एक सिक्के के दो पहलू

आज सुबह सुबह मनोदशा कुछ अच्छी नहीं थी, मन एक बना रहा था तो एक ढहा रहा था। तबी मेरे दोस्त जनक सिंह झाला ने एक तस्वीर दिखाई, जो उसने पिछले दिनों लिए अपने नए कैमरे से खींची। इस तस्वीर को देखने के बाद मुझे एक ख्याल आया वो ये कि ये तस्वीर नहीं, जिन्दगी का एक खरा सच है। इसी लिए मैंने को इस नाम से पुकारा-'एक सिक्के के दो पहलू'। अगर इस महिला को जिन्दगी मान लिया जाए तो दुख-सुख इसके दो पहलू हैं, जैसा कि इस तस्वीर में मुझे दिखाई पड़ता है। शायद आगे दौड़ रहा बच्चा सुख है और पीछे चल रहा दुख । अगर इस तस्वीर को मेरी नजर से देखें तो पीछे दो अक्षर लिखे हुए नजर आ रहे हैं, पीछे वाले बच्चे के पास 'T' एवं अगले वाले बच्चे के पास 'E'। 'T' बोले तो Tension एवं 'E' बोले तो Enjoyment। और तस्वीर में मिलती जुलती स्थिति । हम सबको बनाने वाला तो एक है, लेकिन हमारी स्थिति इन दोनों बच्चों सी है, कोई ज्यादा खुश तो कोई ज्यादा दुखी। दीवार फिल्म के अमिताभ बच्चन एवं शशि कपूर, जन्म तो एक मां ने दिया, लेकिन किस्मत दोनों की जुदा जुदा, जैसे मेरी और मेरे भाई की। जिन्दगी भी ऐसे ही चलती है, कभी पीछे वाले की तरह तो कभी आगे वाले की तरह। इस औरत को मैंने जिन्दगी के रूप में देखा, जिसके आगे खुशी और पीछे दुख चलता मुझे नजर आ रहा है, इसके बीच फँसी है जिन्दगी। आप क्या सोचते हैं, इस तस्वीर को देखने के बाद एक जरूर लिखना।

पंजाब में तो बोर्ड पर बोर्ड

आज सारा दिन खबरिया चैनलों पर एक ही चीज थी, दसवीं बोर्ड, सुबह से शाम तक सुनते सुनते पक गया। पंजाब में तो दसवीं तक आते आते दो बार बोर्ड की परीक्षा से गुजरना पड़ता है, और दसवीं एवं 12वीं कक्षा भी पंजाब में बोर्ड की हैं। पांचवीं कक्षा, आठवीं कक्षा, दसवीं कक्षा एवं बारहवीं कक्षा सब में बोर्ड की परीक्षा से गुजरना पड़ता है, जबकि अन्य राज्यों में तो दसवीं में ही शायद बोर्ड की परीक्षा होती है। अगर बोर्ड की परीक्षा को हटा दिया जाएगा तो ग्रामीण क्षेत्रों में मास्टरों की बल्ले बल्ले हो जाएगी। गधे और घोड़े एक रेस में आ जाएंगे, क्योंकि बोर्ड की परीक्षा के अलावा अन्य कक्षाओं की परीक्षाओं के नतीजे दबाव में बनते हैं। मुझे आज भी याद है, मेरे गाँव में अमीर परिवारों से संबंधित लोग बोर्ड की कक्षाएं छोड़कर अन्य कलासों में से बच्चों को पास करवाने के लिए स्कूल में आकर टीचरों पर दबाव डालते थे। इतना ही नहीं उनको शाम को घर जाते समय प्यार रूपी रिश्वत देने से भी बाज नहीं आते थे। खेतों से सब्जी लाकर देना, गन्ने थाम देने, दिन में चाय दूध लस्सी (छाछ) आदि भेजना। गांव में टीचरों की आओ भगत (मेहमान निवाजी) बहुत होती है, सिर्फ अपने बच्चों को पास करवाने के लिए। इतना ही नहीं बोर्ड की परीक्षा के वक्त भी परीक्षा निगरान को लस्सी दूध एवं चाय के रूप में रिश्वत देने बहुत जाते हैं। कुछ टीचर इस बात का फायदा भी उठाते हैं, बच्चों को पास करने के लिए गेहूं भी ले जाते हैं। बोर्ड में ऐसा होना मुश्किल सा हो जाता क्योंकि वहां पर बच्चों को पास करवाने के लिए बड़ा जैक चाहिए, छोटे मोटे से काम नहीं होता। पहले तो पता ही नहीं चलता कौन से स्कूल के पेपर किसी शिक्षक के हाथों में जाते हैं। अगर बोर्ड की कक्षाएं टूट जाती हैं, तो अच्छी पढ़ाई करने वालों को बिन जुर्म के खमियाजा भुगताना पड़ेगा। मायावती ने तो अपनी माया दिखाते हुए छ: में से पांच में भी पास होने वाले को पास घोषित करने का ऐलान कर दिया। अगर सरकार कुछ करना चाहती है तो स्कूलों में टीचरों की भर्ती करें, वहां पर पढ़ाई को उच्चस्तरीय बनाए। शिक्षा प्रणाली को सुधारने की जरूरत है, न कि बोर्ड हटाने की परीक्षा देने वाले के लिए क्या बोर्ड, क्या आम कक्षा। वहां भी वो ही लिखना है और आम कक्षा की क्लासों में भी वो ही लिखना है। बोर्ड को हौआ बना कर रख दिया, फालतू में।

सत्य पर रखें प्यार की नींव

आँखों देखी एक हकीकत, एक सत्य घटना, जिसको पेश तो हूबहू किया, लेकिन बदलें हैं नाम.
सत्य पर रखें प्यार की नींव

बाल कलाकारों की सफलता खटकी क्या ?

होटल पर बर्तन मांझते हुए, सड़कों पर बज़री कूटते हुए एवं घरों में झाड़ू आदि निकालते हुए बाल मजदूर तो दिखाई नहीं पड़े, लेकिन कितनी अजीब बात है कि सफलता की शिखर को छूते हुए नन्हे कलाकार महाराष्ट्र की नज़र से नहीं बच पाए। महाराष्ट्र सरकार ने कल पांच सीरियल निर्माताओं को नोटिस जारी कर दिया, क्योंकि उनके सीरियलों में नन्हें कलाकार नजर आते हैं। ऐसा कुछ भी नहीं कि इन सीरियलों के सिवाए अन्य सीरियलों में नन्हे कलाकार नहीं हैं, लेकिन उन सीरियलों के किरदारों को इतनी लोकप्रियता हासिल नहीं हुई, जितनी कि उतरन, बालिका वधू, चक्क दे बच्चे, जय श्रीकृष्णा आदि को हुई है। शायद इन नन्हे कलाकारों की सफलता ही महाराष्ट्र को खटक गई। नहीं तो अन्य सीरियलों को भी नोटिस निकाले जाते, जैसे कि जंग नन्हे हंस गुल्लों की, करिश्मा का करिश्मा, तारक मेहता का उल्टा चश्मा एवं अन्य रिलायटी शो, जिन्हें बच्चे अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हैं। फिल्म जगत के जानकार बताते हैं कि नन्हे कलाकारों से पांच घंटे ही काम लिया जाता है। मगर इसकी तुलना में होटलों पर काम करने वाले बच्चों से तो आठ नौ घंटों तक निरंतर काम करवाया जाता है। उनकी तरफ सरकार का ध्यान क्यों नहीं गया। ऐसा तो है नहीं कि महाराष्ट्र में बाल मजदूरी दर कम है, वहां कोई बाल मजदूर नहीं, लेकिन उन बाल मजदूरों पर कार्रवाई कर सरकार को लोकप्रियता थोड़ी हासिल होनी है। ये सब सीरियल इन नन्हें कलाकारों की वजह से चल रहे हैं, अगर इनको निकाल दिया गया तो क्या रह जाएगा सीरियलों में, सीरियल ऐसे हो जाएंगे जैसे कि बिन आत्मा के शरीर. बालिका वधू वो सीरियल है, जो बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठा रहा है, जिसकी लोकप्रियता ने 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' जैसे सास बहू के सीरियलों को चलता कर दिया। उतरन भी समाज में फैले ऊंच नीच के भेदभाव के विरुद्ध एक आवाज है, जिसको भी लोगों ने खूब सराया है। महाराष्ट्र सरकार ने कलर्स टीवी को निशाना बनाया, जबकि अन्य चैनलों पर भी तो बच्चों के प्रोग्राम चलते हैं। सरकार ने बचपन से कैरियर बनाने देना नहीं, जवानी में नौकरी नहीं देनी तो देश किस तरफ जाएगा ?

किस्सा 'किस' का

आजकल विशाल भारद्वाज की शाहिद कपूर प्रियंका चोपड़ा अभिनीत 'कमीने' और राकेश रोशन की रितिक रोशन बार्बरा मोरी अभिनीत फिल्म 'काइट्स' चर्चा में है, दोनों फिल्मों शायद बॉक्स ऑफिस पर आमने सामने भी हो सकती हैं। इन दोनों फिल्मों में एक और समानता भी है, वो है 'लिपलॉक'। जी हां, शाहिद कपूर और प्रियंका चोपड़ा ने कमीने के लिए एक किस सीन दिया है, जिसको सबसे पहले रिलीज किया गया है, इसके अलावा अनुराग बासु निर्देशित फिल्म 'काइट्स' में रितिक रोशन एवं बार्बरा ने किस सीन दिया है, जबकि इस फिल्म में कंगना भी है। सुनने में आया है कि इस सीन को स्पेशल राकेश रोशन के कहने पर फिल्माया गया है, शायद राकेश रोशन जानते हैं कि महंगे बजट की इस फिल्म से लागत निकालने के लिए कोई तो हथकंडा पड़ेगा, नहीं तो फिल्म अपना बजट भी पूरा नहीं कर पाएगी। किस सीन सबसे पहले हिन्दी फिल्मों में शायद हिमांशु राय और देविका ने फिल्म कर्मा (1933) में दिया था, जिसको विदेशी निर्देशक ने निर्देशित किया था। उसके बाद बॉलीवुड की दर्जनों फिल्मों में किस सीन फिल्माए गए, लेकिन कुछ विवादित रहे तो कुछ फिल्म को हिट करवाने में साबित हुए। मल्लिका शेरावत ने फिल्म 'ख्वाहिश' में हिमांशु के साथ 17 चुम्बन दृश्य दिए थे, तो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जम गई, इतना ही नहीं बॉलीवुड में मल्लिका शेरावत को एक जगह भी फिल्म गई, जिसके बाद मल्लिका ने अपनी इस इमेज को मर्डर, प्यार के साइड इफेक्ट, किस किसकी किस्मत में अजमाया। मल्लिका अगर अभिनेत्रियों में बिंदास है तो अभिनेताओं में इमरान हाश्मी का नाम आता है, जिसने स्क्रीन पर अभिनेत्रियों के साथ इतने किस किए कि दर्शकों ने उसको सीरियल किसर का नाम दे डाला। किस का किस्सा यहीं खत्म नहीं होता। याद रहे कि फिल्म 'हे राम' में कमल हसन और रानी पर किस सीन फिल्माया गया था, तो युवा फिल्म में रानी और अभिषेक बच्चन पर ऐसा ही सीन फिल्माया गया। इस किस के जाल से तो एश्वर्या राय भी नहीं बच सकी, उसको भी दो बार किस सीन देना पड़ा एक बार अपने पूर्व प्रेमी विवेक ओबराय को और दूसरा फिल्म धूम2 में रितिक को । बिपाशा बसु भी कम नहीं उसने भी किस सीन दिए, जिनमें प्रमुख हैं गोल में जोहन अब्राहिम के साथ और फिल्म धूम टू में उदय चोपड़ा के साथ। बॉलीवुड के मिस्टर प्रफेक्टनिष्ट आमिर खान भी किस सीन से अछूते नहीं है, उन्होंने फिल्म कयामत से कयामत तक में जूही के साथ किस सीन किया तो फिल्म 'राज हिन्दुस्तानी' में करिश्मा कपूर के साथ। फिल्म जगत जैसे जैसे कार्पोरेट जगत की तरफ बढ़ता जा रहा है, वैसे वैसे पैसा बटोरने के लिए वो हर हथकंडा अजमा रहा है। अनुराग बासु ने फिल्म 'देव डी' में और मधुर भंडारकर ने फिल्म 'फैशन' में कुछ ऐसे ही दृश्य डाले कि दर्शक खींचे चले आए, ऐसी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाई करती है क्योंकि घर लाकर देखने की तो गुंजाइश ही नहीं फिल्म निर्माता निर्देशक छोड़ते। अब देखते हैं कि कमीने और काइटस में फिल्माए किस सीन क्या गजब ढहाते हैं ?