गुजरात बुलेट ट्रेन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नाम खुला पत्र

प्रिय नरेंद्रभाई दमोदरदास मोदी,


मीडिया से दूर, समाचारों से दूर, शांतिमय अच्छे मूड में बैठा था। अपना काम के साथ साथ  फेसबुक पर बीच बीच में एकआध स्टेट्स अपडेट चल रहा था। अचानक पत्नी का काॅल आया कि सभी चैनलों पर आपकी शाही सवारी का खूबसूरत नजारा चल रहा है। मैंने आॅन किया, तो देखा कि आप और जापान के प्रधान मंत्री अबे शिन्जो खुली जीप में सवार होकर रिवरफ्रंट के किनारे टहल रहे हैं।

टेलीविजन की स्क्रीन पर जापान प्रधानमंत्री अबे शिन्जो के साथ आपका रौब देखते ही बन रहा था। एक चाय वाले का ठाठ, वाह वाह, क्या कहने, जो इस समय देश का प्रधान सेवक है। आपकी आपकी बोली में कहूं तो चैंकीदार।

आपके आगमन पर शहर की टूटी फूटी सड़कों को एकदम चकाचक कर दिया है, मझाल है कि पानी के गिलास से एक बूंद पानी छलककर नीचे गिर जाए। लेकिन, यह उतने क्षेत्र में ही हुआ, जहां जहां से आपकी राजशाही सवारी को गुजरना था।

बाकी शहर के लिए तो भाजपा के संकट मोचन अमित शाह कह कर गए हैं कि बारिश के कारण सड़कों की मुरम्मत करना मुश्किल होता है। इसलिए बारिश का मौसम गुजर जाए तो काम चालू हो जाएंगे।

जैसे ही आपके आने का समाचार तंत्र को मिला। अहमदाबाद म्यूनिसिपल कार्पोरेशन के अधिकारी बरसात को भूल गए। शाबाशी देनी चाहिये ऐसे तंत्र को, जिसने रात दिन एक कर दिया, केवल सड़कों को साफ सुथरी, गड्डे रहित बनाने के लिए। हमको को अच्छी सड़कों के लिए बरसात के जाने का इंतजार करना होगा, आप जैसा नसीब थोड़ी है।

कल बच्ची को स्कूल लेने गया। यकीन मानना सात किलोमीटर लंबे रोड़ पर केवल डेढ़ किलोमीटर का पट्टा थोड़ा सा अच्छा मिला, वो भी हाल ही में बना था।

चलो छोड़ो। आप अब बड़े आदमी हो गए हैं। दिल्ली रहने लगे हैं। फिर भी हम नसीब वाले हैं कि आप जैसा प्रधानमंत्री नसीब हुआ, जो देश की भलाई के लिए उम्रभर अविवाहित रहा और अपनी आमदनी से भी पैसा निकालकर समाज कल्याण पर खर्च कर देता है, जैसा भक्तजन कहते हैं।

मुझे तो पता है कि 2000 हजार देकर 200000 सरकारी खाते से उड़ाना आपके लिए तो तली पर रखे फालतू तंबाकू को उड़ाने जैसा है। पूरे देश में गुनगान होगा, आप बुलेट ट्रेन का नींव पत्थर रखने आएं, पर सच तो यह है कि आप तो शक्ति प्रदर्शन करने आए हैं, वो भी सरकारी पैसे पर। बुलेट ट्रेन की आड़ में पूरा प्रोग्राम सरकारी खर्च पर हो जाएगा।

ऐसी ड्रामेबाजी के लिए खूब पैसा है। मगर, सरकारी बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए काम आने वाली आॅक्सीजन के 63 लाख तक के बिल भरने आपके बस की बात नहीं है। पिछले छह सात साल से गुजरात में मैट्रो बन रही है। कुछ लोग तो यह सोचने लगे हैं कि नरेंद्र मोदी जी की मैट्रो पर अब वह नहीं बल्कि उनके पोते पाती सवार होंगे।

कांग्रेस की बिछाई हुई पटरियों पर ट्रेनें चल नहीं पा रही। उनके भाड़े आसमान को छूते जा रहे हैं। पैट्रोल की कीमतों पर आपकी सरकार मुंह पर ताले लगाकर बैठी है। बीएसएनएल दुनिया का सबसे घटिया नेटवर्क बनाकर रख दिया, जिसका विज्ञापनों में पहाड़ पर नेटवर्क आता है, बस घरों में। ऐसे में आपकी फोकी थोथी चौधर, सरदारी, शान देखकर एक आम भारतीय कैसे खुश हो सकता है? वो भी जब उस पर लगने पर नाजायज टैक्सों से होने वाली आमदनी से आप ऐसे मजे कर रहे हों।

हो सकता है कि कुछ लोगों को आपकी थोथी और फोकी टौहर अच्छी लग रही हो। मेरा तो दिमाग खराब कर दिया, तुम्हारे चेहरे की फर्जी मुस्कान ने, जो अबे शिन्जो के साथ खुली जीप में सवार होकर दिए जा रहे थे।

मुस्कान और आंखों का तालमेल हो नहीं रहा था, होगा भी कैसे? आंखों और होंठों में संतुलन के लिए मन में अच्छे कर्म की छाप होनी चाहिये? क्या आप एक साधे और सरल समारोह से एक बुलेट ट्रेन का नींव पत्थर नहीं रख सकते थे? बच्चा पैदा से पहले ही इतना खर्च कर दिया, सोचो जब बच्चा पैदा होगा, तो कितना खर्च होगा।

शुक्र है कि चीन और जापान के पास आप जैसे महानुभवी नेता नहीं थे। वरना, वहां तो हर नयी चलने वाली ट्रेन पर ऐसे ही पैसे की बर्बादी हो जाती।

आपको पता है कि आपके आगमन पर 12000 के करीब पुलिस कर्मचारी अहमदाबाद और गांधीनगर में तैनात किए गए हैं, जो दो दिन तक ऐसे ही टंगे रहेंगे। सुनने में आया है कि कुछ बसों के रूट भी बंद कर दिए गए हैं। ऐसे में नौकरी पर जाने वाले लोग, जो बसों का इस्तेमाल करते हैं, वह क्या करेंगे? कैसे अपने आॅफिस तक पहुंचेंगे?

खैर छोड़िये, आप कहां किसी की सुनते हैं। तीन साल में एक भी आधिकारिक प्रेस कांफ्रेंस आप से न हो सकी। इतने खौफजदा क्यों हैं? यदि आप अच्छा कार्य कर रहे हैं। नहीं, नहीं, आप कार्य कम, कार्य का ड्रामा ज्यादा रच रहे हैं।

जय राम जी
क्षुब्ध भारतीय

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