Express Adda : राहुल गांधी के वक्‍तव्‍य - 2013

 साल 2013 में राहुल गांधी ने कब कहां, क्‍या कहा, जानिये, इस पोस्‍ट में।

राहुल गांधी  ने कहा, "कांग्रेस पार्टी दुनिया का सबसे बड़ा परिवार है लेकिन इसमें बदलाव की ज़रूरत है। मगर सोच-समझ कर। सबको एक साथ लेकर बदलाव की बात करनी है और बदलाव लाना है। प्यार से, सोचसमझ के साथ, सबकी आवाज़ को सुनकर आगे बढ़ना है। वो सबको एक ही आंख से एक ही तरीके से देखेंगे चाहे वो युवा हो, कांग्रेस कार्यकर्ता हो, बुजुर्ग हो या फिर महिला हो।'' 
राहल ने कहा, " आज सुबह मैं चार बजे ही उठ गया और बालकनी में गया। सोचा कि मेरे कंधे पर अब बड़ी जिम्मेदारी है। अंधेरा था, ठंड थी। मैंने सोचा कि आज मैं वो नहीं कहूंगा जो लोग सुनना चाहते हैं। आज मैं वो कहूंगा जो मैं महसूस करता हूं।" राहुल बोले, "पिछली रात मेरी मां मेरे पास आई और रो पड़ी क्योंकि वो जानती हैं कि सत्ता ज़हर की तरह होती है। सत्ता क्या करती है। इसलिए हमें शक्ति का इस्तेमाल लोगों को सबल बनाने के लिए करना है।"
रविवार, 20 जनवरी 2013

राहुल गांधी ने कहा, ''डरने की नहीं बल्कि लड़ने की जरूरत है ताकि सच को सामने लाया जा सके। सोच को बदलने और सकारात्मक सोच के साथ देश में बदलाव लाने की जरूरत है।''
मंगलवार, 22 जुलाई, 2013

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि गरीबी का मतलब भोजन, पैसे या अन्य भौतिक चीजों की कमी नहीं है बल्कि ये एक मनोदशा है.
मंगलवार, 6 अगस्त, 2013

राहुल गांधी ने कहा, 'मेरा अपना कोई सपना नहीं है। मैं अपने सपनों को कुचलना चाहता हूं और आपके सपनों को अपना बनाना चाहता हूं।'
बुधवार, 11 सितंबर, 2013

महाराष्‍ट्र में संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'अगर कांग्रेस अपने दम पर जीतती है तो उसको एनसीपी जैसी सहयोगी पार्टियों के सहारे की जरूरत नहीं पड़ेगी''।
बुधवार, 25 सितंबर, 2013

जगदलपुर रैली में राहुल गांधी ने कहा, ''विपक्ष की सोच है कि एक या दो व्यक्ति देश चला सकते हैं जबकि कांग्रेस पार्टी आम आदमी को साथ लेकर चलती है।''
शुक्रवार, 26 सितंबर, 2013

राहुल गांधी ने कहा कि दागी नेताओं संबंधी सरकार द्वारा लाया गया अध्यादेश पूरी तरह बकवास है और इसे फाड़कर फेंक देना चाहिए।
शुक्रवार, 27 सितंबर, 2013

राहुल ने मनमोहन को लिखा है कि 'आप जानते हैं कि मेरे मन में आपके लिए बहुत ज्यादा सम्मान है। मैं ज्ञान के लिए आप ही की तरफ देखता हूं। मुश्किल हालात में जिस तरह से आप को नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं वो सराहनीय है और मैं इसका कायल हूं। उम्मीद करता हूं कि आप इस विवादित मुद्दे पर मेरे दृढ़ विश्वास को भी समझेंगे।
शनिवार, 28 सितंबर 2013


राहुल गांधी ने कहा, 'मेरी मां ने मुझे बताया कि मेरे शब्द ज्यादा कड़े थे। मैं मानता हूं कि अध्यादेश को बकवास नहीं बताना चाहिए था। मेरी भावनाएं सही थीं, लेकिन शब्द ज्यादा कड़े हो गए थे।'
गुरुवार। 2 अक्‍टूबर 2013।


कुलवंत हैप्‍पी, संचालक Yuvarocks Dot Com, संपादक Prabhat Abha हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र, उप संपादक JanoDuniya Dot Tv। पिछले दस साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय, प्रिंट से वेब मीडिया तक, और वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की छाया में।

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3 प्रतिक्रिया:

  1. बढ़िया है आदरणीय-
    आभार आपका-

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    1. शक्ति मिली परिवार से, किन्तु कहाँ परवाह |
      लगे बड़े परिवार की, अब बकवास सलाह |
      अब बकवास सलाह, जहर सत्ता का ताड़ा |
      अब पानी में डाल, उगाने लगे सिंघाड़ा |
      सिंह सिंघाड़ा खाय, मौन होती अभिव्यक्ती |
      भस्मासुर तो नाय, इकठ्ठा सारी शक्ती ||

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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