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Showing posts from September, 2017

गुजरात में भाजपा की स्थिति ख़राब, मीडिया को भी बदलने पड़ रहे हैं तेवर

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शुक्रवार को एनडीटीवी सोशल मीडिया नेटवर्क वेबसाइटों पर तैरने लगा। ख़बर आई कि एनडीटीवी की 40 फीसद हिस्सेदारी नरेंद्र मोदी के करीबी कारोबारी और स्पाइस जेट के संस्थापक अजय सिंह ने खरीद ली, जिनकी बदौलत भारत को अबकी बार मोदी सरकार जैसा नारा मिला था। हालांकि, शाम होते होते एनडीटीवी ने बीएसई को पत्र लिखकर मामले में अपना पक्ष रखते हुए सभी ख़बरों की हवा निकाल दी।

मगर, अभी भी टेलीविजन से जुड़े कुछ सूत्रों का कहना है कि एनडीटीवी के कार्यालय में परिवर्तन होना शुरू हो चुका है। वैसे आग के बिना धुंआं होता नहीं, लेकिन, जब महिला ही गर्भवती न होने की पुष्टि कर दे, तो दूसरे लोगों के शोर मचाने से क्या होगा? ​अब तो बस इंतजार करना होगा, गर्भवती महिला की तरह एनडीटीवी के पेट बाहर आने का।

शुक्रवार से ठीक एक दिन पहले सोशल मीडिया पर ऐसी भी चर्चा थी कि एनडीटीवी गुजरात में प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि, ऐसा भी कुछ देखने में नहीं मिला। दिलचस्प बात तो यह है कि इस पूरे घटनाक्रम में जी मीडिया के शेयरों को झटका लगा और एनडीटीवी के शेयर बाजार में खूब उछले।

मीडिया जगत से एक और ख़बर सामने आ रही है, जो गुजरात से जुड़ी …

महात्मा गांधी के एक श्लोक ''अहिंसा परमो धर्म'' ने देश नपुंसक बना दिया!

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जब खुद में लड़ने का दम नहीं था तो गीता के श्लोक को आधा करके लोगों को नपुंसक बना दिया। भारत में अहिंसा के पुजारी का ढोंग करने वाले महात्मा गाँधी ने हिन्दुओं की सभा में हमेशा यही श्लोक पढ़ते थे लेकिन हिन्दुओं को कायर रखने के लिए गांधी इस श्लोक को अधूरा ही पढ़ता था।


ऐसी सैंकड़ों बातें आपको इंटरनेट पर तैरती हुई मिल जाएंगी, जब आप ''अहिंसा परमो धर्म:'' श्लोक को कॉपी पेस्ट करके गूगल सर्च में खोजने निकलेंगे। इस साहित्य को लिखने वाले आपको बताएंगे कि ''अहिंसा परमो धर्म'' अधूरा श्लोक है जबकि पूरा श्लोक तो 'अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च:' है, जिसका अर्थ है कि अहिंसा परम् धर्म है, तो धर्म के लिए हिंसा भी परम् धर्म है।

महात्मा गांधी का शरीर तो नत्थू राम गोडसे ने गोलियों से मार डाला। अब गोडसे के अनुयायी की ओर से महात्मा गांधी के विचारों को मारने की कोशिश पुरजोर चल रही है। इसमें कोई दो राय नहीं कि सोशल मीडिया पर कॉपी पेस्ट चलन के कारण उनके सफल होने की संभावनाएं ज्यादा हैं।

दिलचस्प बात तो यह है कि नरफत की आबोहवा पैदा करने के लिए लिखने वाले बेहतर जानते हैं …

शिव सेना की हालत ऐसी — न तलाक लेते बनता है, न साथ रहते बनता है

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वो समय कुछ और था। जब भाजपा के बड़े बड़े नेता बाला साहेब ठाकरे के सामने जाकर सजदे में खड़े होते थे। अब समय बदल चुका है। अब भारतीय जनता पार्टी खुद नरेंद्र मोदी के गगनचुंबी कद के सामने सिर झुकाए खड़ी हो चुकी है।


अगर ऐसे में भी शिव सेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे वाला अदब चाहते हैं, तो उनको बिस्तर पर आराम करना चाहिये, अच्छी नींद लेनी चाहिये और नींद में खूबसूरत ख्वाब देखना चाहिये, क्योंकि हकीकत में ऐसा होना संभव नहीं है।

वैसे भी शिव सेना का शुरू से झुकाव नरेंद्र मोदी की ओर कम वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी की ओर से अधिक रहा है। शिव सेना के शुरूआती तेवरों से नरेंद्र मोदी समझ गए थे कि उनको अगली पारी कैसे खेलनी है क्योंकि नरेंद्र मोदी और चीजों को भले ही याद न रखें, लेकिन, अपने विरोधियों के साथ निबटना अच्छे से जानते हैं।

कभी कभी तो लगता है कि नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही मन की दीवार पर वॉट पुट्टी लगा ली थी, ताकि शिव सेना जैसी विरोधी सहयोगी पार्टी की बारिश का उन पर कोई असर न हो।

पिछले तीन साल से शिव सेना और नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाला सरकार के बीच पति पत्नी वाली कहा सुनी चलत…

मृणाल पांडे : जुमला जयंती पर आनंदित, पुलकित, रोमांचित वैशाखनंदन

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लेखिका और पत्रकार मृणाल पांडे ने ऐसी कोई सी आतिशबाजी छोड़ दी कि मीडिया में कार्यरत लोग, जो कभी उनको पढ़ते रहे हैं या कभी उनके साथ काम करते रहे हैं, तिलमिला उठे हैं और लंबी लंबी पोस्टें लिखने लगे।

मृणाल पांडे ने एक ट्विटर पोस्ट ही तो की है। और दिलचस्प बात तो यह है कि इस पोस्ट में किसी का नाम भी नहीं लिया। इस पोस्ट में मृणाल पांडे लिखती हैं, ''जुमला जयंती पर आनंदित, पुलकित, रोमांचित वैशाखनंदन'', और साथ ही एक गधे की फोटो लगाती हैं।

#JumlaJayanti पर आनंदित, पुलकित, रोमांचित वैशाखनंदन । pic.twitter.com/eSpNI4dZbx — Mrinal Pande (@MrinalPande1) September 17, 2017 असल में गधे को वैशाखनंदन भी कहा जाता है और गदर्भ भी।

जो अति गौर करने वाली बात है, वो यह है कि यह ट्वीट प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर किया गया है। सवाल है कि क्या उस दिन केवल प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिवस ही होता है? हां, कहना शायद मूर्खता होगी।

लेकिन, कुछ पढ़े लिखे बुद्धिजीवी मृणाल पांडे के इस ट्वीट पर लंबे लंबे चिट्ठे लिख रहे हैं। उनके व्यक्तित्व और उनकी गरिमा पर उंगली उठा रहे हैं। बड़ी हैरानी की …

क्या सच में पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 44 रुपये प्रति लीटर है?

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भारत के कुछ हिस्सों में पेट्रोल की कीमत 80 रुपये के आंकड़े को पार कर गई। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार की आलोचना हो रही है। लेकिन, सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब सामने नहीं आ रहा है। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार बढ़ती वाहन तेल कीमतों को एक झटके बदल नहीं सकते।


इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ संदेश वायरल हो रहे हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि अगर आपको भारत में बढ़ती पेट्रोल और डीजल कीमतों से दिक्कत है, तो पाकिस्तान चले जाओ, पाकिस्तान में तेल की कीमत 44 रुपये प्रति लीटर है। हालांकि, हर किसी की कीमत अलग अलग हैं। कोई 404 रुपये, तो कोई 26 रुपये तक पेट्रोल की कीमत बता रहा है।

लेकिन, क्या सच में पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 40 रुपये प्रति लीटर है? यदि देश के हिसाब से बात करूं तो बिलकुल ऐसा नहीं है। पाकिस्तान में भी पेट्रोल डीजल के भाव 70 रुपये की सीमा के पार चल रहे हैं। 30 अगस्त 2017 को द आॅयल एंड गैस रेगुलेटरी अथाॅरिटी ने पाकिस्तानी पेट्रोलियम मंत्रालय को डीजल पेट्रोल के भाव बढ़ाने की सिफारिश की है।

इस सिफारिश पत्र में कहा गया है कि डीजल में 0.7 रुपये और …

गुजरात बुलेट ट्रेन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नाम खुला पत्र

प्रिय नरेंद्रभाई दमोदरदास मोदी,


मीडिया से दूर, समाचारों से दूर, शांतिमय अच्छे मूड में बैठा था। अपना काम के साथ साथ  फेसबुक पर बीच बीच में एकआध स्टेट्स अपडेट चल रहा था। अचानक पत्नी का काॅल आया कि सभी चैनलों पर आपकी शाही सवारी का खूबसूरत नजारा चल रहा है। मैंने आॅन किया, तो देखा कि आप और जापान के प्रधान मंत्री अबे शिन्जो खुली जीप में सवार होकर रिवरफ्रंट के किनारे टहल रहे हैं।

टेलीविजन की स्क्रीन पर जापान प्रधानमंत्री अबे शिन्जो के साथ आपका रौब देखते ही बन रहा था। एक चाय वाले का ठाठ, वाह वाह, क्या कहने, जो इस समय देश का प्रधान सेवक है। आपकी आपकी बोली में कहूं तो चैंकीदार।

आपके आगमन पर शहर की टूटी फूटी सड़कों को एकदम चकाचक कर दिया है, मझाल है कि पानी के गिलास से एक बूंद पानी छलककर नीचे गिर जाए। लेकिन, यह उतने क्षेत्र में ही हुआ, जहां जहां से आपकी राजशाही सवारी को गुजरना था।

बाकी शहर के लिए तो भाजपा के संकट मोचन अमित शाह कह कर गए हैं कि बारिश के कारण सड़कों की मुरम्मत करना मुश्किल होता है। इसलिए बारिश का मौसम गुजर जाए तो काम चालू हो जाएंगे।

जैसे ही आपके आने का समाचार तंत्र को मिला। अहमदाबाद म…

अगर रवीश कुमार ने पीएम को गुंडा नहीं कहा तो सवाल है कि....?

बड़े दिनों से ब्लॉग जगत से दूर हूं। आज एक बार फिर से ब्लॉग जगत की दुनिया में लौटने का मन हुआ। ख़बर आयी कि एनडीटीवी के वरिष्ठ संवाददाता और न्यूज एंकर रवीश कुमार ने देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को गुंडा शब्द से संबोधन किया।

मैंने भी रवीश कुमार के बयान 'मुझे दुख है कि मोदी जैसा गुंडा मेरा पीएम है : रवीश कुमार' के बयान की फेसबुक पर निंदा की। होनी भी चाहिये, क्योंकि यह पत्रकारिता की शालीनता नहीं है और ऐसे बयान पत्रकारिता की ​गरिमा को चोट पहुंचते हैं।

मगर, बाद में पता चला है कि ऐसा कोई भी बयान संवाददाता रवीश कुमार ने नहीं दिया। जो बयान सोशल मीडिया और मीडिया जगत में वायरल हो रहा है, दरअसल वो बयान फर्जी है।

इससे भी मजेदार सवाल तो यह है कि ​यदि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रवीश कुमार ने गुंडा नहीं कहा, तो कौन है वह जो रवीश कुमार के कंधे पर बंदूक रखकर नरेंद्र मोदी पर निशाना साध रहा है।

अपने मन की भड़ास निकाल रहा है और उसके समर्थन में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशंसक की खड़े हुए जा रहे हैं। रवीश कुमार के मुंह से क्यों? यदि कुछ कहना ही है तो अपने मुंह से ​कहिये।

दर…