सावधान! गैस गीजर बन सकता है मौत का कारण


गैस गीजर ले चुका है कई लोगों की जिन्दगी : पठानियां
एनडब्‍ल्यूएस ने की लोगों को सतर्क रहने की अपील

बठिंडा। सर्दीयों के मौसम में ठंड से बचने के लिए लोगों द्वारा गर्म पानी के इस्तेमाल हेतु बाथरूम में लगे गैस गीजरों व कोयले वाली अंगीठियों का प्रयोग घरों में आम ही किया जाता है। इन दिनों में हमारी छोटी सी लापरवाही किसी बड़ी घरेलू घटना को अंजाम दे सकती है। घरों में बाथरूम में लगे गैस गीजर या सर्दियों दौरान प्रयोग की जाने वाली कोयले की अंगीठियाँ लोगों की लापरवाही तथा अज्ञानता के कारण मौत का सामान बन सकती है। इनकी इस्तेमाल संबंधी विशेष् तौर पर सावधान रहने की जरूरत है। पिछले सालों के दौरान कई लोग बाथरूम में नहाते समय बाथरूम में लगे गैस गीजरों की जहरीली गैस चढ़ने के कारण मौत के मुँह में चले गये या चलती फिरती जिन्दा लाश में तदील हो गए। यह खलासा सेंट जॉन के ट्रेनिंग सुपरवाईजर नरेश पठानिया ने समाजसेवी संस्था नौजवान वेलफेयर सोसाईटी के वालंटिरयों को जानकारी देते हुए किया। उन्होंने आगे बताया कि बंद बाथरूमों में नहाने के लिये गर्म पानी इस्तेमाल हेतु जब इन गैस गीजरों का प्रयोग कर रहें होतें हैं तो इन गैस गीजरों के बर्नरों से पैदा हो रही आग के कारण आसीजन की खपत होती है तथा कार्बन डाईआक्‍साईड की मात्रा बढ़ जाती है। तंग जगह वाले बाथरूम जिनमें ताजी हवा आने जाने के प्रबंध न हो तो वहाँ जहरीली गैस कार्बन मोनोआक्‍साईड गैस पैदा होती है। कार्बन मोनोआक्‍साईड एक रंगहीन तथा गंदहीन गैस होने के साथ बेहद जहरीली गैस है, जो इंसान के लिये मौत का कारण बन सकती है। यह जहरीली गैस खून के अंदर आसीजन को पहुँचाने की समर्था को घटाती है और शरीर के अंदर विभिन्ना अंग आसीजन की कमी के कारण प्रभावित होतें हैं। दिल तथा दिमाग को जरूरत के अनुसार आसीजन न मिलने के कारण व्यक्ति अर्द्ध या गहरी बेहोशी (कोमा) में चला जाता है और अगर देर हो जाए तो व्यक्ति की मौत तक हो सकती है। इस गैस के चढ़ने से व्यक्ति में कमजोरी, थकावट, सिर दर्द, धुंधला दिखना, चक्कर आना, दिमागी असंतुलन, छाती में दर्द, घबराहट होना, लड प्रैशर कम होना, सांस उखड़ना व उल्टी आदि लक्ष्ण पैदा होतें हैं। व्यक्ति बेहोश होकर गिर पड़ता है व सांस प्रणाली बंद हो जाने से मौत भी हो सकती है। श्री पठानिया ने बताया कि इस घरव्लू घटना का दुखदायी पहलू यह भी है कि परिवार के दूसरे सदस्यों को इस घटना का बड़ी देर के बाद पता चलता है योंकि पीड़ित धीरे धीरे बेहोशी की हालत में चला जाता है और अपनी बिगड़ती हालत के बारे में किसी को बता भी नहीं पाता। पीड़ित को परिवारिक सदस्यों द्वारा बाथरूम के दरवाजे तोड़ कर बाहर निकालना पड़ता है। इसके इलावा उन्होने बताया कि सर्दी से बचने के लिये कई बार लोग बंद कमरों के अंदर अंगीठी लगा कर सो भी जातें हैं। इसके प्रति भी हमारी अज्ञानता तथा लापरवाही मौत का कारण बन सकती है। नरेश पठानिया ने नौजवान वेलफेयर सोसाईटी के वालंटियरों को अपील की, कि इन दिनों गैस गीजरों तथा अंगीठियों से होने वाले इन घरव्लु हादसों के बचाव हेतु लोगों को जागरूक करवें ताकि किमती जानें बचाई जा सके। उन्होने वालंटियरों को ऐसी दुर्घटना घटित हो जाने के मौके पर दी जाने वाली प्राथमिक सहायता और सावधानियों के संबंध में बताया कि गैस गीजरों पर दी गई हिदायतों की पालना करवें। अगर गीजर को बाहर ही लगाया जाये तो बेहतर है। अगर गीजर बाथरूम के अंदर लगा है तो ताजी हवा के आने जाने का रास्ता आवश्य हो या आगजास्ट फैन लगा हो। बाथरूम में नहाने गये परिवारिक सदस्य के प्रति सचेत रहें। जहरीली गैस चढ़ने पर पीड़ित को तुरंत खुली जगह पर ले जाओ। गैस खुद को न चढ़े इसलिये अपना मुँह ढक कर अंदर जायें। बेहोशी की हालत में पीड़ित को टेड़ा कर दो ताकि उल्टी वगैराह अंदर जा कर सांस नली में रूकावट पैदा न करें। हर दस मिनट बाद सांस चैक करतें रहें तथा पीड़ित को शांत व गर्म रखे। बेहोश व्यक्ति के मुँह में कोई भी तरल पदार्थ पानी आदि न दें। जल्दी ही ऐम्बुलैंस का प्रबंध करके पीड़ित को नजदीकी अस्पताल में ले जायें। वेंटीलेटर की सहायता से आसीजन देने की जरूरत पड़ सकती है। बच्चों में बड़ों की अपेक्षा खतरा और अधिक होता है, इसलिये नहाते समय उनपर विशेष् ध्यान देने की जरूरत होती है। नौजवान वैल्फेयर सोसाईटी के अध्यक्ष सोनू माहेश्वरी ने लोगों से अपील की, कि सर्दियों के दिनों में बंद कमरों के अंदर कोयले वाली अंगीठियां, स्टोप, हीटर आदि का इस्तेमाल ने करें। उन्होंने नरेश पठानिया को आभार प्रकट करते हुए भरोसा दिलाया कि संस्था की ओर से द्गयादा से ज्‍यादा लोगों को ऐसे हादसों के प्रति जागरूक किया जायेगा।

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