Publicly Letter : गृहमंत्री ​सुशील कुमार शिंदे के नाम

नमस्कार, सुशील कुमार शिंदे। खुश होने की जरूरत नहीं। इसमें कोई भावना नहीं है, यह तो खाली संवाद शुरू करने का तरीका है, खासकर आप जैसे अनेतायों के लिए। नेता की परिभाषा भी आपको बतानी पड़ेगी, क्यूंकि जिसको सोशल एवं इलेक्ट्रोनिक मीडिया के शब्दिक ​अ​र्थ न पता हों, उसको अनेता शब्द भी समझ में आना थोड़ा सा क​ठिन लगता है। नेता का इंग्लिश अर्थ लीडर होता है, जो लीड करता है। हम उसको अगुआ भी कहते हैं, मतलब जो सबसे आगे हो, उसके पीछे पूरी भीड़ चलती है।
 
अब आप के बयान पर आते हैं, जिसमें आप ने कहा कुचल देंगे। इसके आगे सोशल मीडिया आए या इलेक्ट्रोनिक मीडिया। कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, क्यूंकि कुचल देंगे तानाशाही का प्रतीक है या किसी को डराने का। आपके समकालीन अनेता सलमान खुर्शीद ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को नंपुसक कहा, क्यूंकि वो दंगों के दौरान शायद कथित तौर पर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पाए, लेकिन जब मुम्बई पर हमला हुआ था, तब आपके कुचल देंगे वाले शब्द किस शब्दकोश में पड़े धूल चाट रहे थे, तब कहां थे सलमान खुर्शीद जो आज नरेंद्र मोदी को नपुंसक कह रहे हैं।

इलेक्ट्रोनिक मीडिया को तो शायद आप पैसे खरीद लें, क्यूंकि उसको पूंजीपति चलाते हैं, जो विज्ञापन के लिए काम कर सकते हैं, लेकिन सोशल मीडिया को कुचलना आपके हाथ में नहीं, क्यूंकि इसको खरीदना आपके बस की बात नहीं। सोशल मीडिया का शब्दिक अर्थ भी समझा देता हूं, लोगों का मंच। जो लोग सरकार बनाने की हिम्मत रखते हैं, उनको कुचलना आपके लिए उतना ही मुश्किल है, जितना घोड़े का घास के साथ दोस्ताना बनाए रखना।

आपके बयान बदलने से एक बात तो पता चलती है कि आप थोथी धमकियां देते हैं। वरना, अपने बयान पर अटल रहते, और मीडिया को कुचल देते, आज तक आप गूगल व फेसबुक से जानकारियां हासिल नहीं कर पाए, कुचलने की बात करते हैं। क्या किसी की अ​भिव्यक्ति को दबाना असैवंधानिक नहीं ? आपको इलेक्ट्रोनिक मीडिया व सोशल मीडिया का अंतर पता नहीं, तो संवैधानिक व गैर संवैधानिक का अंत क्या खाक पता चलेगा।

आजकल मोदी जी ने खूब अपना पुराना धंधा पकड़ा हुआ है। अपने पुराने दिनों को याद कर रहे हैं, इससे शायद उनको चुनावी फायदा मिल जाए, लेकिन अगर आप ने गृहमंत्री होकर कांस्टेबल वाली हरकतें न छोड़ी तो कांग्रेस को भाजपा वाले कुचल देंगे। और सलमान खुर्शीद को अच्छे से उनके बयान का अर्थ भी समझा देंगे।

जय रामजी की। इसका अर्थ बात शुरू करना भी होता है और संवाद बंद करना भी। जहां लिखा है, वहां इसका अर्थ संवाद बंद करना है। फिर से जय रामजी की। 

2 प्रतिक्रिया:


  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन देश-सेवा ही ईश्वर-सेवा है - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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