बाक्स आफिस पर अपनों से टक्कर


बालीवुड के लिए पिछले छ: महीने कैसे भी गुजरें हो, मगर इस साल के आने वाले छ: महीने दर्शकों एवं कलाकारों के लिए बहुत ही रोमांच भरे हैं। अगर हम फिल्म निर्माता एवं निर्देशकों द्वारा फिल्म रिलीज करने की तारीखों पर नजर डालें तो पता चलता है कि इस साल बाक्स आफिस पर प्रेमी प्रेमिका को, मामा भांजे को, बाप बेटे को टक्कर देगा। इसमें कोई शक नहीं की बाक्स आफिस पर अब मुकाबलेबाजी बढ़ने लगी है, यह बात तो 'सांवरिया' एवं 'ओम शांति ओम' के एक साथ रिलीज होने पर ही साबित हो गई थी. उसके बाद 'तारे जमीं पर' एवं 'वैकलम' एक साथ रिलीज हुई, बेशक यहां पर त्रिकोणी टक्कर होने वाली थी, मगर उस दिन अजय देवगन की फिल्म 'हल्ला बोल' को रिलीज नहीं किया गया था.
बाक्स आफिस पर टक्कर होने से फिल्मी सितारों का मनोबल भी बढ़ता है और उनको भी खूब मजा आता है, जब सामने वाले किसी सितारे की फिल्म पिटती है। जुलाई महीने में भी दो नए सितारे बाक्स आफिस पर टकराने वाले हैं, हरमन बावेजा और इमरान खान. वैसे तो यह टक्कर कोई खास न होती, मगर यह टक्कर खास इस लिए हो गई क्योंकि दोनों के पीछे बड़े बैनर हैं. हरमन बावेजा को उनके पिता हैरी बावेजा और इमरान खान को उनके मामा आमिर खान लेकर आ रहे हैं. इमरान की जाने तू या जाने ना और हरमन की लव स्टोरी 2050 एक साथ 4 जुलाई को रिलीज हो रही है.
इसके बाद 18 जुलाई को कंट्रैक्ट एवं किस्मत कनेक्शन रिलीज हो रही है, जहां कंट्रैक्ट को रामगोपाल वर्मा लेकर आ रहे हैं, तो वहीं पर किस्मत कनेक्शन में शाहिद कपूर और विद्या बालन की जोड़ी को अजीज मिर्जा लेकर आ रहे हैं। जुलाई महीने के अंत में बालीवुड के बड़े सितारों को मल्लिका शेरावत बाक्स आफिस पर टक्कर देते हुए नजर आएगी, दरअसल 25 जुलाई को मिशन इस्तांबुल, मनी है तो हनी एवं अगली और पगली रिलीज होने जा रही हैं. जहां मिशन इस्तांबुल में जैयाद खान, विवेक ओबराय, सुनील शैट्टी और मनी है तो हनी है में गोविंदा, आफताब शिवदासानी जैसे कलाकार हैं, वहीं दूसरी ओर अगली और पगली में अकेली मल्लिका शेरावत रणबीर शौरी के साथ दिखाई देगी.
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सलमान खान, अमिताभ बच्चन, प्रियंका चोपड़ा 'गॉड तुसी ग्रेट हो' फिल्म के जरिए यशराज फिल्मज की फिल्म 'बचना ए हसीनों' को टक्कर देगी, जिसमें रणबीर कपूर, दीपिका पादुकोण की जोड़ी होगी। इस साल का सबसे दिलचस्प दिन हो सकता है 20 अगस्त, क्योंकि इस दिन कम से कम आठ फिल्में रिलीज होने की संभावना है और दिलचस्प बात यह है कि इस दिन दिओल परिवार की ही चार फिल्में रिलीज हो सकती है, जैसे कि चमकू, हीरोज, राईट एंड रोंग, एक- द पावर आफ वन. वैसे इस दिन उक्त चार फिल्मों के अलावा चल चला चल, दो और दो पांच, हरी पुत्र, मुंबई कटिंग, ओह माई गॉड, फिर कभी, रूबरू, द ग्रेट इंडियन बटरफ्लाई. ऐसा भी हो सकता है कि इन तारीखों के नजदीक आते, फिल्म निर्देशक दियोल परिवार के कहने पर फिल्मों कोई तारीखों को आगे खिसका दें.
इसके बाद महात्मा गांधी की जन्मतिथि पर मामा भांजा बाक्स आफिस पर टकरा सकते हैं क्योंकि इस दिन जहां आमिर खान की गजनी रिलीज होगी, वहीं संजय दत्त एवं उनके भांजे की किडनैप रिलीज होगी, इसके अलावा इसी दिन जूनियर बच्चन बाक्स आफिस पर द्रोणा के रूप में उतरेंगे और सलमान खान को बोनी कपूर 'वांटेड: डैड एंड अलाईव' घोषित करेंगे, जिससे यह दिन फिल्मी दीवानों के लिए बहुत दिलचस्प हो जाएगा. जब बात प्यार को जीताने की हो तो सभाविक है कि प्रेमिका अपने दीवाने का साथ देगी, बेशक अक्षय कुमार को 'सिंह इज किंग' से कैटरीना कैफ बालीवुड का किंग बनाने जा रही हो, मगर 24 अक्टूबर को बाक्स आफिस पर कैटरीना कैफ अपने दिलबर सलमान खान को 'युवराज' साबित करने में पूरी ताकत झोंक देगी क्योंकि इस दिन अक्षय कुमार भी 'चांदनी चौक टू चाईना' लेकर बाक्स आफिस पर उतरेंगे. इतना ही नहीं इसी दिन अजय देवगन की 'गोलमल रिटर्नज' और यशराज फिल्मज की 'रोड साईड रोमियो' भी रिलीज होगी. इसके बाद ठीक 14 नवंबर को प्रियंका चोपड़ा अपने प्रेमी हरमन बावेजा को टक्कर देगी, दरअसल हरमन की विकट्री और प्रियंका की 'फैशन' फिल्म रिलीज होगी. जहां आज प्रियंका अपने प्रेमी को बालीवुड में जबरदस्त एंट्री दिलाने के लिए बेचैन है, वहीं उक्त तारीख को वह उसकी प्रेमी की फिल्म पर भारी पड़ेगी. इस प्रेमी प्रेमिका की टक्कर के बाद बाप बेटे अमिताभ अभिषेक की टक्कर देखने को मिलेगी. जहां इस बाप बेटे ने सरकार राज में एक साथ काम करके राम गोपाल वर्मा की डुबती हुई नौका को किनारे लगाया, वहीं 21 नवंबर को बाप बेटा बाक्स आफिस पर आमने सामने होंगे, दरअसल अलादीन एंड द मिस्ट्री आफ द लैम्प में अमिताभ हैं तो दोस्ताना अभिषेक बच्चन है, दोनों फिल्में एक दिन रिलीज होंगी.

बालीवुड को जोरदार झट्के


चमक दमक भरी मायानगरी यानी बालीवुड में कुछ पता नहीं चलता, कब किसको आसमां मिल जाए और न जाने कब किसको जमीन पर आना पड़ जाए। जब बालीवुड की बात चल रही हो तो यशराज फिल्मस बैनर का नाम तो लेना स्वाभिक बात है क्योंकि इस बैनर का नाम तो बच्चा बच्चा जानता है। सफलता की सिख़र पर पहुंचे इस बैनर को लोगों की नजर लग गई और अब यह बैनर फलक से जमीं तलक आ गया। पिछले साल यशराज ने पांच फिल्में रिलीज की, मगर सफलता का परचम केवल एक लहरा पाई, वो फिल्म थी किंग खान की 'चक दे! इंडिया. यह फिल्म सफलता की सीढ़ियां चढ़ पाएगी यशराज बैनर को उम्मीद नहीं थी, जिसके चलते उन्होंने फिल्म को सस्ते दामों में बेचा, मगर जो फिल्में यशराज बैनर ने महंगे दामों पर बेची थी वो सब सुपर फ्लाप साबित हुई, जिसके चलते सिनेमा मालिकों को घाटा झेलना पड़ा. यशराज ने इस साल की शुरूआत 25 अप्रैल को 'टशन' से की, उन्होंने इस फिल्मों को भी महंगे दामों पर बेचना चाहा, मगर पहले ही नुकसान झेल चुके सिनेमा मालिकों ने इस बार यशराज फिल्मस की फिल्म को अहमियत नहीं दी, जिसके चलते यह फिल्म कुछ सिनेमा घरों में रिलीज नहीं हुई. फिल्म रिलीज होने के एक दो दिन बाद ही सुपर फ्लाप घोषित हो गई और यशराज बैनर को इस साल का सबसे बड़ा जोरदार झटका लगा. इस झटके के बाद यशराज चोपड़ा भी सख्ते में आ गए. इसके बाद बात करते हैं पिछले साल की सबसे बड़ी फ्लाप फिल्म की, जिसका नाम था 'आग', जिसको बनाया था पिछले साल लगातार तीन फ्लाप देने वाले रामगोपाल वर्मा ने, कहते हैं कि रामू 'आग' को 'शोले' की सफल रीमेक बनाने जा रहे थे, मगर इस रामू इस आग में जलकर राख हो गए, अब उनका कैरियर आने वाली फिल्म 'सरकार राज' पर टिका हुआ है, जिसमें अभिषेक बच्चन, अमिताभ बच्चन और उनकी बहू एशवर्या नजर आने वाली है.

'सरकार राज' ठाकरे को नसीहत


फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा की उम्दा पेशकारी 'सरकार राज' देखते हुए दर्शकों को पिछले दिनों महाराष्ट्र में महाराष्ट्र नव निर्माण सेना की ओर से उत्तर भारतीयों को निशान बनाने की घटनाओं की याद आई होगी। राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में खुद को स्थापित करने लिए उत्तर भारतीयों को निशाना बनाया था, विशेषकर अमिताभ बच्चन को, जहां बड़े पर्दे के मैगास्टार अमिताभ बच्चन ने पर्दे के पीछे राज ठाकरे के शब्दी निशानों का खूब जोरदार जवाब दिया, वहीं पर अमिताभ बच्चन एवं उनके बेटे अभिषेक बच्चन ने 'सरकार राज' में महाराष्ट्र का नेतृत्व कर बड़े पर्दे पर खूब वाह वाह बटोरी है। उल्लेखनीय है कि इस फिल्म को आईफा अवार्ड समारोह में दिखाया गया था, फिल्म को इतना बड़ा समर्थन मिला कि पुलिस को भी भीड़ के साथ दो चार होना पड़ा. मेरे ख्याल से महाराष्ट्र को राम गोपाल वर्मा का आभार प्रकट करना चाहिए जिन्होंने महाराष्ट्र की एकता को पर्दे पर दर्शाया एवं महाराष्ट्र की एकता के नाम पर लोगों को तालियां बजाने लिए मजबूर कर दिया. वैसे तो सुनने आया है कि राज ठाकरे एवं राम गोपाल वर्मा में बहुत गहरी दोस्ती है एवं राज राम की फिल्म को रिलीज होने से पहले देखते हैं. अगर ऐसी बात है तो राज को फिल्म से सीख तो जरूर मिली होगी कि अगर बाल ठाकरे एवं राज ठाकरे का मकसद एक है तो रास्ते अलग अलग क्यों, अगर दोनों ही महाराष्ट्र का विकास चाहते हैं तो गद्दी पाने लिए उत्तर भारतीयों को निशाना क्यों बनाया जा रहा है. राम गोपाल वर्मा ने अपनी फिल्म को महाराष्ट्र की पृष्ठभूमि पर फिल्माया, इस फिल्म में एक नागरे परिवार है, जिसकी पूरा महाराष्ट्र मानता है. इसमें कोई शक नहीं कि फिल्म देखने वाले नागरे परिवार में ठाकरे परिवार की छवि कहीं न कहीं तलाशने की कोशिश करेंगे. जिस तरह नागरे परिवार महाराष्ट्र का भला चाहता एवं उसके लिए अपने निजी हित छोड़कर मानवता की भलाई में काम करता है. अगर राज एवं बाल ठाकरे ऐसा करते हैं तो किसी को भी ऐतराज नहीं होना चाहिए.

• हसन की 'दशावतारम' संकट में

• संघर्ष का दूसरा नाम 'अक्षय'

2007 ने किसको क्या दिया, किसी से क्या छीना


किसी ने ठीक ही कहा है कि समय से बलवान कोई नहीं और समय से पहले किसी को कुछ नहीं मिलता, ये बात बिल्कुल सत्य है, अगर आप आपने आसपास रहने वाले लोगों या खुद के बीते हुए दिनों का अध्ययन करेंगे तो ये बात खुदबखुद समझ में आ जाएगी। चलो पहले रुख करते हैं बालीवुड की तरफ क्योंकि ये मेरा पसंदीदा क्षेत्र है. जैसे ही 2007 शुरू हुआ छोटे बच्चन यानी अभिषेक के दिन बदल गए, उनकी इस साल की पहली फिल्म 'गुरू' रिलीज हुई, इस फिल्म ने अभिषेक को सफलता ही नहीं बल्कि करोड़ों दिलों की धड़कन 'ऐश' लाकर इसकी झोली में डाल दी, इसके बाद आओ हम चलते खिलाड़ी कुमार की तरफ ये साल उनके लिए बहुत ही भाग्यशाली साबत हुआ क्योंकि उनकी इस साल रिलीज हुई हर फिल्म को दर्शकों ने खूब प्यार दिया, जिसकी बदौलत अक्षय कुमार सफलता की सीढ़ियों को चढ़ते हुए सफलता की शिख़र पर जाकर बैठ गए. इस साल भारी झटका बालीवुड के प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली को लगा क्योंकि उनकी पिछले दिनों रिलीज हुई फिल्म को इस साल की सबसे फ्लाप फिल्मों में गिना जा रहा है, बेशक संजय मानते हैं कि उनकी फिल्म बहुत अच्छी थी लेकिन समीक्षाकारां ने फिल्म की आलोचना इस स्तर पर की कि उनकी फिल्म को मिलने वाले दर्शक दूर चले गए, इस बाद ये साल यशराज फिल्म बैनर के लिए भी बहुत अच्छा नहीं रहा क्योंकि उनकी इस साल रिलीज हुई फिल्मों में ज्यादातर फ्लाप फिल्में शामिल हैं. इसके अलावा 'जब वी मेट' में नज़र आए शाहिद-करीना कपूर एक दूसरे से दूर हो गए, पिछले करीबन चार सालों से चला आ रहा रिश्ता इस साल के अंतिम पड़ाव में पहुंचते ही दम तोड़ गया. अब बात करते खेल की दुनिया की, ये क्षेत्र भी लोगों का बहुत प्रिया है, सबसे पहले क्रिकेट जगत की बात करते हैं, इस बार काफी उलटफेर हुआ क्योंकि बुरे दौर से गुजर रहे राहुल द्रविड़ ने जैसे ही कप्तानी छोड़ती, वैसे महेंद्र सिन्ह धोनी की किस्मत ने पलटी खाई, वैसे भी धोनी खुद को किस्मत वाला मानते हैं, धोनी की अगुवाई में भारतीय टीम ने ट्वेंटी-20 चैंपियनशिप जीतकर बहुत बड़ी सफलता को छूआ है, इसके अलावा भारत के माईंड मास्टर यानी विश्वनाथन आनंद ने भी दूसरी बार शतरंज में विश्वविजेता का रुतबा हासिल किया है. ये बात तो कुछ पाने की अब खोने की बात करें तो भारत के महान क्रिकेटरों में शुमार कपिल देव को एक निजी संस्थान के साथ जुड़ने के लिए बीसीसीआई से संबंधित एक प्रशिक्षण संस्थान के प्रमुख्य का पद छोड़ना पड़ा, इसके बाद दलीप वैंगसरकर का बोर्ड के साथ पंगा चल रहा है क्योंकि बोर्ड ने पदाधिकारियों पर कुछ पाबंदियां लगाई हैं जोकि दलीप वैंगसरकर गले नहीं उतर रहीं. इसके अलावा यह साल भारतीय क्रिकेट बोर्ड के लिए काफी दयनीय रहा क्योंकि इस साल भारतीय टीम को कोच नहीं मिल पाया, लेकिन अब जाकर जब कोच मिला तो वह मार्च 08 से आपना कार्यकाल शुरू करेगा. अब बात करते हैं कोर्ट कचहरी की कि कौन हुआ अन्दर और कौन बाहर, सबसे पहले इस साल का सबसे बड़ा फैसला था स्टाम्प घोटाले से संबंधित मामला, इस साल स्टाम्प घोटाले के मुख्य आरोपी अब्दुल करीम तेलगी को अदालत ने दोषी ठहराते हुए 13 साल कैद की सजा सुनाई है और इसके साथ ही 102 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया है. तेलगी के खिलाफ यह मामला पुणे रेलवे स्टेशन के पास इंडिका कार में नकली स्टाम्प पेपर पुलिस द्वारा जब्त किए जाने के बाद सात जून 2002 को मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा बालीवुड के सितारे संजय दत्त को गैरकानूनी तौर पर हथियार रखने आरोप में छ: साल कारावास की सजा हुई है, जिसके चलते उनकी आंखों को इस बार दीपावली की रोशनी देखनी नसीब नहीं हुई जबकि मोनिका बेदी को जाली पासपोर्ट मामले में बरी होने से राहत मिलगी, इसके अलावा लाल किले पर हमला करने के आरोपी मुहम्मद अशफाक की फांसी पर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है, अब थोड़ी सी उसकी बात कर लें, जिसने भारत रूपी पेड़ को दीमक की तरह खा लिया है, ये है दीमक भारतीय राजनीति है. इस बार जहां एक तरफ भारत अमरीका प्रमाणु करार सत्ताधारी संप्रग के गले का फांस बन गया, वहीं दूसरी तरफ नंदीग्राम ने पच्छिमी बंगाल सरकर की नींद हाराम कर दी, प्रतिभा पाटिल के लिए यह साल अच्छा रहा क्योंकि वह राजस्थान के राज्यपाल के पद से सीधी राष्ट्रपति पद पर पहुंच गई, इस बार भाजपा का पहली बार दक्षिणी भारत में कोई मुख्यमंत्री बना था, लेकिन सात दिन तक भी वहां सरकार नहीं टिक पाई. इस साल कांग्रेस पार्टी पंजाब, उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्यों से उड़ गई जबकि उत्तर प्रदेश के शासन पर मायावती का राज हुआ तो पंजाब की सत्ता पर बादल साहब का. आजकल पूरी राजनीति गुजरात के अंदर हो रही है क्योंकि गुजरात विस चुनाव जो होने वाले हैं. इस हिंसा की बात करें तो नंदीग्राम हिंसा की आग में लगातार जल ही रहा है, इसके अलावा असम में इस साल सैंकड़े हिंदुभाषियों को मौत की नींद सुला दिया गया जबकि अतंकवादियों ने हैदराबाद मस्जिद, उत्तर प्रदेश को अपना निशाना बनाया. आखर में बात करें तो सैंसेकस की जिसने इस साल 20000 के आंकड़े को छूकर एक नया रिकार्ड कायम किया है।
• चोली दामन का रिश्ता राखी और विवाद में
http://liveindia.mywebdunia.com/2007/12/27/1198752900000.html

लाजवाब है 'सरकार राज'

निर्देशकः राम गोपाल वर्मा
कलाकारः अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्य राय बच्चन, गोविन्द रामदेव, सुप्रिया पाठक, राजेश श्रृगांरपुरी, रवि काले, उपेन्द्र लिमाए।




पिछले साल फ्लाप हैट्रिक मारने वाले राम गोपाल वर्मा ने इस साल की शुरूआत 'सरकार राज' से की. इसमें कोई शक नहीं कि इस फिल्म में रामगोपाल वर्मा ने अपने आपको फिर से साबित करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी. वर्मा ने इस फिल्म को बहुत बढ़िया ढंग से बनाया है ताकि दर्शक उनकी पुरानी फिल्म 'सरकार' से भी तुलना करना चाहें तो बढ़े शौक से करें क्योंकि यह फिल्म पुरानी सरकार से काफी ज्यादा अच्छी है. इतना ही नहीं रामू गोपाल वर्मा ने फिल्म को इस ढंग से तैयार किया कि दर्शक एक बार भी नजर इधर उधर चुरा नहीं पाते.
फिल्म ‘सरकार राज’ को देखकर कहा जा सकता है, कि राम गोपाल वर्मा ने बॉलीवुड के सफल निर्देशकों के कतार में धमाकेदार वापसी की है. उनके द्वारा बनाई गई ‘सत्या’ और ‘कंपनी’ जैसी फिल्मों की तुलना में कई गुणा बेहतरीन फिल्म है ‘सरकार राज’. फिल्म के सभी पहलू उसे बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त हिट बनाने में मददगार तो होंगे ही, साथ ही इसके तमाम कलाकारों के फिल्मी करियर में यह फिल्म मील का पत्थर जैसी साबित होगी.
फिल्म ‘सरकार राज’ की कहानी का अहम सूत्र है अनिता राजन (ऐश्वर्य राय बच्चन), जो एक अंतर्राष्ट्रीय कम्पनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) है। अनिता महाराष्ट्र में एक बिजली प्लांट लगाना चाहती है, जिसके लिए नागरे परिवार से मंजूरी मिलनी बहुत लाजमी होती है. सुभाष नागरे को यह बात कुछ जमती थी, मगर उसके बेटे शंकर नागरे को लगता है कि इस प्लांट के लगने से महाराष्ट्र का फायदा होगा, तो वो प्लांट लगवाने लिए जिम्मा उठाता है. इस दौरान उसके रास्ते में कई रुकावटें आती हैं. जिसमें उसको अपनी पत्नी एवं खुद को भी खोना पड़ता है. शंकर की मौत के बाद खुलकर सामने आती है एक रणनीति एवं साजिश. जो दर्शक को हैरान कर देती है.

एक परिवार की ताकत को उभारती ‘सरकार राज’ की असली कामयाबी इसके संवादों और पटकथा में है। तेजी से बढ़ती घटनाओं के बीच सिनेप्रेमियों को चौंकाने के लिए कुछ कहानी में कुछ दिलचस्प मोड़ भी देखने को मिलेंगे, जो फिल्म के आखिरी 20-25 मिनट में नजर आएंगे. फिल्म ‘सरकार राज’ का अंतिम हिस्सा सबसे बेहतरीन है. राम गोपाल वर्मा ने जहां इस फिल्म के विषय को बड़ी संजीदगी के साथ पेश किया है, वहीं फिल्म ‘सरकार राज’ के कुछ दृश्य गहरी छाप छोड़ते हैं.

इसके अलावा, ‘सरकार राज’ का फिल्मांकन भी बहुत उम्दा है. फिल्म के हर दृश्य पर राम गोपाल वर्मा के निर्देशन की पैनी पकड़ साफ नजर आती है. ‘सरकार राज’ को एक बेहतरीन फिल्म बनाने का श्रेय इसके कहानीकार प्रशांत पांडे को भी जाता है, जिन्होंने पटकथा में कहीं भी ठहराव नहीं आने दिया है.
पूरे फिल्म के बीच में ‘गोविंदा’ के नारे इसके प्रभाव को और गंभीर बनाते हैं।

अमित रॉय की सिनेमाटोग्राफी और अल्लान अमीन का एक्शन भी उम्दा है। फिल्म ‘सरकार राज’ में अदाकारों का अभिनय बेमिसाल है. फिल्म के अंत में उनका वैसा ही कठोर रुप देखने को मिलेगा, ठीक जैसी एक घायल शेर की होती है. इन दृश्यों के जरिए वह फिल्मों को कामयाबी की बुलंदियों पर पहुंचा देते हैं.

‘गुरु’ और ‘युवा’ जैसी फिल्मों में अभिनय करने के बाद अभिषेक बच्चन फिल्म ‘सरकार राज’ में फिल्म जगत के सबसे महान अभिनेता की बराबरी में खड़े नजर आते हैं और हर दृश्य में जान डालते हैं. अभिनय के मामले में दोनों पिता-पुत्र एक दूसरे की बराबरी में नजर आते हैं. वहीं ऐश्वर्य राय बच्चन भी फिल्म ‘सरकार राज’ में अपने पूरे करियर के दौरान सबसे बेहतरीन अंदाज में अभिनय करती नजर आई है. इस फिल्म में दिलीप प्रभावालकर, गोविन्द रामदेव, शयाजी शिंदे, रवि काले और सुप्रिया पाठक सभी कलाकारों ने अपना किरदार बखूबी निभाया है.

कुल मिलाकर कहा जाए तो सरकार राज राम गोपाल वर्मा की एक बेहतरीन पेशकारी है, जिसको देखकर दर्शक वाह वाह कहते हुए नजर आएंगे।

छोटे आसमां पर बड़े सितारे


शाहरुख खान छोटे पर्दे से बड़े पर्दे पर जाकर बालीवुड का किंग बन गया एवं राजीव खंडेलवाल आपनी अगली फिल्म 'आमिर' से बड़े पर्दे पर कदम रखने जा रहा है, मगर वहीं लगता है कि बड़े पर्दे के सफल सितारे अब छोटे पर्दे पर धाक जमाने की ठान चुके हैं। इस बात का अंदाजा तो शाहरुख खान की छोटे पर्दे पर वापसी से ही लगाया जा सकता था, मगर अब तो सलमान खान एवं ऋतिक रोशन भी छोटे पर्दे पर दस्तक देने जा रहे हैं. इतना ही नहीं पुराने समय के भी हिट स्टार छोटे पर्दे पर जलवे दिखा रहे हैं, जिनमें शत्रुघन सिन्हा एवं विनोद खन्ना प्रमुख है. बालीवुड के सितारों का छोटे पर्दे की तरफ रुख करने के दो बड़े कारण हैं, एक तो मोटी राशी एवं दूसरा अधिक दर्शक मिल रहे हैं. इन सितारों के अलावा अक्षय कुमार, अजय देवगन, गोविंदा भी छोटे पर्दे के मोह से बच नहीं सके. अभिनेताओं की छोड़े अभिनेत्रियां भी कहां कम हैं उर्मिला मातोंडकर एवं काजोल भी छोटे पर्दे पर नजर आ रही हैं.

छोटे पर्दे पर भी आना बुरी बात नहीं लेकिन जब आप बड़े पर्दे पर सफलता की शिखर पर बैठे हों तो छोटे पर्दे की तरफ रुख करना ठीक नहीं, इस सबूत तो शाहरुख खान को मिल गया, उसके नए टीवी शो 'पांचवीं पास॥' की टीआरपी इतनी कम है कि शाहरुख को अपनी लोकप्रियता पर शक होने लगा है। शाहरुख ने छोटे पर्दे पर वापसी अमिताभ बचन के नकशे कदम पर चलते हुए की थी, मगर स्थिति बिल्कुल विपरीत थी, अमिताभ को तो मजबूरी में छोटे पर्दे का सहारा लेना पड़ा, मगर शाहरुख खान ने सफलता की शिखर पर बैठे हुए छोटे पर्दे पर वापसी की. अमिताभ को छोटे पर्दे ने एक बार फिर बड़े पर्दे पर जाने के लायक बनाया क्योंकि अमिताभ काफी कर्ज में डुब चुके थे क्योंकि उनकी हर बाजी उलटी पर रही थी, मगर छोटे पर्दे 'कौन बनेगा करोड़पति' में क्या आए वो एक बार फिर करोड़पति बन गए. छोटे पर्दे ने काफी फिल्मी सितारों को बचाया है जिनमें मुकेश खन्ना, अजूब खान, विनोद खन्ना, हेमा मालनी, शेखर सुमन, पंकज कपूर आदि, इतना ही नहीं शाहरुख खान, ग्रेसी सिंह आदि भी तो छोटे पर्दे की देन हैं. शाहरुख खान, सलमान खान, अक्षय कुमार, ऋतिक रोशन जैसे सितारों को सोचना चाहिए कि अगर सब कुछ वो करने लगेंगे तो विचार फ्लाप स्टारों का क्या होगा.
इतना ही नहीं रोज रोज टैलीविजन पर दिखने से इज्जत भी कम होती है, यह बात तो बेचारे शाहरुख खान से पूछ लो, जिनके टीवी शो ने उनकी नींद उड़ा दी. चलो शाहरुख खान को तो हर जगह टांग आड़ने के आदत है, अन्य स्टारों को तो सोचना चाहिए. फिलहाल तो हमको देखना है कि आखिर किस में है कितना दम, दस का दम में हैं सलमान खान, तो जानून कुछ कर दिखाने का में ऋतिक रोशन एवं फीयर फैक्टर में अक्षय कुमार हैं.