शुरूआत एक नए युग की


नमस्‍ते दोस्‍तो, आपकी ओर से मिल रहे प्‍यार और स्‍नेह ने ही मुझे ब्‍लॉग को वेबसाइट में बदलने के लिए प्रेरित किया। मैं वादा करता हूं कि आज के बाद यह पोर्टल पूर्ण रूप से युवाओं को समर्पित होगा। मेरी नजर में उम्र से युवा होना ही युवा होना नहीं है, ब्‍लकि सोच से युवा होना ही असली युवावस्‍था है. उम्‍मीद ही नहीं, यकीन भी है कि आपको मेरी ओर से उठाए गए इस कदम से बेहद खुशी खुशी होगी।

जीवन खत्‍म हुआ तो जीने का ढंग आया

जीवन खत्‍म हुआ तो जीने का ढंग आया 
 शमा बुझ गई जब महफिल में रंग आया,
मन की मशीनरी ने सब ठीक चलना सीखा, 
बूढ़े तन के हरेक पुर्जे में जंग आया, 
फुर्सत के वक्‍त में न सिमरन का वक्‍त निकाला, 
उस वक्‍त वक्‍त मांगा जब वक्‍त तंग आया, 
जीवन खत्‍म हुआ तो जीने का ढंग आया। 
जैन मुनि तरूणसागर जी की किताब से