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Showing posts from November, 2012

मच्‍छर की मौत लाइव रिपोर्टिंग

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होटल का दरवाजा पूरी तरह सुरक्षित हैं, क्‍यूंकि होटल प्रबंधन को पहले ही सीआईडी टीम के आने की सूचना मिल गई थी, और बताया जा रहा है कि पिछले 15 सालों में बेगिनत दरवाजे तोड़ चुके दया से होटल प्रबंधन पूरी तरह से अवगत है, क्‍यूंकि होटल में इस शो देखने वालों की संख्‍या बहुत है।

मच्‍छर की बॉडी को अभी अभी पोस्‍टमार्टम के लिए लैब में भेज दिया गया है। सी आई डी अपने काम में जुट चुकी हैं, उम्‍मीद है कि बहुत जल्‍द मच्‍छर की मौत के पीछे का रहस्‍य खुलकर हमारे सामने आएगा।

पुलिस अधिकारियों को एक वंछित मच्‍छर की तलाश थी, लेकिन वो यह मच्‍छर है या कोई दूसरा। इस मामले में भी तहकीकात चल रही है। ऐसे में कुछ भी कहना मुश्‍किल है। आसपास के क्षेत्र में काफी तनाव महसूस किया जा रहा है। यहां यह होटल है, ये एक पॉश इलाका है। इस जगह पर मच्‍छर की उपस्‍थिति सुरक्षा व्‍यवस्‍था पर काफी सारे सवाल खड़े रही है।

अभी अभी जुड़े हमारे दर्शकों को बता देना चाहते हैं कि आज सुबह एक होटल में मच्‍छर के मृत पाए जाने की ख़बर मिली थी। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मच्‍छर को पाकिस्‍तान स्‍थित आतंकवादी संगठनों द्वारा प्रशिक्षित करके भेजा …

बस! मुझे ट्रैफिक चाहिए

आज की ब्रेकिंग न्‍यूज क्‍या है ? सर अभी तक तो कोई नहीं, लेकिन उम्‍मीद है कि कोई दिल्‍ली से धमाका होगा। अगर न हुआ तो। फिर तो मुश्‍िकल है सर। बस! मुझे ट्रैफिक चाहिए। कुछ ऐसे ही संवाद होते हैं आज के बाजारू मीडिया संपादक के।

मजबूरी का नाम महात्‍मा गांधी हो या मनमोहन सिंह, कोई फर्क नहीं पड़ता। मजबूरी तो मजबूरी है। उसके सामानर्थी शब्‍द ढूंढ़ने से कुछ नहीं होने वाला। पापी पेट के लिए कुछ तो पाप करने पड़ते हैं। आज मीडिया हाऊसों की वेबसाइटों को अश्‍लील वेबसाइटों में तब्‍दील किया जा रहा है। अगर कोई ब्रेकिंग न्‍यूज नहीं तो क्‍या हुआ, तुम कुछ बनाकर डालो, अश्‍लील फोटो डालो, लिप लॉक की फोटो डालो। मुझे तो बस! मुझे ट्रैफिक चाहिए। इतना ही नहीं, मासिक पत्रिकाएं भी कहती हैं अब कुछ करो, बुक स्‍टॉलों पर ट्रैफिक चाहिए, वरना घर जाइए।

हर किसी को ट्रैफिक चाहिए। हर कोई ट्रैफिक के पीछे दौड़ रहा है। सड़कें ट्रैफिक से निजात पाना चाहती हैं, मगर ऐसा हो नहीं पा रहा। पैट्रोल के रेट बढ़ रहे हैं तो कंपनियां वाहनों के रेट गिराकर डीजल मॉडल उतार रही हैं। ट्रैफिक कम होने का नाम नहीं ले रहा, वहीं दूसरी तरफ नेता अभिनेता भी ट्र…

टुकड़ों की जिन्‍दगी ; रिटर्न टू इंडिया

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कई बार हमने अपने बहनों भाईयों और दोस्‍तों को बड़े उत्‍साह के साथ जीमैट या जीआरई, टीओएफईएल की तैयारी करते, अमेरिकी दूतावास के सामने लम्‍बी कतारें लगाए और छात्रवृत्‍ति पाने के लिए तमाम कोशिशें करते देखा है, उनका मकसद सिर्फ इतना होता है कि वे अमेरिकी सपने को जीना चाहते हैं। वे कोला कोला, मिक्‍की माऊस, हैरिसन फोर्ड और अवसरों के देश को उड़ जाना चाहते हैं ताकि अपने जीवन के साथ प्रयोग कर सकें, परंपराओं और लालफीताशाही की घरेलू जंजीरों को तोड़ सकें।

जानी मानी लेखिका एवं स्‍तंभकार शोभा नारायण ने अपनी किताब ''रिटर्न टू इंडिया'' में बड़ी बेबाकी से अमेरिकी सपने और उसे जीने की चाहत को उकेरा है। साथ ही साथ दो परंपराओं के बीच झूल रहे लोगों के द्वंद्व के बारे में भी बड़े सलीके से बताया और जताया है। उन्‍होंने प्‍यार, परिवार, पहचान एवं घर कहने लायक एक ठिकाने की तलाश की कहानी बड़े ही मर्मस्‍पर्शी ढंग से पिरोई है।

इन कहानियों के बीच अपनी यादों को ताजा करते हुए शोभा जाहिद खान जैसे अपने दोस्‍तों की कहानी भी सुनाती हैं, जो अपने अमेरिकीकरण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। कहानी के बहाव के दौरान यह…

'आम आदमी' की दस्‍तक, मीडिया को दस्‍त

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अन्‍ना हजारे के साथ लोकपाल बिल पारित करवाने के लिए संघर्षरत रहे अरविंद केजरीवाल ने जैसे 'आम आदमी' से राजनीति में दस्‍तक दी, तो मीडिया को दस्‍त लग गए। कल तक अरविंद केजरीवाल को जननेता बताने वाला मीडिया नकारात्‍मक उल्‍टियां करने लगा। उसको अरविंद केजरीवाल से दुर्गंध आने लगी। अब उसके लिए अरविंद केजरीवाल नकारात्‍मक ख़बर बन चुका है।

कल जब अरविंद केजरीवाल ने औपचारिक रूप में आम आदमी को जनता में उतारा तो, मीडिया का रवैया, अरविंद केजरीवाल के प्रति पहले सा न था, जो आज से साल पूर्व था। राजनीति में आने की घोषणा करने के बाद अरविंद ने कांग्रेस एवं भाजपा पर खुलकर हमला बोला। मीडिया ने उनके खुलासों को एटम बम्‍ब की तरह फोड़ा। मगर बाद में अटम बम्‍बों का असर उतना नहीं हुआ, जितना होना चाहिए था, और अरविंद केजरीवाल को मीडिया ने हिट एंड रन जैसी नीति के जन्मदाता बना दिया, जो धमाके करने के बाद भाग जाता है।

मुझे पिछले दिनों रिलीज हुई ओह माय गॉड तो शायद मीडिया के ज्‍यादातर लोगों ने देखी होगी, जिन्‍होंने नहीं देखी, वो फिर कभी जरूर देखें, उस में एक संवाद है, जो अक्षय कुमार बोलते हैं, जो इस फिल्‍म में भगवान …

पहले मां बनो, फिर बनो पत्‍नी

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टोटोपाडा के जंगल से बॉलीवुड तक | हम नया कुछ नहीं करते, हम पुराने को तरीकों फिर से दोहराते हैं, लेकिन ख़बरों में आने के बाद वो नया सा लगने लगता है चाहे वो योग या फिर लिव इन रिलेशन का कनेक्‍शन।

भारत भूटान सीमा पर एक टोटोपाडा नामक ऐसी जगह है, जहां आज भी शादी से पहले लड़की को गर्भवती होना पड़ता है। कहते हैं कि टोटो जनजाति समुदाय के लड़के को जो लड़की पसंद आती है, वो उसके साथ फरार होता है एवं लड़का लड़की एक साथ रहते हैं, कुछ महीनों बाद जब लड़की गर्भधारण कर लेती है तो लड़की को शादी के काबिल माना जाता है। भले ही हम हिन्‍दी फिल्‍मों में कुछ महिलाओं को त्रासदी झेलते देखते हैं, जब वो अपने प्रेमी से कहती हैं, जोकि फिल्‍म में विलेन है, लेकिन लड़की के लिए प्रेमी, मैं तुम्‍हारे बच्‍चे की मां बनने वाली हूं।
मगर बॉलीवुड की कहानी भी रुपहले पर्दे से बेहद अलग है, जहां बहुत सी अभिनेत्री हैं, जो टोटोपाडा की प्रथा को बॉलीवुड में स्‍थापित कर चुकी हैं। ख़बरों की मानें तो बॉलीवुड की सदाबाहर अभिनेत्री श्रीदेवी ने बोनी कपूर से उस समय शादी की थी, जब वह करीबन सात माह की गर्भवती थी।

परदेस से बॉलीवुड में प्रवेश करने…

थप्‍पड़ अच्‍छे हैं

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जोर से थप्‍पड़ मारने के बाद धमकी देते हुए मां कहती है, आवाज नहीं, आवाज नहीं, तो एक और पड़ेगा। जी हां, मां कुछ इस तरह धमकाती है। फिर देर बाद बच्‍चा पुराने हादसे पर मिट्टी डालते हुए मां के पास जाता है तो मां कहती है कि तुम ऐसा क्‍यूं करते हो कि मुझे मारना पड़े।

अब मां को कौन समझाए कि मां मैं अभी तो बहुत छोटा हूं या छोटी हूं, तुम कई बसंत देख चुकी हो। तुम भी इन थप्‍पड़ों को महसूस कर चुकी हो। मेरे पर तो तुम इतिहास दोहरा रही हो या कहूं कि एक विरासत को आगे बढ़ा रही हो। यह थप्‍पड़ मुझे जो आपने दिए हैं, वो कल मैं भी अपनी संतान को रसीद करूंगा या करूंगी, और मुझे पता भी न होगा, कब मेरा हाथ आपकी नकल करते हुए उसकी गाल पर छप जाएगा।
जब मम्‍मी मारती है तो पड़ोस में खड़े पापा या कोई अन्‍य व्‍यक्‍ति कहता है, क्‍यूं मारती हो बच्‍चे को, बच्‍चे तो जिद्द करते ही हैं, तुम्‍हें समझने की जरूरत है, मगर मां को नसीहत देने वाला, कुछ समय बाद इस नसीहत की धज्‍जियां उड़ा रहा होता है।

मां बाप के थप्‍पड़ का दर्द नहीं होता, क्‍यूंकि उनके पास प्‍यार की महरम है। हम बच्‍चे भी तो कितनी जिद्द करते हैं, ऐसे में क्षुब्‍ध होक…

आम आदमी का तोड़

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यह तो बहुत ही न इंसाफी है। ब्रांड हम ने बनाया, और कब्‍जा केजरीवाल एंड पार्टी करके बैठ गई। आम आदमी की बात कर रहा हूं, जिस पर केजरीवाल एंड पार्टी अपना कब्‍जा करने जा रहे हैं। गुजरात में चुनाव सिर पर हैं, कांग्रेस अपने चुनाव प्रचार में चीख चीख कर कह रही थी, कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ।

मगर आम आदमी तो केजरीवाल एंड पार्टी निकली, जिसकी कांग्रेस के साथ कहां बनती है, सार्वजनिक रूप में, अंदर की बात नहीं कह रहा। अटकलें हैं कि कांग्रेस बहुत शीघ्र अपने प्रचार स्‍लोगन को बदलेगी। मगर आम आदमी का तोड़ क्‍या है?

वैसे क्रिएटिव लोगों के पास दिमाग बहुत होता है, और नेताओं के पास पैसा। यह दोनों मिलकर कोई तोड़ निकालेंगे, कि आखिर आम आदमी को दूसरे किस नाम से पुकार जाए। वैसे आज से कुछ साल पूर्व रिलीज हुई लव आजकल में एक नाम सुनने को मिला था, मैंगो पीप्‍पल।

अगर आम आदमी मैंगो पीप्‍पल बन भी जाता है तो क्‍या फर्क पड़ता है। पिछले दिनों एक टीवी चैनल का नाम बदल गया था। हुआ क्‍या, हर जगह एक ही बात लिखी मिली, सिर्फ नाम बदला है। वैसा ही सरकार का रवैया रहने वाला है आम आदमी के प्रति।
आम आदमी की बात सब करते हैं, लेकिन …

मैं हूं खादी वाला गुंडा

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मैं हूं खादी वाला गुंडा।  यह किसी फिल्‍म का नाम नहीं बल्‍कि भाजपा नेता का बयान है। जी हां, भाजपा नेता एवं मध्‍य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा व जिले के प्रभारी मंत्री अनूप मिश्रा ने ऐसा बयान देकर मध्‍यप्रदेश की राजनीति में खलबली पैदा कर दी है। वो खुद को खादी वाला गुंडा कह रहे हैं। उनका मानना है कि भिंड जिले के कुछ गुंडों को सुधारने के लिए खादी वाला गुंडा बनना बेहद जरूरी है। शायद वैसे ही जैसे आज से कुछ साल पहले एक फिल्‍म में धर्मेंद्र बना था पुलिस वाला गुंडा।

सवाल यह उठता है कि रावण को मारने के लिए रावण बनना जरूरी है। आज के युग में श्रीराम बनकर श्री हनुमान के द्वारा रावण की लंका को राख नहीं किया जा सकता। जब अन्‍ना हजारे की भ्रष्‍टाचार के खिलाफ मुहिम जोरों पर थी तो तब ज्‍यादातर युवाओं ने एक टोपी पहनी थी मैं हूं अन्‍ना, भले ही बाद में कुछ युवाओं ने उससे उतारते हुए एक नई टोपी पहन ली, जिस पर लिखा था मैं हूं आम आदमी।

जिस तरह का तर्क देते हुए अनूप मिश्रा कहते हैं कि मैं हूं खादी वाला गुंडा। कहीं अब युवा बुराई को खत्‍म करने के लिए इस तरह के फिकरे वाली टोपी पहनाना न शुरू कर दें। भले ही हम गांधी को…

कसाब के बदले सरबजीत को फांसी, नहीं चाहती इमरान खान की पार्टी

पाकिस्‍तान तारीके इंसाफ पीटीआई के अधिकारिक प्रवक्‍ता शाफकत महमूद ने उस ख़बर का खंडन किया है, जिसमें कहा गया था कि कसाब को फांसी देने के बाद पाकिस्‍तान में पीटीआई ने भारतीय कैदी सरबजीत सिंह को फांसी पर लटकाने की मांग की है।

इस ख़बर पर कड़ा रुख अपनाते हुए शाफकत महमूद ने ट्विटर पर कहा कि नेता नसीमुल्लाह खान कौन हैं, वो नहीं जानते, उन्‍होंने कहा कि वो पार्टी के अधिकारिक प्रवक्‍ता हैं, समाचार पत्रों को उनसे पूछ पड़ताल करनी चाहिए थी।

उन्‍होंने कहा है कि कानूनी मामलों के हस्‍तक्षेप करना राजनीतिक पार्टियों का काम नहीं, कानूनी मामलों के लिए अदालतें हैं। उन्‍होंने यह भी कहा है कि नसीमुल्लाह खान का नाम दूसरी बार पार्टी की छवि को धूमिल करने के लिए इस्‍तेमाल किया गया है।

गौरतलब है कि पाकिस्‍तान तारीके इंसाफ क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान ख़ान की पार्टी है।

बाबा साहेब या बाला साहेब की स्‍मारक

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बाला साहेब को अभी रुखस्‍त हुए कुछ दिन भी नहीं हुए कि उनकी स्‍मारक को लेकर विवाद शुरू हो गया। शिव सेना चाहती है कि बाला साहेब का स्‍मारक शिवाजी पार्क में बने, जबकि मनसे चाहती है कि शिवाजी पार्क को छोड़ कर बाला साहेब की स्‍मारक इंदू मिल की जगह पर बने। मगर दिलचस्‍प बात यह है कि मनसे ने जिस जगह बाला साहेब की स्‍मारक बनाने की बात कही है, उस जगह पर बाबा साहेब की स्‍मारक बनाने के लिए दलित संगठन संघर्ष कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, आरपीआई अध्यक्ष रामदास आठवले ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि 5 दिसंबर तक इंदू मिल की 12.5 एकड़ जमीन बाबासाहब आंबेडकर के स्मारक के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई तो पार्टी 6 दिसंबर को मिल जमीन पर कब्जा कर लेगी।

सूत्रों की माने तो लगभग 3500 करोड़ की कीमत वाली इस जगह को लेकर राज्‍य सरकार पहले ही मुश्‍किल में है, ऐसे में अगर राज ठाकरे शिवाजी पार्क में बाला साहेब की स्‍मारक बनने के रास्‍ते में रोड़ा बने तो राज्‍य सरकार के लिए और मुश्‍किल हो सकती है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में दलित-आदिवासी कुल जनसंख्या का लगभग 20 प्रतिशत है। ऐसे में राज्‍य सरकार कोई भी कदम एक दम से नहीं उठा…

बनेगा ओह! माय गॉड का स्‍किवल

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मराठी सिनेमा में प्रवेश करने के बाद होगा पंजाबी, बंगाली एवं दक्षिण की तरफ रुख   अभिनेता, निर्माता अक्षय कुमार एवं परेश रावल की अभिनीत फिल्‍म ओह! माय गॉड का स्‍िकवल बनेगा। 43वां अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍मोत्‍सव होस्‍ट कर रहे अक्षय कुमार अपनी बिजनस पार्टनर अश्‍िवनी जर्डी के साथ एक मराठी फिल्‍म कोल्‍हापुर 72 माइल्‍स एक प्रवास का निर्माण भी कर रहे हैं। इस फिल्‍म के बाद हो सकता है अक्षय कुमार एवं अश्‍विनी यार्डी की संयुक्‍त फिल्‍म निर्माण कंपनी गेजिंग गोट ओह! माय गॉड का निर्माण करे। सूत्रों की माने तो अक्षय कुमार का मानना है कि और भी काफी मुद्दे हैं, जिस पर फिल्‍म निर्माण किया जा सकता है।

अब देखना यह है कि ओह! माय गॉड का स्‍किवल दर्शकों को कितना पसंद आता है, वैसे भी बॉलीवुड में स्‍िकवल बनाने की होड़ सी लगी हुई है। रेस टू, दबंग टू, रॉक ऑन टू, वन्‍स टाइम अपन एट मुम्‍बई टू, हाऊस फुल टू ब्‍लॉ ब्‍लॉ।

सुनने में तो यह भी आया है कि अक्षय कुमार बहुत जल्‍द पंजाबी, बंगाली एवं दक्षिण की तरफ रूख करने वाले हैं। ऐसा लगता है कि अक्षय कुमार एवं अश्‍िवनी यार्डी बॉलीवुड से बाहर निकलकर कुछ ऐसा करने चाहते हैं जो ब…

चलो चला गया कसाब, अफजल की विदाई मुश्‍किल

बाल ठाकरे की न्‍यूज को साइड पर रख चुका होगा मीडिया, न्‍यूज एंकर ब्रेड बटर खाकर घर से निकल चुके होंगे, जो जल्‍द पहुंचेगा, उसको मिलेगा एंकरिंग का अवसर ! कुछ एंकरों को तो आज का दिन ब्रेड बटर से काम चलाना पड़ेगा । कुछ चर्चा कार तो सुबह से ही तैयारी कर रहे होंगे चलो आज फिर टीवी स्‍क्रीन पर जाने का मौका मिलेगा, भले की कसाब की फांसी से सरकार को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन पूर्ण रूप से नहीं, क्‍यूंकि अफजल गुरू आजतक जिन्‍दा है, जिसको फांसी देना, एक फसाद को जन्‍म देना भी कुछ लोग मान रहे हैं, क्‍यूंकि वो कश्‍मीर से तालुक रखते हैं, और हमारी सरकार नहीं चाहती कि कश्‍मीर में पहले से हालात बने, देश में अलगाववादी नेताओं की कमी नहीं।  माइक्रो  संपादकीय न्‍यूज डेस्‍क । 26/11 मुंबई अटैक के गुनहगार पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब को फांसी दे दी गई है। कसाब को मुंबई की ऑर्थर रोड जेल से पुणे की यरवडा जेल में शिफ्ट कर बुधवार सुबह 7.30 बजे फांसी पर लटकाया गया। फांसी के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। महाराष्ट्र के गृह मंत्री आर.आर. पाटिल ने इसकी पुष्टि कर दी है। वह थोड़ी ही देर में प्रेस कॉन…

करीना को शादी के बाद एक नए सवाल ने घेरा

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किड नॉट नाऊ - करीना ने कहा                  भले ही करीना ने अपने कैरियर की शुरूआती फिल्‍म रिफ्यूजी में प्रस्‍व पीड़ा को रुपहले पर्दे पर सहन करते हुए नजर आई, लेकिन रियल लाइफ में अभी उनका मां बनने का कोई इरादा नहीं। यह बात उन्‍होंने चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस समारोह के दौरान कही। गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व करीना एवं सैफ अली खान ने अपने लिव इन रिलेशनशिप को निकाह में बदला है।

सवाल का जवाब देते हुए करीना ने कुछ यूं कहा, किड...नॉट नाऊ...आई एम टू यंग। आई एम ओनली 32 नाऊ...अभी तो बहुत उम्र पड़ी है। अभी तो मैं खुद बच्ची हूं। हमने और सैफ ने शादी बच्चे के लिए नहीं की थी। न तो अभी मैं और न ही सैफ बच्‍चा चाहते हैं। हम दोनों का पूरा फोकस अभी अपने करियर पर है।

लिम्का कांटेस्ट में विजेताओं से मिलने पहुंची करीना ने कहा कि वह अभी बहुत यंग है। महज 32 साल की उम्र हैं इसलिए बच्चे के लिए अभी बहुत वक्त पड़ा है। बच्‍चा उनकी प्राथमिकताओं में दूर-दूर तक नहीं है। जब हमें जरूरत होगी कि हमें एक बच्चे की जरूरत है तब हम उसके बारे में सोचेंगे। यह तब होगा जब मैं फिल्मों को कुछ नया देने की हालत में नहीं होंगी।

43वां भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव आज से शुरू

43वां भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव मंगलवार से गोवा में शुरू हो रहा है। यह महोत्सव 20 से 30 नवंबर तक चलेगा। उद्घाटन समारोह के लिए सिने सितारे अक्षय कुमार मुख्य अतिथि होंगे। इस अवसर पर सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी उपस्थित होंगे। उनके साथ पोलैंड के संस्कृति मंत्री और गोवा के मुख्य मंत्री मनोहर पर्रिकर भी मौजूद होंगे।

दस दिवसीय इस महोत्सव में दर्शकों के उत्कृष्ट सिनेमा का प्रदर्शन किया जाएगा। भारतीय परिदृश्य जैसे वर्गों के तहत फीचर और गैर फीचर सिनेमा को शामिल किया गया है। इसके अलावा भारतीय सिंहावलोकन, श्रद्धांजलि, उत्कृष्ट तथा विद्यार्थी फिल्मों और काफी कुछ शामिल किया गया है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय स्क्रीनिंग वर्ग के तहत महोत्सव के विभिन्न पक्ष, विश्व सिनेमा, विदेशी सिंहावलोकन, श्रद्धांजलि, प्रमुख देश, पर्दे पर रेखाचित्र (एनिमेशन और थ्री डी सिनेमा), वृतचित्र जैसे विशेष पहलू दर्शाए जाएंगे।

दस दिवसीय इस अवधि में 200 से अधिक फिल्में दिखाई जाएंगी। इसमें ऑस्कर पुरस्कार प्राप्त आंग ली की लाइफ ऑफ पाई का भी प्रदर्शन किया जाएगा और साथ ही महोत्सव में अंतिम फिल्म के तौर पर मीरा नायर …

क्राइम शो के होस्‍ट राघवेंद्र कुमार मुद्गल नहीं रहे

‘चैन से सोना है तो जाग जाओ’ कहने वाले राघवेंद्र नहीं रहे। टीवी चैनल पर चर्चित रहे क्राइम शो सनसनी के एंकर राघवेंद्र कुमार मुद्गल का रविवार को पटना में निधन हो गया। वे कई घंटों से वेंटिलेटर पर थे। उनका अंतिम संस्कार रविवार को ही पटना में किया गया।  दिल का दौरा पडऩे के बाद वे कई दिनों से मगध अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे। राघवेंद्र की स्कूली शिक्षा बिलासपुर में हुई थी। उनके पिता आरटीओ अधिकारी थे। वे अंबिकापुर से रिटायर हुए। फिर वहीं बस गए। राघवेंद्र ने आकाशवाणी अंबिकापुर के ड्रामा आर्टिस्ट के तौर पर करिअर की शुरुआत की थी। 
इप्टा में उन्होंने अपना अभिनय कौशल संवारा। दिल्ली और चंडीगढ़ में एनएसडी के कलाकारों के साथ भी काम किया। वे बीबीसी की कई डाक्यूमेंट्रीज में भी नजऱ आए। मुदगल ने एक भोजपुरी फिल्म ‘भोले शंकर’ में विलेन का रोल किया था। इसके हीरो मिथुन चक्रवर्ती थे। उन्होंने न्यूज़ एक्सप्रेस चैनल में भी काम किया।

सरदार के बाद खिलाड़ी मुश्‍िकल में

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तलाश के बाद होगी रिलीज खिलाड़ी 786
सन ऑफ सरदार एवं जब तक है जान के बीच की टक्‍कर खत्‍म हो गई, दोनों फिल्‍में बॉक्‍स ऑफिस पर अच्‍छा धन जुटाने में सफल रही। अगर आंकड़ों को देखते तो सन ऑफ सरदार ने यशराज ग्रुप को कड़ी टक्‍कर देते हुए जीत हासिल की, क्‍यूंकि अजय देवगन की फिल्‍म केवल 2000 स्‍क्रीनों पर रिलीज हुई, जबकि जब तक है जान करीबन 2500 स्‍क्रीन पर। यशराज फिल्‍म का खर्च 85 से 90 करोड़ के बीच बताया जा रहा है, जबकि सन ऑफ सरदार का खर्च केवल 65 से 75 के बीच बताया जा रहा है।

वैसे अजय देवगन बॉक्‍स ऑफिस क्‍लेकशन को देखने के बाद काजोल एवं बच्‍चों के साथ गोवा रवाना हो चुके हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सन ऑफ सरदार पूरी तरह सफल रहा। जब तक है जान को वो रिस्‍पांस नहीं मिला, जो मिलना चाहिए था, कहीं न कहीं यशराज बैनर्स को निराशा हाथ लगी है, भले ही फिल्‍म अपना खर्च निकालने में कामयाब हो जाए।

फिल्‍मों के बढ़ते बजट के कारण सितारों के बीच अब युद्ध तो चलता ही रहेगा। अब आगे रिलीज होने वाली दो फिल्‍मों के बीच टक्‍कर का माहौल बताया जा रहा है, क्‍यूंकि अमीर खान की फिल्‍म तलाश नवंबर अंत में रिलीज हो रही…

रिक्‍शे वाला बना ब्‍लॉगर

वैसे थोड़ा पागल तो मैं शुरू से ही रहा हूं. और यक़ीन मानिए, ये अपने-आप में एक पूरा जवाब है कि आखिर मैं एक रिक्शावाला क्यों बना. लेकिन अगर आप इससे ही संतुष्ट नहीं हैं तो आइए मिलकर कोशिश करते हैं जवाब ढूंढने की, क्योंकि शायद इससे पहले मैंने भी कभी इतनी गहराई से इस बारे में नहीं सोचा!

ज़्यादातर जन कल्याण योजनाओं के आलोचक अक्सर ये तर्क देते हैं कि "सरकार ज़मीन से जुड़ी नहीं है". वो कहते हैं कि कि लोगों की क्या ज़रूरते हैं, ये एसी कमरों में बैठने वाले मंत्रियों और नौकरशाहों को पता ही नहीं है. जिस तरह की विवादास्पद नीतियां सरकार और योजना आयोग द्वारा बीते कुछ सालों में लाई गई हैं, उनसे इस तर्क को और भी बल मिलता है.

तो मुझे कहीं-न-कहीं ये लगा कि अगर मुझे अपने लोगों को बेहतर तरीके से जानना है और ये समझना है कि ग़रीबी क्या होती है, तो एक दर्शक की तरह इसे समझ पाना थोड़ा मुश्किल होगा. इसके लिए मुझे वो ज़िंदगी जीनी होगी.

मगर ग़रीबी के तो कई रूप हैं और एक रिक्शे वाले से कहीं ज़्यादा भयावह. लेकिन शायद एक रिक्शा वाला बनना मुझे सबसे ज़्यादा सहज और व्यावहारिक लगा. वो इसलिए क्योंकि साइकिल चलाना मे…

बिच्‍छू डॉट कॉम का संपादक वर्सेस मुख्‍यमंत्री

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भोपाल, इंदौर और विदिशा में बिच्छू डॉट कॉम के होर्डिंग लगने के कुछ ही घंटों में हटा लिए गए। इंदौर में तो लगाने वाले को ही हिरासत में ले लिया। आखिर किसके कहने पर और किस वजह से इन्हें हटाया गया। इसका कारण कोई बताने की स्थिति में नहीं है।

भोपाल में रोशनपुरा चौराहे और सुभाष स्कूल के पास दोपहर दो बजे होर्डिंग लगाए। शाम पांच बजे तक उतार लिए गए। नगर निगम के अधिकारी कह रहे हैं कि उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। कलेक्टोरेट के अधिकारियों को भी होर्डिंग हटाने की कोई जानकारी नहीं है। पुलिस तक मामला पहुंचा ही नहीं। तो क्या मिस्टर इंडिया ने उतारे होर्डिंग?विदिशा में होर्डिंग लगे तो भाजपाइयों ने उसे लेकर प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी मुकेश टंडन ने मुख्यमंत्री निवास फोन लगाया। निर्देश मिला कि यथास्थिति बनी रहने दी जाए। लेकिन बाद में एसडीएम ने खुद जाकर होर्डिंग हटा लिए।  इंदौर में पांच जगह होर्डिंग लगाए गए थे। लेकिन उन्हें उतार लिया गया। रीगल तिराहे पर जब श्याम नामक व्यक्ति होर्डिंग लगा रहा था तो उसे हिरासत में ले लिया। तुकोगंज पुलिस थाने में उसे रात भर बिठाया गया। उसका लोडिंग ऑट…

खुद क्‍यूं नहीं काटकर लाते जेठमलानी की जुबान

भाजपा नेता राम जेठमलानी के श्रीराम भगवान पर दिए बयान को लेकर हिन्‍दु समुदाय बेहद क्रोधित है, भले ही आम आदमी श्रीराम भगवान के घर वापसी उत्‍सव को समर्पित दीवाली त्‍योहार की तैयारियों में मस्‍त है। शायद आम आदमी ही नहीं, बल्‍कि श्री हिंदू न्यायपीठ विधान परिषद के सदस्‍य भी, तभी तो उन्‍होंने श्रीराम भगवान के चरित्र पर बुरे पति का ठप्‍पा लगाने वाले नेता की जुबान काटकर लाने वाले को 11 लाख रुपए देना का एलान किया है यह कार्य तो केवल वो व्‍यक्ति कर सकता है, जिसके मुंह में राम और बगल में छुरी

अब ऐसा व्‍यक्‍ति की तलाश करनी होगी। भारत में ऐसा वयक्‍ति ढूंढ़ना बेहद मुश्किल है। आप पूछोगे क्‍यूं, यहां तो हर दूसरा व्‍यक्ति ऐसा है, लेकिन यह बात मानने को कौन तैयार है, कि मैं मुंह में राम और बगल में छूरी रखता हूं, सब कहेंगे हमारे मुंह में राम है, बगल में खड़े व्‍यक्‍ति के पास जरूर छूरी होगी, जब आप दूसरे से पूछोगे तो वो भी यही कहेगा।

आप सोच रहे होंगे मुद्दा तो राम भगवान का चल रहा था, छूरी कहां से आ गई। छूरी का जिक्र इस लिए करना पड़ रहा है, क्‍यूंकि जुबान काटने के लिए कोई तो औजार चाहिए। तो वो छूरी क्‍यूं नह…

भारत को ब्रिटेन से मिला विकासशील देश का प्रमाण पत्र

अब भारत गरीब देश नहीं रहा। अब भारत एक अमीर देश बन चुका है। भारत दिन प्रति दिन विश्‍व के नक्‍शे पर अपनी उपस्‍थिति दर्ज करवा रहा है। ऐसा मैं नहीं कह रहा, बल्‍कि यह बात तो ब्रिटेन कह रहा है, और इस की आढ़ लेकर वो हम को अब आर्थिक सहायता देने से मना कर रहा है। यह सब भारत के कुछ नीच अमीर लोगों के कारण हुआ, जो घोटाले कर कर मीडिया के दुबारा दुनिया को बता रहे हैं कि हमारे यहां पैसे की कोई कमी नहीं, बल्‍कि कमी है तो मिल बांटकर खाने की, एक बेहतर प्रबंधन की।
हमें चीजों का सही इस्‍तेमाल नहीं करना आता। इसकी सबसे बड़ी उदाहरण है हमारे देश का प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह, जो विश्व के सबसे महान अर्थ शास्‍त्रियों में शामिल हैं, लेकिन देश को आर्थिक रूप से सशक्‍त कर पाने में असशक्‍त हैं, उनके पीछे उनका हाथ नहीं, बल्‍कि कुछ हमारे समाज के भ्रष्‍ट लोगों का दोष है। ब्रिटेन का उक्‍त बयान मनमोहन सिंह को सही साबित कर रहा है, लेकिन देश की जमीनी हालत तो पूरी दुनिया जानती है। इस देश की एक और बड़ी समस्‍या है, जो प्रबंधन से ही जुड़ी हुई है, कुछ नेता पैसा कमाते हैं, और सीधा स्‍विस बैंक में भेज देते हैं, ऐसे करीबन 700 लोगों…

आज तक टीवी एंकरिंग सर्टिफिकेट कोर्स, सिर्फ 3950 रुपए में

आजतक के एंकर व एक्सपर्ट्स से सीखिए कैसे आत्‍मविश्‍वास के साथ टीवी पर आते हैं.
इस ऑनलाइन कोर्स में आप आजतक के टॉप क्‍लास एंकर और एक्सपर्ट्स की मदद से वीडियो ट्यूटोरियल के माध्‍यम से कैमरे के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्‍तुत होना सीखेंगे.
किस के लिए है यह ऑनलाइन कोर्स?
अपनी सुविधानुसार टीवी एंकरिंग में सर्टिफिकेट कोर्स नये और अनुभवी प्रोफेशनल दोनों कर सकते हैं. इस कोर्स में आप जानेंगे टीवी न्यूज चैनल की कार्यप्रणाली, टेलीप्रॉम्पटर का इस्तेमाल, स्टूडियो लाईट्स, अपनी आवाज को कैसे निखारें और कैसे बने स्टाईलिश एंकर.
इस ऑनलाइन कोर्स में आप क्या सीखेंगे?
- आत्‍मविश्‍वास के साथ टीवी स्‍क्रीन पर आना.
- टीवी न्‍यूज चैनल के विषय में.
- जब आप स्‍टूडियो में पहुंचें तो क्‍या उम्‍मीद रखें.
- आवाज को कैसे निखारें.
- टीवी ड्रेस कोड और कैसे आप अपना स्‍टाइल बनाएं.
पाठ्यक्रम
भाग 1- एंकरिंग की बुनियादी जानकारियां
मुख्‍य अंश- अपने को दृढ़ रखना, उर्जा को सहेजना, कैमरे के लेंस से बातें करना, टिप्‍स और तकनीक.
भाग 2-  टीवी न्यूज़ चैनलों की दुनिया
मुख्‍य अंश - टीवी न्‍यूज चैनलों की कार्यप्रणाली, न्यूज़ फॉर्मेट्…

जी न्‍यूज का हो गया अमर उजाला !

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भड़ास 4 मीडिया डॉट कॉम के साभार से


मीडिया इंडस्‍ट्री से बहुत बड़ी खबर है. अमर उजाला समूह बिक गया. सुभाष चंद्रा के जी समूह ने अमर उजाला को खरीद लिया है. जल्‍द ही इसकी आधिकारिक घोषणा दोनों समूह कर सकते हैं. बताया जा रहा है कि यह सौदा 1200 से 2500 करोड़ के बीच तय हुआ है. हाल के समय में यह सबसे बड़ा मीडिया टेकओवर है. इसके साथ ही यह भी तय हो गया है कि मीडिया मार्केट में जनसरोकारी पत्रकारिता का भविष्‍य बहुत ही मुश्किल है.

प‍हले भी अमर उजाला के बिकने की चर्चाएं होती थी. सूचना आई थी कि भास्‍कर समूह अमर उजाला को खरीदने का प्रयास कर रहा है. दोनों समूहों के बीच कई चक्र भी बातचीत भी हुई थी, परन्‍तु बात पैसे पर आकर अटक गई. अमर उजाला समूह 1500 करोड़ से ज्‍यादा की मांग पर अड़ा था जबकि भास्‍कर समूह 1000 करोड़ रुपये से आगे बढ़ने को तैयार नहीं था, लिहाजा यह डील फाइनल नहीं हो पाई.


पर अब जी समूह ने अमर उजाला का टेकओवर कर लिया है. अभी आधिकारिक रकम की जानकारी नहीं हो पाई है पर माना जा रहा है कि डील 1200 करोड़ से ज्‍यादा में फाइनल हुई है. सुनील मुतरेजा कंपनी के सीईओ बने रहेंगे. खबर यह भी है कि माहेश्‍वरी पर…

'जब तक है जान' से परेशान 'सन ऑफ सरदार'

हर दीवाली सिने प्रेमियों के लिए दो बड़ी फिल्‍में रिलीज होती हैं। इस बार भी ऐसा ही कुछ होने जा रहा है, लेकिन इस बार फिल्‍म रिलीज को लेकर विवाद सा खड़ा हो गया है, क्‍यूंकि यशराज बैनर्स ने महानगरों के बड़े सिनेमा घरों पर पहले से बुकिंग कर ली, जिसके चलते सन ऑफ सरदार के रास्‍ते में मुश्किलें खड़ी हो गई।

बीबीसी हिन्‍दी डॉट कॉम के अनुसार यशराज बैनर ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि दोनों फिल्मों के लिए पर्याप्त सिनेमाघर उपलब्ध हैं। इस पर अजय देवगन बड़े सख्त लहज़े में कहते हैं, ''क्या हम बेवकूफ़ हैं । हां हैं न सिनेमाघर हैं, पर दक्षिण भारत में हैं, दक्षिण भारत में लोग 'सन ऑफ़ सरदार' देखेंगे या फिर अपनी दक्षिण भारतीय फिल्में?।

डॉट कॉम के अनुसार अजय कहते हैं, ''मुंबई के दादर में सात सिनेमाघर हैं, जिनमें से छ: पर यशराज की फिल्म लगने वाली है। हमारे लिए बचा एक सिनेमाघर। अब आप ही बताएं कि क्या ये बात गलत नहीं है।

एक सवाल के जवाब में अजय कहते हैं, ''इतने बड़े बजट की फिल्म को अपनी लागत वसूल करने में कम से कम दो हफ्ते लगते हैं।
अगर हम अपनी फिल्म 23 नवंबर को रिलीज़ करते हैं…

जनता की पसंद, एक बुद्धू तो दूसरा बांदर

देश में दो नाम पिछले लम्‍बे समय से चर्चाओं का केंद्र बने हुए हैं। दोनों को देश का भावी प्रधान मंत्री बनाने का सपना भारतीय जनता संजो रही है। मगर हैरानी की बात है कि जनता की पसंद एक बुद्धू तो दूसरा बांदर है। यकीन नहीं आता तो आप सुब्रमण्यम स्वामी का बयान सुनिए और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा बरखा सिंह का बयान सुनिए।

गौर तलब है कि :-

जनता पार्टी प्रमुख सुब्रमण्यम स्वामी ने गुरूवार को एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी पर एक समाचार पत्र को 90 करोड़ का कर्ज देने की बात कहते हुए 1600 करोड़ की संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया था। इस बयान के बाद राहुल गांधी ने कहा कि वो स्‍वामी पर मानहानि का दावा करेंगे। राहुल का बयान आते ही कानून की मदद से सोनिया गांधी के रास्‍ते में मुश्‍िकलें खड़ी करने वाले स्‍वामी ने राहुल गांधी को 'बुद्धू' कहा है। स्वामी ने ट्विटर पर राहुल को बुद्धू लिखते हुए कहा, 'इस (बुद्धू को) मानहानि के कानून पर जानकारी लेने की जरूरत है। पब्लिक सर्वेंट एवं सांसद होने के नाते उन्हें यह साबित करना होगा कि जो कुछ मैंने कहा है, वह झूठ है, न कि मुझे यह साबित …

आरटीआई का उपयोग और आपकी छवि

सूचना का अधिकार कानून का यदि आप उपयोग नहीं करते हैं तो समझ लीजिये कि आप इस संसार के सबसे अच्छे लोगों में हैं और इसका उपयोग करते हैं तो आप उन लोगों के बीच खलनायक के तौर पर माने जाएंगे जिनका आपके हस्तक्षेप से कुछ नुकसान होने की आशंका है। पहले तो आपको समझाया जाएगा कि आप भले आदमी हैं। आपकी ऐसी छवि नहीं है और जब आप इन बातों में नहीं आएंगे तो वे कहेंगे आखिर आप भी वैसे ही निकले। लब्बोलुआब यह है सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने वाले किसी भी उस व्यक्ति की जो आमतौर पर किसी विवादों में नहीं पड़ता है। मुझे पता नहीं कि आपने आरटीआई अर्थात सूचना के अधिकार के तहत कोई जानकारी मांगने का कभी कोई प्रयास किया या नहीं और यदि इस कानून का उपयोग आप कर रहे हैं तो आपके अनुभव की भी मुझे कोई जानकारी नहीं। इस मामले में मैं अपना अनुभव जरूर आज आपसे बांटना चाहूंगा।
आरटीआई है क्या, यह तो अब लोगों, खासतौर पर इलिट क्लास को बताने की जरूरत नहीं है। इसका उपयोग कहां और कैसे करना, यह भी उन्हें मालूम है और यह भी कि इसके उपयोग से उनके हितों पर क्या असर पड़ सकता है। कभी इस कानून का सच जानना है तो आप सीधे न सही, उस व्यक्ति…

‘पीपुल्स हीरो’ सुपर-30 के आनंद कुमार बने

आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षाओं के लिये कोचिंग मुहैया कराने वाले सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार को ‘पीपुल’ पत्रिका ने ‘पीपुल्स हीरो’ चुना है.

एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि टाइम पत्रिका समूह की पीपुल पत्रिका ने अपने भारतीय संस्करण में आनंद पर एक विस्तृत फीचर प्रकाशित किया है और ‘पीपुल्स हीरो’ की सूची में शामिल किया है.

आमतौर पर यह पत्रिका फिल्म और अन्य क्षेत्रों के नामचीन सितारों की खबरें छापती हैं लेकिन इस बार उसने शिक्षा के पेशे से जुड़े व्यक्ति को चुना है.
पत्रिका ने कहा, ‘आनंद ने यह अपने बूते किया है जो उल्लेखनीय है.’

विज्ञप्ति में आनंद के हवाले से कहा गया है, ‘पीपुल में जगह पाकर बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं. मैं कोई नामचीन सितारा नहीं हूं. मैं बस एक आम इंसान हूं.’

जापान में 'ग्लोबल 30'  - भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने वाले चर्चित संस्थान पटना के 'सुपर 30' की तर्ज पर जापान स्थित टोक्यो विश्वविद्यालय ने 'ग्लोबल 30' संचालित करने की योजना बनाई है। इसमें सुपर 30 से एक विद्यार्थी का चयन किया जाएगा, जिसका पूरा खर्च टोक्यो…