शिव सेना की हालत ऐसी — न तलाक लेते बनता है, न साथ रहते बनता है

वो समय कुछ और था। जब भाजपा के बड़े बड़े नेता बाला साहेब ठाकरे के सामने जाकर सजदे में खड़े होते थे। अब समय बदल चुका है। अब भारतीय जनता पार्टी खुद नरेंद्र मोदी के गगनचुंबी कद के सामने सिर झुकाए खड़ी हो चुकी है।


अगर ऐसे में भी शिव सेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे वाला अदब चाहते हैं, तो उनको बिस्तर पर आराम करना चाहिये, अच्छी नींद लेनी चाहिये और नींद में खूबसूरत ख्वाब देखना चाहिये, क्योंकि हकीकत में ऐसा होना संभव नहीं है।

वैसे भी शिव सेना का शुरू से झुकाव नरेंद्र मोदी की ओर कम वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी की ओर से अधिक रहा है। शिव सेना के शुरूआती तेवरों से नरेंद्र मोदी समझ गए थे कि उनको अगली पारी कैसे खेलनी है क्योंकि नरेंद्र मोदी और चीजों को भले ही याद न रखें, लेकिन, अपने विरोधियों के साथ निबटना अच्छे से जानते हैं।

कभी कभी तो लगता है कि नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही मन की दीवार पर वॉट पुट्टी लगा ली थी, ताकि शिव सेना जैसी विरोधी सहयोगी पार्टी की बारिश का उन पर कोई असर न हो।

पिछले तीन साल से शिव सेना और नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाला सरकार के बीच पति पत्नी वाली कहा सुनी चलती आ रही है। उधर, अपनी धुन में रहने वाले पति की तरह नरेंद्र मोदी हैं कि सुनते नहीं, और इधर, दुखी पत्नि की तरह शिव सेना है कि चुप नहीं होती।

अमूमन ऐसा होता है कि अंत शिव सेना थक हारकर अपने घरेलू अख़बार सामना में अपने मन की भड़ास निकालकर अपने मन को सांत्वना देती है, जो गुस्सैल पत्नि का बर्तनों पर गुस्सा उतारने जैसा प्रतीत होता है।

मगर, अब लगता है कि पानी सिर से गुजर चुका है। शिव सेना तलाक लेने की कगार पर पहूुंच चुकी है। मगर, नरेंद्र मोदी राजनीति के बड़े मंझे हुए खिलाड़ी हैं, ऐसा दांव चलते हैं कि अपने और विरोधियों के चारे खाने चित्त कर देते हैं।

महाराष्ट्र में ​भारतीय जनता पार्टी के पास 122 सीटें हैं और शिव सेना के पास 63 सीटें। अगर शिव सेना महाराष्ट्र सरकार से तलाक लेती भी है, तो भी महाराष्ट्र सरकार को कुछ नहीं होगा क्योंकि उसके पास एनसीपी का समर्थन है, जिसके पास 62 सीटें हैं।

ऐसे ही तो नरेंद्र मोदी ने शरद पावर के साथ ​नजदीकी संबंध रखे हुए। ऐसे ही तो नहीं, सुप्रिया सुले को कैबिनेट में शामिल करने का प्रस्ताव दिया था।

​वरिष्ठ नेता शरद पावर खुद पुष्टि कर चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बैठक में सुप्रिया सुले को केंद्रीय मंत्री मंडल का हिस्सा बनने का प्रस्ताव दिया था, जो सुप्रिया सुले ने यह कहते हुए ठुकरा दिया कि भाजपा में शामिल होने वाली वो अंतिम एनसीपी सदस्य होंगी।

पिछली मीटिंग में कुछ भी हुआ हो, अगर, नरेंद्र मोदी को महाराष्ट्र सरकार बचाने के लिए एनसीपी का हाथ मांगना पड़ा तो नरेंद्र मोदी पीछे नहीं हटेंगे, और शरद पावर इस रिश्ते से इंकार भी नहीं करेंगे। हालांकि, दहेज की मांग बढ़ सकती है। बता दूं कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए 145 सीटों की जरूरत है जबकि खुद भाजपा के पास 122 सीटें हैं।

यदि इस समय महाराष्ट्र में चुनाव होते हैं तो एनसीपी और कांग्रेस को फायदा होने की संभावना है। शिव सेना की हालत पतली है, यदि मीडिया रिपोर्टों पर विश्वास करें। उद्धव ठाकरे की ओर से शिव सेना विधायकों की मीटिंग का आयोजन किया गया। इस मीटिंग में मौजूद कथित 25 विधायकों ने कहा, 'उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है जबकि भाजपा की आर्थिक स्थिति काफी अच्छी है।'

लगता है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निशाना सही जगह लगा है। शायद, यह भी एक कारण है कि शिव सेना निरंतर नोटबंदी को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साध रही है।

दरअसल, नोटबंदी नरेंद्र मोदी का मोदी स्ट्रोक था, जिसका उद्देश्य विरोधी पार्टियों को आर्थिक तौर पर कंगाल करना ही था। जिस आर्थिक तंगी का रोना शिव सेना के विधायक रो रहे हैं। उसका रोना यूपी बिहार में भी रोया चुका है।

वैसे कहा जा रहा है कि शिव सेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे इस मामले में दश्हरे तक कोई ठोस निर्णय लेंगे। लेकिन, सच तो यह है कि शिव सेना की हालत ऐसी है..... न तलाक लेते बनता है, न साथ रहते बनता है।

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