तोगड़िया ने कुछ गलत तो नहीं कहा

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतर्राष्‍ट्रीय प्रमुख डॉक्टर प्रवीण तोगड़िया ने कहा, ''जो लोग नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बता रहे हैं, वे बुनियादी रूप से एनडीए और बीजेपी को तोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं''।

अगर विहिप के नेता की बात मान भी ली जाए तो इसमें बुरा भी कुछ नहीं। अगर देश की जनता नरेंद्र मोदी के रूप में भाजपा को बहुमत दे देती है तो इसके देश के लिए बेहद अच्‍छी बात है, जब तक इसको बहुमत सरकार नहीं मिलेगी, तब तक इस देश का भला होना मुश्किल है, वो बहुमत चाहे कांग्रेस को मिले चाहे फिर बीजेपी को, बहुमत देश के हित में है।

भाजपा अपनी तैयारी कर चुकी है नितिन गड़करी को महाराष्‍ट्र भेज राजनाथ सिंह को अध्‍यक्ष बनाकर। अपने पुराने साथी कल्‍याण सिंह को एक बार फिर अपने साथ खींच लाई। नरेंद्र मोदी अपने शपथ समारोह में जयललिता से लेकर प्रकाश सिंह बादल को बुलाकर अपनी आगे की योजना को सबके सामने रख चुके हैं। वाइब्रेंट गुजरात 2013 के जरिए अपना शक्‍ति प्रदर्शन ही नहीं, बल्‍कि उसमें छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री रमन सिंह की उपलब्‍धियों भरी स्‍पेशल प्रदर्शनी कर अपने साथ ला खड़ा किया।

उम्‍मीद है कि भाजपा फरवरी में नरेंद्र मोदी को चुनाव समिति का अध्‍यक्ष बनाएगी। अगर ऐसा होता है तो इसको हम नरेंद्र मोदी की अग्‍निपरीक्षा मान सकते हैं। मगर जिस तरह की स्‍थिति इन दिनों में देश के अंदर बनी हुई है, उसको नजर अंदाज करना मुश्‍किल है। देश पिछले कई सालों से एक तानाशाह की तलाश में है, जो लोकतंत्र में विश्‍वास करता है, ऐसा एक ही व्‍यक्‍ति है, वो नरेंद्र मोदी।

गोलियों की रासलीला 'रामलीला'

फिल्‍म निर्देशक एवं निर्माता संजय लीला भंसाली  की अगली फिल्‍म गोलियों की रसलीला 'रामलीला' का पोस्‍टर रिलीज हो चुका है। शेक्‍सपियर की 'रोमियो जूलियट' प्रेम कहानी आधारित एवं दीपिका - रणबीर सिंह अभिनीत फिल्‍म रामलीला 29 नवम्‍बर 2013 को सिने पर्दे पर उतरेगी। इस फिल्‍म में पहले करीना को लेने की बात चल रही थी, लेकिन अंत दीपिका पादुकोण को फाइनल किया गया। इस फिल्‍म में दीपिका पादुकोण जिस लहंगे को पहनने वाली हैं, उसका वजन तीस किलोग्राम बताया जा रहा है जबकि डिजाइनर अंजू मोदी द्वारा तैयार किए गए इस लहंगे का घेरा करीबन 50 मीटर है।

सुभाष की खोज मिष्‍टी बनेगी कांची

सपना रीना रॉय कालीचरण, टीना टीना मुनीम कर्ज, राधा मिनाक्षी हीरो, राधा माधुरी दीक्षित रामलखन, राधा मनीषा कोईराला सौदागर, गंगा माधुरी दीक्षित खलनायक, गंगा महिमा चौधरी परदेस, मानसी, एश्‍वर्या ताल, ईशा करीना कपूर यादें, लक्ष्‍मी ईशा कृष्‍णा, अनुशका कैटरीना कैफ युवराज के बाद अब सुभाष घई दर्शकों को अपनी नई खोज कांची से मिलाने जा रहे हैं। कांची के लिए उन्‍होंने काफी लड़कियों के ऑडिशन लिए और अंत अपनी खोज को संपूर्ण किया।

मगर इत्‍तेफाक देखिए, सुभाष घई एक बार फिर से एम फेक्‍टर को अजमाने जा रहे हैं। जी हां, सुभाष घई की फिल्‍मों की ज्‍यादातर नायिकाओं के नाम एम से शुरू होते हैं, एम फेक्‍टर उनके लिए बेहद लक्‍की रहा है। कुछ फिल्‍मों में उन्‍होंने एम फेक्‍टर को भुला दिया था, मगर वो फिल्‍में बॉक्‍स ऑफिस पर पिट गई। यादें, कृष्‍णा एवं युवराज ऐसी फ्लॉप फिल्‍में हैं, जिनमें एम फेक्‍टर नहीं था, इसलिए शायद कांची के लिए उन्‍होंने मिष्‍टी को ढूंढ़कर एक बार फिर से एम फेक्‍टर को अजमाने की कोशिश की है। देखते हैं राधा गंगा से कितने कदम आगे निकल पाती है सुभाष की कांची। इस नयी लड़की नाम मिष्टी है। वह मूल रूप से कोलकाता की रहने वाली है।

मिष्‍टी की यह पहली फिल्‍म होगी, क्‍यूंकि अब तक उसने किसी फिल्म में भी काम नहीं किया। मिष्‍टी तक पहुंचने के लिए सुभाष घई को चार सौ लड़कियों के ऑडिशन लेने पड़े। मिष्टी का चयन इन चार सौ लड़कियों के बीच में से हुआ। नीली आंखों और घुंघराले बालों वाली यह लड़की सुभाष घई की फिल्म 'कांची' की नायिका बनेगी। इस फिल्म के लिए अभिनेता ऋषि कपूर और मिथुन चक्रवर्ती को पहले ही साइन किया जा चुका है। इस फिल्म में हीरो के रूप में कार्तिक तिवारी को साइन किया जा सकता है।

सुभाष घई अपनी फिल्मों में एक नयी लड़की को लांच करने के लिए जाने जाते हैं। माधुरी दीक्षित, मनीषा कोईराला, महिमा चौधरी, मीनाक्षी शेषाद्री और ईशा शेरवानी जैसी नायिकाओं को सुभाष घई ने ही अपनी फिल्मों से डेब्‍यू करवाया था। मुक्‍ता आर्ट्स ने कांची का प्रमोशन गत वर्ष 14 अगस्‍त से शुरू कर दिया था, मगर यह फिल्‍म इस साल 15 अगस्‍त को रिलीज होगी। उम्‍मीद है कि शोमैन जोरदार वापसी करेंगे।

पुरुषों की टीम में खेलेंगी सारा टेलर

इंग्लैंड की राष्ट्रीय महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर बल्लेबाज सारा टेलर को घरेलू क्रिकेट टीम ससेक्स के अगले सत्र के लिए पुरूषों की टीम में शामिल किया जा सकता है। क्रिकेट जगत पर पैनी निगाह रखने वाली बेवसाइट ने ब्रिटेन के द गार्जियन अख़बार के हवाले से बताया कि टेलर की ससेक्स के अगले सत्र के लिए पुरूषों की टीम में शामिल होने को लेकर लगातार बातचीत जारी है।

टेलर ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि ससेक्स ने महिला टीम के कोच मार्क लेन से इस बाबत बातचीत की है। जानकार कहते हैं कि एकदिवसीय महिला क्रिकेट विश्वकप के लिए टेलर अगले सप्ताह भारत दौरे पर आएंगी। टेलर ने स्कूल स्तर पर ससेक्स के लिए क्रिकेट खेला है। अब सारा पुरूषों की काउंटी टीम का हिस्सा बनेंगी, जो कि प्रथम श्रेणी क्रिकेट से केवल एक स्तर ही पीछे है।

23 वर्षीय टेलर अगर पुरुषों की टीम में खेलती हैं तो इसको एक अच्‍छी पहल भी माना जा सकता है। हो सकता है कि इस पहल के कई सकारात्‍मक नतीजे सामने आएं। 2006 में भारत के खिलाफ खेलते हुए एक दिवसीय क्रिकेट में कदम रखने वाली टेलर ने 60 एकदिवसीय मैचों में करीबन 1821 स्‍कोर बनाए हैं, जिसमें तीन शतक एवं आठ अर्ध शतक शामिल हैं।

कहीं विलेन न बन जाएं

बरिया की नई नई नौकरी लगी थी। बरिया बेहद मेहनती युवा था। काम के प्रति इतना ईमानदार कि पूछो मत, लेकिन बरिया जहां नौकरी करता था, वहां कुछ कम चोर भी थे। बरिया साधारण युवा नहीं जानता था कि जमाना बदल चुका है। मक्‍खनबाजों का जमाना है। काम वालों की भी जरूरत है, क्‍यूंकि घोड़ों की भीड़ में गधे भी चलते हैं। बरिया सबसे अधिक काम करता। वो हर रोज अपने हमरुतबाओं से अधिक वर्क काम करता, जैसे गधा कुम्‍हार के लिए।

मगर कुछ दिनों बाद बरिया निराश रहने लगा। उसको लगा, उसके साथी सारा दिन गपशप मारते हैं, वो कार्य करता है, लेकिन उसका बॉस उसको उतना ही मानता है, जितना के उसके हमरुतबाओं को। बरिया उदास परेशान कई दिनों तक तो रहा, लेकिन अब उसके भीतर बैठा इंसान सब्र खोने लगा। वो कुछ भी बर्दाशत करने को तैयार नहीं था। वो अगले दिन बॉस के टेबल पर पहुंचा। उसने अपने हमरुतबाओं के कार्यशैली की भरपूर निंदा की, जो उसका बॉस अच्‍छी तरह पहले से जानता था। बॉस भी मन ही मन में सोच रहा था, अगर वो काम करने लायक होते तो तेरी जरूरत किसे थी। बॉस ने ध्‍यान से शिकायत को सुना।

इस दिन के बाद बरिया को शिकायतों की लत लग गई। छोटी छोटी बातों पर शिकायत करना जारी हो गया। अंत में बॉस के मन में बरिया की नकारात्‍मक छवि बन गई। बरिया निरंतर शिकायतों की वजह से अपनी गुणवत्‍ता और काम के प्रति ईमानदारी खो बैठा। जब एप्रेजल करने का समय आया तो बरिया उस वक्‍त हैरान रह गया, जब उसके बॉस ने उसको कहा, बरिया जितना समय तुमने दूसरों की गलतियां गिनने और गिनाने में गुजारा, काश उतना समय अपने कार्य को और बेहतर बनाने में लगाया होता तो शायद आज मुझे तुम्‍हारा शत प्रतिशत एप्रेजल करने में भी कोई दिक्‍कत न होती, मगर तुम्‍हारी कार्य शैली तो उनसे भी ज्‍यादा खराब हो गई। बरिया उदास कांफ्रेंस रूम से बाहर निकल गया। मगर बरिया की कहानी बहुत से युवाओं के लिए पथ प्रदर्शक बन गई।

बरिया की कहानी से नसीहत लेते हुए अगर आप ऑफिस में बहुत अच्‍छा काम करते हैं, तो आपको बहस करने से बचना चाहिए। फालतू की बातों एवं शिकायतों से गलत छवि बनती है। अगर आप उच्‍चाधिकारियों को प्रभावित करना चाहते हैं, तो फोकट की बातें करने की बजाय आपको काम करके खुद को साबित करना चाहिए। सिर्फ खुद के बारे में दलीलें देते रहने से लोग आपसे परेशान हो जाते हैं और एक समय ऐसा आता है कि वे आपकी बातों पर गौर करना बंद कर देते हैं। यह बहुत बुरी स्‍थिति होती है। आप में हीरो है। यह तो केवल आपका काम बता सकता है। इसलिए बेकार की बातों में पड़ कर कहीं विलेन न बन जाएं।

मोदी के ड्रीम प्रोजेक्‍ट गिफ्ट सिटी का हुआ लोकार्पण

-: वाईआरएन सर्विस :-
गांधीनगर। मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरूवार को राज्‍य के सबसे ऊंचे इमारती प्रोजेक्‍ट गिफ्ट सिटी के अंदर बनकर तैयार हो चुके पहले 28 मंजिला टॉवर का लोकार्पण किया। हालांकि इस मौके पर मुख्‍यमंत्री ने वादा किया कि बहुत जल्‍द दूसरे टॉवर का निर्माण कार्य भी मुकम्‍मल कर दिया जाएगा। उन्‍होंने कहा, इस इमारत के प्रवेश द्वारा पर सरस्‍वती के साथ साथ लक्ष्‍मी जी भी विराजमान रहेंगी।

मोदी ने टॉवरों का लोकार्पण करने के बाद कहा कि उनका पहला सपना साकार हुआ, आधुनिक शहरों के लिए गिफ्ट सिटी एक मॉडल बनेगी। गिफ्ट सिटी को बेहतर वित्तीय सेवाओं का केंद्र बनाने के भरोसे के साथ कहा कि युवाओं के लिए हाईटेक वित्तीय सेवाओं का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
गिफ्ट सिटी के अध्यक्ष व पूर्व सचिव सुधीर मांकड ने बताया गिफ्ट का पहला टॉवर रिकार्ड 14 माह में बनकर तैयार हो गया जबकि दूसरा टॉवर अगले दो माह में तैयार हो जाएगा। दोनों टावर पर अनुमानित एक हजार करोड़ रु की लागत आएगी। गिफ्ट वन 29 मंजिला है तथा इसमें करीब 8 लाख वर्गफीट का स्पेस है। इसका 60 फीसद व्यापारिक सेवाओं के लिए जबकि शेष आवासीय, होटल, हॉस्पीटल, शॉपिंग सुविधा के काम में लिया जाएगा। प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से इससे दस लाख युवाओं को रोजगार मिल सकेगा।

गौरतलब है कि राज्‍य की राजधानी गांधीनगर के निकट लगभग 886 एकड़ भूखंड में बनने वाली गिफ्ट सिटी के निर्माण पर करीबन 78 हजार करोड़ रुपए के करीब लागत आने की संभावना है। राज्‍य सरकार ने गुजरात को वित्‍तीय सेवा क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण ग्‍लोबल फाइनेंसियल हब बनाने का संजोकर गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक सिटी का गठन किया था। गुजरात सरकार के संयुक्‍त उपक्रम जीआईएफटीसीएल एवं इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर लीजिंग एवं फाइनेंस सर्विस द्वारा विकसित की जा रही गिफ्ट सिटी में दुबई व हांगकांग के समकक्ष वित्‍त केंद्रों का निर्माण करने की योजना है।

माँ की आँख

मेरी माँ की सिर्फ एक ही आँख थी और इसीलिए मैं उनसे बेहद नफ़रत करता था | वो फुटपाथ पर एक छोटी सी दुकान चलाती थी | उनके साथ होने पर मुझे शर्मिन्दगी महसूस होती थी | एक बार वो मेरे स्कूल आई और मै फिर से बहुत शर्मिंदा हुआ | वो मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती है ? अगले दिन स्कूल में सबने मेरा बहुत मजाक उड़ाया |

मैं चाहता था मेरी माँ इस दुनिया से गायब हो जाये | मैंने उनसे कहा, 'माँ तुम्हारी दूसरी आँख क्यों नहीं है? तुम्हारी वजह से हर कोई मेरा मजाक उड़ाता है | तुम मर क्यों नहीं जाती ?' माँ ने कुछ नहीं कहा | पर, मैंने उसी पल तय कर लिया कि बड़ा होकर सफल आदमी बनूँगा ताकि मुझे अपनी एक आँख वाली माँ और इस गरीबी से छुटकारा मिल जाये |

उसके बाद मैंने म्हणत से पढाई की | माँ को छोड़कर बड़े शहर आ गया | यूनिविर्सिटी की डिग्री ली | शादी की | अपना घर ख़रीदा | बच्चे हुए | और मै सफल व्यक्ति बन गया | मुझे अपना नया जीवन इसलिए भी पसंद था क्योंकि यहाँ माँ से जुडी कोई भी याद नहीं थी | मेरी खुशियाँ दिन-ब-दिन बड़ी हो रही थी, तभी अचानक मैंने कुछ ऐसा देखा जिसकी कल्पना भी नहीं की थी | सामने मेरी माँ खड़ी थी, आज भी अपनी एक आँख के साथ | मुझे लगा मेरी कि मेरी पूरी दुनिया फिर से बिखर रही है | मैंने उनसे पूछा, 'आप कौन हो? मै आपको नहीं जानता | यहाँ आने कि हिम्मत कैसे हुई? तुरंत मेरे घर से बाहर निकल जाओ |' और माँ ने जवाब दिया, 'माफ़ करना, लगता है गलत पते पर आ गयी हूँ |' वो चली गयी और मै यह सोचकर खुश हो गया कि उन्होंने मुझे पहचाना नहीं |
एक दिन स्कूल री-यूनियन की चिट्ठी मेरे घर पहुची और मैं अपने पुराने शहर पहुँच गया | पता नहीं मन में क्या आया कि मैं अपने पुराने घर चला गया | वहां माँ जमीन मर मृत पड़ी थी | मेरे आँख से एक बूँद आंसू तक नहीं गिरा | उनके हाथ में एक कागज़ का टुकड़ा था... वो मेरे नाम उनकी पहली और आखिरी चिट्ठी थी |

उन्होंने लिखा था :

मेरे बेटे...
मुझे लगता है मैंने अपनी जिंदगी जी ली है | मै अब तुम्हारे घर कभी नहीं आउंगी... पर क्या यह आशा करना कि तुम कभी-कभार मुझसे मिलने आ जाओ... गलत है ? मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है | मुझे माफ़ करना कि मेरी एक आँख कि वजह से तुम्हे पूरी जिंदगी शर्मिन्दगी झेलनी पड़ी | जब तुम छोटे थे, तो एक दुर्घटना में तुम्हारी एक आँख चली गयी थी | एक माँ के रूप में मैं यह नहीं देख सकती थी कि तुम एक आँख के साथ बड़े हो, इसीलिए मैंने अपनी एक आँख तुम्हे दे दी | मुझे इस बात का गर्व था कि मेरा बेटा मेरी उस आँख कि मदद से पूरी दुनिया के नए आयाम देख पा रहा है | मेरी तो पूरी दुनिया ही तुमसे है |

चिट्ठी पढ़ कर मेरी दुनिया बिखर गयी | और मैं उसके लिए पहली बार रोया जिसने अपनी जिंदगी मेरे नाम कर दी... मेरी माँ |

Noted # यह कहानी  किसी महान व्‍यक्‍ित द्वारा किसी और संदर्भ में लिखी गई , कहानी से प्रेरित है, मगर जिसने लिखा है, उसका भी नाम मुझे पता नहीं, मगर कहानी आपको बेहद अच्‍छी लगेगी। 

बयान बवालों से 'बुद्धम् शरणम् गच्छामि' की गूंज तक - साप्‍ताहिक हलचल

रविवार, 6 जनवरी 2013।  इसी के साथ नव वर्ष के प्रथम छह दिन खत्‍म होने जा रहे हैं। बीते सप्‍ताह के दौरान ज्‍यादा सुर्खियां बयानों को लेकर हुए बवालों पर बनी। अगर अंतर्राष्‍ट्रीय समाचारों की बात की जाए तो दो से अधिक सप्‍ताह बाद संडी हूक्‍स स्‍कूल के बच्‍चे जहां एक बार फिर स्‍कूल लौटे तो वहीं दूसरी तरफ तालिबानियों की गोली का निशान बनी मलाला को अस्‍पताल से छुट्टी मिल गई। अंत अमरीका में टैक्स की बढ़ोत्तरी एवं सरकारी खर्चों में कटौतियों के मसले पर 'फ़िस्कल क्लिफ़' नामक' प्रस्ताव को अमरीका के दोनों सदन ने मंजूरी दे दी है, जो प्रस्ताव राष्ट्रपति ओबामा के लिए गले की फांस बन गया था। इसके अलावा भारतीय मूल की अमेरिका में कांग्रेस के लिए निर्वाचित पहली हिन्दू तुलसी गैबर्ड ने पवित्र भगवद् गीता पर हाथ रखकर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। तुलसी (31) को प्रतिनिधि सभा के स्पीकर जॉन बोहनर ने शपथ दिलाई। दाऊद इब्राहिम के समधि को भारत वीजा मिलने पर भारत में हुआ विरोध एवं अंत वीजे को कैंसल करना पड़ा। मियांदाद भारत में चल रही अंतर्राष्‍ट्रीय वनडे क्रिकेट सीरीज देखने के लिए आने वाले थे, जो भारत पाकिस्‍तान को 2-0 के फर्क से हार चुका है एवं आज इस सीरीज का अंतिम एवं तीसरा मैच खेला जाएगा।

नव वर्ष का आरंभ दिल्‍ली गैंगरेप से जुड़ी सुर्खियों से हुआ। इस मामले में शशि थरूर के उस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई, जिसमें उन्‍होंने कहा था कि गैंग रेप पीड़ित के नामों को उनके माता पिता की अनुमति से सार्वजनिक किया एवं उसके नाम पर नए बनने वाले कानून का नाम रखा जाए। इसके बाद बयान के चलते मुस्‍लिम नेता औवेसी का विवाद शुरू हुआ। उनका यह विवाद उनके बेहद भड़काऊ भाषण से जुड़ा हुआ है। उनके खिलाफ शबनम हाशमी ने कार्रवाई करने के लिए संबंधित विभागों को पत्र लिखा। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार की उस अपील को खारिज करते हुए लोकायुक्‍त आरए मेहता की नियुक्‍ित को सही ठहराया, जिसमें लोकायुक्‍त की नियुक्‍ित पर एतराज उठाया गया था।

संघ नेता मोहन भागवत एवं भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने महिलाओं के प्रति ऐसी टिप्‍पणियां की जो बेहद चिंताजनक एवं विवादित थी। जहां भागवत ने कहा कि बलात्‍कार इंडिया में होते हैं भारत में नहीं, वहीं कैलाश ने कहा, अगर महिलाएं लांघेगी अपनी मर्यादा तो रेप होना पक्‍का है। इस बयान के बाद भाजपा ने कैलाश विजयवर्गीय को माफी मांगने के आदेश दिए, लेकिन मोहन भागवत के बयान पर बीजेपी केवल इतना कह पाई, उनके कहने का वो अर्थ नहीं था, जो मीडिया ने पेश किया। आख़िर भाजपा ऊंचे सुर में मोहन भागवत के साथ कैसे बात करती, क्‍यूंकि इसकी जान तो संघ तोते में है। उधर, डीएमके के प्रमुख करुणानिधि ने अपने छोटे बेटे स्‍टालिन को उत्‍तराधिकारी बनाने के संकेत दिए तो बड़े बेटे एमके अलागिरी ने कहा, यह कोई मठ नहीं, जिसका उत्‍तराधिकारी घोषित किया जाए। वहीं राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से अलग हुए पीए संगमा ने अपनी नई पार्टी नेशनल पीपल्‍स पार्टी का गठन कर दिया।

शनिवार देर रात इंडियन ऑयल कारपोरेशन के हजीरा गुजरात स्थित संयंत्र में एक तेल भंडारण टैंकर में आग लग गई और देखते ही देखते तेजी से फैल गयी। इस घटनाक्रम में करीबन 2:30 करोड़ तेल जलकर नष्‍ट होने की सूचना मिली है। 200 करोड़ से अधिक रुपए के नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

दबंग टू ने जहां बॉक्‍स ऑफिस पर सौ करोड़ रुपए से ऊपर कलेक्‍शन किया, वहीं अक्षय कुमार एवं परेश रावल अभिनीत ओह माय गॉड ने सिनेमा खिड़की पर अपने सौ दिन का सफर पूरा किया। पिछले हफ्ते रिलीज हुई राजधानी एक्‍सप्रेस पटड़ी से उतर गई जबकि परेश रावल के टेबल नं 21 को फिल्‍म समीक्षकों ने देखने लायक बताया। देहरादून डायरी सिने खिड़की पर आई, लेकिन सिने प्रेमियों ने कोई रुचि तक नहीं ली। अगले हफ्ते रिलीज होने वाले विश्‍वरूपम उस समय विवादों में घिर गई, जब कमल हसन ने इस फिल्‍म को रिलीज से पहले डीटीएच पर रिलीज करने की घोषणा की एवं इस फिल्‍म को लेकर मुस्‍लिम समुदाय ने भी अपना एतराज दर्ज करवाया।

अंत में दिल्‍ली गैंग रेप मामले पर लौटते हुए बताना चाहेंगे। इस हफ्ते इस मामले पर रही मीडिया की गहरी निगाह। ब्‍लैकमेलिंग मामले में जमानत पर रिहा हुए जी न्‍यूज संपादक सुधीर चौधरी ने हादसे के शिकार युवक का लाइव इंटरव्‍यू दिखाकर खुद को एक बार फिर चर्चा का केंद्र बनाया। कुछ लोग कह रहे हैं कि सुधीर चौधरी अपने दाग धोना चाहते हैं। फिलहाल दिल्ली गैंगरेप मामले में वॉरंट जारी कर दिए गए हैं एवं सोमवार को पेश होंगे 5 आरोपी।

केबीसी में मुम्‍बई की सनमीत कौर साहनी ने पांच करोड़ जीतकर सुखद समाचारों की सीरीज का आगाज किया तो पाटलिपुत्र में 'बुद्धम् शरणम् गच्छामि' की गूंज भी सुनाई देने लगी, क्‍यूंकि यहां पर तीन दिवस तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संघ समागम का शुभारम्‍भ हो चुका है। इसमें बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा स्‍वयं उपस्‍थित हैं।

मीडिया की सुर्खियों में मुम्‍बई की सनमीत

बिहार के सुशील कुमार के बाद मुम्‍बई की सनमीत कौन साहनी ने पांच करोड़ रुपए जीतकर मीडिया में सुर्खियां बटोर ली है। खासकर सनमीत कौर साहनी ने यह ईनाम राशि उस वक्‍त जीती है, जब पूरा मीडिया महिलामय हो चुका है। ऐसे में सनमीत कौर साहनी को सुर्खियां मिलना लाजमी है।

बीबीसी हिन्‍दी ने इस ख़बर को 'केबीसी: 12वीं पास महिला ने जीते पाँच करोड़' हैंडलाइन के साथ प्रकाशित किया है। शायद मीडिया को लगता है कि सामान्‍य ज्ञान  केवल बड़े बड़े डिग्री होल्‍डर के पास है, तभी तो मीडिया हैंडिंग हैरतजनक बनाया, 12वीं पास महिला ने पांच करोड़ जीत लिए, इस ख़बर के अंदर बताया गया है कि सनमीत कौर साहनी बच्‍चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं।

वहीं मुम्‍बई के प्रसिद्ध समाचार पत्र मिड डे ने इस ख़बर को 'वूमैन विन्‍स पांच करोड़ ऑन केबीसी' के टाइटल तले प्रकाशित की। इस टाइटल को पढ़ने के बाद उम्‍मीद है कि पुरुष थोड़ा सा शर्मिंदा होंगे, और तपाक मुंह से निकलेगा 'महिला ने जीते पांच करोड़'। अगर गम्‍भीरता से देखा जाए तो यह हैंडिंग भी अचकितवाचक लगता है। इतना ही नहीं, मुम्‍बई वासियों को खुश करने के लिए वुमैन के आगे मुम्‍बई भी लगा दिया गया है, सब हैंडिंग तो देखिए जनाब। शी इज ए हाऊसवाइफ, हू रेजिडेज इन मुम्‍बई। प्‍वाइंट नोट करने लायक है। पति अपनी पत्‍नि को ताना मार सकते हैं, देखो वो गृहिणी है, जिसने पांच करोड़ जीते।

सुशील के बाद सनमीत ने जीते पांच करोड़, अमर उजाला ने ख़बर की तरह पेश किया, कोई हलचल नहीं। शायद अमर उजाला वाले सोचते हैं, जीत के लिए खेल रही थी, तो जीतना लाजमी था। वहीं एबीपी न्‍यूज ने लिखा, केबीसी में महिला ने रचा इतिहास, जीते पांच करोड़। इस टाइटल को हम मान सकते हैं, बिल्‍कुल स्‍टीक है, अगर पहले किसी महिला प्रतिभागी ने यह उपलब्‍िध हासिल नहीं की। दैनिक जागरण ने भी अमर उजाला की तरह साधारण टाइटल केबीसी में सनमीत ने जीते पांच करोड़ के साथ ख़बर को प्रस्‍तुत किया। ख़बर एनडीटीवी ने लिखा, सनमीत ने केबीसी में जीते पांच करोड़।

चलते चलते। सभी मीडिया हाऊसों ने इस ख़बर को ब्रेकिंग न्‍यूज की तरह लिया, ब्रेकिंग न्‍यूज में गलतियां होना स्‍वाभविक है, वैसा ही इस ख़बर में भी हुआ, किसी ने उसको सुरमीत लिखा तो किसी ने सनमीत। अंत शायद उसका नाम सनमीत कौर साहनी है, वो मुम्‍बई की रहनी वाली है। शैक्षणिक योग्‍यता की बात करें तो पांच करोड़ उनकी झोली में पहुंच चुका है। आदमी शिक्षा दो चीजों के लिए हासिल करता है, नौकरी के लिए और जिन्‍दगी जीने के सही तौर तरीकों सीखने के लिए। फिलहाल सनमीत कौर ने दो मैदानों में अपना लोहा मनवा लिया।

डिस्‍कलेमर- घर जाकर पत्‍नि पर टौंट मत कसिएगा, देखो उसने पांच करोड़ जीते महिला होकर, क्‍यूंकि मुंह की खानी पड़ेगी प्‍यारे इससे पहले सुशील कुमार भी जीत चुके हैं।

मुबारक हो! नई पार्टी बन गई

मुबारक हो! आज एक नई पार्टी का गठन हो गया। जी हां, नेशनल कांग्रेस पार्टी के सह संस्‍थापक रहे पीएम पीए संगमा ने आज नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) का गठन करते हुए भाजपा के नेतृत्व वाले राजग में शामिल होने की घोषणा कर दी।

पिछले कुछ सालों से निरंतर नई राजनीतिक पार्टियों का उदय हो रहा है चाहे राज्‍य स्‍तर पर हो चाहे फिर राष्‍ट्रीय स्‍तर पर। पंजाब के विधान सभा चुनावों से पूर्व शिरोमणि अकाली दल से अलग होते हुए प्रकाश सिंह बादल के भतीजे एवं पंजाब के पूर्व वित्‍त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने 27 मार्च 2011 को पीपुल्स पार्टी आफ पंजाब की स्‍थापना की, मगर यह पार्टी चुनावों में कुछ भी न कर सकी।

इससे कुछ साल पूर्व 2006 में महाराष्‍ट्र के अंदर भी शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे ने शिव सेना से किनारा करते हुए महाराष्‍ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया। राज ठाकरे की अगुवाई वाली मनसे ने महाराष्ट्र विधानसभा 2009 के चुनावों में 13 सीटों पर जीत दर्ज करते हुए अपनी उपस्‍िथति दर्ज करवाई थी, वहीं महाराष्‍ट्र के अंदर 2012 के दौरान हुए नगर पालिका के चुनावों में भी मनसे का दबदबा देखने को मिला।

2012 में तीन पार्टियों का गठन हुआ, जिसमें आम आदमी पार्टी, गुजरात परिवर्तन पार्टी एवं कर्नाटका जनता पार्टी शामिल है। आम आदमी पार्टी का गइन तो हो चुका है, लेकिन अभी तक इस पार्टी की ओर से कोई चुनाव नहीं लड़ा गया, जबकि गुजरात परिवर्तन पार्टी की नींव रखने वाले गुजरात के पूर्व मुख्‍यमंत्री केशुभाई पटेल गुजरात विधान सभा 2012 के चुनावों में कोई कमल नहीं कर सके। उनकी पार्टी केवल 2 सीटों पर विजय परचम लहराने में कामयाब हुई। गुजरात के पूर्व मुख्‍यमंत्री की तरह भाजपा के बर्ताव से दुखी बीजेपी के साथ चार दशक पुराना रिश्ता तोड़ने वाले कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने 9 दिसम्‍बर 2012 को गृह जिले हावेरी में विशाल रैली कर नई पार्टी कर्नाटक जनता पार्टी की घोषणा की।

वहीं, आज शनिवार 5 जनवरी 2013 को राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से रिश्‍ता तोड़ते हुए पीके संगमा ने अपनी नई पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी का गठन किया, मगर राष्‍ट्रपति पद के उम्‍मीदवार बने पिता का साथ देने वाली और अपना मंत्री पद गंवाने वाली अगाथा पिता के साथ नजर नहीं, बल्‍िक भरोसा जताया जा रहा है कि वो अगले चुनाव अपनी पिता की पार्टी के बैनर तले लड़ेंगी।

इस नई पार्टी का राष्ट्रीय चुनाव चिह्न किताब होगा, क्योंकि संगमा एवं उनके सहयोगी मानते हैं कि केवल शिक्षा और साक्षरता ही कमजोर वर्गों का सशक्तिकरण कर सकती है। इतना ही नहीं, जल्द ही होने जा रहे मेघालय विधानसभा के चुनाव में उनकी पार्टी अपने उम्मीदवार उतारेगी एवं 33 उम्मीदवारों के नाम पहले ही तय हो चुके हैं।

गौरतलब है कि संगमा ने शरद पवार और तारिक अनवर के साथ 1999 में कांग्रेस छोड़ दिया था, और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का गठन किया था। सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर इस नई पार्टी का गठन किया गया था। नौ बार सांसद रहे एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष संगमा के जुलाई में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के फैसले पर उन्हें राकांपा से निकाल दिया गया था।

चलते चलते मन में सवाल उठता है कि निजी हितों के लिए बनाई गई, यह छोटी छोटी पार्टियां क्‍या देश को सही दिशा की तरफ अग्रसर करेंगी? राकांपा का जन्‍म इस लिए हुआ, क्‍यूंकि सोनिया गांधी विदेशी थी, मगर अफसोस कि आज राकांपा उसी सोनिया गांधी के दर पर पानी भरती है। इन छोटी छोटी पार्टियों के कारण किसी बड़ी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता, और गठबंधन सरकार सत्‍ता संभालती है, जिसकी स्‍थिति कर्तब दिखाती उस बच्‍ची सी है, जिसको रस्‍सी पर चलते हुए बैलेंस बनाकर रखना पड़ता है। किसी भी तरफ झुकाव हुआ, वहीं सारा खेल खत्‍म। छोटी छोटी पार्टियों के मनमुटाव के कारण कई बार बिल लोक सभा या राज्‍य सभा में पारित होने से रह जाते हैं, या बेतुके तरीके से पास हो जाते हैं। कई राष्‍ट्रीय मुद्दों पर बात नहीं होती। छोटी छोटी पार्टियां राष्‍ट्रीय मुद्दों को भूलकर अपने क्षेत्रिय मुद्दों पर ज्‍यादा ध्‍यान देने लगती हैं, क्‍यूंकि राजनीति वोट बैंक आधारित होती जा रही है।

मीडिया की प्रश्‍नावली, नेताओं के बेबाक उत्‍तर

या तो मीडिया को अपनी बे अर्थी प्रश्‍नावली बंद कर देनी चाहिए या फिर देश के नेताओं के घटिया बयानों को प्रसारित करने से परहेज करना चाहिए। मीडिया को कहीं न कहीं सावधानी बरतनी होगी। मीडिया अच्‍छी तरह जानता है। हमारे नेताओं की शिक्षा का स्‍तर कितना ऊंचा है। वैसे भी रानजीतिक रैलियों में हमारे नेता कहते नहीं थकते कि कीचड़ में पत्‍थर मारोगे तो कीचड़ के छींटे आपका दामन गंदा करेंगे।

दिल्‍ली गैंग रेप घटना के बाद पूरा देश सदमे में है। ऐसा मैं नहीं, बल्‍कि हमारा 24 घंटे प्रसारित होने वाले इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया कह रहा है। भले ही इस घटनाक्रम के बावजूद सलमान की दबंग ने सौ करोड़ से ज्‍यादा रुपए बॉक्‍स ऑफिस पर एकत्र किए। भारतीय क्रिकेट प्रेमियों ने निरंतर क्रिकेट देखा। दिल्‍ली गैंगरेप की लाइव रिपोर्टिंग व चर्चा के दौरान मीडिया ने विज्ञापन से अच्‍छा कारोबार किया, थोड़े से ब्रेक के बाद के बहाने।

अब हमारे पत्रकार महोदय जहां भी खड़े होते हैं, वहीं खड़े किसी न किसी शख्‍स से पूछ लेते हैं दिल्‍ली गैंग रेप के बारे में आपका क्‍या खयाल है, क्‍यूंकि आजकल सन्‍नी लियोन फायरब्रांड नहीं। हमारे नेता भी टीवी पर आने के चक्‍कर बेबाक बयान दे देते हैं। मगर जब वो बयान बवाल बन जाता है तो मीडिया के सिर आरोप आता है बयान तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया। अंत बयान की लीपापोती की जाती है, शायद वैसे ही जैसे दीवाली से पूर्व कच्‍ची दीवारों में पड़े खड़ों को भरने की प्रक्रिया होती है या किसी बड़े नेता के आने से पूर्व टूटी सड़कों की मुरम्‍मत। नेता सार्वजनिक तौर पर माफी मांग लेता है। हर हिन्‍दी फिल्‍म की तरह बवाल का भी हैप्‍पी एंडिंग हो जाता है।

दिल्‍ली गैंगरेप पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है, 'रेप की घटनाएं 'भारत' में नहीं 'इं‌डिया' में ज्यादा होती हैं'। उन्होंने कहा है, 'गांवों में जाइए और देखिए वहां महिलाओं का रेप नहीं होता, जबकि शहरी महिलाएं रेप का ज्यादा शिकार होती हैं'।

मोहन भागवत किसी गांव की बात करते हैं, जहां से किसी शहर का उदय होता है। जैसे गंगोत्री गंगा का उदय, वैसे ही गांव शहर का उदय करता है। गांव से निकलकर लोग शहर की तरफ आते हैं। लोग शहर में आकर बस जाते हैं, जो कल गांव थे, आज गांव मंडियां या शहर बन चुके हैं। अगर मोहन भागवत गांव का तर्क देकर किसी सच्‍चाई से मुंह मोड़ना चाहते हैं तो अलग बात है, वैसे मैं उनको एक बात कहना चाहता हूं कि शायद शहर में औरत की आबरू की कीमत हजारों में लगती हो, मगर गांव में दलित महिला की इज्‍जत की कीमत केवल एक घास की गठड़ी हो सकती है या कुछ पैसे हो सकते हैं। गांवों की स्‍थिति शहर से बेहद बुरी है। गांव में दलित महिलाओं को निशाना बनाया जाता है। जैसे मध्‍य प्रदेश की एक महिला प्रोफेसर ने कहा था, समर्पण कर देना चाहिए था, वैसा समर्पण गांवों में महिलाओं को करना पड़ता है। वो उस स्‍थिति को स्‍वीकार कर लेती हैं।

वहीं दूसरी तरफ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है 'महिलाएं मर्यादा न लांघें, नहीं तो रावण हरण के लिए बैठा है'। मगर कैलाश विजयवर्गीय ने महिलाओं की मर्यादा के बारे में प्रकाश नहीं डाला। शायद वो इस विषय पर विस्‍तार से बोलते तो हो सकता था महिलाएं उनके प्रवचनों को आत्‍मसात कर लेती। दिल्‍ली गैंग रेप को ध्‍यान में रखकर बयान देने से अच्‍छा होता अगर कैलाश क्राइम आंकड़े देखकर बयान दिया होता, जो यह दर्शाता है कि 90 फीसदी बलात्‍कार घरों के अंदर अपने ही परिजनों के हाथों से किए जाते हैं। घर में रहने वाली युवतियों के लिए, महिलाओं के लिए आख़िर कौन सी लक्ष्‍मण रेखा होती है, शायद जानने के लिए महिलाएं आतुर होंगी। अगर कैलाश जी आपके पास है तो जरूर बताईए, ताकि महिलाएं घर में किसी हवश के भूखे भेड़िए का शिकार होने से बच जाएं।

मीडिया भी उस बाजार का एक हिस्‍सा है, जो अपने उत्‍पाद बेचने के लिए हर तरह का फंडा अपनाता है। यह कहना गलत होगा कि केवल बॉलीवुड नग्‍नता परोसता है। मीडिया भी कोई कम नहीं। मल्‍लिका शेरावत, सन्‍नी लियोन, पूनम पांडे से दुनिया को अगवत करवाने वाला बॉलीवुड नहीं, मीडिया है। काजोल, माधुरी, जूही किस तरह अपने परिजनों को समर्पित हो गई हैं। मीडिया यह सब बताने में दिलचस्‍पी नहीं लेता, बल्‍कि इसमें दिलचस्‍पी लेता है कि मल्‍लिका ने कितने चुम्‍बन दिए, सन्‍नी लियोन से इससे पहले कौन कौन सी अश्‍लील फिल्‍मों में काम किया।

कमल हसन का नया फंडा

सिने यात्रियों से अपील है कि लिएंडर पेस द्वारा चलाई जा रही राजधानी एक्‍सप्रेस में यात्रा करना बेहद घातक सिद्ध हो सकता है। अगर सिने यात्री इस वीएंड पर कहीं समय बतीत करना चाहते हैं तो उनके लिए परेश रावल एवं रंजीव खंडेलवाल का टेबल नम्‍बर 21 सुविधा जनक साबित हो सकता है।

और अगले हफ्ते पर्दे पर विश्‍वरूपम लेकर कमल हसन हाजिर हो रहे हैं। मगर वो इस बार नया तुजुर्बा करने जा रहे हैं। इस फिल्‍म को रिलीज करने से पूर्व इस फिल्‍म को डिश टीवी के बैनर तले प्रसारित किया जाएगा। यह अपने आप में एक नया तुजुर्बा है। कमल हसन मानते हैं कि ऐसा करने से नकली सीडी एवं डीवीडी बाजार पर नकेल कसी जा सकती है, हालांकि कमल हसन के इस प्रयोग से सिनेमा मालिक थोड़ा सा दुखी हैं। मगर कमल कहते हैं कि जो उनके असली दीवाने हैं, वो सिनेमा घरों में दस्‍तक देंगे।

5 जनवरी, 2013 तक बुक कराने वाले ग्राहक ‘विश्‍वरूपम’ का तमिल संस्करण 1000 रु में देख सकते हैं जबकि इसके बाद के ऑर्डर पर, सिंगल शो के लिए 1200 रु खर्च करने होंगे। हिंदी और तेलुगू संस्करणों का खर्च 500 रु है। ऐसा पहली बार होगा कि सिने प्रेमियों को नई मूवी देखने के लिए सिनेमा घर तक जाने की तकलीफ नहीं उठानी पड़ेगी।

तमिलनाडू फिल्‍म डिस्‍ट्रीब्‍यूटर्स एसोसिएशन ने कमल हसन के इस फैसले का पुरजोर विरोध करते हुए चेताया है कि अगर वो ऐसा करेंगे तो उनकी फिल्‍म को रिलीज नहीं किया जाएगा। इसके अलावा तामिलनाडू में मुस्‍लिम सुमदाय ने कमल हसन का विरोध करना शुरू कर दिया, उनका मानना है कि कमल हसन की इस फिल्‍म से मुस्‍लिमों की छवि समाज में बिगड़ सकती है।

कांग्रेसियों का 'ब्रह्मचर्य व्रत'

कहते हैं जो पकड़ा गया वो चोर बड़ा। जो समय रहते स्‍वीकार कर गया वो सबसे बड़ा महान, जैसे कि मोहनदास कर्म चंद गांधी। मगर अफसोस है कि अब कांग्रेसी नेताओं को स्‍वीकार करने का मौका ही नहीं मिलता या तो लड़कियां आत्‍म हत्‍या कर नेताओं को बेनकाब कर देती हैं या फिर कुछ साल बाद गलतियां पुत्रों का जन्‍म लेकर जग जाहिर हो जाती हैं।

शायद महात्‍मा गांधी की परंपरा को कांग्रेसी नेता बरकरार रखने की कोशिश में लगे हुए हैं, भले दूसरी तरफ सत्‍ता में बैठी कांग्रेस महिलाओं की सुरक्षा का पूरा पूरा जिम्‍मा उठाने का भरोसा दिला रही है। कथित तौर पर कुछ महीनों से ब्रह्मचर्य का व्रत, जिससे हम बलात्‍कार भी कह सकते हैं,  कर रहे एक नेता विक्रम सिंह ब्रह्मा को क्षुब्‍ध महिलाओं ने असम में पीट डाला, और कांग्रेस को एक बार फिर शर्मिंदा होना पड़ा। शायद कांग्रेस शर्मिंदा न होती। अगर आज हमारे राष्‍ट्रपिता की तरह विक्रम सिंह ब्रहमा भी जनता के बीच आकर महिला के साथ किए अपने ब्रह्मचर्य व्रत की स्‍वीकृति करते।

जैसे गांधी जी ने एक पत्र में लिखा था कि 'मुझे मालूम है कि शिविर के सभी लोग जानते हैं कि मनु मेरी खाट में साझेदारी करती है। वैसे भी मैं छुपाकर कुछ नहीं करना चाहता हूं। मैं इसको विज्ञापित नहीं कर रहा हूँ। यह मेरे लिए अत्यंत पवित्र चीज है। संदेह और अविश्वास को दूर करने के लिए फरवरी 1947 में गांधीजी ने नोआखाली की एक प्रार्थना सभा में मनु के साथ बिस्तर की साझेदारी की बात सबके सामने रखी। लेकिन यह नहीं बतलाया कि इस साझेदारी में मनु वस्त्रहीन अवस्था में होती थी।

कुछ माह पहले गीतिका नामक लड़की ने आत्‍महत्‍या कर ली और पीछे एक सुसाइड नोट छोड़ गई, जिसमें लिखा था कि उनकी आत्‍महत्‍या के पीछे कांग्रेसी नेता का हाथ है। यकीनन यह मामला भी महिला के साथ शारीरिक प्रयोग का था, जिसमें महिला को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। मगर जब आरोपी नेता का जन्‍मदिवस आया तो एक अन्‍य कांग्रेसी नेता ने कहा, 'गोपाल कांडा ने गलती से गलत नौकर रख लिया था'। यकीनन गीतिका मनु सी न थी, ईमानदार पैरोकार न था।

कांग्रेस के दिग्‍गज नेताओं में शुमार एनडी तिवारी, जो तीन बार उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री भी रह चुके हैं, को ब्रह्मचर्य व्रत प्रयोग उस समय महंगा पड़ गया, जब हाईकोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर रोहित शेख़र को उनका पुत्र मान लिया। एनडी तिवारी ने इसको एक साजिश बताया तो वहीं डीएनए टेस्ट रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद उज्ज्वला शर्मा ने कहा था, जो सच्चाई केवल वह जानती थीं, अब वह सच्चाई पूरी दुनिया के सामने आ गई है। यह सच की जीत है और उनके बेटे के मां के प्रति प्रेम की जीत है।

कथित तौर पर पिछले वर्ष कांग्रेस के फायरब्रांड वकील नेता अभिषेक मनु सिंघवी को भी उनके चालक ने ब्रह्मचर्य व्रत प्रयोग करते हुए एक वीडियो में कैच कर लिया था। इस वीडियो के रिलीज होने के बाद बात सामने आई कि वो वकील महिला को बदले में उच्‍च पदवी देने वाले थे। कांग्रेसी नेता अपने प्रेरणास्रोत एवं देश के राष्‍ट्रपिता के प्रयोग करने की कोशिश करते हुए पकड़े जाते हैं। उनको जनता महात्‍मा गांधी बनने से रोक लेती है। वैसे तो राहुल गांधी भी इस तरह के आरोप को झेल चुके हैं।

आज रात एनडीटीवी पर प्राइम टाइम शो देखते हुए एक सवाल सुनने को मिला कि महाभारत से द्रोपदी चीरहरण को हटा देना चाहिए। मुझे लगता है कि देश के राष्‍ट्रपिता की कुछ ऐसी स्‍वीकृतियों को भी नहीं हटा देना चाहिए।

पाक ने धोनी ब्रिगेड को 85 से धो डाला

कोलकाता। भारत पाकिस्‍तान के बीच चल रही तीन मैचों की वनडे क्रिकेट सीरीज भारत आज की हार के साथ गंवा चुका है। अगला मैच केवल खानापूर्ति से अधिक कुछ नहीं होगा, क्‍यूंकि आज की जीत के साथ पाकिस्‍तान सीरीज में 2-0 से आगे निकल चुका है।

ईडन गार्डन्स में पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए दूसरे वनडे में भारत को 85 रनों से शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। भारत की ओर से सबसे ज्यादा रन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (नाबाद 54) ने बनाए। 

पहले बल्‍लेबाजी करते हुए नासिर जमशेद (106) एवं मोहम्मद हफीज (76) की शानदार बल्लेबाजी की मदद से पाकिस्तान ने ईडन गार्डन्स में खेले जा रहे दूसरे वन-डे में भारत को 251 रनों का टारगेट दिया था, जिसको अचीव करने में भारतीय टीम पूरी तरह असफल रही।

उधर, हमारे प्रतिनिधि को गुप्‍त सूत्रों से सूचना मिली है कि धोनी से विराट कोहली से कहा है, ''जिसने तुम लड़की पटाने के दो तरीके बताएं हैं, उससे बात करो, शायद उनके पास कोई मैच जीतने का तरीका भी हो।''

पद्मनी को भुला दिया, दामिनी को भी भूल जाएंगे

एल आर गाँधी
 
केरल में कोच्ची की एक मस्जिद में 23 नवम्बर को, आतंकी अजमल कसाब जिसे 21 नवम्बर को फांसी पर लटका दिया गया था, के लिए नमाज़ पढ़ी गई। मस्जिद की प्रबंधक समिति ने कसाब के लिए नमाज़ पढने वाले इमाम को उसके पद से हटा दिया। ज़ाहिर है इमाम की इस करतूत को मस्जिद के प्रबंधकों ने राष्ट्र विरोधी माना और उसको इमाम के पद से हटा दिया। मगर केरल की कांग्रेस सरकार ने इस देशद्रोही इमाम के खिलाफ कोई कार्रवाही करना उचित नहीं समझा! करें भी कैसे? केंद्र की और राज्य की सेकुलर सरकारें तो आस्तीन में सांप पालने में वैसे ही माहिर हैं।

अभी अभी पिछले दिनों हमारे गृह मंत्री शिंदे जी महाराज ने तो मुंबई पर आतंकी हमले के  'आका ' हाफिज सईद को 'श्री' के अलंकार के साथ संबोधित कर अपनी चिर परिचित सेकुलर मानसिकता का परिचय दे ही दिया। हर मुस्लिम नाम के आगे श्री और पीछे जी लगाना कभी नहीं भूलते हमारे ये 'सेकुलर' हुक्मरान ..... भूलें भी कैसे ....वोट बैंक की दरकार जो है। हमारे दिग्गी मिया ने तो हद ही कर दी जब दुनिया के दुर्दांत आतंकी ओसामा बिन लादेन को देश के परम आदरणीय शब्द 'जी' से संबोधित तो किया ही और साथ ही अमेरिका द्वारा ओसामा को इस्लामिक रिवायत से  दफन न कर समुद्र में जल समाधि देने पर अपना 'आक्रोश' जताया। ऐसी ही कुछ राजनैतिक मजबूरिओं के चलते ही हमारे सेकुलर हुक्मरान 'मियाँ अफज़ल गुरु' को फांसी पर लटकाने से टालते आ रहे हैं।

दिल्ली के 'दामिनी' गैंग रेप कांड ने पूरे देश को झकझोंकर रख दिया। देश की राजधानी की सड़कों पर कैसे 'मौत के दरिन्दे' दनदनाते फिर रहे हैं। फिरें भी क्यों न, जब देश के जनतंत्र के मंदिर 'संसद' पर हमला करने वाले अफज़ल को 11 साल में उसके अंजाम तक नहीं पहुचाया गया। महिला होते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 5 बलात्‍कारियों की मौत की सजा माफ़ कर दी। दामिनी कांड से आक्रोशित जनता के हजूम ने देश के भ्रष्ट राजनेताओ की नींद उड़ा दी।

मीडिया ने लोगों को 'दामिनी की शहादत को न भुलाने की 'कसमें' दिलाई और दिल्ली की शीला, मोहन, सोनिया ने भी लोगों से अनगिनत 'वायदे' कर डाले। कहते हैं की जनता की याददाश्त बहुत कमजोरर होती है, और वह नेता ही क्या जिसका वायदा वफ़ा हो जाए। दशक पूर्व दो शैतान बिल्ला रंगा ने संजय चोपड़ा और गीता चोपड़ा बहन भाई को फिरौती के लिए अगवा किया और मार दिया। दिल्ली की सड़कों पर सरकार के खिलाफ ऐसा ही जन आक्रोश उमड़ा  था। लोग भी भूल गए और उस वक्त भी राज नेताओं ने ढेर सारे वायदे किए थे। कहाँ वफा हुए अपहरण-फिरौती बलात्कार बदस्तूर ज़ारी हैं और बढ़ते ही जा रहे हैं।

कहते हैं जो कौमें इतिहास से कुछ सबक नहीं लेतीं। वे इतिहास के पन्नों में ही दफन हो जाती हैं। पद्मिनी के इतिहास को हमने भुला दिया और दामिनी को भी भूल जाएंगे।  अलाउदीन खीलजी से अपनी 'आबरू' की रक्षा के लिए चितौड़ की महारानी ने अपनी तमाम चितौड़ वीरांगनाओं सहित 'जौहर' को चुना। पद्मिनी के रूप पर पागल अलाउदीन जब महल में दाखिल हुआ तो देख कर अवाक रह गया। राज महल की सभी राजपूत वीरांगनाओं के जिस्म 'जौहर' की ज्वाला में धू धू जल रहे थे। अलाउदीन ने चितौड के सभी 'काफिरों' के सर कलम करने का हुकम दिया। 60000 निहत्‍थे निर्दोष हिन्दुओं को मौत के घाट उतार दिया गया और हमारे ये सेकुलर शैतान खिल्ज़ीओं, बाबरों और औरंगजेबों की मजारों पर सजदे करते नहीं थकते।

उठता धुआं (ओवैसी), किसी आगजनी का अंदेशा

लगता है देश एक बार फिर से किसी भयानक हादसे से गुजरने वाला है। देश के हुकमरान एक बार फिर किसी को पनपने की वो हर परिस्‍थिति मुहैया करवा रहे हैं, जो आज से कुछ साल पहले कुछ समुदाय नेताओं की दी गई एवं अंत तो पूरा विश्‍व जानता है। मगर अफसोस यह गलती एक ही परिवार बार बार कर रहा है।
 
कथित तौर पर  लिट्टे को जन्‍म देना वाला। पंजाब में सिखों के अलग राज की मांग करने वाले संत। सभी को उभरने के लिए गांधी परिवार ने अपना पूरा सहयोग दिया। मगर जब इन्‍होंने गांधी परिवार से आगे जाकर अपनी खुद की पैठ बनानी शुरू की तो गांधी परिवार को बुरा लगा। अफसोस इसमें नुकसान आम आदमी को भुगताना पड़ा। अब एक बार फिर गांधी परिवार अपनी पुरानी भूल को दोहराने जा रहा है, लेकिन इत्तेहादुल मुसलमीन के विधायक अकबरउद्दीन ओवैसी के रूप में।

अकबरउद्दीन ओवैसी के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने नई दिल्ली के पार्लियामेन्ट स्ट्रीट के डीसीपी को एक पत्र लिख कर शिकायत की है कि ओवैसी ने 24 दिसम्‍बर 2012 को आंध्र प्रदेश के निर्मल शहर में बेहद भड़काऊ भाषण दिया गया था। पूरा भाषण बेहद आपत्तिजनक है, हिंदू धर्म के खिलाफ भड़काऊ और हमारी सांस्कृतिक विरासत के खिलाफ है। यह हमारे संवैधानिक मूल्यों, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर एक तगड़ा हमला है। ऐसे अप्रिय भाषण समाज को विभाजित करते हैं, शांति भंग करते हैं और सांप्रदायिक दंगों की पृष्ठभूमि तैयार करते हैं।

यह ऐसा कोई पहला मामला नहीं, जब ओवैसी को लेकर किसी ने एतराज जताया हो। ओवैसी के खिलाफ समय समय पर काफी गम्‍भीर आरोप लगे हैं, लेकिन सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी की छत्रछाया में चल रही सरकार इस बाबत को गम्‍भीरता से लेने को तैयार नहीं।

गुजरात के सूरत से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र लोकतेज की वेबसाइट के सौजन्‍य से निम्‍न  प्रकाशित लेख, जो कांग्रेस के छुपे हुए चेहरे को जग जाहिर करता है ।

क्या भारत सही मायने में धर्मनिरपेक्ष है? क्या भारत संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों को मानता है? क्या भारत मे हिंदू और मुस्लिम लोगों और उनके नेताओं के बीच भेद-भाव नही किया जाता? यदि हाँ, तो फिर राहुल गाँधी का सबसे करीबी दोस्त और यूपीए का सांसद असदुद्दीन ओबैसी भारत और संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हमास और हिजबुल्लाह के खूंखार कमांडरों के साथ बार बार मिलने लेबनान के बेरुत और दहिल्या शहर मे क्यों जाता है?

इजरायल के चेतावनी की अनदेखी
सूत्रों से ज्ञात हुआ की इजराइली खुफिया एजेन्सी मोसाद ने भारत सरकार को कई बार पत्र लिखकर कहा है कि आपका सांसद जो आपकी यूपीए सरकार को समर्थन दे रहा है वो इजरायल में आतंकवाद पैâला रहा है और साथ ही भारत के गरीब मुस्लिम युवकों का ब्रेनवाश करके उन्हें हमास और हिजबुल्लाह के लिए भर्ती करता है, लेकिन चूँकि भारत की यूपीए सरकार को सिर्पâ हिंदू ही आतंकवादी नजर आते है इसलिए भारत सरकार ओबैसी को खुलेआम छुट दे दिया है। ज्ञात रहे कि हिजबुल्लाह आज विश्व का सबसे बड़ा आत्मघाती दस्ते वाला आतंकवादी संगठन है जो छोटे-छोटे बच्चों को अपने आत्मघाती दस्ते मे भर्ती करता है।

मुस्लिमों ने वैसे धर्म निरपेक्ष देशों को मुस्लिम राष्ट्र बनाया
पूर्व में लेबनान पहले धर्मनिरपेक्ष देश था और वहाँ ४ हिंदू और १० यहूदी भी रहते थे। लेबनान जहां पहले ८० ईसाई तथा अन्य धर्म और २० मुस्लिम रहते थे और लेबनान विश्व का बहुत तेजी से तरक्की करता हुआ मुल्क था, इसकी राजधानी बेरुत को विश्व का गोल्ड केपिटल कहा जाता था क्योकि बेरुत विश्व की सबसे बड़ी सोने की मण्डी थी। इतना ही नहीं खूबसूरत लेबनान में कई हॉलीवुड और बॉलीवुड के फिल्मों की शूटिंग होती थी।

लेकिन लेबनान की तरक्की और खुशहाली पर लेबनान के मुस्लिम नेताओं ने ग्रहण लगा दिया, मस्जिदों में और अपने सम्मेलनों के मुसलमानों को खूब बच्चे पैदा करके लेबनान पर कब्जा करने की बाते करते थे। फिर धीरे-धीरे लेबनान का जनसंख्या का संतुलन बिगड़ गया और फिर लेबनान २५ सालों से गृहयुद्ध की चपेट मे आ गया। आज लेबनान के दो हिस्से है उत्तरी लेबनान जिसमें ईसाई और अन्य धर्मों के लोग रहते है और दक्षिण लेबनान जहां मुस्लिम रहते है उसी तरह राजधानी बेरुत का भी दो अघोषित हिस्सा है जहां एक तरह ईसाई और दूसरी तरफ मुस्लिम रहते हैं।

सांसदों को विदेश यात्रा से पूर्व अनुमति का नियम
जब भी कोई सांसद विदेश यात्रा करता है तो उसे लोकसभा सचिव को लिखित सूचना देकर अनुमति लेनी पड़ती है भले ही वो उसकी निजी यात्रा ही क्यों न हो। एक आरटीआई के जबाब मे मीरा कुमार ने पहले बताया कि उनके पास ऐसी कोई फाइल नही आई जिसमे ओबैसी ने लेबनान और सीरिया के यात्रा की अनुमति मांगी हो। इसका मतलब यही है कि ओवैसी ने बिना अनुमति के विदेश यात्रा की। सवाल ये उठता है कि आखिर इतना घोर साम्प्रदायिकता पैâलाने वाला ओबैसी को यूपीए साम्प्रदायिक क्यों नही मानती है ?

ओबैसी के डिप्लोमेटिक पासपोर्ट में गांधी परिवार की भूमिका
सबसे बड़ा चौकने वाला खुलासा ये है कि ओबैसी को डिप्लोमेटिक पासपोर्ट राहुल गाँधी की सिफारिश पर मिला था जबकि खुद आन्ध्रप्रदेश की कांग्रेस सरकार की ही खघ्ुफिया पुलिस ने ओबैसी को डिप्लोमेटिक पासपोर्ट न देने की रिपोर्ट भेजी थी लेकिन जब राहुल गाँधी ने इस मामले मे हस्तक्षेप किया जब जाकर विदेश मंत्रालय ने ओबैसी को बिना किसी योग्यता-अर्हता के डिप्लोमेटिक पासपोर्ट जारी कर दिया।

ध्यान रहे कि साधारण पासपोर्ट का कलर नीला होता है जबकि डिप्लोमेटिक पासपोर्ट का कलर मैरून होता है। और तो और डिप्लोमेटिक पासपोर्ट रखने वाले व्यक्ति की किसी भी हवाई अड्डे पर तलाशी नही होती और इन्हें वीजा आन अराइवल की भी सुविधा होती है और ये पासपोर्ट केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केबिनेट स्तर के मंत्री और राज्यों में मुख्यमन्त्रियों और राजदूत तथा दूतावास में सचिव स्तर के अधिकारियों को ही जारी हो सकता है ।

बांग्लादेशी मुसलमानों का पुर्नवास क्यों
अभी कुछ दिन पहले संसद में आसाम पर चर्चा के दौरान ओबैसी ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की उपस्थिति मे कहा कि यदि भारत सरकार आसाम मे मुसलमानों का चाहे वो प्रवासी क्यों न हो ठीक ढंग से पुनर्वास नही करती और उन्हें उचित मुवावजा नही देती तो फिर भारत का मुसलमान इस देश की ईंट से ईंट बजा देंगे लेकिन किसी भी सांसद ने ओबैसी के इस बयान की निंदा नही की। इससे बड़ा राष्ट्र का अपमान और क्या हो सकता है की पक्ष व विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर चुप रहे और तो और मीडिया ने भी इसको ब्रेकिंग न्यूज नही बताया सिर्पâ टाइम्स नाउ ने ही इस खबर पर चर्चा की।

यूपीए की नजर में हिन्दू
यूपीए की नजर में सिर्फ भारत के हिंदू ही साम्प्रदायिक है। अगर कोई भारत मे हिंदू हित की बात करेगा तो वो घोर साम्प्रदायिक और राजनितिक रूप से अछूत बन जायेगा। पूरी मीडिया और कई राजनितिक दल सहित कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अपनी दूकान चलाने वाली छोटी पार्टियां सब उसको साम्प्रदायिक घोषित कर देंगे। लेकिन यदि कोई सिर्फ मुस्लिम हित की ही बात करेगा तो वो धर्मनिरपेक्ष माना जायेगा।

ओवैसी की नजर में मुस्लिम ही नागरिक
ओवैसी ने आज तक संसद में सिर्पâ मुस्लिम हित और मुस्लिमों के बारे मे ही मुद्दे उठाये हैं और वे सिर्पâ मुस्लिम लोगों की ही मदद करते है यहाँ तक कि आसाम में भी उन्होंने जब राहत शिविर लगाया तो उसके उपर लिख दिया ‘‘ओनली फॉर मुस्लिम’’

इन्होंने सानिया मिर्जा को कई बार सम्मानित किया लेकिन जब एक पत्रकार ने इनसे पूछा कि आप सानिया नेहवाल को कब सम्मानित करेंगे तो ये महाशय माइक फेंक दिये।

आईबी ने दंगों के लिये ओबैसी बंधुओं को जिम्मेदार माना

आंध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार की ही आईबी हैदराबाद में भड़के कई दंगों के लिए ओबैसी बंधुओ को जिम्मेदार बताती है यहाँ तक की केन्द्र की खुफिया एजेंसियों ने भी कई बार गृहमंत्रालय को ओबैसी के संदिग्ध गतिबिधियों के बारे मे चेतावनी दी है। लेकिन सब बेकार।

चैन्‍ने एक्‍सप्रेस की पहली झलक

जब तक है जान के बाद 2013 में चैन्‍ने एक्‍सप्रेस में नजर आएंगे शाहरुख ख़ान। उनका साथ नजर आएंगी ओम शांति ओम गर्ल दीपिका पादुकोण। नव वर्ष के मौके पर रोहित शेट्टी द्वारा निर्देशित फिल्‍म चैन्‍ने एक्‍सप्रेस का पोस्‍टर रिलीज कर दिया। इस फिल्‍म में मुख्‍य भूमिका निभाने वाले शाहरुख ख़ान मुम्‍बई से रामेशेवरम की यात्रा करते हुए नजर आएंगे। इस दौरान कई घटनाएं घटित होंगी, जिनके जरिए रोहित शेट्टी शायद दर्शकों हंसाने में कामयाब होंगे। अब तक अजय देवगन के साथ नजर आने वाले रोहित शेट्टी शाहरुख खान के साथ नजर आएंगे, बतौर निर्देशक।



30 साल का हुआ इंटरनेट

-: वाईआरएन सर्विस :-
न ई मेल होती, न फेसबुक होता और न होता यू ट्यूब, अगर इंटरनेट का जन्‍म न होता। आज इंटरनेट 30 साल का हो चुका है। सोचो जरा! भारतीय आईटी इंडस्‍ट्री इंटरनेट के बिना आख़िर कैसी होती? आज भारत में चार बड़ी आईटी सर्विसेस कंपनियों की श्रेणी में टीसीएस, विप्रो, इन्‍फोसिस एवं एचसीएल टेक्‍नोलॉजिज शामिल हैं, जिनमें लगभग छह लाख से ऊपर कर्मचारी कार्यरत हैं।

दरअसल, आज से करीबन 30 साल पूर्व 1 जनवरी 1983 को पुरानी टेक्‍नॉलोजी को अलविदा कहते हुए नई प्रणाली को स्‍थापित किया, जिसे आज हम इंटरनेट के रूप में जानते हैं। उस दिन अमेरिका के रक्षा विभाग द्वारा संचालित अर्पानेट नेटवर्क 'Advanced Research Projects Agency Network' की जगह सम्पूर्ण तौर पर इंटरनेट प्रोटोकॉल सूट (आईपीएस) संचार प्रणाली के उपयोग को अपना लिया गया। आगे चलकर वर्ल्ड वाइड वेव (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू) का रास्ता तैयार हुआ।

अर्पानेट नेटवर्क ने 1960 के दशक के आखिरी वर्षों में सैन्य परियोजना के तौर पर काम करना शुरू किया था एवं कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय और स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसे कई संस्थानों ने इसकी विकास प्रक्रिया में मदद की। 1973 में आईपीएस और ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल प्रौद्योगिकी पर काम शुरू हुआ। इसे इसलिए तैयार किया गया क्योंकि पुराने नेटवर्क कंट्रोल प्रोग्राम (एनसीपी) में खामियां थीं।

ब्रिटेन के कम्प्यूटर वैज्ञानिक टिम बर्नर्स-ली ने बाद में 1989 में हाईपरटेक्स्ट डॉक्यूमेंट में इंटरनेट प्रोटोकॉल का उपयोग किया, जिसे वर्ल्ड वाइड वेव के नाम से जाना जाता है।

न नेता सुधरेंगे न अभिनेता

दिल्‍ली गैंगरेप के बाद नेता और अभिनेता टेलीविजन पर आंसू बहाते नजर आए। मगर संसद एवं मायानगरी में पाए जाने वाले ये अद्भुत प्राणी कभी नहीं सुधर सकते। पहले ही दिन एक नेता ने गीतिका को नौकर बताकर नए साल की बेहतरीन शुरूआत की दी।

कांग्रेसी नेता एक अन्‍य सहयोगी नेता के जन्‍मदिवस पर जश्‍न मनाने में मशगूल थे, जिन पर आत्‍महत्‍या के लिए मजबूर करने का आरोप है। किसी ने नेता से पूछ लिया गीतिका केस के बारे में, दरअसल यह सवाल उस लड़की के बारे में, जो कभी कांग्रेसी नेता गोपाल कांडा की कंपनी में अधिकारी हुआ करती थी, एक दिन आत्‍महत्‍या कर ली।

जहां कांग्रेस सरकार दिल्‍ली में बैठकर महिला सुरक्षा घेरे को मजबूत करने की दावे कर रही है, वहीं दिल्‍ली के पड़ोसी राज्‍य में उसके नेता महिलाओं के प्रति किसी तरह का नजरिया रख़ते हैं के उदाहरण पेश कर रहे हैं। हरियाणा के एक मंत्री शिव चरण शर्मा ने कहा, गोपाल कांडा ने गलती से एक गलत नौकर को रख लिया था, वो मामला इतना बड़ा नहीं, यह बयान उस लड़की के संबंध में थे, जिससे गोपाल कांडा के काफी करीबी रिश्‍ते होने की बातें सामने आई, और उस लड़की ने अंत आत्‍म हत्‍या कर ली थी। गीतिका के बाद फिजा का भी कुछ ऐसा ही हश्र हुआ, जो कभी एक अन्‍य पूर्व कांग्रेसी नेता के बेहद करीब हुआ करती थी, अंत तो पत्नि का दर्जा भी दे दिया था।

आज गोपाल कांडा एवं उसके साथ जश्‍न मना रहे हैं, जबकि गीतिका का परिवार इंसाफ के लिए कोर्ट के फैसलों के इंतजार में मायूस बैठा हुआ है। हमारे द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हमारे बीच में से ही किसी को चुनते हैं अपनी रातों को गर्म करने के लिए, और हम यह कहकर भूल जाते हैं, यह हमारे घर से तो नहीं थी।

 
नेताओं की छोड़िए अभिनेता की बात करते हैं। अभिनेताओं ने भी दिल्‍ली गैंगरेप पर काफी आंसू बहाए। हम भी भावुक हो गए। हम भी रोने लगे, क्‍यूंकि हमारे आदर्श रो रहे थे, जबकि हमको पता है कि यह अभिनय करने में सबसे आगे हैं। जया बच्‍चन सांसद में रोई तो उसके कुछ देर बाद एक एयरपोर्ट पर अमिताभ बच्‍चन मुस्‍कराते हुए मीडिया कर्मियों को कुछ कहकर निकलते हुए नजर आए। नए साल की शुरूआत राजधानी एक्‍सप्रेस से होने वाली है। जिसमें चलती गाड़ी के अंदर जिस्‍म भूख़ मिटाते हुए किरदार नजर आएंगे, वहीं कुछ दिन बाद विशाल भारद्वाज की मटरू की बिजली का मन्‍डोला रिलीज होने वाली है, जिसमें अनुष्‍का शर्मा बिकनी में और दो अर्थे शब्‍द बोलती नजर आएंगी। सुधीर मिश्रा की इंकार, जो एक सेक्‍स पैकेज है, जिसे यौन शोषण के बहाने युवा पीढ़ी के आगे परोसा जाएगा। आकाशवाणी में दो अर्थे संवाद नहीं, बल्‍कि टोटली एक अर्थे संवाद कानों तक पहुंचेंगे। एकता कपूर, जो महेश भट्ट को कई कदम पीछे छोड़ती है, महेश भट्ट की खोज सन्‍नी लियोन को रागिनी एमएमएस में दर्शकों के सामने परोसने वाली है। जब जब सन्‍नी लियोन के बारे में हमारे बच्‍चे पूछेंगे या स्‍कूलों में इस अभिनेत्री की बात होगी तो बच्‍चे बड़े गर्व से बताएंगे सन्‍नी लियोन पॉर्न स्‍टार हैं, भले ही हमारे बच्‍चों को पॉर्न स्‍टार का अर्थ पता न हो।

साल 2013 हो महिला सुरक्षा को समर्पित: प्रणब

-: वाईआरएन सर्विस :-

देश के 13वें राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 2013 को महिला सुरक्षा को समर्पित करने की अपील की। उन्‍होंने अपने नव वर्ष के संदेश में कहा, 'हम ऐसे समय नववर्ष में कदम रख रहे हैं, जब राष्ट्र एक बहादुर युवती की मौत का शोक मना रहा है, जो घृणित अपराध का शिकार हो गई'।

राष्ट्रपति ने लोगों को हैदराबाद स्थित ‘राष्ट्रपति निलयम’ में उन्हें नव वर्ष की शुभकामनाएं देने न आने की अपील करते हुए 2013 को महिलाओं की सुरक्षा में सुधार और कल्याण के लिए समर्पित करने के लिए कहा। याद रहे कि  ‘राष्ट्रपति निलयम’ राष्ट्रपति के दो आधिकारिक निवासों में से एक है।

वहीं, दिल्‍ली में शोक व्‍यक्‍त कर रहे कुछ युवाओं ने भी देश वासियों से अपील की है कि वो केवल मोमबत्‍तियां न जलाएं। वो मोमबत्‍ती से ज्ञान का प्रकाश लेकर बुराई एवं हवश के अंधकार को दूर भगाएं। यह मोमबत्‍ती तो प्रकाश का प्रतीक है। मोमबत्‍ती दिखाने का अर्थ है कि देश में अंधकार फैल चुका है, अब उसको दूर करने की जरूरत है।

'इंकार' के लिए दो करोड़ सर्वे पर खर्च

-: वाईआरएन सर्विस :-

दिल्‍ली गैंगरेप की घटना से उभरकर जब हम 2013 में नए संकल्‍पों के साथ कदम आगे बढ़ा रहे होंगे, तभी हम सुधीर मिश्रा की अगली फिल्‍म 'इंकार' से टकराएंगे, जो कॉर्पोरेट्स ऑफिसों में होने वाले यौन शोषण को जग जाहिर करेगी।

अगर सूत्रों की मानने तो जिस विषय पर इस फिल्‍म को बनाया गया है, उसे विषय से संबंधित हकीकत जानने के लिए वाय कॉम 18 ने करीबन दो करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

वाय कॉम 18 ने चंडीगढ़, दिल्‍ली, बैंगलोर, मुम्‍बई, पूने एवं कोलकत्‍ता जैसे बड़े महानगरों में स्‍थित कार्योलयों के भीतर विपरित लिंग सह कर्मी के साथ किस तरह का व्‍यवहार होता है, जैसे विषय पर सर्वे करवाया, जिस पर करीबन दो करोड़ रुपए खर्च आए हैं।

गौरतलब है कि सुधीर मिश्रा की निर्देशित फिल्‍म इंकार का निर्माण वॉय कॉम 18 मोशन पिक्‍चर्स द्वारा किया जा रहा है, जिसमें अर्जुन रामपाल एवं चित्रांग्‍दा सिंह मुख्‍य भूमिका निभाते नजर आएंगे।