अब तुम ही कहो

सरकार पुरानी है
उसकी वो ही कहानी है
ऑफिस में वजीर,
तो जनपथ रहती रानी है

वो चुपके से बयान देते हैं
लोग कहां ध्‍यान देते हैं
चंद पैसों के बदले में
गिरवी रख हिन्‍दुस्‍तान देते हैं

नहीं कृष्‍ण कोई यहां, तभी तो
आबरू ए द्रोपदी
सड़कों पर तार तार होती है
कोई सरेआम उतारे कपड़े
तो कोई कपड़े ओढ़ने को
किसी कोने में बैठी रोती है

शुक्र ए खुदा कि
एक सोई 'दामिनी' तो जागे कई हजार
वरना फाइलों में
दबी रहती है कई दामिनियों की पुकार

अब तुम ही कहो
कैसे कहूं हैप्‍पी न्‍यू ईयर मेरे यार।

केआरके ने कहा, डेरा सच्‍चा सौदा प्रमुख को मायकल जैक्‍श्‍ान

-:वाईआरएन सर्विस :-
 
देश द्रोही फिल्‍म से बड़े पर्दे पर दस्‍तक देने वाले एवं अपने बड़बोलेपन के कारण इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया में सुर्खियां बटोरने वाले कमाल आर ख़ान ने अपने टि्वट खाते पर इस बार आध्‍यात्‍मिक गुरू श्री गुरमीत राम रहीम सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि

उन्‍होंने बहुत सारे नौटंकी धर्म गुरूओं को देखा है, वो सबसे डेरा सच्‍चा सौदा सिरसा के धर्म गुरू से नीचे हैं। उन्‍होंने डेरा सच्‍चा सौदा के प्रमुख श्री गुरमीत राम रहीम सिंह को माइकल जैक्‍सन के नाम से संबोधित किया। शायद उनका यह टि्वट आजकल टैलीविजन चैनलों पर आने वाले डेरा सच्‍चा सौदा सिरसा के विज्ञापन से प्रेरित है, जिसमें डेरा प्रमुख अपने अनुयायियों के साथ नाचते हुए नजर आते हैं।

याद रहे कि डेरा सच्‍चा सौदा सिरसा अनुयायियों ने आगे बढ़कर अपना योगदान दिया है, जब जब देश में किसी कुदरती आपदा ने मानवी जीवन को अस्त व्‍यस्‍त किया है। मगर कुछ समय से सिख समुदाय एवं डेरा प्रेमियों के बीच टकराव हो रहा है, जो बेहद चिंता का विषय है।

यो यो हनी सिंह का विरोध

-: वाईआरएन सर्विस :-

दिल्‍ली से सटे गुड़गांव में होगा यो यो हनी सिंह का प्रोग्राम। यो यो हनी सिंह अपने अश्‍लील गायन के चलते अक्‍सर आलोचकों के निशाने पर रहे हैं। अब लेखक कल्‍पना मिश्र ने उनके अश्‍लील गीतों का विरोध करते हुए गुड़गांव में होने वाले प्रोग्राम को रोकने के लिए संबंधित होटल को पत्र लिखा है, मगर उक्‍त पत्र के बावजूद उक्‍त प्रोग्राम पहले से तय किए समय एवं स्‍थल पर होगा।

प्रोग्राम संबंधी जब आयोजकों से संपर्क किया गया तो सामने से बात कहते हुए एक महिला आयोजक ने कहा, इस प्रोग्राम को रद्द नहीं किया गया एवं यह प्रोग्राम अपने निर्धारित समय पर होगा।

जहां एक तरफ यो यो हनी सिंह के अश्‍लील गीतों को यू ट्यूब पर प्रसारित किया जा रहा है, जिनमें बलात्‍कारी एवं पटियाला सलवार शामिल हैं, जो बेहद अश्‍लील भाषा में लिखे गए हैं, वहीं दूसरी तरफ यो यो हनी सिंह अपने टि्वटर खाते पर दिल्‍ली गैंगरेप को लेकर अफसोस जाहिर कर रहे हैं।

यो यो हनी सिंह के कभी सबसे ज्‍यादा नजदीक रहे गायक जस्‍सी जसराज, आज हनी सिंह का सबसे बड़ा विरोधी हैं, क्‍यूंकि यो यो हनी सिंह ने पैसे कमाने के चक्‍कर में पंजाबी संगीत को दल दल की तरफ धकेल दिया। पंजाब में जितना नकारात्‍मक लेखन हनी सिंह के बारे में हुआ, शायद ही किसी गायक के हिस्‍से आया हो।

इससे पूर्व दिल्‍ली के एक हिन्‍दी दैनिक ने भी यो यो हनी सिंह पर अश्‍लील गीतों को लेकर एक टिप्‍पणी की थी, मगर अभी तक इस मामले में हनी सिंह की ओर से कोई टिप्‍पणी नहीं की गई।

''दामिनी'' को ''गूगल'' की श्रद्धांजलि

-: वाईआरएन सर्विस :-
 
खुद सदा के लिए सो कर पूरे हिन्‍दुस्‍तान को जगाने वाली अस्‍मरणीय दामिनी को पूरे हिन्‍दुस्‍तान ने ही नहीं बल्‍कि विश्‍व के सबसे बड़े सर्च इंजनों में शामिल गूगल ने भी मोमबत्‍ती जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। गूगल होम पेज पर नजर आने वाली मोमबत्ती पर जैसे ही माऊस जाता है तो वहां पर ''इन मैमोरी ऑफ द दिल्‍ली ब्रेवहार्ट'' लिखा मिलता है।

पीड़िता के साथ 16 दिसंबर को एक चलती बस में 6 पुरुषों ने गैंग रेप करने के बाद उसे सड़क किनारे फेंक दिया था। और उसके बाद उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया। वहां उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और गत शनिवार तड़के उसकी मौत हो गई।

इस घटना ने पूरे हिन्‍दुस्‍तान को महिलाओं के प्रति हो रहे अत्‍याचारों के खिलाफ एकसुर किया। इस आंदोलन ने केंद्र सरकार की जड़ों को पूरी तरह हिलाकर रख दिया। यह आजादी के बाद पहला ऐसा जनाक्रोश था, जिसका नेतृत्‍व किसी ने नहीं किया, बल्‍कि आम लोगों ने किया।

अब बलात्‍कारी भी होंगे ऑन लाइन !

#उलटी चप्‍पल
 अगर आप बलात्‍कारियों से नरफत करते हैं, और आप उनकी सुपारी देना चाहते हैं, तो आपके लिए एक अच्‍छी ख़बर है कि सरकार बहुत जल्‍द बलात्‍कारियों की वेबसाइट पर पूरी जानकारी डालेगी, जिसमें उनका नाम, फोटो एवं घरे के पते आदि शामिल होंगे। अभी तो फिलहाल गृह राज्यमंत्री आर पी एन सिंह ने राष्ट्रीय अपराध रेकॉर्ड ब्यूरो को इतना ही करने का निर्देश दिया है।

अगर गुप्‍त पूर्वानुमान कर्ताओं की मानें तो सरकार आने वाले समय में बलात्‍कारियों को जेलों में कम्‍प्‍यूटर एवं इंटरनेट मुहैया करवाकर देगी एवं फेसबुक या अन्‍य सोशल साइट माहिरों से संपर्क कर एक अच्‍छी चैट एपिलकेशन का प्रबंध भी करेगी, ताकि बलात्‍कारी अपने विचारों का आदान प्रदान कर सकें।

बलात्‍कार का शिकार हो चुकी युवतियां, महिलाएं एवं बच्‍चियां अपने पर कहर ढहाने वालों से बातचीत कर अपने मन की भड़ास निकाल सकें या फिर अपने घर पर लगे कम्‍प्‍यूटर की स्‍क्रीन पर उनको वीडियो चैट पर लेकर जूते आदि मार सकें।

सरकार ने यह कदम लोगों की पुरजोर आ रही मांग को देखते हुए उठाया है, जिसमें कहा जा रहा था, बलात्‍कारियों को सार्वजनिक करो, उनको सार्वजनिक सजा दो। शायद जो सरकार को समझ आया। सरकार ने वो ही कदम उठाया। अब बलात्‍कारियों को सार्वजनिक करने का इससे अच्‍छा तरीका क्‍या हो सकता है।

शायद सरकार को ऐसा लग रहा है कि जब भविष्‍य में उनकी चैट एप्‍लिकेशन ऑनलाइन हो जाएगी, तब कुछ शरारती तत्‍व जेलों में बंद कैदियों से चैट कर बलात्‍कार के तरीके सीखने के लिए पहुंच करने का प्रयास करेंगे, तो पुलिस उनको हादसे से पहले पकड़ लेगी।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार वेबसाइट को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए यू ट्यूब जैसे बड़े ब्रॉडकास्‍टिंग इंटरनेट बड़े धुरंधरों का सहारा लेकर जेल में खुशनुमा जिन्‍दगी काट रहे कैदियों से भी रूबरू करवा सकती है। इसके अलावा सरकार चाहे तो अधिक क्‍लिक पाने वाले वीडियो में शामिल कैदी को 15 अगस्‍त के दिन लाल किले पर सम्‍मानित कर उनको नए मिशन के लिए जेल से बाहर भेज सकती है।

धोनी ब्रिगेड ने निभाया अतिथि देवो भव: धर्म : #उलटी चप्‍पल

#उलटी चप्‍पल
कल बैंगलोर में खेले गए पहले टी 20 मैच में मेहमान टीम ने जीत दर्ज करते हुए दो मैचों की सीरिज में मेजबान टीम को एक जीरो से पछाड़ दिया। मेहमान टीम भारतीय क्रिकेटरों की मेहमान निवाजी से बेहद खुश है। आए हुए मेहमानों में एक भारतीय दामाद भी हैं, सानिया के शौहर। कल का सारा मैच उनके नाम ही रहा, क्‍यूंकि वो अंत तक नाबाद रहने में सफल रहे।

उधर, भारतीय टीम ने मैच हराने के बाद कहा कि उन्‍होंने मेहमानों को खुश करने के लिए शत प्रतिशत सहयोग किया। हमें नहीं लगता कि हमने मेहमान को खुश करने में कोई कसर बाकी छोड़ी है। इससे पहले भी हमने 28 सालों से जीत का सपना देख रहे इंग्‍लैंड निवासियों को यहां से खुश करके भेजा। इस सीरिज के दूसरे मैच के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं, हम नहीं चाहते कि मेहमान कोई किसी भी प्रकार की निराशा का सामना करना पड़े।

उधर, बीसीसीआई पाकिस्‍तानी क्रिकेट बोर्ड से निरंतर संपर्क कर रही है एवं निवेदन कर रही है कि पाकिस्‍तानी खिलाड़ियों को आईपीएल में खेलने की अनुमति दें। अगर खुफिया सूत्रों की माने तो धोनी ब्रिगेड के अतिथि देवो भव: धर्म निभाने से बीसीसीआई की साख़ निरंतर गिरती जा रही है। बीसीसीआई इसको लेकर निरंतर चिंतित है, भले भारतीय सरकार देश में बढ़ते क्राइम ग्राफ को लेकर बिल्‍कुल चिंतित न हो। बीसीसीआई चाहती है कि जैसे भारतीय खिलाड़ियों का आईपीएल खेलने से खेल स्‍तर निरंतर गिरता जा रहा है, वैसे ही एशियाई क्षेत्र की अन्‍य टीमों का भी गिरना चाहिए, क्‍योंकि आगे निकलने के दो तरीके हैं, या तो खेल स्‍तर को सुधारो या फिर दूसरे का भी बिगाड़ो।

अगर भारतीय टीम का खेल स्‍तर आने वाले दिनों में नहीं सुधरता तो टी 20 के बाद शुरू हुए गली फॉर्मेट में भारतीय खिलाड़ियों को खेलने के लिए भेजा जाएगा एवं स्‍टार बल्‍लेबाजों को अधिक से अधिक विज्ञापन करने की छूट दी जाएगी, इससे होने वाली कमाई का 50 फीसद हिस्‍सा बीसीसीआई अपने पदाधिकारियों के एशो आराम के लिए सुरक्षित रखेगी।

घोष्ट राइंटिंग - हमें सोचना होगा

'पाखी' पत्रिका ने महुआ माजी के द्वारा लिखे गए उपन्यास की चोरी का विवाद खड़ा किया उससे बहुत सारे प्रश्न उठते हैं। अंग्रेजी में भी ऐसी घटनाओं के कारण बहसें हुई हैं और लेखन की मौलिकता संदेह के घेरे में आयी और उन्हें रचनाकार की सम्मानित सूची से हटा दिया गया।

लेकिन हिंदी में यह ताजा प्रकरण इसलिए महत्वपूर्ण है कि पिछले दिनों लेखन में महत्वाकांक्षियों की एक पूरी फौज आ गयी है और वे साहित्य के इतिहास में 'महान्' हो जाना चाहते हैं। इसमें फिर चाहे तन, मन के अलावा धन ही क्यों न लगाना पड़ें। इसमें पत्रिका के सम्पादकों के साथ एक गठजोड़ की भूमिका भी देखी जानी चाहिए। कई बार प्रकाशकों के साथ इस गठजोड़ की भूमिका की जांच भी की जा सकती है।

पश्चिम में तो अब आलोचक की हैसियत रही नहीं कि उसके 'कहे बोले' गए से कोई लेखक महान हो जाए या उसकी महानता की चौतरफा स्वीकृति हो जाए। वहां प्रकाशनगृह ही लेखक पैदा करते हैं वे ही उन्हें महान भी बनाते हैं। अब माना जा रहा है कि यह सिलसिला यहां हिंदी में भी चल पड़ा है।

आलोचक का प्रभाव धुंधला गया है और प्रकाशक ही अब लेखक को 'आइकनिक' बना सकता है। हिंदी में ऐसे कई उदीयमान और चम‍कीले लेखक हो रहे हैं, जो वे किसी न किसी के डंडे पर चढ़कर, झंडे की तरह लहरा सकने की स्थिति में आ गए हैं। लिखने-पढ़ने की बिरादरी वाले लोगों के बीच

होने के नाते हम भी जानते हैं कि प्रभु जोशी ने न केवल कुछेक घोष्ट पेंटर बना दिए हैं बल्कि घोष्ट कहानीकार भी। अब वे ही घोष्ट खूब छप रहे हैं और पुरस्कार हथिया रहे हैं। और भी कोई प्रभु हो सकता है। ऐसी स्थिति इसलिए भी बनने लगी है कि पत्रिकाओं की तादाद बढ़ी और लेखक संघों का भी विघटन हो चुका है। इसलिए अब गुट है। गुटों की अपनी अपनी पत्रिकाएं हैं। अपने अपने लेखक है ही, पत्रिका के अपने अपने महान है। ऐसे महान भी हैं जो ‍किसी न किसी की 'घोष्ट राइंटिंग' के कारण सांस ले रहे हैं।

सवाल यह उठता है कि क्या हम अब यह मान लें ‍कि भारत का साहित्य मर गया है? उसकी मौलिकता के कोई मायने नहीं? अब साहित्य का भी राजनीति की तरह पतन हो चुका है? क्या ऐसे माहौल में हम कभी अमेरिकन और रशियन के समकक्ष खड़े हो पाएंगे? वह कौन सी वहज है जिसके

कारण हम भारत के साहित्य और साहित्यकारों को महान मानकर अपना आदर्श बनाएं, जबकि साहित्य भी अब बाजार की राह पर चल पड़ा है।

लेखक - अनिरुद्ध जोशी, वेब दुनिया हिन्‍दी डॉट कॉम,

प्रधान मंत्री के नाम खुला पत्र

प्रिय मनमोहन सिंह। मैं देश का आम नागरिक हूं। मुझे ऐसा लगने लगा है कि अब देश पर चल रही साढ़े साती खत्‍म होने का वक्‍त आ गया है। आपको अब नैतिक तौर पर अपने पद से अस्‍तीफा दे देना चाहिए। बहुत मजाक हो चुका। अब और मत गिराओ प्रधान मंत्री पद की गरिमा को। तुम राष्‍ट्र संदेश के अंत में पूछते हो ठीक है, जबकि देश में कुछ भी ठीक नहीं। हर तरफ थू थू हो रही है। उस समय 'ठीक' शब्‍द बहुत ख़राब लगता है, जब देश के नागरिक ठीक करवाने के लिए सड़कों पर उतर कर दमन का सामना कर रहे हों।

प्रिय मनमोहन सिंह मैं जानता हूं, चाय में चायपत्‍ती की मात्र चीनी, पानी एवं दूध से कम होती है। मगर पूरा दोष चायपत्‍ती को दिया जाता है, अगर चाय अच्‍छी न हो। मैं जानता हूं, आपकी दशा उस चायपत्‍ती से ज्‍यादा नहीं, लेकिन अब बहुत हुआ, अब तो आपको सोनिया गांधी पद छोड़ने के लिए कहे चाहे न कहे, आपको अपना पद स्‍वयं जिम्‍मेदारी लेते हुए छोड़ा देना चाहिए, ये ही बेहतर होगा।

वरना पूरा देश उस समय सदमे में पहुंच जाएगा। जब सचिन की तरह आपके भी संयास की ख़बर एक दम से मीडिया में आएगी। सचिन के नाम तो बहुत सी अच्‍छी उपलब्‍िधयां हैं, लेकिन आप की सरकार के नाम तो भ्रष्‍टाचार एवं घोटालों के अलावा कोई बड़ी उपलब्‍धि नहीं। आप एक अच्‍छे अर्थ शास्‍त्री हैं। लेकिन मैं हैरान हूं कि तीन दिन लग गए, यह बताने में कि आपके तीन बेटियां हैं। आप से पहले गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी कुछ ऐसा ही बयान दिया था, मेरे दो बेटियां हैं। मैं सोचता हूं कि अगर इन दिनों देश की कामना हमारे विश्‍व प्रसिद्ध बिहारी ब्रांड लालू प्रसाद यादव के हाथ में होती तो इस बयान के लिए जनता को सात दिन इंतजार करना पड़ता, क्‍यूंकि उनके तो सात बेटियां हैं।

यकीनन सोनिया गांधी को अफसोस रहा होगा कि उनको मौका नहीं मिला अपनी इकलौती पुत्री के बारे में बताने का, क्‍यूंकि शिंदे जी पहले ही दो नम्‍बर को जग जाहिर कर चुके थे। वैसे देश को खुशी हुई यह जानकार कि अब आप अपने परिवार समेत घर में सलामत हैं।

इस बयान से कहीं मनमोहन सिंह जी आप ये तो कहना नहीं चाहते थे कि मेरे तीन बेटियां हैं, अगर वो सुरक्षित हैं, और आपकी बेटियां असुरक्षित हैं तो इसमें सरकार नहीं, बल्‍िक जनता का कसूर है या फिर जब आग हमारे घर आएगी तो देखेंगे। अगर आप दूसरे विकल्‍प को दर्शाने की बात करते हैं तो मैं आपको एक कविता सुनाना चाहूंगा, जो मार्टिन नेमोलर की एक विश्‍व प्रसिद्ध कविता 'फर्स्‍ट दे कम' का हिन्‍दी अनुवाद है, जो कुछ दिन पूर्व राजस्‍थान पत्रिका में प्रकाशित हुई थी ''पहले वे फूलनों के लिए आए, मैंने कुछ नहीं कहा, क्‍यूंकि मैं फूलन नहीं थी, फिर वे नैनाओं के लिए आए, मैंने कुछ नहीं कहा, क्‍यूंकि मैं नैना नहीं थी, फिर वे भंवरियों के लिए आए, मैंने कुछ नहीं कहा, क्‍यूंकि मैं भंवरी नहीं थी, उसके बाद वे मेरे लिए आए, और वहां मेरे लिए बोलने वाला कोई नहीं था।

अंत में मनमोहन सिंह जी आपको एक बार फिर नैतिक जिम्‍मेदारी का अहसास करवाते हुए अपना पद छोड़ने की सलाह दूंगा। वैसे एक और बात, महात्‍मा गांधी के नाम दर्ज एक कहावत को लोगों ने बहुत पहले आपके नाम दर्ज कर दिया था, जिसे लोग अब ऐसे कहते हैं, मजबूरी का नाम मनमोहन सिंह।

वैसे आज मैंने भी एक बद दुआ को जन्‍म दिया, कुछ यूं, अगर आप का किसी देश को बद दुआ देने का मन करे तो चुपके से कह दीजिए, तुम्‍हारे देश का प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह जैसा हो।

समाचार पत्रों में 'दिल्‍ली जनाक्रोश'

पूरा दिन हिन्‍दी इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया ने दिल्‍ली जनाक्रोश को कवरेज दी। इस जनाक्रोश को घरों तक पहुंचाया। वहीं अगले दिन सोमवार को कुछेक हिन्‍दी समाचार पत्रों ने दिल्‍ली जनाक्रोश को सामान्‍य तरीके से लिया, जबकि कुछेक ने जनाक्रोश को पूरी तरह उभारा। भारतीय मीडिया के अलावा दिल्‍ली जनाक्रोश पर हुए पुलिस एक्‍शन को विदेश मीडिया ने भी कवरेज दिया।

इंग्‍लेंड के गॉर्डियन ने अपने अंतर्राष्‍ट्रीय पृष्‍ठ पर 'वी वांट जस्‍टिस' एवं 'किल देम' जैसे शब्‍द लिखित तख्‍तियां पकड़ रोष प्रकट कर रही लड़कियों की फोटो के साथ, किस तरह पुलिस ने उनको खदेड़ने के लिए आंसू गैस एवं पानी की बौछारों का इस्‍तेमाल किया, समाचार प्रकाशित कर इंग्‍लेंड की जनता को भारतीय पुलिस रवैया से अवगत करवाया।

वहीं, न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स ने अपने डिजीटल संस्‍कार में दिल्‍ली जनाक्रोश की ख़बर को 'रोष प्रदर्शन हिंसा में बदला' के शीर्षक तले प्रकाशित किया। इस रिपोर्ट अंदर रविवार को हुए पूरे घटनाक्रम का बड़ी बारीकी से लिखा गया है। ख़बर में बताया गया कि किस तरह लोग दिल्‍ली में एकत्र हुए। किस तरह इस जनाक्रोश में राजनीतिक पार्टियों ने घुसना शुरू किया एवं किस तरह शक्‍ति बल के जरिए इस प्रदर्शन को दबाने की कोशिश की गई। उन्‍होंने पुलिस के प्रति रोष प्रकट करते हुए कुछ प्रदर्शनकारियों की बातों को भी विशेषता से प्रकाशित गया, जैसे के पुलिस से जनता का सवाल करना, आप जहां क्‍यूं नहीं आए, हमारे साथ क्‍यूं नहीं खड़े हुए एवं जो हुआ क्‍या आप से गुस्‍साए नहीं।

पाकिस्‍तान द डॉन तो निरंतर दिल्‍ली घटनाक्रम को प्रकाशित कर रहा है। कल बाद दोपहर से द डॉन ने इस ख़बर को अपने होमपेज पर नम्‍बर तीन पर रखा, जबकि मुख्‍य लीड में पाकिस्‍तान नेता की ख़बर थी, जिनकी एक बम्‍ब धमाके में मौत हो गई, जिनको कल पूरे रीति रिवाजों के साथ खाके सुपुर्द किया गया।

अगर भारतीय समाचार पत्रों की बात करें तो अमर उजाला ने सचिन की ख़बर को प्रमुखता से लिया, लेकिन अख़बार के पहले तीन कॉलम दिल्‍ली जनाक्रोश को दिए। वहीं राजस्‍थान पत्रिका ने सचिन की ख़बर को नम्‍बर दो पर रखते हुए दिल्‍ली जनाक्रोश की ख़बर को 'छावनी बना इंडिया गेट' शीर्षक के तले प्रमुखता से प्रकाशित किया।

कड़के की ठंड में उबलती रही दिल्‍ली के शीर्षक तले दैनिक जागरण ने इस घटनाक्रम से जुड़ी तमाम ख़बरों को प्रकाशित किया एवं अंत बॉटम में 'क्रिकेट के भगवान ने किया एकदिवसीय का परित्‍याग' से सचिन तेंदुलकर को भी स्‍पेस दिया।

वहीं, दैनिक हिन्‍दुस्‍तान ने एक भावुक करती छवि के साथ 'डंडे बरसे, बिगड़े हालत' ख़बर को प्रमुखता से प्रकाशित किया।

अंत मीडिया कवरेज पर राज्‍य सभा चैनल पर मीडिया मंथन में कई तरह के सवाल उठाए गए। इसमें कहा गया कि मीडिया ने जनाक्रोश को भड़काने का प्रयास किया। मीडिया भी कहीं न कहीं इस गुस्‍से की लय में बह गया। अंत कोई कुछ भी कहे। देश की सरकार को इस झटके की जरूरत थी। इस मीडिया ने जो जनाक्रोश को कवरेज दिया, वो काफी सराहनीय थे, वरना दिल्‍ली की क्ररूरता जो कैमरों के सामने भी कम न हुई, वो कैमरों से परे कितना कहर बरपाती, इसका अंदाजा लगाना बेहद मुश्‍किल है।

चलते चलते इतना कहूंगा। हमारी इज्‍जत गई, अब तो शर्म करो दिल्‍ली के हुक्‍मरानों।

तो मोदी का सिर मांग लेता मीडिया

सुषमा स्‍वराज  टि्वट के जरिए लोगों को संबोधित करते हुए कहती हैं, 'मैं आपकी भावनाओं को समझती हूं, आपके गुस्‍से का सत्‍कार करती हूं, हमें कुछ वक्‍त दें, हम बातचीत कर रहे हैं, जल्‍द ही किसी नतीजे पर पहुंचेंगे'। उधर, तस्‍लीमा नस्‍रीन  लिखती हैं, 'यह औरतों की सुरक्षा का सवाल नहीं, केवल औरतों के लिए नहीं, बल्‍कि मानव अधिकारों का सवाल है, हर किसी को इस मार्च में शामिल होना चाहिए'।

वहीं आजसमाज  ने टि्वट पर लिखा है कि अगर यह मसला गुजरात के अंदर बना होता तो मीडिया अब तक नरेंद्र मोदी का सिर मांग चुका होता, लेकिन अभी तक मीडिया एवं अन्‍य पार्टियों ने शीला दीक्षित से नैतिकता के तौर पर अस्‍तीफा देने जैसे सवाल नहीं उठाए।

वहीं कुछ मित्रों ने फेसबुक पर लिखा है कि लोगों का जनाक्रोश अब किसी दूसरी तरफ मोड़ खाता नजर आ रहा है, ऐसे में किसी अनहोनी के होने से पहले लोगों को सतर्क होते हुए वापिस जाना चाहिए।

वहीं, मीडिया के रुख पर गुस्‍साए अभिनेता परेश रावल अपने टि्वट पर लिखते हैं, ''ख़बर कमरे में बैठकर लोगों के गुस्‍से को गलत बताने वाले पत्रकारों को घटनास्‍थल पर जाकर आंसू गोलों, पानी की ठंडी बौछारों का सामना करना चाहिए, और फिर बताएं प्रदर्शनकारियों का गुस्‍सा गलत या सही।

'जनांदोलन' नहीं, 'जनाक्रोश'

राहुल गांधी, अब जनपथ से बाहर आइए। इंडिया गेट पर पहुंचकर, उस युवा पीढ़ी के साथ खड़े होने का दम दिखाईए। जिसको बार बार राजनीति में उतरे का आह्वान आप हर राजनीति रैली में कर रहे थे। इस बार पुलिस असफल हो रही है भीड़ को खदेड़ने में, क्‍यूंकि यह जनांदोलन नहीं, जनाक्रोश है। जो ज्‍वालामुखी की तरह एक दम से फूटता है, और पानी की बौछारें उस आग का कुछ नहीं बिगाड़ पाती, जो ज्‍वालामुखी से उत्‍पन्‍न होती है।

जो जनाक्रोश दिल्‍ली में अभी देखने को मिल रहा है। वो अब तक हुए जनांदोलनों से कई गुना ज्‍यादा आक्रामक है। वहां हर कोई पीड़ित है। वहां हर कोई सरकार से पूछना चाहता है आखिरी कब मिलेगी असली आजादी। लड़कियां तो लड़कियां इस जनाक्रोश में तो लड़के भी बहुसंख्‍या में शामिल नजर आ रहे हैं, जो कहीं न कहीं बदलते समाज की तस्‍वीर को उजागर करते हैं। ये वो युवा पीढ़ी है, जो आने वाले कल में देश को नई पनीरी देगी। जो आज दिल्‍ली में आक्रोशित हैं, वो कल अपने बच्‍चों को शायद एक अच्‍छा नागरिक बनाने में तो अपनी जी जान लगाएगी। वहीं, दूसरी तरफ उस अस्‍पताल के बाहर कुछ कानून की पढ़ाई कर रहे छात्र नुक्‍कड़ नाटक के प्रति लोगों को जागरूक करते नजर आए। कहीं न कहीं, हम को गंदे समाज का बहिष्‍कार करना होगा और एक अच्‍छे समाज की परिकल्‍पना एवं सृजना करनी होगी। आज जो लोग दिल्‍ली में जनाक्रोश से सरकार को जगाने का प्रयास कर रहे हैं, कल उन्‍हीं लोगों को वापिस लौट कर अपने आस पास के समाज को जगाना होगा, क्‍यूंकि इस रेप मामले में ऐसे भी देखने का आया है, इसमें शामिल कुछ ऐसे आरोपी हैं, जो पहली बार जुर्म की दुनिया में आए। इसके पीछे कहीं न कहीं हमारा समाज जिम्‍मेदार है, जो औरत को सिर्फ काम वासना की वस्‍तु मानता है।

बलात्‍कारियों के खिलाफ उठी आवाम में आक्रोश की लहर अब थमनी नहीं चाहिए। देश की सरकार शायद अब आक्रोश की भाषा समझने लगी है। असुरक्षित का भाव आज जनता को सरकार के सामने खींच लाया है। यह असुरक्षित का भाव जब नेताओं के मनों में पहुंचेगा, तब वो भी खुद को सुरक्षित करने के लिए जनता की तरफ ध्‍यान देंगे।

जनपथ की महारानी या उनका वजीर अभी तक जनाक्रोश को बिना आश्‍वासन के कुछ नहीं दे पाया। अगर जनपथ की महारानी एवं उनके वजीर समय रहते जनता की भावनाओं को समझते, तो शायद आज का जनाक्रोश देखने को न मिलता। शायद पहली बार ऐसा हुआ होगा, जब पुलिस के आंसू गोले, ठंडे पानी की बौछारें एवं लाठीचार्ज भी जनाक्रोश को खदेड़ नहीं पाया। इंडिया गेट पर बढ़ती लोगों भीड़ बलात्‍कार के दोषियों को सजा तो दिला देगी। मगर क्‍या हमारी सरकार इस जनाक्रोश से कुछ सीखकर पूरे देश के भीतर एक अच्‍छा कानून ला पाएगी, जो इस खौफनाक जुर्म के लिए एक कड़ी सजा देने का अधिकार कानून को दे सके।

ऑस्‍कर से 42वीं भारतीय फिल्‍म रिजेक्‍टेड

-: वाईआरएन सर्विस :-

बॉक्‍स ऑफिस पर सौ करोड़ रुपए से अधिक कलेक्‍शन करने वाली एवं समीक्षकों के मुंह से वाह वाही लूटने वाली रणबीर कपूर एवं प्रियंका चोपड़ा अभिनीत फिल्‍म ऑस्‍कर की दौड़ में शामिल नहीं हो सकी। भारत द्वारा ऑस्‍कर के लिए भेजी गई 45 फिल्‍मों में से केवल तीन को ऑस्‍कर के लिए नॉमिनेट किया गया, बाकी सब फिल्‍मों के लिए भारत को न सुनने को मिली।

भारत ने ऑस्‍कर की ''उत्‍तम फिल्‍म विदेश भाषा'' श्रेणी के लिए पहली बार मदर इंडिया को 1957 में भेजा गया, जो ऑस्‍कर के लिए नामित हुई एवं अंत एक इटालियन फिल्‍म ले नॉटी दी कैबीरिया से केवल एक वोट के अंतर से हारी।

इसके बाद भारत इस पुरस्‍कार के लिए किसी साल फिल्‍म भेजता और किसी साल न भेजता। यह सिलसिला करीबन 1984 तक चला। इसके बाद केवल 2003 को छोड़कर भारत ऑस्‍कर पुरस्‍कार के लिए निरंतर फिल्‍में भेज रहा है।

भारत अब तक इस पुरस्‍कार के लिए करीबन 45 फिल्‍में भेजा चुका है, जिसमें 30 हिन्‍दी फिल्‍में हैं, बाकी अन्‍य क्षेत्रिय भाषाओं से चुनी गई फिल्‍में हैं। अगर हिन्‍दी सिनेमा की बात करें तो सुनील दत्‍त व आमिर ख़ान ऐसे सितारे हैं, जिनकी सबसे अधिक फिल्‍में ऑस्‍कर के लिए भेजी गई, लेकिन दोनों सितारों की केवल एक-एक फिल्‍म को ऑस्‍कर ने स्‍वीकार किया, जिसमें सुनील दत्‍त की मदर इंडिया और आमिर ख़ान की लगान। ज्ञात रहे कि आमिर ख़ान की चार एवं सुनील दत्‍त की तीन फिल्‍में ऑस्‍कर के लिए भेजी गई थीं।

बर्फी के रणबीर कपूर से पहले उनके पिता ऋषि कपूर भी सागर एवं हीना फिल्‍म के लिए ऑस्‍कर की दौड़ में शामिल होते होते दो बार रह चुके हैं।

अब तक भारत की ओर से भेजी गई हिन्‍दी फिल्‍में - सुनील दत्‍त की मदर इंडिया, अमरपाली व रेशमा और शेरा, दिलीप कुमार की मधुमति, गुरू दत्‍त की बीवी साहेब और गुलाम, देव आनंद की गाइड, जया बच्‍चन की उपहार, अमिताभ बच्‍चन की सौदागर व एकलव्‍य, स्‍मिता पाटिल की मंथन, संजीव कुमार की सतरंज के खिलाड़ी, राजेश खन्‍ना की आख़िरी ख़त, धर्मेंद्र की मझली दीदी, अनुपम खेर की सारांश, ऋषि कपूर की सागर व हीना, अनिल कपूर-जैकी श्रॉफ की परिंदा, डिम्‍पल कपाडिया की रूदाली, सीमा बिश्‍वास की बैंडिट क्‍वीन, आमिर ख़ान की अर्थ, लगान, रंग दे बंसती, तारे जमीं पर, कमल हसन की हे राम, शाहरुख की देवदास व पहेली।

जो तीन नॉमित हुई, लेकिन विजय नहीं, उनमें शामिल हैं मदर इंडिया, सलाम बॉम्‍बे और लगान।

बर्फी के बाहर होने के बाद ऑस्‍ट्रिया की अमोर, कनाडा की वर विच, चाइल की नो, डेनमॉर्क की ए रॉयल अफेयर, फ्रांस की द इनटॉचेबल, आइलैंड की द डीप, नॉर्वे की कोन टिकी, रोमानिया की बेयोंड द हिल्‍स, स्‍विस की सिस्‍टर दौड़ में शामिल हैं। इनमें से भी फिल्‍मों को शॉर्टलिस्‍ट किया जाएगा एवं अंतिम पांच की घोषणा दस जनवरी को की जाएगी।

दिल्‍ली की प्रशासक महिला, फिर महिला असुरक्षित!

दिल्‍ली गैंगरेप मामले ने उस तरह तुल पकड़ लिया, जिस तरह मुम्‍बई में हुए आतंकवादी हमले ने। भले ही इससे पहले भी गैंगरेप हुए थे, भले ही इससे पहले भी आतंकवादी हमले हुए थे। शायद किसी न किसी चीज की एक हद होती है, जब हद पार हो जाए तो उसका विनाश तय होता है।

दिल्‍ली गैंगरेप के बाद लोग सड़कों पर उतर आए, मगर दिल्ली की मुख्‍यमंत्री शीला दीक्षित कहती हैं, उनमें हिम्‍मत नहीं कि वो रेप पीड़िता से मिल सकें, लगातार तीन बार दिल्‍ली की जनता ने उनको मुख्‍यमंत्री बनाया। दिल्‍ली का प्रशासन एक महिला के हाथ में है, मगर हैरत की बात है कि दिल्‍ली को महिलाओं के लिए असुरक्षित माना जा रहा है। इससे पहले दिल्‍ली पर सुषमा स्‍वराज का राज रहा। निरंतर महिलाएं दिल्‍ली की सत्‍ता संभालें हुए हैं, मगर फिर भी दिल्‍ली सुरक्षित नहीं महिलाओं के लिए।

देश की सबसे बड़ी पार्टी को चलाने वाली सोनिया गांधी  दिल्‍ली में दस जनपथ पर रहती हैं। वहीं, सेक्‍सी शब्‍द को सुंदरता की संज्ञा देने वाली महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा  भी तो दिल्‍ली में बसती हैं। गैंग रेप मामले ने जैसे ही तुल पकड़ा तो सेक्‍सी शब्‍द की सुंदरता से तुलना करने वाली ममता शर्मा ने बलात्‍कारियों नपुंसक बना देना चाहिए ताकि वे अपने जीवन के हर दिन पर पछताएं, वाला बयान देकर अपनी जिम्‍मेदारी से पल्‍लू झाड़ लिया।

मुम्‍बई की ठुमके लगाने वाली जय बच्‍चन, ''संजय निरुपम के एक अदाकारा के संदर्भ में दिए बयान को मद्देनजर रखते हुए'' सांसद में गैंगरेप मामले को लेकर रो पड़ती हैं, मगर दिल्‍ली में बैठी हुई महिलाओं में हिम्‍मत नहीं कि वो पीड़िता के सामने जाकर उसका हाल चाल पूछ पाएं। शीला दीक्षित बयान देती हैं कि उनमें हिम्‍मत नहीं कि वो पीड़िता से मिल सकें, सवाल तो यह है कि अगर अस्‍पताल में पड़ी लड़की की जगह उनकी अपनी बेटी होती तो, क्‍या वो फिर भी उक्‍त बयान देती।

दिल्‍ली को चंडीगढ़ से सीख लेनी होगी। चंडीगढ़ पुलिस ने गैंग रेप एवं सार्वजनिक स्‍थलों पर होने वाली छेड़खानी को रोकने के लिए विशेष मुहिम चलाई है। चंडीगढ़ पुलिस ने कुछ महिला पुलिस कर्मचारियों को कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियों का रूप दे दिया एवं उनको उन जगहों पर भेजा, जहां से सर्वाधिक लड़कियां अपने कॉलेजों की तरफ जाती हैं। मनचलों को पता नहीं होता कि छात्राओं सी लगने वाली लड़कियां पुलिस कर्मचारी हैं, जैसे ही मनचले अपना मन बहलाने के लिए अपने शरारती हाथों को आगे बढ़ाते हैं, पीछे कैमरे में कैच कर रहे अन्‍य पुरुष पुलिस कर्मचारी मनचलों को दबोच लेते हैं।

जब ऐसे शरारती तत्‍वों को हम सार्वजनिक स्‍थलों पर पकड़ेंगे एवं उनकी वहीं पर सार्वजनिक तौर पर इज्‍जत उतारेंगे तो कहीं न कहीं इससे समाज में सकारात्‍मक संकेत मिलेंगे। इससे पूर्व बठिंडा में तैनात एक पुलिस कर्मचारी सुबह सुबह बस स्‍टेंडों पर पहुंच जाता था, वो देखता लड़के वहां किस तरह से लड़कियों के साथ व्‍यवहार करते हैं, बस संदिग्‍ध युवाओं की घटनास्‍थल पर धुलाई कर देता। उसके नाम का डर पूरे शहर में फैल गया। दुनिया किसी बात से डरे न डरे, लेकिन डर के आगे भूत भी नाचते हैं।

डर पैदा करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, नहीं तो पुलिस लाठीचार्ज, पानी की बौछारें एवं गैसी गोले लोगों के बढ़ते आक्रोश को कभी नहीं रोक पाएंगे। आक्रोश का दमन हमेशा असफल सिद्ध होता है। विश्‍व प्रसिद्ध लेखिका तस्‍लीम नसरीन  लिखती हैं, भारतीय महिला सदियों से जुल्‍म को सहती आ रही है। अंत वो गुस्‍से हुई एवं सड़कों पर उतरी। मुम्‍बई से एक फिल्‍मी अदाकार डेजी ईरानी कहती हैं, बलात्‍कारियों को मारो नहीं, नपुंसक बनाकर छोड़ दो।

'दबंग 2' से हुआ 'कैपरी सिनेमा' का पुन:उदय

-: वाईआरएन सर्विस :-
 
जहां पूरा विश्‍व 21 दिसम्‍बर 2012 को खत्‍म होने वाला था, वहीं राख़ हो चुके कैपरी सिनेमा हाल का दबंग 2 से 21 दिसम्‍बर को फिर उदय हुआ। कराची का सबसे सिंगल स्‍क्रीन लोकप्रिय कैपरी सिनेमा 21 सितम्‍बर को कुछ शरारती तत्‍वों द्वारा जला दिया गया था। इसके अलावा सात अन्‍य सिनेमाओं को भी निशाना बनाया गया था, जिसमें से पांच सिनेमा हाल कराची के थे, जबकि अन्‍य तीन पेशावर के।

सिने प्रेमियों की जरूरत को देखते हुए इस सिनेमा हाल को फिर से पुन:जीवित करने का फैसला किया गया। पहले उम्‍मीद थी कि यह सिनेमा सात दिसम्‍बर को शुरू हो जाएगा, और दर्शक खिलाड़ी 786 देख पाएंगे। मगर ऐसा हो न सका, अंत यह सिनेमा 21 दिसम्‍बर से पहले फिर बनकर तैयार हो गया, और इस की फिर शुरूआत सलमान ख़ान की बहुत चर्चित फिल्‍म दबंग 2 से की गई।

इस फिल्‍म को देखने के लिए दर्शकों की बेहद भीड़ सिनेमा हाल के बाहर देखी गई। पूरी सुरक्षा व्‍यवस्‍था के बीच सिनेमा हाल का पुन:संचालन किया गया है। इस सिनेमा हाल के मालिक ने पाकिस्‍तान समाचार पत्र द डान से बातचीत करते हुए कहा, उनको पूरी उम्‍मीद है कि दबंग 2 सप्‍ताह भर हाऊसफुल बिजनस देगी।

उधर, सिने प्रेमियों में भी खुशी की लहर है कि आख़िर तीन महीनों बाद ही सही, उनका प्रिय सिनेमा कैपरी फिर से शुरू तो हुआ।

बॉलीवुड रिपोर्ट बनाम बॉक्‍स ऑफिस 2012

इंडिया में दो चीजें बेहद पापुलर हैं एक क्रिकेट और दूसरा मूवीज। दोनों को देखने के लिए भारतीय दर्शक उतावले रहते हैं। सलमान ख़ान की दबंग 2 के साथ बॉलीवुड 2012 के बही ख़ाते को बंद करने जा रहा है। साल 2012 में रिलीज हुई फिल्‍मों में सलमान ख़ान की 'एक था टाइगर' बॉलीवुड में सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्‍मों में शुमार है एवं पहले दिन बॉक्‍स ऑफिस 32 करोड़ रुपए एकत्र करने का रिकॉर्ड भी इसी के नाम दर्ज हुआ, लेकिन पूरे साल भर की एकत्र राशि करने में अक्षय कुमार सबसे आगे रहे क्‍यूंकि अक्षय कुमार ने इस साल फिल्‍म निर्माताओं को चार सौ करोड़ से भी अधिक रुपयों का कलेक्‍शन करके दिया।

अक्षय कुमार, सलमान ख़ान के अलावा इस साल बॉक्‍स ऑफिस पर गंभीर दिखने वाले अजय देवगन ने भी काफी धमाल मचाई। अजय देवगन की बोल बच्‍चन ने जहां 100 करोड़ के क्‍लब में एंट्री मारी, वहीं सन ऑफ सरदार सौ करोड़ से कुछ कदम पीछे ठहर गई, लेकिन फिर भी यह फिल्‍म भारतीय सर्वाधिक कलेक्‍शन करने वाली फिल्‍मों की टॉप टेन सीरिज में है।

इस साल रिलीज हुई शाहरुख़ ख़ान की जब तक है जान ने बॉक्‍स ऑफिस पर सौ करोड़ से अधिक कलेक्‍शन की, लेकिन उतना जादू न दिखा सकी, जितने की इस फिल्‍म से उम्‍मीद थी। कुछ ऐसा ही हश्र हुआ, आमिर ख़ान की तलाश का भी। पिछले साल रॉकस्‍टार बनकर बॉक्‍स ऑफिस पर धूम मचाने देने वाले रणबीर कपूर ने बर्फी के जरिए जहां सिने खिड़की पर अच्‍छी कलेक्‍शन की, वहीं समीक्षकों से भी काफी वाहवाही लूटी। कुछ ऐसा ही हुआ, ऋतिक रोशन के साथ, जो इस साल फिल्‍म अग्‍निपथ में नजर आए। सिने खिड़की पर दर्शक भी मिले, और समीक्षकों ने भी खूब सराहा।

इस साल कुछ ऐसी फिल्‍में भी रिलीज हुई, जिन्‍होंने सौ करोड़ तो नहीं कमाया, लेकिन दर्शकों को वाह वाह कहने पर मजबूर कर दिया। इनमें सबसे ऊपर है, ओह माय गॉड, पान सिंह तोमर, कहानी, विक्‍की डॉनर,  इश्‍कजादे, इंग्‍लिश विंग्‍लिश आदि।

कुछ ऐसी फिल्‍में थी, जिन्‍होंने बॉक्‍स ऑफिस दर्शकों को खींचा, और धन कमाया। इन फिल्‍मों में तलाश, खिलाड़ी 786, कॉकटेल, गैंग्‍स वासेपुर, जन्‍नत, क्‍या सुपर कूल हैं हम, राज 3, स्‍टूडेंट ऑफ द ईयर, रिटर्न इविल 1920, जन्‍नत टू एवं तेरे नाम लव हो गया आदि शामिल हैं।

कुछ ऐसी फिल्‍में थी, जिन्‍होंने दर्शकों के अंदर जिज्ञासा तो जगाई, लेकिन दर्शकों संतुष्‍ट नहीं कर पाईं। इन फिल्‍मों में प्‍लेयर्स, तेज, विनोद एजेंट, लंडन पेरिस न्‍यूयार्क, ब्‍लड मनी, बिट्टू बॉस, डेंजर्स इशक, डिपार्टमेंट, तेरी मेरी कहानी, जिस्‍म 2, जोकर, हीरोइन, कमाल धमाल मालामाल, चक्रव्‍यूह, भूत रिटर्नस आदि शामिल हैं।

सौ करोड़ से अधिक कमाने वाली फिल्‍मों में सबसे ऊपर सलमान ख़ान की एक था टाइगर, दूसरे नम्‍बर अक्षय कुमार की राउड़ी राठौड़, तीसरे पर ऋतिक रोशन की अग्‍निपथ, चौथे पर अक्षय कुमार की हाऊस फुल 2, पांचवें नम्‍बर पर रणबीर कपूर की बर्फी, छठे नम्‍बर पर शाहरुख ख़ान की जब तक है जान, सातवें नम्‍बर पर आज देवगन की बोल बच्‍चन है।

कीनिया में खूनी हिंसा, 30 मरे

-: वाईआरएन सर्विस :-

कीनिया के दक्षिण पचिश्‍मी क्षेत्र स्‍थित ताना रीवर जिले में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प के दौरान 30 लोगों के मारे जाने की ख़बर मिली है। यह ख़ूनी हिंसक झड़प पोकोमो एवं उरमा समुदाय के बीच शुक्रवार सुबह उस समय हुई, जब पोकोमो समुदाय के किसानों ने चारवाहों के एक गांव पर हल्‍ला बोल दिया।

रेड क्रॉस के मुताबिक हमलावर अपने साथ भारी मात्रा में असलाह बगैरह लेकर गांव में पहुंचे थे, इस हमले में मरने वालों की संख्‍या 30 बताई जा रही है, जिसमें पांच महिलाएं एवं पांच बच्‍चे भी शामिल हैं।

उधर, रेड क्रास का कहना है कि पोकोमो एवं उरमा सुमदाय की आपसी झड़पों में अगस्‍त एवं सितंबर महीने में करीबन 110 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हिंसा को आगामी होने वाले आम चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। यह क्षेत्र कीनिया की राजधानी नेरोबी से करीबन 300 किलोमीटर दूर है।

चलेगी सलमान ख़ान की दबंगिरी

-: वाईआरएन सर्विस :-
इस साल की मेगा बजट एवं अंतिम फिल्‍म दबंग 2 बॉक्‍स ऑफिस पर इतिहास बनाने में सफल रहेगी। बॉलीवुड पर निगाह रखने वाले जी-ईटीसी बॉलीवुड ने अपने टि्वटर खाते पर लिखा है कि पूरे भारत में इस फिल्‍म के शाम के शो पूरी तरह पहले से हाऊसफुल हैं, इतना ही नहीं सलमान ख़ान की लोकप्रियता को देखते हुए सिनेमा मालिकों ने टिकटों रेटों में भी इजाफा किया है। एक था टाइगर के वक्‍त भी ऐसा ही हुआ था।

फिल्‍म दबंग टू की फिल्‍म समीक्षा को लेकर सभी फिल्‍म समीक्षक अलग अलग राय रखते हैं, लेकिन सलमान ख़ान की उपस्‍थिति होने के कारण फिल्‍म के हिट होने की गारंटी जरूर दे रहे हैं। हिन्‍दी वेबदुनिया के फिल्‍म समीक्षक समय ताम्रकर एक जगह लिखते हैं, 'दबंग 2 एक तरह से दबंग का ही रीमेक है। इसमें नया कुछ नहीं है। दरअसल यह फिल्म उन लोगों के लिए है जिन्हें चुलबुल की चुलबुली हरकतें पसंद हैं'। सोनाक्षी सिन्‍हा के बारे में लिखते हैं कि चुलबुल की बुलबुल सोनाक्षी सिन्हा बीच-बीच में कपड़े सुखाती रहती हैं, जिससे पता चलता रहता है कि वे भी फिल्म में हैं।

एनडीटीवी ख़बर पर प्रशांत सिसोदिया फिल्‍म की समीक्षा करते हुए लिखते हैं कि शुरू के करीब 15 मिनट की फिल्म देखकर लगा कि बॉलीवुड में भी एक रजनीकांत का जन्म हो गया है, यानी सलमान खान, जिन्हें दर्शक किसी भी रूप में पसंद करते हैं और उनके लिए तालियां और सीटियां बजाते हैं, पर यह कहना जरूरी है कि फिल्म सिर्फ और सिर्फ सलमान खान की है। कहानी में कोई नयापन नहीं है। गाने अच्छे हैं, लेकिन कहानी के साथ पिरोए नहीं गए। हालांकि जितने अच्छे डायलॉग 'दबंग' के थे, उतने 'दबंग-2' के नहीं हैं। हां, चुलबुल पांडे के किरदार को थोड़ा और तराशा गया है। चुलबुल और उनके पिता बने विनोद के साथ कुछ अच्छे सीन्स और खूबसूरत लम्हे दिखाए गए हैं।

हिन्‍दी डॉट इन डॉट कॉम पर फिल्‍म की समीक्षा करते हुए लिखते हैं कि कुछ छोटी बातों को छोड़ दें तो यह फिल्म काफी मनोरंजक है और पांडे जी मल्टीप्लेक्स में काफी सीटी बटोरेंगे। ‘दबंग 2’ आपको कहीं भी बोर नहीं होने देती, पर अपने पहले भाग के बराबर नहीं कही जा सकती।

युवा रॉक्‍स व्‍यू - एक था टाइगर में कुछ नहीं था, फिर भी दो सौ करोड़ से ऊपर की कमाई करने में सफल रही, यह तो फिर भी सलमान की कॉमेडी कम एक्‍शन फिल्‍म है, जिस पर पैसे खर्च करने के बाद दर्शक ज्‍यादा नहीं तो यह तो कहेंगे पैसा वसूल।

उधर, फिल्‍म निर्देशक कुणाल कोहली अपने टि्वटर खाते पर लिखते हैं कि हॉलीवुड हेज स्‍पाइडरमैन, सुपरमैन, बट बॉलीवुड हेज सलमान। कुल मिलाकर कहें तो सलमान ख़ान के साथ किस्‍मत है, और जिसके साथ किस्‍मत है, वो किसी को भी मात दे सकता है।

आर्मी चीफ साइकिल से पहुंचे ऑफिस

-: वाईआरएन सर्विस :-

पड़ोसी देश नेपाल से ख़बर आ रही है कि वहां के सेना प्रमुख पर्यावरण की समस्‍याओं को लेकर इतना गम्‍भीर हैं, कि वो अपने दफ्तर तक सरकारी वाहन में न आकर अपने साइकिल द्वारा पहुंच रहे हैं।

सूत्रों की माने तो आर्मी चीफ गौरव शमशेर राणा आज शुक्रवार को अपने घर से आर्मी मुख्‍यालय भद्रकाली तक अपने साइकिल पर आए, जबकि आर्मी चीफ हमेशा कड़ी सुरक्षा के बीच आर्मी वाहन में सवार होकर ऑफिस पहुंचते थे।

ऐसा करने वाले अकेले आर्मी चीफ ही नहीं थे, बल्‍कि अन्‍य सीनियर ऑफिसरों ने भी कुछ तरह ऑफिस में आगमन किया, हालांकि कुछ अधिकारियों ने सार्वजनिक वाहनों का सहारा लिया। सूत्रों का कहना है कि हर शुक्रवार सेना अधिकारी कुछ इस तरह ऑफिस पहुंचेंगे।

द हिमालियन टाइम्‍स से बातचीत करते हुए आर्मी प्रवक्‍ता सुरेश शर्मा ने कहा कि आर्मी की ओर से इस मुहिम को पर्यावरण बचाओ अभियान के तहत शुरू किया गया है एवं अगर दूसरी तरफ देखा जाए तो इससे कहीं न कहीं सेहत अच्‍छी रहती है एवं पैसे की बचत होती है। इस दौरान जन संपर्क भी बढ़ता है, रास्‍ते में आते हुए हम को हमारे शुभ चिंतकों से मिलना भी हो जाता है। उम्‍मीद है कि आर्मी द्वारा शुरू की गई इस मुहिम से नेपाल वासी प्रभावित होंगे, और यह मुहिम एक बड़ा रूख ले सकती है।

बेतुके गायक से 'गंगनम स्‍टाइल'

दक्षिण कोरियाई रेपर फीजि का 'गंगनम स्‍टाइल' वीडियो एक अरब व्‍यूवर्स के आंकड़े को छूने वाला है, जो 15 जुलाई 2012 को यूट्यूब पर रिलीज किया गया था। विश्‍व भर में 'गंगनम स्‍टाइल' से प्रसिद्ध हो चुके फीजि का असली नाम पार्क जिय संग है, उनका जन्‍म 31 दिसम्‍बर 1977 को गंगनम जिले में हुआ था, उनके पिता पार्क वॉन हो, डी आई कॉर्पोरेशन के कार्यकारी अध्यक्ष थे।

'गंगनम स्‍टाइल' से प्रसिद्ध हुए फीजि दक्षिण कोरियाई लोगों के लिए कम मुश्‍किलें खड़ी करने वाले नहीं रहे, उनको उनके टीचर तक पसंद नहीं करते थे, वीकिपीडिया के अनुसार उनके टीचर द्वारा सियोल ब्रॉडक्रास्‍टिंग को दिए एक साक्षात्‍कार में कहा, वो गंगनम स्‍टाइफ फेम फीजि को पसंद नहीं करते थे, वो क्‍लास रूम में अश्‍लील चुटकले सुनाकर बच्‍चों को प्रभावित करता था।

1996 में फीजि को बिजनस संबंधी पढ़ाई के लिए बॉस्‍टन यूनिवर्सिटी भेजा गया, लेकिन बहुत जल्‍द उसका पढ़ाई से मन ऊब गया, और वो अपनी ट्यूशन फीस को म्‍यूजिक संसाधनों को खरीदने में खर्च करने लगा। उसने ब्रेकली कॉलेज ऑफ म्‍यूजिक में दाखिल लिया, लेकिन बहुत जल्‍द गायक बनने की लालसा उस को फिर से दक्षिण कोरिया की तरफ खींच लाई।

जनवरी 2001 में फीजि ने अपनी पहली एलबम फीजि चो रिलीज की, लेकिन दक्षिण कोरिया सरकार ने इस एलबम के लिए फीजि को जुर्माना तक ठोक दिया। इसके बाद 2002 में सा 2 रिलीज की, जिसका दक्षिण कोरिया के लोगों ने विरोध कर दिया, अंत इस अलबम की खुली बिक्री पर बैन लगा दिया गया, यह कहते हुए कि इस को कम उम्र के बच्‍चों को न बेचा जाए। सितम्‍बर 2002 में आई उनकी तीसरी 3 फीजि के लिए उनको सम्‍मानित किया गया, इस एलबम के गीत चैम्‍पियन को बेहद सफलता मिली।

2003 के बाद दक्षिण कोरियाई सरकार के नियम के तहत फीजि को फौज के अंदर देश हित में सेवा करने के लिए चयनित किया गया। तीन साल बाद नौकरी के दौरान फीजि की चौथी एल्‍बम रिलीज हुई सा जिब, जिसको बेहद प्रसिद्धी मिली। इस सफलता के बाद फीजि ने नौकरी पर ध्‍यान देना कम करते हुए अपने संगीतक प्रोग्रामों की तरफ ध्‍यान देना ज्‍यादा कर दिया, जो कानूनी तौर पर वहां के प्रशासकों की नजर में गलत था। उनको कोर्ट में पेश होना पड़ा एवं इसके बाद उसने 2009 में फौज की नौकरी से छुटकारा पाया, लेकिन पैसों की तंगी के चलते वो अपनी कोई नई एलबम रिलीज कर न सका, तब उसकी पत्‍नि ने उसको अपने एक दोस्‍त की कंपनी में काम करने की सलाह दी। फीजि की पांचवी एलबम 2010 में रिलीज हुई, लेकिन इस पर अश्‍लीलता के चलते दक्षिण कोरिया के मंत्रालय द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया था।

इसके बाद 2012 में फीजि की छठी एलबम रिलीज हुई 'फीजि सिक्‍स'। इसमें शामिल गंगनम स्‍टाइल गीत को जुलाई में यूट्यूब पर डाला गया, और अगस्‍त तक आते आते यह वीडियो यूट्यूब के सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए नम्‍बर पर आ गई। अब इस वीडियो को देखने वालों का आंकड़ा एक अरब को पार करने वाला है।

गैंगनम स्‍टाइल से प्रसिद्ध हुए फीजि को दक्षिण कोरियाई लोग बेतुका गायक कहकर भी पुकारते हैं। फीजि को 2001 में नशा रखने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया था, और इस दौरान उनके दादा की मौत हो गई थी, जिनकी अंतेष्‍टि के वक्‍त फीजि नहीं पहुंच सके थे, आज भी उसको इस बात का अफसोस है।

पाक : फेयर ट्रायल बिल 2012 को मंजूरी

-: वाईआरएन सर्विस :-
 
पाकिस्‍तानी राष्ट्रीय विधानसभा ने गुरूवार को विवादित फेयर ट्रायल बिल 2012 को मंजूरी दे दी है। इस बिल को सदन में कानूनी मंत्री फारूक नायक, ने पीएमएल एन एवं एमक्‍यूएम के द्वारा किए संशोधनों के समावेश के बाद पेश किया।

जहां इस बिल को आतंकवाद के खिलाफ एक सकारात्‍मक कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसको व्‍यक्‍तिगत निजता के ख़तरे से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

यह बिल सुरक्षा एजेंसियों को लोगों के फोन कॉल्‍स और अन्य निजी संचार यंत्रों को टेप करने की अनुमति देता है। इस से सुरक्षा एजेंसियां संदिग्‍ध लोगों के फोन कॉल्‍स एवं अन्‍य संपर्क साधनों पर निगरानी रखकर आतंकवादियों तक पहुंच सकती है, लेकिन वहीं इससे निजता भंग होने का ख़तरा भी है।

इस मौके पर प्रधान मंत्री राजा परवेज अशराफ ने कहा, इस बिल के पास होने से आतंकवादियों को संदेश जाएगा कि पाकिस्‍तान उनके खिलाफ एकजुट हो चुका है। इस बिल के पास होने से आम लोगों को आतंकवाद का शिकार होने से बचाया जा सकता है।

नरेंद्र मोदी को मिला 'जन समर्थन'

-: वाईआरएन सर्विस :-

तीन बार बतौर मुख्‍यमंत्री अपनी जिम्‍मेदारी निभा चुके नरेंद्र मोदी पर गुजरात की जनता ने एक बार फिर विश्‍वास जताते हुए अपना फैसला सुना दिया।

भले चुनाव नतीजों में पूरा गुजरात भाजपा के नारे की तरह एकमत गुजरात नजर न आया हो, लेकिन नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा 115 सीटों पर जीतकर सत्‍ता में लौट रही है।

भाजपा से अलग हुए केशुभाई पटेल की अगुवाई वाली गुजरात परिवर्तन पार्टी चुनावों में दो सीटें जीतकर अपना खाता खोलने में सफल रही। केशुभाई की अगुवाई में भाजपा दो बार सत्‍ता में आई थी, लेकिन चली नहीं, उसके बाद ही नरेंद्र मोदी को भाजपा ने कामन सौंपी थी।

उधर, सत्‍ता की राह देख रही कांग्रेस पार्टी को 61 सीटों पर विजय मिली, जो कांग्रेसी नेताओं के अनुमान के हिसाब से बिल्‍कुल ठीक है, मगर इन चुनावों में कांग्रेस के लिए बेहद बुरी बात यह है कि जिन कंधों पर वो चुनाव लड़ रही थी, वो कंधे कमजोर निकले, विपक्ष नेता अर्जुन मोढ़वाडिया एवं कांग्रेस प्रमुख शक्‍ति सिंह गोहिल।

भाजपा को सौराष्‍ट्र कच्‍छ, दक्षिण गुजरात एवं मध्‍य गुजरात से बेहद सफलता मिली, लेकिन नरेंद्र मोदी के गृह क्षेत्र उत्‍तर गुजरात से नरेंद्र मोदी की भाजपा केवल 27 में से केवल 13 सीटें निकाल पाई। इस क्षेत्र में नरेंद्र मोदी को प्रफुल्‍ल पटेल, जयनारायण व्‍यास एवं फकीरभाई वाघेला जैसे मंत्रियों की सीटें गंवानी पड़ी।

असली 'द व्‍हाइट टाइगर' नरेंद्र मोदी

अपनी पहली बुक 'द व्‍हाइट टाइगर' से धूम मचाने देने वाले अरविंद अडिगा को अगर अपनी दूसरी बुक लिखने का मन करे तो वो नरेंद्र मोदी पर लिख सकते हैं, क्‍यूंकि नरेंद्र मोदी भी 'अरविंद अडिगा' की किताब 'द व्‍हाइट टाइगर' के किरदार की तरह काफी उतार चढ़ावों से गुजरते हुए गुजरात की सत्‍ता पर विराजमान हुए हैं। नरेंद्र मोदी का जन्‍म उत्‍तर गुजरात में पड़तते वडनगर कस्‍बे के एक मध्‍य वर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता चाय बेचने का कार्य करते थे, उनकी मां हीरा बा को आज भी विश्‍वास नहीं होता कि उनका पुत्र नरेंद्र आज देश की राजनीति में सबसे बड़े कद के नेताओं को मात दे रहा है।

नरेंद्र मोदी, चौथी बार गुजरात के मुख्‍यमंत्री बनने जा रहे हैं, जबकि 2012 के विधान सभा चुनावों में हुई उनकी इस  जीत को उनकी चुनावी हैट्रिक कहा जा रहा है। दरअसल केशुभाई पटेल के 2001 में त्‍याग पत्र देने के बाद तत्‍कालीन सत्‍ताधारी पार्टी भाजपा ने अपनी सरकार की बागडोर नरेंद्र मोदी को सौंप दी थी। शायद तब भाजपा को भी अंदाजा न था कि नरेंद्र मोदी इतना लम्‍बा राजनीति की पिच पर खेल पाएंगे, क्‍यूंकि गुजरात की राजनीति में इतना लम्‍बा तब तक किसी भी मुख्‍यमंत्री ने नहीं खेला था।

1960 से लेकर 2001 तक गुजरात के अंदर लगभग 5 बार तो राष्‍ट्रपति शासन लागू हुआ। गुजरात के अंदर 1960 के बाद सबसे पहले कांग्रेस पार्टी सत्‍ता में आई, तो जीवराज मेहता को मुख्‍यमंत्री बनाया गया। 1960 से 1971 तक सत्‍ता में रही कांग्रेस पार्टी को तीन मुख्‍यमंत्री क्रमश: जीवराज मेहता, बलवंत राय मेहता, हतेंद्रभाई देसाई बनाने पड़े। 1971 में पहली बार गुजरात के अंदर राष्‍ट्रपति शासन लागू हुआ।

भाजपा ने गुजरात में पहली बार सत्‍ता में उस वक्‍त कदम रखा, जब 1995 के दौरान केशुभाई की अगुवाई वाली भाजपा ने चुनावों में विजय अर्जित की, लेकिन केशुभाई की अगुवाई वाली सरकार 221 दिन चली, इसके बाद इस सरकार का नेतृत्‍व सुरेश मेहता के हाथों में आया, जो भी 365 दिन पूरे न कर सके, और राष्‍ट्रपति शासन गुजरात में फिर लागू हो गया।

1998, भाजपा केशुभाई की अगुवाई में एक बार गुजरात के सिंहासन पर बैठी, मगर 2001 में केशुभाई पटेल द्वारा त्‍याग पत्र दिए जाने के बाद सत्‍ता नरेंद्र मोदी के हाथ में आई, जो आज तक उनके हाथों में है। नरेंद्र मोदी गुजरात के पहले ऐसे मुख्‍यमंत्री हैं, जो तीन बार लगातार चुनाव जीतकर सत्‍ता में लौटे हैं, और उनके शासन के बाद गुजरात के अंदर पिछले 11-12 सालों में एक बार भी राष्‍ट्रपति शासन लागू करने की नौबत नहीं आई।

गुजरात को मिली एनएसजी क्षेत्रीय हब की मंजूरी

-: वाईआरएन सर्विस :-

गुजरात में एनएसजी क्षेत्रीय हब स्‍थापना करने के लिए केंद्र से मंजूरी मिल गई है। गुजरात सरकार इसकी स्‍थापना के लिए जगह देख रही है। गांधीनगर एवं अहमदाबाद के बाहरी इलाकों में इसके स्‍थापित होने की उम्‍मीद की जा रही है।
 
गौरतलब है कि गत 12 दिसम्‍बर को गृह राज्‍य मंत्री श्री आरपीएन सिंह ने राज्‍यसभा में पूछे गए एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि गुजरात सरकार से अनुरोध प्राप्‍त होने पर, गृह मंत्रालय ने गुजरात में राष्‍ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के क्षेत्रीय हब की स्‍थापना करने के लिए अपने ‘सिद्धांत रूप में’ अनुमोदन की सूचना गुजरात सरकार को दे दी है, बशर्ते राज्‍य सरकार एनसीजी द्वारा उपयुक्‍त पाए गए स्‍थान पर नि:शुल्‍क जमीन उपलबध कराए।

एक अंग्रेजी समाचार पत्र के अनुसार मंत्री सिंह ने हब में कमांडों समूहों की संख्‍या राष्‍ट्रीय सुरक्षा के हित में प्रकट करते हुए कहा कि गुजरात सरकार हब के लिए गांधीनगर के नजदीक 20 से 30 एकड़ जगह देने के लिए योजना बना रही है, हालांकि कुछ अन्‍य गतिविधियों के लिए अहमदाबार के बाहरी इलाके में भूमि लेने संबंधी भी विचार किया जा रहा है।

पत्र सूचना कार्यालय की वेबसाइट के अनुसार सरकार ने मानेसर, हैदराबाद, कोलकाता, चेन्‍नई और मुम्‍बई में राष्‍ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के बेस/हबों की स्‍‍थापना पहले ही कर दी है और उसे चालू भी कर दिया है। इन हबों/‍बेस में कमांडों समूहों की संख्‍या/नफरी राष्‍ट्रीय सुरक्षा के हित में प्रकट नहीं की जा सकती।

मौत के दूतों ने छीने दो बूंद जिन्‍दगी के

-: वाईआरएन सर्विस :-

पोलियो विरोधी मुहिम को चलाने वाले वर्करों पर हो रहे निरंतर हमलों के बाद डब्‍ल्‍यूएचओ ने पाकिस्‍तान में बंद करने की घोषणा कर दी है। गौरतलब है कि पिछले दो तीन दिनों से निरंतर बंदूकधारी पाकिस्‍तान में अलग अलग स्‍थानों पर पोलियो विरोधी मुहिम चलाने वाले वर्करों को निशाना बना रहे हैं। इन हमलों में अभी तक दर्जन भर से ऊपर लोगों की जानें चल गई।

डब्‍ल्‍यूएचओ ने उस समय इस मुहिम को रोकने का मन बनाया, जब खैबर के तीन अलग अलग स्‍थानों पर हुए हमलों में दो लोगों जान जाने एवं कई के घायल होने की सूचना मिली। इससे पूर्व बंदूकधारियों ने पोलियो मुहिम से जुड़ी पांच महिला वर्करों को उस समय निशाना बनाया था, जब वो अपने कार्य में व्‍यस्‍त थीं।

उधर, तारीखे तालिबान ने इन हमलों की जिम्‍मेदारी लेते हुए इस मुहिम को बंद करवाने की बात कही। पाकिस्‍तान उन देशों में शामिल है, जहां पर पोलियो की बीमारी निरंतर अपने पैर पसार रही है।

स्‍पेशल छब्‍बीस के प्रमोशन का नया फंडा

-: वाईआरएन सर्विस :-

कुछ दिनों पहले आप ने कुछ अख़बारों में पढ़ा होगा कि एक एमएलए के घर पर फेक सीबीआई रेड, दरअसल यह समाचार नहीं बल्‍कि प्रमोशन का नया फंडा था।

इस नए फंडे को ईजाद करने वाले अक्षय कुमार हैं। जी हां, अक्षय कुमार ने अपनी अगली फिल्‍म 'स्‍पेशल छब्‍बीस' के प्रमोशन के लिए स्‍पेशल फंडा निकाला है। इस फंडे के कारण 'स्‍पेशल छब्‍बीस' को प्रमोशन मिल रहा है, जिसे ए वेडनेस डे फेम नीरज पांडे निर्देशित कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, अक्षय कुमार की अगली फिल्‍म स्‍पेशल छब्‍बीस का प्रोमो आपको दबंग टू फिल्‍म के साथ मुफ्त देखने को मिल सकता है, क्‍यूंकि फिल्‍म यूनिट इसको इस फिल्‍म के साथ रिलीज करने का मन बना रही है।

इस फिल्‍म में अक्षय कुमार के साथ जिम्‍मी शेरगिल, मनोज वाजपेयी और अनुपम खेर मुख्य भूमिका में नज़र आएंगे।

'इलेक्‍शन क्‍वीन' बनेगी द.कोरिया की प्रथम महिला राष्‍ट्रपति

-: वाईआरएन सर्विस:- 
दक्षिण कोरिया में राष्‍ट्रपति के चुनाव संपन्‍न होने के बाद मतगणना शुरू हो चुकी है एवं इलेक्शन वॉचडॉग ने कहा कि सत्‍ताधारी पार्टी की उम्‍मीदवार पार्क ज्‍यून हाय इन चुनावों में भारी मतों के साथ जीत दर्ज करते हुए देश की पहली महिला राष्‍ट्रपति होने का सम्‍मान हासिल कर लेंगी।

दक्षिण कोरिया में इलेक्‍शन क्‍वीन के नाम से प्रसिद्ध पार्क ज्‍यून हाय, ग्रांड नेशनल पार्टी की चेयरपर्सन 2004 से 2006 एवं 2011 से 2012 तक रही, जिसका नाम बदलकर अब सियनरी पार्टी कर दिया गया है। पार्क ज्‍यून हाय, दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्‍ट्रपति पार्क चुंग ही की बेटी हैं, जिनको उनके मुख्‍य इंटेलीजेंस चीफ ने 1979 में मार दिया था।

राष्‍ट्रीय चुनाव कमिश्‍न ने जानकारी देते हुए कहा कि पार्क विपक्ष डेमोक्रेटिक युनाइटेड पार्टी के उम्‍मीदवार मूनन जी इन को हराते हुए देश की पहली महिला राष्‍ट्रपति बनेगी। रात्रि 11 बजे तक हुए 78 फीसद मतदान गणना में पार्क पूरी तरह मजबूत थी, मून के मुकाबले। देश के बड़े चैनलों के एग्‍जिट पोल पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि पार्क को जीत मिलेगी।

जीत का पूर्ण विश्‍वास मिलने के बाद उनकी पार्टी ने अपने समर्थकों को तहेदिल से शुक्रिया अदा किया।

इंस्‍टाग्राम ने यूजर्स को दिलाया भरोसा

-: वाईआरएन सर्विस :-
मोबाइल फोटो शेयरिंग वेबसाइट इंस्‍टाग्राम ने यूजर्स की फीडबैक के बाद थैंक्‍स, वी आर लिस्‍टनिंग, ब्‍लॉग पोस्‍ट के जरिए अपने यूजर्स को संतुष्‍ट करने के लिए कहा है, वो उनकी फोटो को किसी भी एड में इस्‍तेमाल नहीं करेंगे।

अब इंस्‍टाग्राम का मालिक फेसबुक है। उसने अपने नए नियम एवं शर्तें तैयारी की हैं। उसने इस्‍तेमाल कर्ताओं को भरोसा दिलाया कि उनकी फोटो के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। उनकी फोटो को किसी भी विज्ञापन आदि में इस्‍तेमाल नहीं किया जाएगा।

इंस्‍टाग्राम प्रबंधन का कहना है कि यूजर्स अपनी फोटो को पब्‍लिक एवं अपने फ्रेंड सर्कल में शेअर कर सकेंगे। उन्‍होंने कहा कि इसको और सरल बनाया जाएगा।

गौरतलब है कि इंस्‍टाग्राम को सितम्‍बर में फेसबुक ने खरीदा था। इसकी नियम एवं शर्तों में परिवर्तन कर दिया गया है, जो 17 जनवरी के बाद लागू हो जाएंगी।

कुत्‍ते की मौत से सदमे में आस्‍ट्रेलियन

-:वाईआरएन सर्विस:-

2011 में रिलीज हुई रेड डॉग फिल्‍म में मुख्‍य भूमिका निभाने वाले कुत्‍ते 'कोको' की कल पर्थ स्‍थित एक डॉग्‍स हाउस में दिल की बीमारी के कारण मौत हो गई। सूत्रों के अनुसार 'कोको' की उम्र सात साल के करीब थी। उनकी मौत की ख़बर ने उनके चाहने वालों को गहरा झटका दिया। उनकी मौत के बाद पर्थ डॉग्‍स रिफ्यूजी हाउस को करीबन 70 से अधिक लोगों ने अनुदान राशि भेजी, जिसकी कुल राशि 2000 डॉलर से ऊपर आंकी जा रही है।

रेड डॉग फिल्‍म बेहद प्रसिद्ध नॉवेल 'ल्‍यूस दे बर्निर्स' पर आधारित थी। इस फिल्‍म ने बॉक्‍स ऑफिस पर जोरदार सफलता आर्जित की थी। यह आस्‍ट्रेलियन फिल्‍मों में आठ नम्‍बर की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्‍मों में दर्ज हुई। इस फिल्‍म को देखने वाले कोको को फिल्‍म का नायक मानते थे। कोको की मौत से जहां सिने प्रेमियों को दुख हुआ, वहीं इस फिल्‍म के निर्माता नेलसन वाश बेहद दुखी हैं।

पश्‍िचमी आस्‍ट्रेलियाई कुत्‍ता शरणार्थी घर के प्रमुख करेन रहॉडेस का कहना है कि उनके पास काफी सारे कॉल आ रहे हैं, 70 से अधिक दान कॉल आ चुके हैं, लोग कोको की मौत से बेहद दुखी हैं। सब कोको को दुखी मन से श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

'विक्‍की डॉनर' की तो निकल पड़ी

-:वाईआरएन सर्विस:-

'विक्‍की डॉनर' से सिने खिड़की पर जोरदार एंट्री मारने वाले अयुशमन खुराना को यशराज बैनर्स ने अपनी अगली फिल्‍म के लिए साइन किया है। इस फिल्‍म में उनके साथ काम करती नजर आएंगी सोनम कपूर, जिनकी दो फिल्‍में अगले साल निरंतर रिलीज होने वाली हैं, जिनमें भाग मिल्‍खा भाग एवं रांझना शामिल हैं।

'विक्‍की डॉनर' की सफलता के बाद अयुशमन खुराना को जहां रोहन सिप्‍पी ने अपनी अगली फिल्‍म नौटंकी साला के लिए साइन किया था, वहीं फिर से जॉन अब्राहिम ने उनको अपने अगले प्रोजेक्‍ट 'हमारा बजाज' के लिए साइन किया। इस अयुशमन खुराना के साथ यमी गौतम भी नजर आएंगी।

अयुशमन के पास दो फिल्‍मों के अलावा अब यशराज बैनर्स की फिल्‍म भी आ चुकी है। इस फिल्‍म का निर्देशन कार्य मुझसे फ्रेंडशिप करोगे फेम नुपुर अस्‍थाना के हाथों में है, जबकि पटकथा इश्‍कजादे फेम हबीब फैजल लिख रहे हैं।

कौन थी शिल्‍पा सिंह से पहले, मिस यूनिवर्स की दौड़ में


सुंदरता के ताज पर फैसला आज 

-:वाईआरएन सर्विस:-
 
अमेरिका के लॉस वेगास के प्लैनेट हॉलीवुड रिसॉर्ट में आयोजित हो रही मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता-2012 का फैसला आज 17 सदस्‍यीय कमेटी सुनाएगी। इस सुंदरता के खिताब के लिए 89 देशों की सुंदरियां भाग ले रही हैं, इनमें एक भारत की शिल्‍पा सिंह भी हैं, जिनको मिस यूनिवर्स इंडिया उर्वशी रौटेला की जगह, उस समय इस प्रतियोगिता के लिए चुना गया, जब उर्वशी की उम्र को लेकर विवाद हो गया था। शिल्‍पा सिंह आई एम शी मिस इंडिया 2012 की पहली रनर अप थीं।
आज से पचास साल पूर्व शुरू हुए मिस यूनिवर्स मुकाबले में इस ताज पर अब तक भारत दो बार कब्‍जा करने में सफल रहा है, पहली बार जब 1994 में भारत का नेतृत्‍व करने वाली सुष्‍मिता सेन ने इस पर अपना कब्‍जा किया था, और दूसरी बार आज से करीबन 12 साल पूर्व लारा दत्‍त इस सम्‍मान को भारत लेकर आई थीं।

अब सब की निगाहें शिल्‍पा सिंह पर टिकी हुई हैं, जो पेशे से इंजीनियर हैं, इंफोसिस टेक्‍नोलॉजी में कार्यरत हैं, और बिहार से तालुक रखती हैं। शिल्‍पा सिंह आईएमशी मिस इंडिया 2012 में उर्वशी से एक कदम पीछे रह गई थी, लेकिन बदकिस्‍मती से उम्र के विवाद ने उर्वशी को मिस यूनिवर्स का हिस्‍सा नहीं बनने दिया।

इस प्रतियोगिता में गेबन एवं लिथुनिया आदि जहां पहली बार हिस्‍सा ले रहा हैं, वहीं बुल्‍गारिया, इथियोपिया, नमीबिया एवं नॉर्वे इस प्रतियोगिता में वापिस लौटा है, जबकि मिश्र, कजाख़स्‍थान, पुर्तगाल, सलोविनिया, तुकर्स एवं यूएस वर्जिन आइलेंड ने इस प्रतियोगिता से दूरी बनाई। इस बार भारत समेत ऐसे आठ देश हैं, जिनको किसी न किसी कारण अपने पहले प्रतिभागी की जगह किसी और को देनी पड़ी।

'फेसबुक' से बड़ा 'मार्क का दिल'

-:वाईआरएन सर्विस:-

'फेसबुक' की खोज से दुनिया को एक मंच पर खींचकर लाने वाला 28 वर्षीय युवक मार्क जुकरबर्ग युवाओं के लिए ही नहीं बल्‍कि बिजनसमैनों के लिए प्रेरणा स्रोत बनकर उभर रहा है। मंगलवार को फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने सेन फ्रांसीसिको की एक संस्‍था को 500 मिलीयन डॉलर आर्थिक सहायता के लिए रूप में दान देने की घोषणा की। इस फंड का इस्‍तेमाल सेहत सेवाओं एवं शिक्षा के क्षेत्र में किया जाएगा।

मार्क जुकरबर्ग द्वारा दान किए 18 मिलियन फेसबुक शेयरों की कीमत मंगलवार को बंद होने के वक्‍त करीबन 498.8 मिलियन डॉलर आंकी गई। इन शेयरों को उपहार में प्राप्‍त करने वाली सिलीकॉन वैली कम्‍यूनिटी फाउंडेशन, एक नॉन प्रोफिट संगठन है, जो दानदाताओं द्वारा दिए गए दान से चलता है।

यह मार्क जुकरबर्ग का अब तक सबसे बड़ा दान है। इससे पहले मार्क जुकरबर्ग 2010 में 100 मिलियन डॉलर नेवॉर्क पब्‍िलक स्‍कूल को दान के रूप में दे चुके हैं। इसके बाद उन्‍होंने माइक्रो सॉफ्ट संस्‍थापक बिल गेट्स की अगुवाई वाली संस्‍था ज्‍वॉइन की।

रेप रेप रेप, अब ब्रेक

दिल्‍ली से केरल तक रेप की ख़बरें। भारतीय संस्‍कृति ऐसी तो नहीं। फिर क्‍यूं अपने घर में, देश की राजधानी में सेव नहीं गर्ल। लड़कियां कल का भविष्‍य हैं, कहकर कन्‍या भ्रूण हत्‍या पर तो रोक लगाने की हम सब जंग लड़ रहे हैं, लेकिन जिंदा लड़कियों को जिन्‍दा लाश में तब्‍दील करने के खिलाफ कब लड़ना शुरू करेंगे हम।

कभी दिल्‍ली की चलती बस में लड़की के साथ रेप होता है, तो कभी घर में उसके अपने ही उसके बदन के कपड़े तार तार कर देते हैं। कभी केरल से ख़बर आती है बाप ने अपनी बेटी से कई सालों तक किया रेप। रेप रेप रेप सुनकर तंग आ चुके हैं, अब ब्रेक लगना चाहिए।

गैंग रेप की घटना होने के बाद सारा कसूर पुलिस प्रशासन पर डाल देते हैं। हजारों मामलों की पैरवी कर रही पुलिस इस को भी एक मामला समझ कार्रवाई शुरू कर देती है। कई सालों बाद कोर्ट आरोपियों को कुछ साल की सजा सुना देती है, मगर रेप एक लड़की को कई सालों तक की सजा सुना देता है। उसके भीतर एक अनजाने से डर को ताउम्र भर के लिए भर देता है।

सिने जगत  से लेकर मीडिया पर कसनी होगी नकेल
हर तरफ सेक्‍स सेक्‍स, अश्‍लीलता अश्‍लीलता। जो दिमाग को पूरी तरह काम वासना से भर रही है। टीवी ऑन करो तो कंडोम की एड, अलग अहसास के संवादों से काम वासना को जागती है, रूपहले पर्दे पर अधनंगी अभिनेत्रियां, दो अर्थे संवाद, गूगल पर सबसे ज्‍यादा सन्नी लियोन को ढूंढ़ते हैं, समाचार पढ़ने पहुंचते हैं तो एडिटर च्‍वॉइस में भरी गंदी तस्वीरें देखने को मिलती हैं, किसी बुक स्‍टॉल पर पहुंचते हैं तो पत्रिका के कवरेज पेज पर सेक्‍स सर्वे की रिपोर्टें मिलती हैं। हर जगह आंखें सेक्‍स देखती हैं या पढ़ती हैं, ऐसे में दिमाग का संतुलन बनाए रखना, दिमाग पर काबू रखना बेहद मुश्किल होता है। हम अपने ही बुने हुए जाल में बुरी तरह फंसे जा रहे हैं, इस चक्रव्‍यूह को तोड़ना होगा, मीडिया से लेकर मनोरंजन की दुनिया को अपनी सोच बदलनी होगी।

खुलमखुल्‍ला प्‍यार घातक
प्‍यार बुरी चीज नहीं, लेकिन प्रेमियों के इजहार का तरीका बेहद घातक हो सकता है उनके लिए। इस्‍लाम में बाहर से आया एक पिता अपने बच्‍चे को बीच सड़क गले नहीं लगाता, क्‍यूंकि उनमें ऐसा माना जाता है कि ऐसे करने से उस बच्‍चे को ठेस लग सकती है, जिसके अब्‍बा नहीं हैं। आजकल पार्कों में, साइबर कैफों में, लड़के लड़कियां बेहूदा ढंग से बैठे हुए पाए जाते हैं, जो प्‍यार की परिभाषा नहीं है। इस तरह के खुलेपन से बचना होगा। इसको रोकना होगा। ऐसी चीजें देखने वालों के मानसिक असर डालती हैं, पानी और भावनाएं बहने का तरीका खोज लेती हैं, चाहे उसके परिणाम विपरीत हो या सकारात्‍मक।

सार्वजनिक सजा का बंदोबस्‍त
गैंग रेप जैसे मामलों में सार्वजनिक सजा का बंदोबस्‍त बेहद जरूरी है। जब तक गैंग रेप से आरोपों में ऐसा नहीं होगा तब तक इस पर अंकुश लगाना मुश्‍किल है। गैंग रेप में शामिल लोगों का परिवार अगर उनको बचाने के लिए बचाव में उतरता है तो समाज को उसका बहिष्‍कार करना चाहिए। जब तक हम इस के खिलाफ एकजुट नहीं होंगे, तब तक ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाना बेहद मुश्‍किल है। इस तरह की घटनाओं को केवल पुलिस रोक पाएगी, तो ऐसा हमारा सोचना बेहद गलत है।

स्‍कूलों में यौन शोषण संबंधी जागरूकता की जरूरत
कई सालों तक अपने ही किसी द्वारा शिकार बनाई जा रही लड़कियों एवं बच्‍चों को बचाने के लिए स्‍कूलों में यौन शोषण संबंधी जागरूकता फैलाना अति जरूरी है। अब हमको ऐसी जागरूकता फैलाने के प्रति कदम उठाने होंगे, इसको सेक्‍स शिक्षा कहकर अब हम नकार नहीं सकते। अब टेलीविजन से लेकर सिने घर, वेबसाइट पर सेक्‍स संबंधी बहुत सारा गलत प्रचार हो रहा है, ऐसे में बच्‍चों को सेक्‍स संबंधी सही शिक्षा की बेहद जरूरत है।

चुनाव संपन्‍न, मोदी को मिलेगा बहुमत

-: वाईआरएन सर्विस :- 
गुजरात विधान सभा चुनावों के नतीजे तो 20 दिसम्‍बर को आएंगे, लेकिन यह भविष्‍यवाणी तो एग्जिट पोल गुरू कर रहे हैं। विधान सभा चुनाव संपन्‍न होने के बाद सामने आए एग्‍जिट पोल में नरेंद्र मोदी को 120 से 130 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जबकि आम राजनीति में रुचि रखने वाले लोगों की भी यह राय है। मगर कुछेक लोगों का मानना है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा इस बार अनुमान से ज्‍यादा सीटें खींचने में पूरी तरह सफल रहेगी।

केशु बापा के अलग पार्टी बनाने से नरेंद्र मोदी को झटका लगने की संभावना से इंकार तो नहीं किया जा सकता, लेकिन इससे नरेंद्र मोदी को कम और कांग्रेस को ज्‍यादा झटका लगेगा। इस बार हुई रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग नरेंद्र मोदी की जीत का संकेत देती है। एग्‍जिट पोलों की मानें तो कांग्रेस का इस बार बुरा हश्र होने वाला है।

भारत में प्रसारित होने वाले अलग अलग न्‍यूज चैनलों ने अलग अलग अनुमान लगाएं हैं, मगर सभी न्‍यूज चैनलों ने नरेंद्र मोदी को बहुमत मिलने की बात कही है।

पंजाबियत के 'मान' को 'डी लिट' का सम्‍मान

-: वाईआरएन सर्विस :-

पंजाबियत के मान पंजाबी गायक एवं अभिनेता गुरदास मान को पटियाला स्‍थित पंजाबी यूनिवर्सिटी में गत शुक्रवार को आयोजित हुए 36वें वार्षिक दीक्षांत समारोह के दौरान पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटिल ने डॉक्टरेट ऑफ लिटरेचर (डी-लिट) की डिग्री सम्‍मानित किया।

इससे पहले 2010 में ब्रिटेन के वोल्वरहैम्टन विश्वविद्यालय ने पंजाबी गायक गुरदास मान को विश्व संगीत में डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया था। गुरदास मान के संगीत कैरियर की शुरूआत 1980 में जालंधर दूरदर्शन पर नववर्ष के कार्यक्रम में गाए 'दिल दा मामला है' गीत से हुई। इस गीत की सफलता ने उनको संगीत की दुनिया में उतरने के लिए मजबूर कर दिया।

उनका परिवार नहीं चाहता था कि वो संगीतक दुनिया में कदम रखें, लेकिन आज केवल उनका परिवार ही नहीं, पूरा पंजाब उन पर गर्व करता है, क्‍योंकि उन्‍होंने पंजाबी संगीत को देश विदेश में लोकप्रिय ही नहीं बनाया, बल्‍कि उन्‍होंने हमेशा साफ सुथरी गायकी को प्राथमिकता दी।

खिलाड़ी कुमार ने दी समकालीनों को मात

-: वाईआरएन सर्विस :-
'खिलाड़ी 786' भले ही बॉक्‍स ऑफिस पर 65 करोड़ रुपए कमाने में सफल हुई, मगर कुल मिलाकर 2012 अक्षय कुमार के लिए बेहद लक्‍की ईयर रहा है, क्‍यूंकि इस साल रिलीज हुई अक्षय कुमार की फिल्‍मों ने लगभग चार सौ करोड़ तक की कमाई की।

रविवार को अंधेरी स्‍पोर्ट्स कम्‍पलेक्‍स में आयोजित तीसरे बिग स्‍टार इंटरटेनमेंट अवार्ड 2012 समारोह में अक्षय कुमार ने तीन पुरस्‍कारों पर अपना कब्‍जा जमाया। इस समारोह के दौरान अक्षय कुमार बेस्‍ट एक्‍शन हीरो, बेस्‍ट फिल्‍म निर्माता एवं बेस्‍ट कामेडी एक्‍टर के लिए पुरस्कृत किया गया, क्रमश: रौउड़ी राठौड़, ओह माय गॉड एवं हाऊसफुल।

इस मौके पर अक्षय कुमार की लक्‍की चैम रही कैटरीना कैफ को रोमांटिक रोल एवं एक्‍शन रोल के लिए सम्‍मानित किया गया, जो उन्‍होंने क्रमश: जब तक है जान एवं एक था टाइगर में निभाए। इसके अलावा शाहरुख ख़ान एवं कैटरीना कैफ को बेस्‍ट कपल ऑन स्‍क्रीन पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया।

केरल की छवि पर ब्‍लैक डॉट्स

-: वाईआरएन सर्विस :-

चलती बस में हुए गैंग रेप की घटना ने जहां दिल्‍ली पुलिस प्रशासन पर एक बार फिर से सवालिया निशान लगाएं हैं, वहीं केरल में लगातार सामने आ रही बलात्‍कार की घटनाओं ने केरल की छवि को धूमिल कर दिया है।

चौदह वर्षीय एक लड़की ने अपने भाई एवं उसके दोस्‍त पर बलात्‍कार करने का आरोप लगाया है। पुलिस इस मामले में दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया है। पीड़िता के अनुसार वो पिछले दो सालों से निरंतर उसके साथ जबरी शारीरिक संबंध बना रहे थे।

यह मामला उस समय सामने आया जबकि पुलिस ने पीड़िता को एक होटल में देर रात कुछ लोगों के साथ पकड़ा था एवं पुलिस पूछताछ की। पुलिस अधिकारियों का कहना है, लड़की को कर्नाटका के अलग अलग स्‍थानों पर रखकर उसके साथ रेप किया गया है। 

केरल में इस तरह की घटनाएं निरंतर सामने आ रही हैं। कुछ हफ्ते पहले इरनाकुलुम के पारावूर में 17 वर्षीय लड़की ने अपने पिता एवं अन्‍य दर्जन भर लोगों पर जबरदस्‍ती करने का आरोप लगाया था। लड़की के अनुसार वो उसके साथ कई महीनों से इस तरह कर रहे थे।

इस तरह कुछ दिन पूर्व एक अधेड़ उम्र के पिता द्वारा अपनी छह वर्षीय बच्‍ची के साथ यौन शोषण करने का मामला सामने आया था जबकि कन्‍नूर जिले के धर्मधाम नामक जगह पर एक 13 वर्षीय लड़की ने अपने पिता, भाई एवं अंकल पर कई महीनों तक रेप करने का आरोप लगाया था।

इस तरह की घटनाएं कहीं न कहीं केरल की कुदरती सुंदरता की छवि पर ब्‍लैक डॉट्स का काम कर रही हैं।

जोश में नजर आए 'नरेंद्र मोदी'

-: वाईआरएन सर्विस :-

गुजरात विधान सभा चुनावों में तीसरी बार जीत का परचम लहराने के लिए संघर्षरत गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी आज दूसरे चरण के मतदान दौर में अपना मत देने के बाद 'जोश' में नजर आए। नरेंद्र मोदी ने आज सुबह करीबन पौने दस बजे राणिप स्‍थित एक स्‍कूल में स्‍थापित इलेक्‍शन बूथ पर अपनी वोट डाली।

वोट करने के बाद नरेंद्र मोदी पूरे जोश ए खरोश में नजर आए। उनके चेहरे पर जोश देखने लायक था। वो बूथ से अपनी गाड़ी तक विक्‍ट्री चिन्‍ह दिखाते हुए आए। उन्‍होंने कहा, 'संतोष है कि गुजरात के में चुनाव शांति पूर्ण संपन्‍न हो रहे हैं, एवं लोग अपनी जिम्‍मेदारी समझते हुए इलेक्‍शन बूथों पर पहुंचकर, अपने मत अधिकार का इस्‍तेमाल कर रहे हैं'।

पूरे आत्‍मविश्‍वास के साथ नरेंद्र मोदी ने कहा कि भाजपा फिर से सत्‍ता सम्‍हालेगी, क्‍यूंकि भाजपा ने जो विकास की गाथा गुजरात में लिखी है, वो भाजपा को फिर से विजय बनाने में अहम रोल अदा करेगी। गौरतलब है कि आज नरेंद्र मोदी समेत 820 उम्‍मीदवारों की किस्‍मत ईवीएम मशीनों में बंद होने वाली है। अभी तक करीबन 60 फीसदी मतदान हो चुका है। नरेंद्र मोदी मणिनगर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जिनका मुकाबला निलंबित आईपीएस अफसर संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट से है, जिसको कांग्रेस ने टिकट दिया है। इस सीट पर कांग्रेस को जीजीपी का समर्थन मिला हुआ है।

एक कुल्‍हाड़ी वार ने ली दस बच्‍चियों की जान

-: वाईआरएन सर्विस :-

सोमवार को उस समय पूर्वी अफगानिस्‍तान में एक कुल्‍हाड़ी के वार ने दस बच्‍चियों को मौत के मुंह में धकेल दिया, जब लकड़ियां एकत्र करने निकली बच्‍चियों में से एक ने कुल्‍हाड़ी द्वारा एक लकड़ी को काटने के लिए वार किया, और बदकिस्‍मती से कुल्‍हाडी का वार जमीं में बिछी एक बारूदी सुरंग से टकरा गया। सूत्रों के मुताबिक ये घटना नांगरहार प्रांत के चापेरहार जिले के दावलात्जी गाँव के पास हुई।

पुलिस अधिकारी इस धमाके के पीछे के कारणों को ढूंढ़ रहे हैं, जबकि कुछ स्‍थानीय लोगों का मानना है कि यह बम्‍ब धमाका जमीन में बिछी बारूदी सुरंग के कारण हुआ है। गौरतलब है कि अफगानिस्‍तान में कई सालों से चल रहे गृह युद्ध के कारण आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बारूदी सुरंगें मौजूद हैं।

इस बम्‍ब धमाके में मरने वाली लड़कियों की उम्र मात्र 9 से 13 साल के बीच बताई जा रही है। एक इंग्‍लिश अख़बार के मुताबिक जहां इस हादसे में दस बच्‍चियों की जान गई, वहीं दो की हालत नाजुक बनी हुई है, जिसको नजदीकी अस्‍पतालल में दाखिल करवाया गया है।

योशिहिका का इस्‍तीफा, एलडीपी की सत्‍ता वापसी

-: वाईआरएन सर्विस :-

पूर्व प्रधान मंत्री शिंजो अबे की अगुवाई पार्टी लिबेरल डेमोक्रेटिक पार्टी ने रविवार को हुए निचले सदन के चुनावों में जोरदार वापसी करते हुए सत्‍ताधारी पार्टी के चार खाने चित कर दिए। एलडीपी एवं उनकी सहयोग पार्टी न्‍यू कोमिटो को नीचले सदन में दो तिहाई बहुमत मिल गया।

डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान के प्रमुख एवं मौजूदा प्रधान मंत्री योशिहिको नोडा अपनी पार्टी की शर्मनाक हार से बेहद हताश हैं। उन्‍होंने हार का जिम्‍मा लेते हुए पार्टी प्रमुख के पद से अपना इस्‍तीफा देने की घोषणा नतीजे आने के बाद आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में की।

480 सदस्‍यों के नीचले सदन में एलडीपी ने 294 सीटों पर जबकि उनकी सहयोगी पार्टी कोमिटो ने 31 सीटों पर जीत दर्ज कर दो तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है। इससे उनको रि वोटिंग करवाने का अधिकार मिल गया, अगर ऊपरी सदन अगर किसी बिल को रिजेक्‍ट करता है। एलडीपी एवं न्‍यू कोमिटो की ऊपरी सदन में बहुमत हासिल नहीं।

इस जीत के बाद अबे ने एनएचके से बातचीत करते हुए कहा कि एलडीपी एवं न्‍यू कोमिटो पहले ही संयुक्‍त सरकार बनाने का फैसला कर चुके हैं और बहुत जल्‍द नीतियों पर चर्चा की जाएगी। उन्‍होंने कहा कि पार्टी की अगली कोशिश रहेगी कि ऊपरी हाऊस में हर बिल को लागू करवाने के लिए दूसरी पार्टियों का भी सहयोग हासिल कर सकें।

आए चुनाव नतीजों में सत्‍ताधारी पार्टी को केवल 57 सीटें मिली हैं, जबकि पूर्व टोक्‍यो गर्वरनर की पार्टी जापान रेस्‍टोरेशन को 54 सीटों पर विजय हासिल हुई। वहीं यॉशिमी वटनेबल की यूअर पार्टी ने 18 सीटों पर अपनी जीत दर्ज की। टोमोरो पार्टी ऑफ जापान एवं जापानी कम्‍यूनिस्‍ट पार्टी आठ आठ सीटों पर कब्‍जा जमाने में सफल रहीं एवं कुछ नई बनी पार्टियां एक एक सीट पर जीत दर्ज कर पाईं हैं एवं सोशियल डेमोक्रेटिक को दो सीटें प्राप्‍त हु्ई हैं।

हिलेरी की जगह आ सकते हैं जॉन कैरी!

-: वाईआरएन सर्विस :-
 
अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा अगले विदेश मंत्री के रूप में सेंट जॉन कैरी को नियुक्‍त करने का मन बना चुके हैं, जिसकी अधिकारिक घोषणा बहुत जल्‍द हो जाएगी। ऐसे में अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्‍लिंटन की जगह जॉन कैरी ले सकते हैं।

गौरतलब है कि अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन निर्जलीकरण की शिकार होने के बाद बेहोश होकर गिर पड़ी थी एवं उन्हें सिर में मामूली चोट आयी हैं। वह पिछले कुछ दिनों से पेट के संक्रमण से पीड़ित थीं। हिलेरी के बीमार पड़ने के ठीक बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उनके सहयोगी अधिकारी ने बताया था कि 65 वर्षीय हिलेरी पूरी तरह ठीक होने तक घर से ही काम करेंगी एवं डाक्टर लगातार उनकी निगरानी करते रहेंगे।

उधर, सूत्रों का कहना है कि जॉन कैरी अगले विदेश मंत्री बन सकते हैं, अगर अपना पद छोड़ने का मन बना चुकी हिलेरी क्‍लिंटन अधिकारक रूप पर इस पद से हटने की घोषणा करें। मैसाच्‍यूसेट्स से सीनेटर जॉन कैरी सीनेट फॉरेन रिलेशन्‍स कमेटी के चेयरमैन हैं, और डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उनको 2004 के राष्‍ट्रपति चुनावों के दौरान राष्‍ट्रपति पद के लिए नामोकित किया गया था, लेकिन वो राष्‍ट्रपति जॉर्ज डब्‍ल्‍यू बुश से हार गए थे।

11 जनवरी को भिड़ेंगे दो दिग्‍गज

-: वाईआरएन सर्विस :-
अगस्‍त, नवम्‍बर, दिसम्‍बर बॉलीवुड के लिए बेहद सुखद रहा है अन्‍य महीनों की बजाय। जनवरी की शुरूआत में फिल्‍म निर्माता मेगाबजट फिल्‍मों को रिलीज करने से डरते हैं, क्‍यूंकि जरवरी में रिलीज हुई ज्‍यादातर फिल्‍मों को निराशा ही मिली है। मगर इस बार जनवरी में छोटे बजट और बड़े बजट की दोनों फिल्‍में रिलीज होने जा रही हैं, जिनसे उम्‍मीद करना बेईमानी नहीं होगी, क्‍यूंकि इस बार जनवरी महीने में विशाल भारद्वाज, कमल हसन, अब्‍बास मस्‍तान, सुधीर मिश्रा जैसे दिग्‍गज अपनी फिल्‍मों को रिलीज कर रहे हैं।

जनवरी में बॉलीवुड 'टेबल नम्‍बर 21' और 'राजधानी एक्‍सप्रेस' से 4 जनवरी को खिड़की पर दस्‍तक देगा। 'टेबल नम्‍बर 21' में राजीव खंडेलवाल और परेश रावल हैं, जिनसे अच्‍छी फिल्‍म की उम्‍मीद की जा सकती है। वहीं 'राजधानी एक्‍सप्रेस' से खिड़की के प्‍लेटफार्म पर टेनिस स्‍टार लिएंडर पेस उतर रहे हैं, उनके साथ जिम्‍मी शेरगिल जैसा सितारा है।

जबकि 11 जनवरी को विशाल भारद्वाज की 'मटरू की बिजली का मंडोला' रिलीज हो रही है। विशाल को बॉलीवुड में लीक से हटकर फिल्‍में बनाने के लिए जाना जाता है। उनकी इस फिल्‍म में इमरान ख़ान, अनुष्‍का शर्मा एवं पंकज कपूर मुख्‍य भूमिका निभा रहे हैं। इस फिल्‍म का मुकाबला कमल हसन की विश्‍वस्‍वरूप से होगा, क्‍यूंकि कमल हसन ने इस फिल्‍म को रिलीज करने की तारीख़ 11 जनवरी घोषित की है। इस फिल्‍म के प्रोमो तो बहुत पहले रिलीज कर दिए गए थे, लेकिन इस की रिलीज डेट को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई थी। कमल हसन एक उम्‍दा अभिनेता हैं, और वो अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर की फिल्‍में बनाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी फिल्‍म मेगाबजट होती है, और विश्‍वस्‍वरूप भी कुछ इस तरह की है। इस हफ्ते बॉक्‍स ऑफिस पर दो दिग्‍गजों की टक्‍कर कहा जा रहा है।

18 जनवरी को सुधीर मिश्रा की इंकार रिलीज होगी, जिसमें अर्जुन रामपाल एवं चित्ररंगदा सिंह मुख्‍य भूमिका निभाते नजर आएंगे। सुधीर मिश्रा की यह फिल्‍म यौन उत्पीड़न पर आधारित है। फिल्‍म में सेक्‍स का मसाला एवं ठोस कहानी फिल्‍म की तरफ दर्शकों को खींचती है। जिसका ताजा उदाहरण विद्या बालन की द डर्टी पिक्‍चर फिल्‍म है।

जनवरी के अंत में 25 जनवरी को अब्‍बास मस्‍तान रेस 2 लेकर खिड़की पर दस्‍तक देंगे, जो पिछले साल इस महीने के पहले हफ्ते प्‍लेयर्स को लेकर आए थे, मगर प्‍लेयर्स खिड़की पर कोई खेल नहीं दिखा सके। अब्‍बास मस्‍तान की जनरवरी में रिलीज हुई फिल्‍मों में केवल खिलाड़ी हिट रही है। पहले अब्‍बास मस्‍तान रेस 2 को जनवरी के पहले हफ्ते रिलीज करने वाले थे, लेकिन बाद में सीधा महीने के अंतिम सप्‍ताह में जाना पसंद किया।

'दबंग' के आगे आौर पीछे कोई नहीं

-: वाईआरएन सर्विस :- 

2012 की मेगा बजट एवं अंतिम फिल्‍म 21 दिसम्‍बर को रिलीज हो रही है। इस फिल्‍म से बॉलीवुड को बहुत ज्‍यादा उम्‍मीदें हैं। पांच दिन बाद रिलीज होने वाली इस फिल्‍म को ओपनिंग तो बहुत जोरदार मिलने वाली है, लेकिन फिल्‍म में दम कितना है, इसका पता फिल्‍म के रिलीज होने के बाद लग पाएगा। अगर फिल्‍म पिछली 'दबंग' की तरह लोगों को पसंद आई तो सलमान ख़ान अपनी ब्‍लॉकबस्‍टर फिल्‍म 'एक था टाइगर' का रिकॉर्ड तोड़ते हुए नए रिकॉर्ड की रचना करेंगे, क्‍यूंकि फिल्‍म रिलीज होने के बाद फिल्‍म के पास कमाई करने के लिए क्रिसमिस डे, सर्दी की छुट्टियां एवं नए साल की पूर्व संध्‍या जैसे अवसर हैं।

और 'दबंग 2' से एक सप्‍ताह पूर्व एवं दो सप्‍ताह बाद कोई बड़ी फिल्‍म रिलीज नहीं हुई। ऐसे में सिने प्रेमी दबंग देखने के लिए बेताब हैं। ज्ञात रहे कि 2009 से 2012 तक सलमान ख़ान ने करीबन आठ फिल्‍में की, जिनमें से ज्‍यादातर फिल्‍में 100 करोड़ से ऊपर बॉक्‍स ऑफिस पर क्‍लेकशन करने में सफल रही। बॉडीगार्ड एवं एक था टाइगर ने तो 200 करोड़ से ऊपर की कमाई की, इन दोनों फिल्‍मों ने बॉक्‍स ऑफिस पर पहले दिन क्रमश 20 करोड़ एवं 25 करोड़ की क्‍लेकशन कर  नए रिकॉर्ड बनाए।

'एक था टाइगर' ने बॉक्‍स ऑफिस पर कमाई तो रिकॉर्ड तोड़ की, लेकिन दर्शकों को पूरी तरह निराश किया। फिल्‍म देखने के बाद दर्शकों ने खुद को ठगा हुआ पाया। इस फिल्‍म के अधिक से अधिक कमाई करने के पीछे दो अहम कारण रहे एक तो यशराज बैनर्स का प्रमोशन एवं दूसरा सलमान ख़ान पर मीडिया की मेहरबानी। 'बॉडीगार्ड' की सफलता के बाद दर्शकों को सलमान ख़ान की अगली फिल्‍म का इंतजार था, इस बेताबी को बढ़ाने में यशराज बैनर्स के प्रमोशन स्‍टाइल ने बहुत बड़ा योगदान अदा किया, और फिल्‍म पहले ही कुछ दिनों में सौ करोड़ रुपए से ऊपर कमाने में कामयाब रही।

नई 'जंजीर' का नया 'शेरख़ान'

-: वाईआरएन सर्विस :-

अमिताभ बच्‍चन के कैरियर को नया मोड़ देने वाली फिल्‍म 'जंजीर' का रीमेक बनने जा रहा है, जिसका निर्देशन अपूर्वा लाखिया शूटआऊट एट लोखंडवाला फेम कर रहे हैं।

इस फिल्‍म में प्राण वाला किरदार संजय दत्‍त कर रहे हैं, जिनको इस साल दर्शकों ने कांचा छीना एवं सरदार के रोल में देखा और पसंद किया। फिल्‍म जगत के सूत्रों को उम्‍मीद है कि पठान के किरदार में भी संजय दत्‍त बेहद प्रभाव छोड़ेंगे।

रामशरण तेजा एवं प्रियंका चोपड़ा की मुख्‍य भूमिका वाली इस फिल्‍म में शेरख़ान के रोल के लिए बॉलीवुड के कई चेहरों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थी, लेकिन अंत में अपूर्वा लाखिया ने संजय दत्‍त को इस के लिए चुनना। संजय दत्‍त के साथ अपूर्वा लाखिया काम कर चुके हैं। इस फिल्म के 12 अप्रैल को रिलीज होने की पूरी पूरी संभावना है।

ज्ञात रहे कि अग्‍निपथ, डॉन आदि रीमेक फिल्‍मों में प्रियंका चोपड़ा अभिनय कर चुकी हैं, यह उनकी तीसरी रीमेक फिल्‍म होगी।

लिएंडर पेस की 'राजधानी एक्‍सप्रेस' 4 को पहुंचेगी खिड़की पर

-: वाईआरएन सर्विस :-

टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस की 'राजधानी एक्‍सप्रेस' चलने के लिए तैयार है। इसकी पहली झलक कल मुम्‍बई में देखने को मिली, लेकिन इस मौके पर लिएंडर पेस नहीं दिखाई पड़े। सूत्रों की मानने तो वह कोलकाता थे, और फ्लाइट लेट होने के कारण मुम्‍बई में आयोजित समारोह में नहीं पहुंच पाए।

'राजधानी एक्‍सप्रेस' से अपने अभिनय की शुरू करने वाले लिएंडर पेस की 'राजधानी एक्‍सप्रेस' अगले साल 4 जनवरी को रिलीज होने जा रही है। अशोक कोहली के निर्देशन में बनी 'राजधानी एक्सप्रेस' में जिमी शेरगिल, प्रियांशु चटर्जी एवं गुलशन ग्रोवर भी नजर आएंगे।

इस फिल्‍म में नजर आने वाली अभिनेत्री सयाली भगत ने मशहूर टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस की 'राजधानी एक्सप्रेस' में उनके अभिनय की प्रशंसा की है। सयाली ने फिल्म की पहली झलक के प्रदर्शन के मौके पर कहा कि लिएंडर पेस बहुत मेहनती इंसान हैं। मैंने उनके साथ जितने भी दृश्य फिल्माए हैं, उनके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की।

फिल्‍म में गनमैन का किरदार निभा रहे पेस का नाम केशव है। जो बंदूक पहुंचाने के लिए दिल्ली-मुंबई राजधानी में सवार होता है। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदलता और रोमांच, थ्रिलर एवं सस्पेंस के सहारे आगे बढ़ता है।

बंदूकधारी युवक ने ली 20 मासूमों समेत 28 की जान

मां को मारने के बाद स्‍कूल पहुंचा

-: वाईआरएन सर्विस :-

अमरीका के कनेक्टीकट राज्य में एक बंदूकधारी ने 28 लोगों को गोलियों से भुन डाला। इस हमले में 20 बच्‍चों समेत 28 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में बंदूकधारी की मां भी शामिल है। इस हमले में हमलावर भी घटनास्‍थल पर मृत पाया गया है। हमलावर की उम्र लगभग 20 साल बताई जा रही है। पुलिस का मानना है कि हमलावर का स्‍कूल से संबंध हो सकता है। ये हादसा न्यूटाउन के सैंडी हुक एलिमेन्टरी स्कूल में हुआ।

इस हमले को अब तक के इतिहास के सबसे घातक हमलों में गिना जा रहा है। इससे पहले साल 2007 में वर्जिनिया में हुए हमले में 32 लोग मारे गए थे। इस हादसे के बाद घबराए हुए अभिभावक सैंकड़ों की संख्‍या में घटनास्‍थल पर पहुंचे।

इस हादसे को अंजाम देने वाले बंदूकधारी युवक की पहचान एडम लांजा के रूप में हुई और उसने घटना के बाद खुद को गोली मारकर आत्‍महत्‍या कर ली। बंदूकधारी की मां स्‍कूल में कार्यरत थी, जिसके शव को पुलिस ने उनके घर से बरामद किया। मरने वालों में अधिक संख्‍या 5 से 10 साल के बच्‍चों की है।

इस हमले के पीछे क्‍या कारण है, अभी पूरी तरह स्‍पष्‍ट नहीं, शायद एडम मन ही मन किसी बात से क्षुब्‍ध था, उसने बदला लेने के लिए इस हमले को अंजाम दिया।

दुनिया का सबसे गंदा और साफ सुथर शहर

-: वाईआरएन सर्विस :-

भारत की व्‍यापारिक राजधानी मुंबई को दुनिया के सबसे गंदे शहरों की सूची में शामिल किया गया है। मुंबई को सबसे साफ सुथरी गलियों की रैंकिंग में सबसे निचले पायदान पर रखा गया है, जबकि सबसे साफ शहर का ख़िताब जापान की राजधानी टोक्‍यो को दिया गया है।

दुनियाभर के 40 प्रमुख पर्यटक स्थलों का सर्वे करने वाली संस्‍था ट्रिप एडवाइजर सिटीज सर्वे ने इसी तरह आराम से घूमने अनुकूल शहर की श्रेणी में भी मुंबई को सबसे निचले स्थान एवं ज्यूरिख को शीर्ष स्थान पर रखा है।

सर्वे में सबसे ज्यादा रुखे व्यवहार वाले स्थानीय लोगों, सर्वाधिक गंदी गलियों और खरीदारी के लिहाज से सर्वाधिक खराब माहौल वाले शहर की श्रेणी में मास्को को रखा गया है।

टोक्यो को विभिन्न श्रेणियों में शीर्ष स्थान मिला है। यहां की टैक्सी सेवा, दोस्ताना व्यवहार करने वाले टैक्सी ड्राइवर, सर्वाधिक बेहतरीन जन परिवहन प्रणाली, सबसे अधिक साफ सुथरी सड़कें और सुरक्षा के लिहाज से टोक्यो को सबसे अधिक पसंदीदा शहर का रूतबा दिया गया है।

ट्रिप एडवाइजर के संचार मामलों के निदेशक ब्रुक फ्रेंस्कि ने बताया कि खरीददारी के लिहाज से न्यूयार्क को खरीदारों का गढ़ कहा जाता है और सर्वे में भी इस श्रेणी में न्यूयार्क ने बाजी मारी है। इस सर्वे में 75 हजार लोगों को शामिल किया गया।

विद्या के हाथों पर सिद्धार्थ की मेहंदी

-: वाईआरएन सर्विस :-
बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन आज यूटीवी के प्रमुख सिद्धार्थ रॉय कपूर के साथ परिणय सूत्र में बंध गईं। बॉलीवुड के इस शादी समारोह में पंजाबी और तमिल परंपराओं का मेलजोल देखने को मिला।

34 साल की इस विद्या ने गत गुरुवार को अपने हाथों में सिद्धार्थ के नाम की मेहंदी रचाई थी। मेहंदी की रस्म जुहू के आलीशान होटल में सम्पन्न हुई, जहां नजदीकी रिश्तेदार और दोस्त ही शामिल हुए थे। शादी समारोह में बॉलीवुड की बहुत कम हस्‍तियों को बुलाया गया था।

कैरियर
केरल में जनमीं एवं मुम्‍बई में पली बढ़ी विद्या बालन ने अभिनय की दुनिया में कदम एक टीवी सीरियल 'हम पांच' से अपने कैरियर की शुरूआत की, मगर गत दिसम्‍बर में रिलीज हुई 'द डर्टी पिक्‍चर' ने विद्या बालन को हॉट अभिनेत्रियों में शुमार कर दिया। इसके बाद इसी साल रिलीज हुई 'कहानी' ने तो विद्या बालन के कैरियर को नया आयाम दिया।

गौरतलब है कि विद्या बालन ने अपने सात साल के कैरियर में बहुत कम फिल्‍में की हैं, लेकिन ज्‍यादातर फिल्‍में सफल हुई हैं। उनकी सफल फिल्‍मों में 'परिणीता' 'लगे रहो मुन्‍ना भाई' 'गुरू' 'हे बेबी' 'भूलभलैया' 'पा' 'इश्‍किया' 'नो वन क्‍लिड जैसिका' 'द डर्टी पिक्‍चर' 'कहानी' आदि शामिल हैं।


छोटी सी लव स्‍टोरी
विद्या बालन और सिद्धार्थ कपूर की लव स्‍टोरी 2011 में शुरू हुई, जब विद्या बालन यूटीवी मोशन की फिल्‍म 'नो वन क्‍लिड जैसिका' के लिए शूटिंग कर रही थी। विद्या बालन की यह पहली शादी है जबकि सिद्धार्थ तीसरी शादी कर रहे हैं। संयोग देखो, इस 'नो वन क्‍लिड जैसिका' में उनकी सहयोगी कलाकार रही रानी मुखर्जी भी अगले साल यशराज फिल्‍म्‍ज के प्रमुख आदित्‍या चोपड़ा के साथ शादी कर सकती हैं।

हैरत में बॉलीवुड
'द डर्टी पिक्‍चर' एवं 'कहानी' के बाद विद्या का कैरियर शिख़र पर पहुंच गया था, और ऐसे समय में विद्या ने शादी कर सब को हैरत में डाल दिया, विशेषकर उनको तो जो अपनी अगली फिल्‍मों के लिए विद्या को साइन करने की सोच रहे थे। इस समय विद्या बालन केवल इक्‍का दुक्‍का फिल्‍में कर रही हैं, जिनमें बालाजी टेलीफिल्‍म्‍ज की घनचक्‍कर शामिल है। करीना कपूर के बाद विद्या बालन दूसरी बॉलीवुड की बड़ी अदाकारा हैं, जो दुल्हन बनी हैं। आश्चर्य की बात यह है कि जिस तरह फिल्मों में विद्या की सादगी दिखाई देती है, कुछ ऐसी ही सादगी उनकी निजी जिंदगी में भी है।

नील नितिन बने डेविड

-: वाइआरएन सर्विस :-

'न्‍यू यार्क', 'सात खून माफ' एवं 'जेल' के बाद नील नितिन मुकेश शैतान फेम बेजॉय की अगली फिल्‍म 'डेविड' में नजर आएंगे। इस फिल्‍म को दो भाषाओं में रिलीज किया जाएगा, मगर नील नितिन केवल हिन्‍दी वर्जन में नजर आएंगे।

इस फिल्‍म का प्रोमो को 13 दिसम्‍बर 2012 को यू ट्यूब पर रिलीज किया गया है। इसमें नील नितिन एक दमदार रोल में नजर आ रहे हैं। फिल्म का प्रोमो प्रभाव डालता है। इस फिल्‍म में नील नीतिन एक गैंगस्‍टर की भूमिका निभाते नजर आएंगे।

पहली फरवरी को रिलीज होने वाली इस फिल्‍म से नील नीतिन के कैरियर को एक नई उड़ान मिल सकती है, अगर यह फिल्‍म बॉक्‍स ऑफिस पर सफल हो गई। नील नीतिन ने इस फिल्‍म का प्रोमोशन करना शुरू कर दिया है। उन्‍होंने अपने नए टि्वट में इस फिल्‍म के प्रोमो को सांझा किया है।




कुणाल खेमु के लिए शुभ होगा 2013!

-:वाईआरएन सर्विस:-

सफलता के लिए रुपहले पर्दे पर जद्दोजहद कर रहे कुणाल खेमु के लिए फरवरी 2013 अहम हो सकता है, क्‍यूंकि अगले साल उनकी एक 'गो गोआ गोन' नामक फिल्‍म रिलीज हो रही है। इस फिल्‍म में उनके साथ सैफ अली ख़ान काम करते हुए नजर आएंगे, जो बेहद दिलचस्‍प बात है, क्यूंकि कुणाल और सोहा अली ख़ान के अफेयर्स के चर्चे पूरे बॉलीवुड में हैं।

अपनी दूसरी मोहब्‍बत को परवान चढ़ा चुके 'सैफ अली ख़ान' शायद अब अपनी बहन का भी घर बसाकर दम लेंगे। वरना असफल सितारे पर कोई पैसे नहीं लगाता खासकर बॉलीवुड में। इसके अलावा सोहा अली ख़ान भी बीवी साहेब और गैंगस्‍टर जैसी सफल फिल्‍म के स्‍विकल में अभिनय करती नज़र आएंगी। कुल मिलाकर 2013 कुणाल खेमु के लिए शुभ साबित हो सकता है। बाकी तो राम ही राखे।

'मोदीनु माफिया राज' पुस्‍तक बाजार में

-:वाईआरएन सर्विस:-

गुजरात विधान सभा चुनाव 2012 का प्रथम दौर आज संपन्‍न हुआ जबकि दूसरे दौर के लिए मतदान 17 दिसम्‍बर को होने वाला है। इसी दौरान मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को जनता में बिगाड़ने के लिए कुछ व्‍यक्‍तियों ने 'मोदीनु माफिया राज' नामक पुस्‍तक को बाजार में धकेल दिया।

इसके कवरपेज पर घबराहट वाले नरेंद्र मोदी, और दूसरी तरफ इनसेट में उनकी कथित पत्‍नी यशोद्धाबेन मोदी की पिक्‍चर लगाई है। इसके नीचे रोष प्रदर्शनों की फोटो को मिक्‍स कर प्रकाशित किया गया है। इस किताब के अंतिम पेज पर उन भाजपा नेताओं की तस्‍वीरें हैं, जो भाजपा को छोड़कर चले गए। इस किताब में नरेंद्र मोदी की तुलना दाऊद अब्राहिम से की गई है, जिनके आईक्‍यू को लेकर भाजपा अध्‍यक्ष नितिन गड़करी मुश्किल में आ गए थे।

इस पुस्‍तक पर प्रकाशक के तौर पर गुजरात महासंघ, प्रमुख सवाई मार्ग, संस्‍कार सोसायटी के समीप, सुरेंद्रनगर गुजरात लिखा है, और यह किताब नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र मणिनगर में खूब धड़ल्‍ले से सप्‍लाई हो रही है।

गुजरात विस चुनाव का प्रथम चरण संपन्‍न, 68 फीसद मतदान

-:वाईआरएन सर्विस:-
 
गुरूवार सुबह आठ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक सौराष्‍ट्र, दक्षिण गुजरात और अहमदाबाद जिले की चार विधान सभा सीटों पर पहले दौर का मतदान संपन्‍न हुआ। पहले दौर के मतदान में 87 विधान सभा सीटों पर लगभग 68 फीसद मतदान हुआ।

राजनीतिक जानकारों की माने तो दक्षिण गुजरात की पांच एवं सौराष्‍ट्र की 48 सीटों पर गुजरात परिवर्तन पार्टी का प्रभुत्‍व है। इस पार्टी का गठन गुजरात के पूर्व मुख्‍यमंत्री केशुभार्इ पटेल द्वारा किया गया है, जो भाजपा से इस लिए अलग हो गए थे, क्‍यूंकि नरेंद्र मोदी का बढ़ा प्रभुत्‍व उनकी छवि को पीछे धकेल रहा था।

इस क्षेत्र के नतीजे यह तय करेंगे कि आख़िर किस की साख़ ज्‍यादा मजबूत है एक मुख्‍यमंत्री की या एक पूर्व मुख्‍यमंत्री की, जो एक बड़ी पार्टी को छोड़कर अपने दम पर चुनाव लड़ रहे हैं।

फिल्‍म समीक्षा 'तलाश' से 'खिलाड़ी 786' तक

-: वाईआरएन सविर्स :-

'तलाश' बड़े नामों के साथ बनाई गई एक साधारण फिल्‍म। आमिर ख़ान के साथ लोगों का ब्रांड पर विश्‍वास वाला रिश्‍ता हो सकता है, लेकिन 'तलाश' फिल्‍म निराश करती है। फिल्‍म की कहानी एक सड़क हादसे से शुरू होती है और खत्‍म भी एक सड़क हादसे के बाद। मगर इस दौरान फिल्‍म में बहुत साधारण सी कहानी है, सस्‍पेंस के नाम पर आपको वहां कुछ भी नहीं मिलेगा। अंत में आप कई सवालों के जवाब की तलाश में तलाश को अलविदा कहेंगे।

इस फिल्‍म को कहानी से जोड़कर देखने वालों के लिए इस फिल्‍म में निराशा के सिवाय कुछ नहीं। गम्‍भीर अभिनय तो आमिर बाख़ूबी कर लेते हैं। टूटे परिवार के रिश्‍तों को चलते चलते में रानी मुखर्जी से पहले भी रुपहले पर्दे पर जीवंत कर चुकी हैं। वेश्‍या के रूप में करीना को देखना कहीं भी सुकून नहीं देता। इससे बेहतर होता अगर कोंकणासेन को इस रोल के लिए चुना होता। फिल्‍म का सस्‍पेंस तो इंटरमेशन में तोड़ देते हैं। सीबीआई एवं अन्‍य मर्डर मिस्‍ट्री हल करने वाले सीरियल देख चुके लोगों के लिए तलाश में कुछ भी खास नहीं।

अंतिम हादसे से पूर्व करीना की एंट्री जबरदस्‍त है। अगर वहां आकर निर्देशक कहानी का सस्‍पेंस तोड़ते तो शायद फिल्‍म को देखने का कुछ मजा भी आता। अगर आप मुस्‍कराहटें गीत को सुनना चाहते हैं तो फिल्‍म शुरू होने से पूर्व पहुंचे, क्‍यूंकि नम्‍बरिंग के दौरान इस गीत को फिल्‍माया गया है।

अब बात करते हैं 'खिलाड़ी 786' की

अगर आप 'गोलमाल 3' 'वेलकम' 'दे दनादन' 'चुप चुपके से' 'ढोल' 'हाऊस फुल' जैसी हल्‍की फुल्‍की कामेडी फिल्‍मों को देखकर कहते हैं, चलो मनोरंजन तो बढ़िया हुआ, तो आपके लिए 'खिलाड़ी 786' एक अच्‍छी फिल्म हो सकती है। फिल्‍म की कहानी शादी टूटने से शुरू होती है, और शादी संपूर्ण कर खत्‍म होती है। इस फिल्‍म में डायलॉग आपको हंसाएंगे। फिल्‍म के डायलॉग छोटे हैं। दो अर्थी शब्‍दों का इस्‍तेमाल नहीं किया गया। अक्षय कुमार की कई फिल्‍मों की झलक आपको इसमें मिल सकती है, जैसे कि नमस्‍ते लंडन, वेलकम, सिंह इज किंग, तीस मार ख़ान आदि। हिमेश रेशमिया, अक्षय कुमार, मिथुन चक्रवर्ती, जोनी लीवर, असीन आदि के किरदार आपको सिने हाल से बाहर आने के बाद भी याद रहेंगे, उनके संवाद आपको हंसाएंगे।