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Showing posts from February, 2015

'प्रभु की रेल' से अच्छी है 'रविश की रेल'

जब सुरेश प्रभु रेल बजट पेश कर रहे थे, उसी समय एनडीटीवी के चर्चित पत्रकार एवं समाचार प्रस्तोता रवीश कुमार एक नई रेल चलाने में मशगूल थे। उम्मीद है कि रवीश की रेल, प्रभु की रेल से अधिक मजेदार लगेगी, क्योंकि में स्वाद, बेस्वाद, खट्टे मीठे स्वाद को शामिल किया गया है।   
नई दिल्ली : रेल बजट का दिन आमतौर पर रोने-धोने में ही गुज़र जाता है। रेल अपने आप में किसी कथाकार से कम नहीं है। रोज़ अनगिनत कहानियां रचती चली जाती है। लेट होने से लेकर टिकट न मिलने के बीच कुछ अच्छी यादें भी हैं, जिन्हें यात्री अपने साथ किसी धरोहर की तरह संभालकर रखते हैं। इसी खयाल से आज मैंने अपने ट्विटर खाते पर पूछ लिया कि बताइए, किस स्टेशन का खाना आपको पसंद आता है और आप सफर के दौरान उस स्टेशन के आने का इंतज़ार करते हैं। इन व्यंजनों और स्टेशनों के नाम पढ़ते-पढ़ते मिनट भर में टाइमलाइन पर रेल का एक ऐसा नक्शा बना, जिससे पढ़ने वालों के मुंह में पानी भर आय़ा। मैं भी उनके जवाब को री-ट्वीट करने लगा।

देखते-देखते मेरी टाइमलाइन पर सुरेश प्रभु से अलग ही रेल दौड़ने लगी। मैंने सोचा कि क्यों न व्यंजनों के हिसाब से इन्हें सजाकर देख…

कोई मेरे भी कपड़े नीलाम करा दे!

श्रीराम चाचा के बहुत दिन बाद दर्शन हुए. वे मस्त मुद्रा में थे. मिलते ही बोले, ‘‘भतीजे कोई मेरी चड्ढी-बनियान नीलाम पर चढ़ा दे, तो मेरा काम बन जाये, बहुत कड़की चल रही है. नीलामी से नाम भी होगा और दाम भी मिल जायेंगे.’’ मुङो तुरंत समझ में आ गया कि चाचा नवलखा मोदी सूट से प्रभावित हो गये हैं.

मैं कुढ़ कर बोला, ‘‘चाचा तुम तो ऐसे कह रहे हो जैसे मैंने कोई नीलामघर खोल रखा हो! और अगर खोल भी रखा हो तो तुम्हारे चड्ढी-बनियान को पूछेगा कौन? तुम सलमान खान हो या फिर तुम्हारे चड्ढी-बनियान में मोदी सूट की तरह सोने के तार बुने हैं?’’ चाचा तपाक से बोले, ‘‘भतीजे, सोने के तार नहीं हैं, पर यह तार-तार तो है.’’ फिर उन्होंने चुटकी से पकड़ कर बनियान को लहराया और कहा, ‘‘देख लो इसमें ‘मेड इन इंडिया’ से लेकर ‘मेक इन इंडिया’ तक!’’ उनकी बनियान में इतने छेद थे जितने कि मच्छरदानी में होते हैं. मैंने समझाने की कोशिश की, ‘‘क्यों अपनी इज्जत नीलाम करने पर तुले हो?’’ मगर चाचा टस से मस न हुए, बोले- ‘‘यहां तो लोग खुद नीलाम हो रहे हैं. देखो अभी आइपीएल में युवराज की 16 करोड़ रुपये की बोली लगी. जब इनसान की नीलामी में कोई शर्म नह…