल्म करने से इंकार कर दिया. इस बात से आदित्य काफी नाराज हुए, हों भी क्यों न, क्योंकि बालीवुड के बड़े बड़े स्टार यशराज बैनर तले काम करने के दौड़े दौड़े जो आते हैं. मगर अक्षय कुमार उनमें शामिल नहीं. कुछ समय पहले अक्षय ने एक अख्बार को दिए साक्षात्कार में कहा था कि आज वो जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे बड़े बैनर नहीं बल्कि छोटे छोटे बैनर और निर्माता-निर्देशकों का हाथ है. इतना ही नहीं साल अक्षय कुमार और यशराज फिल्मस की पहली फिल्म टशन रिलीज होगी, जिसको लेकर लोगों में क्रेज है. इस फिल्म के बढ़े क्रेज के पीछे यशराज बैनर नहीं बल्कि अक्षय कुमार की बढ़ती लोकप्रियता है. याद हो तो पिछले साल यशराज की चार फिल्में बुरी तरह फ्लाप हुई थी जबकि अक्षय की चार फिल्में हिट गई थी. इसके अलावा अक्षय कुमार की लोकप्रियता का अंदाजा तो छोटे पर्दे के कार्यक्रम 'फीयर फैक्टर' के प्रति ऐपीसोड 1.5 करोड़ रुपए मिलने से लगाया जा सकता है. इसके अलावा खिलाड़ी के हाथ में ऐसी फिल्में है, जोकि बॉक्स पर धमाल मचाए बिना नहीं जाएंगी, जिनमें 'सिन्ह इज किंग' 'ब्लू' 'दिल्ली चाँदनी चौक टू बैंकॉक' 'एक्शन रिप्ले' 'टेन वाय एट' 'हेराफेरी 4' और साजिद खान की अनाम फिल्म आदि शामिल हैं. अक्षय कुमार का जन्म पंजाब के पवित्र शहर अमृतसर में 9 सितम्बर 1967 को हरीओम भाटिया के घर हुआ, उनके पिता सरकारी नौकरी करते थे. जिसके चलते वो अमृतसर साहिब से दिल्ली चाँदनी चौक में आकर रहने लगे. इसके बाद अक्षय कुमार (राजीव भाटिया) ने अपने पांव पर खड़ा होने के लिए यूनिसेफ के कार्ड बेचने शुरू कर दिए. अक्षय कुमार को प्रति कार्ड पचास पैसे मिलते थे. इसके बाद आभूषण, ट्रैवल एजेंसी, होटल, आर्ट मार्शल और पार्टियों में डांस कर पैसे कमाने का जुगाड़ लगाया, मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. दिल्ली के राजीव भाटिया को तय करना था अक्षय कुमार तक का सफर. इस सितारे ने एक्शन, कामेडी और रोमांटिक हर तरह की भूमिका निभायी, जिसको दर्शकों ने खूब सराहा, इतना ही नहीं इस सितारे ने अजनबी फिल्म में अदाकारी के ऐसे जलवे दिखाए कि बेस्ट विलेन का अवार्ड भी अपने नाम कर लिया.